''दफ़नाने" पर भी "जलाना"...खुशदीप




किसी शायर ने क्या ख़ूब कहा...
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वो आती है रोज़, मेरी क़ब्र पर,
अपने हमसफ़र के साथ...
कौन कमबख्त कहता है कि,
"दफ़नाने" के बाद "जलाया" नहीं जाता...

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14 टिप्पणियाँ
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  1. yes... मैंने भी सुना है यह शेर॥वाकई बहुत खूब कहा है।समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  2. wah wah, boht khoob sher hai, sayar log bade ache hote hai

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  3. वाह वाह ..क्या शेर है ..एकदम बब्बर टाइप का.

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  4. क्या खूब शेर कहा है (जिसने भी कहा है).. मज़ा ही आ गया आज तो..

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  5. कौन कमबख्त कहता है कि,
    "दफ़नाने" के बाद "जलाया" नहीं जाता...
    ओये होये …………मार ही डाला

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  6. हा हा हा ! और जलने में तकलीफ भी ज्यादा होती है ।

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  7. वाह..शायर का अंदाज़े बयां काबिले दाद है...एक शायर ने तो कुछ यूँ कहा सुनिए:-

    मैं मर गया जिसके लिए ये हाल है उसका
    ईंटें चुरा के ले गया मेरे मज़ार से



    नीरज

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  8. दफनाने के बाद तो अधिक जलाया जाता है। दिल की आग के साथ जो मनों लकडियाँ होती हैं उनकी आँच भी तो झेलनी पडती है। लेकिन जलते दोनो हैं दफन होने वाले भी और दफनाने वाले भी। शुभकामनायें।

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  9. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-701:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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