युवा पत्रकार कैसे बेहतर बनें? बॉस लोग क्या करें...खुशदीप

 

   (15 जुलाई 2021 को आजतक/इंडिया टुडे के न्यूज़ डायरेक्टर राहुल कंवल के साथ मैं फेयरवेल स्पीच के दौरान)

करीब 27 साल मैं पत्रकारिता में बिता चुका हूं...इनमें 10 साल प्रिंट में (दैनिक जागरण-अमर उजाला), 10 साल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में (9 साल अकेले ज़ी न्यूज़ में), बाकी 7 साल डिजिटल, ब्लॉगिंग और सिनर्जी में (5 साल अकेले आज तक/इंडिया टुडे में)...यानि पत्रकारिता से जुड़े हर प्लेटफॉर्म में काम करने का मुझे मौका मिला है...

आगे भी लेखन से जुड़ा क्रिएटिव कुछ न कुछ करता रहूंगा...अपने इस लंबे अनुभव के आधार पर अब मैं अपने ब्लॉग देशनामा के माध्यम से ऐसे युवाओं से संवाद कायम करना चाहता हूं जो क्रिएटिव राइटिंग, ब्लॉगिंग या पत्रकारिता से जुड़ना चाहते हैं या हाल-फिलहाल में जुड़ चुके हैं...

 सबसे पहली बात युवा साथियों से कहना चाहता हूं कि पत्रकारिता के मायने सिर्फ़ एंकरिंग या रिपोर्टिंग के ज़रिए स्क्रीन पर चेहरा चमकाना ही नहीं होता...मैंने नज़दीक से देखा है कि कामयाब एंकर बनने के लिए कैसे दिन-रात एक करना होता है...देश दुनिया के तमाम ताजा घटनाक्रमों की जानकारी रखनी होती है...अब वो दूरदर्शन जैसे पहले दिन नहीं है जब ख़बरों को वाचक की तरह सिर्फ पढ़ना होता था...

अगर आप बिना पढ़ने लिखने की ज़ेहमत उठाए सिर्फ़ ग्लैमर के वशीभूत पत्रकारिता से जुड़ना चाहते हैं तो मुआफ़ कीजिएगा,ये लाइन आपके लिए नहीं है...ये पेशा जो कड़ी मेहनत मांगता है, वो आप करने के लिए तैयार नहीं हैं तो जल्दी ही हताश हो जाएंगे...आपका पहला लक्ष्य ग्लैमर हैं तो फिर एंटरटेंमेंट की दुनिया को अपनाएं, पत्रकारिता को नहीं...

ऐसे में होगा ये कि दो-तीन साल इस लाइन में रहने के बाद आपका मोहभंग हो जाएगा और आप इस लाइन से निकलना चाहेंगे...लेकिन तब तक आप बेशकीमती समय और मीडिया स्कूल की पढ़ाई पर खर्च किया हुआ पैसा व्यर्थ कर चुके होंगे...इसलिए बेहतर है कि आप सोच समझ कर ही इस लाइन में आएं...जो समय यहां आप इससे निकलने से पहले लगा चुके होंगे उसका सदुपयोग आप कहीं और करियर बनाने में लगा सकते थे...

हां अगर आप पत्रकारिता में नाम बनाने के लिए दिन-रात जी तोड़ मेहनत करने को तैयार हैं, शुरू में काफ़ी कुछ सुनने को मानसिक तौर पर मज़बूत हैं तो आपका स्वागत है...एक बात गांठ बांध लीजिए कुआं आपके पास कभी नहीं आएगा, आपको ही अपनी प्यास बुझाने के लिए कुएं पर जाना होगा...वर्क प्लेस पर हर कोई इतना व्यस्त हैं कि उसके पास आपको सिखाने के लिए वक्त नहीं होता...वो एक बार ही आपको समझाएगा...दोबारा पूछेंगे तो उसे खीझ होगी...इसलिए जो कुछ भी सीखना है वो आपको बहुत धैर्य से और बहुत शांत रहते सीखना होगा...

 ये तो बात रही उन युवाओं के लिए जो पत्रकारिता में करियर बनाना चाहते हैं...अब उन पत्रकार साथियों के लिए बात जो पहले से ही इस लाइन में एंट्री कर चुके हैं...ये बात मैंने आजतक/इंडिया टुडे ग्रुप से 15 जुलाई 2021 को अपनी फेयरवेल स्पीच में भी बोली...


(सही तरह से सुनने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कीजिए, वॉल्यूम  कम है)

पत्रकारों के लिए मेरी बात

मैंने कहा कि पत्रकार को किसी भी स्टोरी को डील करते वक्त एक अच्छे शेफ को ध्यान में रखना चाहिए...अच्छा शेफ बस डिश को तैयार कर देने में ही अपने काम की इतिश्री नहीं करता... उसका काम डिश के लिए रॉ मैटीरियल से ही शुरू हो जाता है. वो चेक करता है कि ये बढ़िया क्वालिटी का हो... डिश तैयार हो जाने के बाद भी शेफ की पैनी नजर रहती है कि डाइनिंग टेबल पर उसे किस सलीके के साथ पेश किया जा रहा है क्योंकि प्रेजेंटेशन भी बहुत मायने रखता है... इसी तरह पत्रकार को अपनी स्टोरी को शुरू से आखिर तक ओन (Own) करना चाहिए...

न्यूज-रूम को डेली मैनेज करने वाले बॉसेज के लिए भी मैंने फेयरवेल स्पीच में दो शब्द कहे-




(सही तरह से सुनने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कीजिए, वॉल्यूम इसमें कम है)

बॉसेज के लिए मेरा आग्रह

मैंने कहा, कोयला और हीरा दोनों कैमिकल एलीमेंट कार्बन (‘C’) के बने होते हैं बस दोनों में कार्बन की सीक्वेंस का अंतर होता है... इसे बदल दिया जाए तो कोयला हीरा और हीरा कोयला में बदला जा सकता है. हर आदमी में प्लस और माइनस दोनों होते हैं...अब ये काम लेने वाले पर है कि वो कैसे प्लस अधिक निकलवा सकता है. अगर आप मछली से कहें कि पेड़ पर चढ़ जाए तो ये संभव नहीं है...

आज हर वक्त अपने केबिन में बैठे रहने वाले मैनेजर्स की नहीं बल्कि वॉक एंड टॉक मैनेजर्स की ज़रूरत है...आपको अपनी टीम के हर सदस्य का दिल जीतने की कोशिश करनी चाहिए...टीम के जूनियर से जूनियर सदस्य को ये भरोसा होना चाहिए कि कहीं फंस जाऊं तो बॉस से सही गाइडेंस ले सकता हूं...आप जिस काम की अपेक्षा अपने टीम के सदस्यों से रखते हैं, वही काम करने की आप में खुद भी काबिलियत होनी चाहिए…

मुझे खुशी है कि आज तक/इंडिया टुडे में काम करते हुए मैंने अपने युवा बॉस राहुल कंवल में ये सारी खूबियां देखींयही वजह है कि इतनी युवावस्था में ही राहुल कंवल ने इंडस्ट्री में उस मुकाम को छुआ है, जिसके बस सपने ही देखे जा सकते हैं…कभी ताज्जुब होता था कि राहुल कंवल सोते कब हैं…सुबह 6 बजे जो वॉट्सऐप पर टीम के साथ संवाद का सिलसिला शुरू होता है वो देर रात तक जारी रहता है…एंकरिंग, स्पेशल प्रोगामिंग, टीम मीटिंग्स हर दिन अलग…सातों दिन यही रूटीन रहता हैइसके साथ ही टीम के हर सदस्य की भी हर वक्त फ़िक्र रखनासाथ ही इनोवेशन्स के लिए नए-नए एक्सपेरिमेंट करते रहना और खुद को दुनिया की नई टेक्नोलॉजी से अपडेट करना...राहुल कंवल के ब्रेनचाइल्ड कुछ नायाब और बेहद कामयाब हालिया प्रोजेक्ट्स के नाम गिनाऊंगा- फैक्ट चेक ब्यूरो, DIU (डेटा इंटेलिजेंस यूनिट), OSINT (ओपन सोर्स इंटेलिजेंस) आदि…ये सब करने के लिए कितनी ऊर्जा और समर्पण की ज़रूरत होती है…जो लोग दूर रह कर देखते हैं, उन्हें ये सही से समझ नहीं आ सकता…राहुल कंवल के लिए आज कहना चाहूंगा- Well done Chief, Keep Rocking!! 

बहरहाल, अपनी पोस्ट को आज यही विराम देता हूं, इस वादे के साथ कि ऐसे युवा जो पत्रकारिता में करियर बनाना चाहते हैं या इस लाइन में नए-नए आए हैं, उनके हित के लिए अगली पोस्ट में कुछ एलान करूंगा...लेकिन फिलहाल कुछ दिन अज्ञातवास में जाना चाहता हूं...बस थोड़ा इंतज़ार कीजिए...

 

 

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