ओ गंगा, तुम रुक गई क्यों...खुशदीप

भूपेन हज़ारिका

8  सितंबर 1926- 5 नवंबर 2011

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12 टिप्पणियाँ
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  1. उनकी यादें हमेशा बनी रहेंगी ....

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  2. दुखद, गंगा से सभ्यता के बारे में प्रश्न पूछने वाला चला गया।

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  3. अभी श्रीलाल शुक्ल जी की चिता की आग ठंडी हुई नहीं कि कला की दुनिया को यह आघात !!!!!!

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  4. उन की कृतियाँ हमारी बहुत बड़ी थाती हैं जो युगों तक उन की स्मृति बनाए रखेगी। उन की कलाएँ आम जन के लिए थीं और वह जल्दी किसी अपने को विस्मृत नहीं करता।

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  5. सुरों की गंगा रुक गयी क्यों ...
    नमन एवं श्रद्धांजलि!

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  6. बहुत कुछ ले गया साल २०११ ...
    उनके गीत हमेशा उन्हें जीवित रखेंगे.
    विनर्म श्रद्धांजलि .

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