रविवार, 7 जुलाई 2019

वर्ल्ड कप फाइनल मे भारत की जर्सी नीली या नारंगी?...खुशदीप

क्या नारंगी (कथित भगवा) जर्सी का भारत की आईसीसी 2019 वर्ल्ड कप में लीग मुक़ाबलों में इकलौती हार से वाकई कोई संबंध था? क्या ये सच में अपशकुन है जैसा कि सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स बता रहे हैं.  अगर फाइनल में इंग्लैंड और भारत के भिड़ने की तस्वीर बनी तो भारत को फिर नारंगी जर्सी में ही खेलना पड़ेगा. अगर भारत सेमीफाइनल में न्यूज़ीलैंड को हरा देता है और दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड को हरा देता है तो टीम इंडिया को फाइनल में नारंगी जर्सी पहनने की नौबत नहीं आएगी.

आइए नारंगी पर आने से पहले इस वर्ल्ड कप के 6 जुलाई तक संपन्न हो चुके लीग स्टेज को लेकर कुछ बात करते हैं. 

आईसीसी वर्ल्ड कप 2019 को शुरुआत में कई मैच बारिश से धुलने की वजह से सबसे नीरस वर्ल्ड कप माना जा रहा था. अचानक वो लीग स्टेज मैच खत्म होते होते बहुत रोचक हो गया. वजह ये रही कि वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल स्टेज में पहुंचने वाली तीसरी और चौथी टीम कौन सी रहेंगी, ये रोमांच आख़िर तक बना रहा.

शनिवार 6 जुलाई को भारत बनाम श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया बनाम दक्षिण अफ्रीका मुक़ाबलों से साफ हो गया कि सेमीफाइनल स्टेज में कौन सी टीम किस टीम से भिड़ेगी. अंक तालिका में नंबर 1 पर रहे भारत का मुक़ाबला चौथे नंबर पर रहे न्यूज़ीलैंड से शुक्रवार 9 जुलाई को पहले सेमीफाइनल में होगा. इसी तरह 11 जुलाई को नंबर 2 ऑस्ट्रेलिया और नंबर 3 इंग्लैंड आपस में भिड़ेंगे.

सेमीफाइनल स्टेज में पहुंची टीमों में मौजूदा वर्ल्ड कप चैंपियन ऑस्ट्रेलिया अभी तक पांच बार इस ट्रॉफी पर कब्ज़ा कर चुका है. वहीं भारत ने 1983 और 2011 में वर्ल्ड कप पर विजेता के तौर पर अपना नाम लिखवाया. बड़ा सवाल ये है कि क्या विराट कोहली भी वर्ल्ड कप के विजेता भारतीय कप्तानों- कपिल देव (1983) और महेंद्र सिंह धोनी (2011) के इलीट क्लब में 14 जुलाई को फाइनल जीत कर अपना नाम शामिल करा पाएंगे.

अंक तालिका ही बता रही है कि इस वर्ल्ड कप में लीग स्टेज में सबसे शानदार प्रदर्शन टीम इंडिया ने ही किया है. भारत को लीग स्टेज के कुल 9 मैचों में से 7 में जीत हासिल हुई. बस इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मुकाबले में भारत को हार का मुंह देखना पड़ा. न्यूज़ीलैंड के साथ लीग मैच धुल जाने की वजह से भारत को एक-एक अंक बांटना पड़ा. वहीं अंक तालिका में दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया की बात की जाए तो उसे 9 में से 2 मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा. पहले भारत के हाथों और फिर शनिवार को दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ टूर्नामेंट के आख़िरी लीग मैच में.

ऐसे में लीग स्टेज में प्रदर्शन के आधार पर देखा जाए तो कायदे से फाइनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया को ही भिड़ना चाहिए. लेकिन मेज़बान देश इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड भी अपना दिन अच्छा होने पर किसी भी टीम को तारे दिखाने में सक्षम हैं. इंग्लैंड को तो वर्ल्ड कप अब तक ना जीत पाने की ख़ास तौर पर कसक है. ऐसे में अपने होम ग्राउंड्स पर वर्ल्ड कप जीतने में इंग्लैंड कोई कसर नहीं छोड़ेगा. न्यूज़ीलैंड भी अभी तक वर्ल्ड कप नहीं जीत सका है, इसलिए वो भी मंगलवार को सेमीफाइनल में भारत के ख़िलाफ़ पूरे जी-जान से खेलेगा जिससे कि लॉर्ड्स में 14 जुलाई को फाइनल का टिकट कटा सके.

आइए अब बात करते हैं टीम इंडिया की वैकल्पिक नारंगी जर्सी की.
टीम की जर्सी के मुद्दे का क्रिकेट से कोई संबंध नहीं हो लेकिन देश के सोशल मीडिया में ये ज़ोर-शोर से चर्चा का विषय बना रहा. वनडे मैचों में टीम इंडिया की पारंपरिक ड्रेस नीली ही रही है. लेकिन 30 जून को मेज़बान इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में भारतीय टीम को नारंगी (कथित भगवा) जर्सी में उतरना पड़ा. इसका कारण ये था कि इंग्लैंड की जर्सी भी नीली है. ऐसे में आईसीसी का नियम है कि मेज़बान देश की जर्सी वही रहती है और मुक़ाबला करने वाले दूसरे देश को जर्सी बदलनी पड़ती है.

जब देश में पता चला कि भारत को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नारंगी जर्सी में मैच खेलना है तो इसने सोशल मीडिया पर विवाद की शक्ल ले ली. कुछ राजनेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया. साथ ही जर्सी बदले जाना केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के भगवा से जुड़ाव का परिणाम भी बताया. हक़ीक़त में ये आईसीसी और बीसीसीआई के बीच का विषय था और इसका सत्ताधारी पार्टी से कोई लेनादेना नहीं था.

सोशल मीडिया पर नारंगी जर्सी को सोशल मीडिया पर अपशकुन से भी जोड़ कर पेश करने की कोशिश की गई. दरअसल, नियम के मुताबिक इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ही टीम इंडिया नीली जर्सी छोड़ कर नारंगी जर्सी में खेली और उसे हार का मुंह देखना पड़ा. 30 जून को हुए इस मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग की और निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 337 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया. भारत पीछा करते हुए 50 ओवर में 5 विकेट खोकर 306 रन ही बना सका और 37 रन से मैच हार गया. इस मैच में पीछा करते हुए भी धोनी और केदार जाधव की धीमी बैटिंग की खास तौर पर काफ़ी आलोचना हुई.

भारत बनाम इंग्लैंड के इस मुक़ाबले पर पाकिस्तान के दर्शकों की भी पैनी नज़र थी. क्योंकि इस मैच में अगर भारत जीतता तो पाकिस्तान की सेमीफाइनल में पहुंचने की राह आसान हो जाती. लेकिन इस मैच में भारत की इंग्लैंड से हार के बाद पाकिस्तान की संभावना बहुत कम हो गई. पाकिस्तानी मीडिया ने ऐसे आरोप भी लगाए कि पाकिस्तान को वर्ल्ड कप से बाहर करने के लिए भारत इंग्लैंड से जानबूझ कर हारा. फिर इंग्लैंड ने एक और लीग मैच में न्यूज़ीलैंड को हराया तो पाकिस्तान के लिए सेमीफाइनल का दरवाज़ा प्रैक्टीकल तौर पर बंद हो गया.

राजनीतिक बहसबाज़ी के लिए नारंगी (कथित भगवा) के मुद्दे को बेशक उछाला जाए लेकिन खेल के मैदान पर ऐसे अंधविश्वास के लिए कोई जगह नहीं होती. ऐसे में टीम इंडिया नारंगी में खेले या नीली जर्सी में, हर भारतीय की यही दुआ है कि क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स की बॉलकनी से 14  जुलाई को वर्ल्ड कप ट्रॉफी लेकर वैसे ही दर्शकों का अभिवादन करें जैसा कि 36 साल पहले कपिल देव ने किया था. 

ये ठीक है कि कई ख़िलाड़ी भी अंधविश्वास के चलते बढ़िया प्रदर्शन के लिए कुछ टोटके आज़माते हैं जैसे कि मोहिंदर अमरनाथ बैटिंग करते वक्त लाल रूमाल हमेशा ज़ेब में रखा करते थे. या जब मैदान पर कोई अपने खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों तो ड्रैसिंग रूम की गैलरी में जिस मुद्रा में बैठे हों, वैसे ही बैठे रहते हैं ताकि टशन ख़राब ना हो. लेकिन ये सिर्फ़ खिलाड़ी विशेष के ज़ेहन से ही जुड़ा होता है इसका खेल की दुनिया से जुड़े होने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (09-07-2019) को "जुमले और जमात" (चर्चा अंक- 3391) पर भी होगी।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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