गुरुवार, 20 सितंबर 2018

गरीबों से मज़ाक है रसोई गैस योजना...खुशदीप



महंगे LPG  सिलेंडर को दोबारा भरवाने के लिए पैसे कहां से लाएं  गरीब?

धूल फांक रहे हैं कनेक्शन, माताएं-बहनें लकड़ी और गोबर के उपलों पर खाना बनाने को मजबूर

फोटो आभार- अरविंद गुप्ता/HT


प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)  को मोदी सरकार की क्रांतिकारी योजना के तौर पर प्रचारित किया गया. कहा गया कि इससे माताओं और बहनों को लकड़ी और गोबर के उपलों के धुएं में खाना बनाने से छुटकारा मिल जाएगा. दावा किया गया कि योजना गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले यानि BPL परिवारों  की बेहतरी के लिए बनाई गई. 

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक देश के 715 जिलों में 20 सितंबर 2018 तक 5,52,75,806 कनेक्शन बांटे जा चुके हैं. 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया में योजना को लॉन्च करते वक्त कहा गया था कि तीन साल में पांच करोड़ PMUY  कनेक्शन वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है. इस तरह मोदी सरकार ढाई साल में ही लक्ष्य से आगे निकल गई. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ये योजना अपने उद्देश्य को पूरा कर रही है?  क्या वाकई ये योजना उज्ज्वल है?  या इसमें धुआं अधिक भरा है?


सच्चाई जाननी है तो देश के किसी भी ग्रामीण इलाके में जाकर योजना की कथित लाभार्थी महिलाओं से पूछिए. पूछना छोड़िए उन्हें बस खाना बनाते ही देख लीजिए. PMUY कनेक्शन किसी कोने में पड़ा धूल खा रहा है और महिलाएं लकड़ी या गोबर के उपलों पर खाना बनाने के लिए मजबूर हैं. चूल्हे में फूंक मारते उनकी आंखों में आंसू देखे जा सकते हैं.

योजनाओं को अगर बिना सोचे समझे अमल में लाया जाता है तो उनका यही हाल होता है. सरकार धड़ाधड़ लक्ष्य पूरा होता दिखाने में ही सारा ज़ोर लगा रही है. उसे ये जानने की सुध नहीं कि जिन परिवारों के लिए ये योजना लाई गई, वो इसका कोई फायदा ले भी पा रहे हैं या नहीं

PMUY  में सरकार से आख़िर मिलता क्या है?

आइए पहले जानते हैं कि PMUY  के आवेदक को सरकार की ओर से मिलता क्या हैइसमें सरकार की ओर से एक रसोई गैस कनेक्शन देने पर 1600 रुपए की नकद सहायता दी जाती है. इस राशि में शामिल हैं-
-14.2 किग्रा/5 किग्रा सिलेंडर की ज़मानत राशि
-रेग्युलेटर की ज़मानत राशि
-1.2 मीटर की पाइप (जिससे सिलेंडर से चूल्हे को जोड़ा जाता है)
-इंस्टालेशन चार्ज
-DGCC बुकलेट जारी करने की लागत  

ये तो हुआ सिर्फ कनेक्शन. लेकिन इसके अलावा चूल्हा, पहले सिलेंडर में भरी  LPG के दाम के लिए भी तो पैसे चुकाने होते हैं. तो इसके लिए ये प्रावधान किया गया कि जो आवेदक चूल्हे और पहले सिलेंडर में भरी LPG  के दाम चुकाने की स्थिति में नहीं हैं वो EMI का विकल्प अपना सकते हैं. ये सुविधा ऑयल मार्केट कंपनियों (OMCs)  की ओर से दी जाती है. इसके तहत लाभार्थी को कनेक्शन लेते वक्त चूल्हे और पहले सिलेंडर में भरी LPG  के लिए भी कुछ नहीं देना होता. लेकिन ये पैसा ऑयल मार्केटिंग कंपनियां उसे आगे LPG  सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी में से काटती हैं. 

इसे ऐसे समझिए कि जब आवेदक पहला LPG सिलेंडर खत्म होने पर दूसरा सिलेंडर लेगा तो उसे उस पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी नहीं मिलेगी. ये सब्सिडी ऑयल मार्केटिंग कपंनियों तब तक लेंगी जब तक चूल्हे और पहले सिलेंडर में भरी LPG के दाम वसूल नहीं हो जाते.

अब यही से पता चलता है कि योजना को लागू करते समय दूरदर्शिता से काम नहीं लिया गया. ये नहीं सोचा गया कि BPL परिवार को कनेक्शन तो मिल गया लेकिन हर महीने मंहगे सिलेंडर रीफिल के लिए वो पैसे कहां से लाएगा.  अगर उसके पास 850-900 रुपए का सिलेंडर रीफिल हर महीने लेने की ताकत होती तो वो 1600 रुपए कनेक्शन लेते वक्त भी दे देता. सरकार को अपने ऊपर ये अहसान करने का मौका ही क्यों देता?  ऐसा करके वो अपना स्वाभिमान तो बचाए रखता.

PMUY कनेक्शन लेने वाले दोबारा LPG सिलेंडर रीफिल कराने के लिए कम ही सामने आए तो सरकार ने अप्रैल 2018 से ट्रैक कुछ बदला. कहा गया कि छह सिलेंडर रीफिल कराने तक उस पर दी जाने वाली सब्सिडी नही कटेगी. यानि चूल्हे और पहले सिलेंडर की LPG के दाम जो लाभार्थी से ऑयल मार्केटिंग कपंनियों ने वसूलने थे वो छह रीफिल पूरे होने के बाद सब्सिडी काट कर वसूले जा सकेंगे. लेकिन इस एलान से भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया. 
हिन्दुस्तान टाइम्स डॉट कॉम की एक हालिया रिपोर्ट  से PMUY की वस्तुस्थिति का अंदाज लगाया जा सकता है . इस रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे बड़े सूबे यानि उत्तर प्रदेश में योजना के एक तिहाई लाभार्थी  दोबारा LPG  सिलेंडर रीफिल लेने नहीं आए. बाकी लाभार्थियों ने साल में औसतन दो-तीन बार ही रीफिल कराया. जबकि हर कनेक्शन साल में 12 सिलेंडर लेने का हकदार है. कमोवेश उत्तर प्रदेश जैसे ही हालात देश के अन्य राज्यों में भी हैं.
सरकार के पास ये आंकड़े तो हैं कि किस राज्य में, किस जिले में कितने PMUY  कनेक्शन बांट दिए गए. लेकिन ऐसे कोई आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं कि कितने लाभार्थी ड्रॉप आउट कर गए हैं और दोबारा LPG रीफिल लेने के लिए नहीं आ रहे हैं. बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे आर्थिक दृष्टि से पिछड़े इलाकों में स्थिति ज्यादा विकट है. ऐसे इलाकों में लकड़ी और गोबर के उपलों पर खाना बनाते दिखने वाली महिलाओं से बात की जाए तो वो कहती हैं कि भइया पहले बच्चों की खिलाई, दवाई, पढ़ाई देखें या रसोई गैस सिलेंडर की महंगी भराई कराएं.
बहरहाल, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाला रसोई गैस  कनेक्शन BPL परिवारों के साथ किसी मज़ाक से कम नहीं. ये ठीक वैसे ही है जैसे किसी को कार तो दे दी गई लेकिन वो उसे चला नहीं सकता क्योंकि पेट्रोल भरवाने के लिए उसके पास पैसे ही नहीं है. इस तरह की योजनाओं के लक्ष्य पूरा करने की बाज़ीगरी से जरूरतमंदों का कोई भला नहीं होने वाला. 

बेहतर यही होगा कि आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति की क्रय शक्ति (Purchasing Power)  बढ़ाने के उपाय किए जाएं. वो आर्थिक दृष्टि से इतना सक्षम बने कि सिर उठा कर कहे- मैं रसोई गैस कनेक्शन भी खुद ले सकता हूं और सिलेंडर भी खुद भरा सकता है. इसके लिए उज्ज्वला योजना जैसी किसी सरकारी बैसाखी की मुझे जरूरत नहीं. यही स्वाभिमान उसके लिए भी उज्ज्वल होगा और देश के भविष्य के लिए भी.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 


5,52,75,806



शनिवार, 1 सितंबर 2018

आलोचना का चॉपर पाक में उड़ सकता है, हमारे यहां क्यों नहीं...खुशदीप


क्रिकेटर से नेता बने इमरान ख़ान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने जुम्मा जुम्मा दो हफ्ते ही हुए हैं...लेकिन वहां कुछ घटनाएं ऐसी हुई हैं जिन्हें लेकर नई नवेली सरकार आलोचनाओं के घेरे में हैं...मीडिया में भी इन घटनाओं को जमकर तूल दिया जा रहा है...वहां के टीवी चैनलों पर प्रसिद्ध कॉमेडी शोज में भी इमरान और उनके मंत्रियों पर खूब चुटकियां ली जा रही हैं...


आइए पहले उन दो प्रमुख घटनाओं के बारे में आपको बता दें जिन्हें लेकर पाकिस्तान में बवाल मचा है..

पहली घटना है इमरान की तीसरी पत्नी बुशरा बीबी के पहले पति खावर मनेका का एक पुलिस अधिकारी से उलझना और फिर उस अधिकारी का पलक झपकते ट्रांसफर होना...

दूसरी घटना है इमरान खान का इस्लामाबाद में बानी गला स्थित अपने निजी आवास से हेलीकॉप्टर के जरिए प्रधानमंत्री आवास तक आना-जाना...

साभार- GEO TV
याद रहे कि इमरान ख़ान ने चुनाव जीतते ही कहा था कि पाकिस्तान की माली हालत बहुत ख़राब है इसलिए सबसे पहले सरकारी फिजूलखर्ची पर वो लगाम लगाएंगे...इमरान ने एलान किया कि वो इसकी शुरुआत खुद से करेंगे और भव्य प्रधानमंत्री आवास में ना रहकर उसी परिसर में स्थित तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट में रहेंगे...

इमरान ने पीएम हाउस को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के एजुकेशनल हब में तब्दील करने का एलान किया ताकि पाकिस्तान के छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा सुविधाएं मिल सकें...इमरान ने पीएम आवास के 500 से ज्यादा कर्मचारियों के लंबे चौड़े लश्कर में से सिर्फ दो की सेवाएं लेने की बात कही. साथ ही कहा कि पीएम के 80 आलीशान गाड़ियों के बेड़े में से सिर्फ दो ही अपने पास रखेंगे...बाकी सभी गाड़ियों को ऑक्शन कर दिया जाएगा जिनमें अधिकतर 5 करोड़ से ऊपर की बुलेटप्रूफ हैं...

इमरान ने ये भी कहा था कि वो तो पीएम आवास स्थित 3 बेडरूम वाला अपार्टमेंट भी नहीं लेना चाहते थे बल्कि बनी गला स्थित अपने घर पर ही रहना चाहते थे लेकिन उन्हें बताया गया कि सिक्योरिटी कारणों से ऐसा नहीं किया जा सकता...

अब हुआ ये कि इमरान ने बनी गला स्थित अपने निजी घर से पीएम हाउस तक हेलीकॉप्टर से आना-जाना शुरू किया तो वहां सवाल उठने लगे कि ये कैसी फिजूलखर्ची पर लगाम है?

इमरान के बचाव में झट उनके विश्वासपात्र और नए सूचना और प्रसारण (l&B) मंत्री फवाद चौधरी मैदान में उतरे...कभी पत्रकार रह चुके चौधरी ने मुशर्रफ सरकार में भी इसी महकमे की जिम्मेदारी संभाली थी...

चौधरी का कहना है हेलीकॉप्टर से खर्च सिर्फ़ 55 रु प्रति किमी बैठता है...कहां मिलता है ऐसा हेलीकॉप्टर भाई? जब चौधरी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि गूगल से सर्च किया है...तब से सोशल मीडिया पर उन्हें 'गूगल चौधरी' कह कर तंज कसे जा रहे हैं...

इमरान के हेलीकॉप्टर के जरिए आने जाने के पीछे ये भी तर्क दिया गया कि बनी गला स्थित घर से पीएम हाउस के बीच दूरी 15 किलोमीटर है...आने जाने में 30 किलोमीटर का सफ़र करना पड़ता है...ऐसे में इमरान नहीं चाहते कि सड़क से उनके आने जाने से और लोगों को किसी तरह की असुविधा हो...इस सड़क पर वाहनों की भारी आवाजाही रहती है...

अच्छा चलिए, अब आते हैं फवाद चौधरी की हेलीकॉप्टर से सफ़र पर 55 रूपए प्रति किलोमीटर खर्च आने की कथित गूगल थ्योरी पर...अगर 55 नहीं तो प्रति किलोमीटर हेलीकॉप्टर यात्रा पर वास्तव में कितना खर्च आता है?

पाकिस्तानी चैनल GEO.TV की रिपोर्ट के मुताबिक इमरान प्राइवेट कंपनी प्रिंसली जेट्स के हेलीकॉप्टर की सेवाएं लेते हैं...इस कंपनी के सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर 4000 डॉलर प्रति घंटा ( करीब पांच लाख पाकिस्तानी रुपए) के हिसाब से लिए जा सकते हैं...ये प्रति मिनट 66.66 डॉलर (8198 पाकिस्तानी रुपए) बैठता है...एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर एक मिनट में करीब 3 किलोमीटर उड़ता है...इस तरह हेलीकॉप्टर प्रति किलोमीटर यात्रा का खर्च 2,670 रुपए (पाकिस्तानी करंसी) बैठता है...

यानी इमरान के बानी गला स्थित घर से पीएम हाउस तक एक बार आने जाने में सिंगल इंजन 6 सीटर हेलीकॉप्टर से 80,100 पाकिस्तानी रुपए का खर्च आता है...इमरान डबल इंजन 15 सीटर AW139 हेलीकॉप्टर इस्तेमाल करते हैं...विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के हेलीकॉप्टर का प्रति किलोमीटर खर्च 6,666 पाकिस्तानी रुपए बैठता है...(अगर आप भारतीय रुपए में ये खर्च जानने के इच्छुक हैं तो आज की तारीख में भारत के एक रुपए की कीमत पाकिस्तानी मुद्रा में 1 रुपए 74 पैसे है...)

चलिए ये तो हो गई हेलीकॉप्टर गाथा...अब आते हैं इमरान की तीसरी पत्नी और आध्यात्मिक गुरु बुशरा बीबी के पूर्व पति खावर फ़रीद मनेका से जुड़े विवाद पर...बताया जा रहा है कि 23 अगस्त की रात को खावर लाहौर से पाकपट्टन जा रहे थे तभी उन्हें रात एक बजे जांच नाके पर रोका गया...पुलिस ने खावर को रुकने का इशारा किया तो वो नहीं रुके. पुलिस ने कार का कुछ किलोमीटर पीछा कर उन्हें पकड़ लिया...खावर ने बताया कि वो कौन हैं, इसके बावजूद नहीं छोड़े जाने पर उन्होंने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया...पाकपट्टन के डीपीओ (डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफिसर) रिज़वान गोंडाल हैं...

रिजवान गोंडाल और खावर फ़रीद मनेका (फोटो आभार-डेली टाइम्स)

मामला ऊपर तक गया तो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नए मुख्यमंत्री और पीटीआई नेता उस्मान बुजदार ने डीपीओ गोंडाल को पिछले शुक्रवार को तलब किया...गोंडाल को बताया गया कि खावर ने शिकायत की है कि उनके साथ बदसलूकी की गई, इसलिए गोंडाल को उनके घर जाकर माफी मांगनी चाहिए...

गोंडाल ने माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है. इसके बाद पंजाब के आईजीपी सईद कलीम इमाम ने सज़ा के तौर पर गोंडाल के ट्रांसफर आदेश जारी कर कर दिए...

पाकिस्तान में मीडिया और विपक्ष में यही आरोप लग रहे हैं कि बुशरा बीबी ने खावर मनेका से बदसलूकी की शिकायत इमरान से की थी और इमरान ने ही इस संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री को निर्देश दिए...

वहीं पंजाब पुलिस डीजी पब्लिक रिलेशन नायब हैदर ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि गोंडाल का तबादला किसी राजनीतिक दबाव की वजह से नहीं बल्कि दुराचार और झूठे दावे करने के आरोप में किया गया है...

अभी कहानी में ट्विस्ट आना बाकी है...पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस मियां साकिब नसीर ने इस घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए बुशरा बीबी के पूर्व पति खावर मनेका को 3 सितंबर को समन किया है...सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने पंजाब के आला पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री बुज़दार के निजी सचिव और मुख्य सुरक्षा अधिकारी को भी समन किया है...

कोर्ट ने 31 अगस्त को इस मामले की सुनवाई के दौरान ये भी पूछा कि डीपीओ गोंडाल को क्यों मनेका के घर जाकर माफ़ी मांगने के लिए कहा गया और क्यों उनका ट्रांसफर किया गया...बेंच के सदस्य जस्टिस इजाज़ुल अहसान ने ये भी कहा, ‘’हम राजनीतिक दखल या दबाव को बर्दाश्त नहीं करेंगे.’’

पाकिस्तानी मीडिया में इन दोनों मुद्दों पर चटखारे लेने के साथ इमरान सरकार पर जमकर निशाना साधा जा रहा है...सोशल मीडिया पर भी सादगी के दावे करने वाली इमरान सरकार पर खूब मज़े लिए जा रहे हैं...ये जानते हुए भी कि सरकार को आए बामुश्किल चंद दिन ही हुए हैं...

चुनाव के दौरान ये कहा जाता रहा है कि इमरान पाकिस्तानी फौज की कठपुतली हैं...लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान में मीडिया में इमरान सरकार को बख्शा नहीं जा रहा है...जमकर आलोचना की जा रही है...

इमरान ने शुक्रवार को पाकिस्तान के टीवी एंकर्स के साथ बैठक में कहा कि वो आलोचनाओं का स्वागत करते हैं जिससे उन्ह़े सरकार का कामकाज दुरूस्त करने में मदद मिलेगी... इमरान ने अपनी सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करने के लिए मीडिया से कहा कि वो उन्हें बस 100 दिन दे...

चलिए पाकिस्तान की बात छोड़िए, अब अपने देश पर लौटते हैं...उस सरकार का क्या जो खुद भी मानती है और चाहती है कि सभी मानें कि वो जो भी करती है सब चकाचक करती है...यहां जनविरोधी नीतियों की आलोचना के लिए क्या कोई गुंजाइश नहीं?

देश में ऐसा आभास देने का माहौल बनाने की कोशिश क्यों कि सरकार दूध की धुली है और तमाम खोट विपक्षी नेताओं में ही हैं...

जय भारत...जय लोकतंत्र...