सोमवार, 31 जुलाई 2017

ब्लॉगिंग से करनी है कमाई तो GST, रजिस्ट्रेशन की भी सोचो भाई...खुशदीप

दिन है सुहाना आज पहली तारीख है,
खुश है ज़माना आज पहली तारीख है,
पहली तारीख है जी पहली तारीख है....

आज से 63 साल पहले रिलीज हुई फिल्म पहली तारीखका ये गाना जब भी कोई सुनता है तो उसके चेहरे पर खुद-ब-खुद मुस्कान आ जाती है...कमर जलालाबादी के लिखे इस गीत को सुधीर फड़के के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने बड़े मज़े ले ले कर गाया था...फिल्म के नायक होने की वजह से ये गाना बड़े पर्दे पर किशोर पर ही फिल्माया गया था...गाने में यही संदेश था कि पहली तारीख को नौकरीपेशा लोगों को तनख्वाह मिलती है इसलिए ये उनके लिए महीने में खुशी का सबसे बड़ा दिन होता है...

अब लगता है इस गाने को हिन्दी ब्लॉगिंग के लिए भी थीम सॉन्ग बनाना होगा...ऐसा इसलिए कि विगत 1 जुलाई को हिंदी ब्लॉगिंग को फिर से नई धार देने की मुहिम शुरू की गई...अंशुमाला ने सबसे पहले ये प्रस्ताव दिया कि हर महीने की एक तारीख को सभी हिन्दी ब्लॉगर्स अपने ब्लॉग्स पर पोस्ट ज़रूर लिखें...इसके लिए कम से कम एक दिन के लिए फेसबुक को विराम देना पड़े तो दिया जाए...इसी कड़ी को बढ़ाते हुए हरदिलअजीज ताऊ रामपुरिया ने 1 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा...मेरी तरफ से हैशटेग #हिन्दी_ब्लॉगिंग का सुझाव दिया गया...

खुशी है कि इस सारी कवायद के बड़े सकारात्मक परिणाम सामने आए...सबसे अच्छी बात ये रही कि इस मुहिम का संदेश हर हिन्दी ब्लॉगर तक पहुंचा...सबके सहयोग से एक बार फिर ऐसा लगा कि हिंदी ब्लॉगिंग के 7-8 साल पुराने वाले दिन लौट आए...सब एक बड़े परिवार के सदस्य की तरह दिखाई दिए...ब्लॉग पोस्ट, कमेंट, फेसबुक, ट्विटर जहां कहीं भी जिससे जैसे भी हो सकता था सब ने हिंदी ब्लॉगिंग के पुन: जागरण के लिए अपनी सक्रियता दिखाई...मुहिम के प्रचार के लिए अर्चना चावजी, केवल राम और शाहनवाज ने जिस तरह खुद ही आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी संभाली, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है...

जैसा कि मैं फेसबुक पोस्ट पर लिख चुका हूं कि बीते महीने में ब्लॉगिंग में वैसा ही आनंद आया जैसा कि 7-8 साल पहले आता था...आज की इस ब्लॉग पोस्ट को मिलाकर मैंने इस महीने में कुल 13 पोस्ट लिखीं...इस दौरान जहां पाठक आधार बढ़ा वहीं अलैक्सा रैंकिंग और इंडीब्लॉगर्स रैंक में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ...हां, मेरे साथ ये जरूर रहा कि दूसरे ज्यादा ब्लॉग्स पर जाकर टिप्पणी नहीं दे सका...इसका तोड़ यही है कि हफ्ते में कम से कम दो दिन इस काम के लिए भी वक्त निकाला जाए.... 

बीते एक महीने में ये अवधारणा गलत साबित हुई कि अब ब्लॉग कोई पढ़ना नहीं चाहता...इसलिए ब्लॉगर्स ने यहां से विमुख होकर फेसबुक को ही पहली पसंद बना लिया...ब्लॉगिंग नियमित की जाए तो आप देखेंगे कि ना सिर्फ आपकी पाठक संख्या बढ़ती  है बल्कि गूगल भी आपकी उपस्थिति दर्ज करने लगता है...फेसबुक पर आप कितना भी लिखो, ये फायदा आपको नहीं मिल सकता...आपका ब्लॉग एक ऐसे सुविधाजनक दस्तावेज की तरह है जिसमें आप वर्षों पहले अपना लिखा भी बड़ी आसानी से ढूंढ सकते हैं...फेसबुक पर ऐसा नहीं किया जा सकता...  

ब्लॉग पर कम टिप्पणियों को लेकर हतोत्साहित होना भी सही नहीं है...आखिरकार जो मायने रखता है वो है कंटेंट...आपके लेखन में अगर किस्सागोई की तरह दूसरों को बांधने की क्षंमता है,  विविधता है, नई किंतु विश्वसनीय जानकारियों का समावेश है, तो आप देखेंगे कि आपका पाठक आधार लगातार बढ़ेगा, अलैक्सा रैंकिंग में सुधार होगा और गूगल आपको सर्च में वरीयता देने लगेगा...हम सभी ब्लॉगर्स को इसी दिशा में बढ़ने के लिए प्रयास करने चाहिए....

इस पोस्ट को विराम दूं, इससे पहले एक काम की बात...भाई विनय प्रजापति का तकनीक दृष्टा के नाम से ब्लॉग है...इस ब्लॉग के जरिए वो ब्लॉगिंग समेत सोशल मीडिया से जुड़ी बड़ी काम की बातें बताते हैं...हाल में उन्होंने अपनी एक पोस्ट में बताया है कि ब्लॉगिंग से कमाई करने वाले ब्लॉगर्स किस तरह 1 जुलाई से गुड्स एवं सर्विस टैक्स (GST) के दायरे में आ गए हैं...उनके लेख का निचोड़ इस तरह है- 

  

1. ऑनलाइन कंटेट लिखना ब्लॉगिंग है और ब्लॉगिंग से विज्ञापन के जरिए कोई कमाई होती है तो उस पर इंडियन टैक्सेशन लॉ के तहत टैक्स देना ज़रूरी है...

2. ब्लॉगिंग पर 18% की दर से GST देय है

3. जो व्यक्ति भी राज्य के बाहर या देश के बाहर से आमदनी कर रहा है, उसे सेंट्रल जीएसटी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है और उस पर छूट की सीमा लागू नहीं होगी...यानि छोटे डीलर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स को जो 20 लाख की छूट मिलती है वो छूट विदेश से आमदनी करने वाले लोग जैसे ब्लॉगर्स को नहीं मिलेगी...

4. कोई ब्लॉगर जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं कराएगा तो उस पर दो तरह की पेनल्टी लगेगी...रजिस्ट्रेशन नहीं कराने के लिए 25,000रुपए पेनल्टी लगेगी...रिटर्न नहीं फाइल करने पर 100 रुपए प्रति दिन के हिसाब से पेनल्टी देनी होगी...

5. सभी ब्लॉगर्स (बशर्ते कि वो एक्सपोर्ट सर्विस के दायरे में नहीं आता हो) को जीएसटी अदा करना अनिवार्य होगा। अब वो चाहे 1 रुपया कमा रहा हो या कई हजार डॉलर्स...



ये सब पढ़ना उन के लिए जरूर बेचैनी बढ़ाने वाला होगा जिन्हें ब्लॉगिंग से कुछ कमाई हो रही है...अधिकतर हिन्दी ब्लॉगर्स अभी ऐसी स्थिति में नहीं है इसलिए उनके लिए चिंता की फिलहाल कोई बात नहीं है...लेकिन आज नहीं तो कल वो ऐसी स्थिति में आते हैं तो उन्हें सभी नियम-कायदों की जानकारी तो होनी ही चाहिए...

शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

कपिल शर्मा के साथ ये तो होना ही था...खुशदीप


कपिल शर्मा यानि पिछले 5-6 साल से भारत के बेताज कॉमेडी बादशाह...इन दिनों कपिल को लेकर बहुत सी बातें हवा में तैर रही हैं...कहीं कपिल की बहन के हवाले से बताया जा रहा है कि वो डिप्रेशन के शिकार हैं...सेट पर तीन बार बेहोश हो चुके हैं...ये अटकलें भी हैं कि कपिल फिल्मों के लिए अपने शो में आने वाले सुपरस्टार्स तक को इतना इंतजार कराते हैं कि वो तौबा करने लगे हैं...हवा में ये भी उड़ रहा है कि शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा ने अब कभी कपिल के शो में ना आने की कसम खा ली है...इन दोनों की फिल्म आने वाली है...जब हैरी मेट सेजल’…इसी फिल्म के प्रमोशन के दौरान कपिल के शो पर ऐसा-वैसा कुछ हुआ बताया जा रहा है...

फोटो- कपिल शर्मा के ट्विटर हैंडल से साभार
हाल में ऐसा दो बार हुआ कि कपिल को अपने शो का शूट तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से टालना पड़ा...एक बार जब हैरी मेट सेजलकी लीड जोड़ी शाहरुख और अनुष्का के साथ...तो दूसरी बार मुबारकांकी स्टार कास्ट (अनिल कपूर, अर्जुन कपूर, इलियाना डिक्रूज) के साथ...हालांकि अब कपिल मुबारकां वाला शूट पूरा कर चुके हैं. बताया जा रहा है कि जल्दी ही कपिल जब हैरी मेट सेजलके निर्देशक इम्तियाज अली और शाहरुख-अनुष्का के साथ भी शो शूट करेंगे... 

कपिल के लिए राहत की बात ये भी है कि सोनी चैनल पर ही जोर शोर के साथ शुरू किया गया कॉमेडी शो द ड्रामा कंपनी फ्लॉप  साबित हुआ है...इस शो में मिथुन चक्रवती के होस्ट होने के अलावा कृष्णा अभिषेक, सुगंधा, सुदेश लहरी, संकेत जैसे कॉमेडियन्स होने के बावजूद बात नहीं बनी...सोनी चैनल कॉमेडी को लेकर नए प्रयोग कर रहा है...इसकी वजह यही बताई जाती रही है कि सोनी कपिल के साथ कॉन्ट्रेक्ट को बढ़ाने के मूड में नहीं है. लेकिन अब नई परिस्थितियों में ये कॉन्ट्रेक्ट बढ़ाया भी जा सकता है...

कॉमेडियन्स में जिस तरह की कामयाबी और पैसा कपिल को मिला, वैसा देश में पहले किसी कॉमेडियन को नहीं मिला...पहले कॉमेडियन्स अपनी प्रतिभा सिर्फ बॉलिवुड के बड़े पर्दे पर दिखाते थे. लेकिन अब टीवी ने कॉमेडी में कमाई के मामले में बड़े पर्दे को कहीं पीछे छोड़ दिया है...

बॉलिवुड के कॉमेडियन्स की बात की जाए तो महमूद से बड़ा नाम कोई नहीं दिखाई देता...वैसे महमूद के पहले भी गोप, याकूब, मुकरी, ओम प्रकाश, जॉनी वॉकर, भगवान दादा जैसे अदाकारों ने अपनी कॉमेडी से लोगों को गुदगुदाया...यही बात महमूद के समकक्षों में आई एस जौहर, जगदीप, देवेन वर्मा, राजेंद्र नाथ के लिए भी कही जा सकती है...महमूद के बाद कॉमेडी के हुनर में चमकने वाले एक्टर्स में असरानी, केश्टो मुखर्जी, उत्पल दत्त, पेंटल, कादर खान, शक्ति कपूर, जॉनी लीवर के नाम गिनाए जा सकते हैं...हाल के वर्षों में राजपाल यादव, सतीश कौशिक, अनुपम खेर, बमन ईरानी, अरशद वारसी ने दर्शकों का अपनी कॉमेडी टाइमिंग से भरपूर मनोरंजन किया...बॉलिवुड में विशुद्ध कॉमेडियन्स की चमक फीकी पड़ने का एक कारण ये भी रहा कि सुपरस्टार्स ने खुद ही बड़े पर्दे पर कॉमेडी करने का जिम्मा उठा लिया...

बॉलिवुड में विशुद्ध कॉमेडियन्स की पूछ बेशक कम हुई लेकिन छोटे पर्दे ने इसकी भरपाई कर दी...टीवी पर द लाफ्टर चैलेंजशुरू होने के बाद कॉमेडियन्स की नई फौज दर्शकों के सामने आई...इनमें अमृतसर से आए कपिल शर्मा, भारती, राजीव ठाकुर, सुदेश लहरी, चंदन प्रभाकर खास तौर पर कामयाब रहे...इनके अलावा राजू श्रीवास्तव, कृष्णा अभिषेक, एहसान कुरैशी, सुनील पॉल, नवीन प्रभाकर, प्रताप फौजदार, सुमीत राघवन ने भी अपनी पहचान बनाने में सफलता पाई...टीवी की बदौलत भारत ने पाकिस्तान के कॉमेडियन्स शकील, रऊफ लाला के टेलेंट को भी देखा...ये अलग बात है कि पाकिस्तान के कॉमेडी किंग उमर शरीफ ने खुद को भारतीय टीवी पर ज्यादा एक्सपोज नहीं किया...   

कपिल शर्मा को लेकर कितनी भी बातें की जा रही हों लेकिन सच तो ये है कि हर कॉमेडियन की एक शेल्फ लाइफ होती है...कुछ साल तक ही वो अपनी कॉमेडी से दर्शकों को बांधने में कामयाब रहता है...एक समय के बाद वो जो कुछ भी करे रिपीट लगने लगता है...इस फील्ड में लंबे समय तक वही चल सकता है जो नए नए प्रयोग करता रहे...जिसके पीछे मजबूत स्क्रिप्ट राइटर्स हों...एक कॉमेडियन के समय के साथ फीके पड़ने की एक वजह ये भी होती है कि किसी और नए प्रतिभाशाली कॉमेडियन का उदय होना...कपिल के लिए ये प्लस प्वाइंट रहा है कि उन्हें इतने वर्षों से कोई सवा सेर कॉमेडियन नहीं मिला...

भारत में कॉमेडी के क्षेत्र में अगर महमूद का टाइम सबसे लंबा खिंचा तो इसकी वजह और भी थी, महमूद सिर्फ कॉमेडियन ही नहीं खुद बहुत उम्दा एक्टर भी थे...वो ट्रेजिडी सीक्वेंस करने पर आते तो दर्शकों को जार जार रूला भी देते थे...एक वक्त ऐसा भी आया था जब महमूद से उस वक्त के बड़े स्टार्स भी खौफ खाने लगे...उन्हें लगता था कि महमूद के साथ काम करना ख़तरे से खाली नहीं क्योंकि दर्शकों की सारी तालियां तो वही बटोर कर ले जाएंगे...

महमूद जैसी नैसर्गिक और ऑल राउंड प्रतिभा विरले ही देखने को मिलती है...इस मामले में कपिल भी महमूद के सामने कहीं नहीं टिकते...कपिल ने छोटे पर्दे से निकल कर बॉलिवुड के सिल्वर स्क्रीन पर भी पैर जमाने की कोशिश की...कपिल की कॉमेडी की जब टीवी पर तूती बोल रही थी तभी अब्बास-मस्तान ने कपिल को लेकर किस किसको प्यार करूंफिल्म भी बना डाली...और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी खासी कमाई भी कर ली...ये बात दूसरी है कि कपिल को इस फिल्म के बाद बॉलिवुड में कोई दूसरी फिल्म नहीं बनी...कपिल को दूसरी फिल्म के लिए खुद ही प्रोड्यूसर बनना पड़ा...फिरंगी नाम से बन रही इस फिल्म में कपिल ने अच्छा खासा पैसा झोंक दिया है...सुना जाता है कि एक सेट के लिए ही कपिल ने 7 करोड़ रुपए खर्च कर डाले....

कपिल को अब ये ध्यान भी रखना होगा कि उनका अब पहले जैसा गोल्डन पीरियड नहीं रहा... कपिल की टीम से सुनील ग्रोवर, अली असगर, सुगंधा के आउट होने के पीछे फ्लाइट में कपिल के बर्ताव को जिम्मेदार माना जाता है...तभी से कपिल का खराब दौर शुरू होना बताया जा रहा है...ये भी कहा जा रहा है कि इस दबाव से कपिल खुद को उबार नहीं पा रहे हैं...इसी वजह से उनका प्रोफेशनल ग्राफ नीचे आता जा रहा है...अब जो भी तर्क दिए जाएं लेकिन मेरा मानना है कि कॉमेडियन की शेल्फ लाइफ वाला सिद्धांत कपिल पर भी लागू होता है...कपिल अगर कोई नए प्रयोग करने में कामयाब नहीं रहते हैं तो उनके पास जितना कॉमेडी का हुनर था, वो लोगों को दिखा चुके हैं...ऐसे में लोगों को इंतजार है कि कॉमेडी के मंच पर किसी ऐसी नई प्रतिभा के आने का जो आते ही उनके दिलों-दिमाग पर छा जाए और बन जाए भारत का नया कॉमेडी किंग या क्वीन...
   

        

रविवार, 23 जुलाई 2017

ढिंचैक हिट होना है तो अंट शंट कर प्यारे...खुशदीप


वो दिन गए जब खलील खां फाख़्ता उड़ाया करते थे...आप अच्छा लिखते हैं, यूट्यूब पर क्रिएटिविटी दिखा सकते हैं, तो खुद को तोप मत समझिए...आप को अपनी मेहनत के कम ही कदरदान मिलेंगे...आपको सोशल मीडिया पर हिट होना है तो पहले तो इस सोच को ताक पर रखिए कि दुनिया क्या कहेगी? अगर आप ऐसा करते हैं तो आधा किला तो आपने पहले ही फतेह कर लिया समझो...अब आप ऐसा कुछ अटपटा करिए कि लोगों को चर्चा के लिए मसाला मिल जाए...एक दूसरे से कहने लगें कि फलां को सुना कितना बेसुरा या बेसुरी है...क्या आएं बाएं शाएं लिखता या लिखती है...हिन्दी तो कम से कम सही लिख लिया करे...अंग्रेज़ी पढ़ो क्या माशाअल्लाह है...शक्ल तो देखो लेकिन सेल्फी में अपने को कटरीना या सलमान से कम नहीं मानते...


ढिंचैक पूजा  के ट्विटर हैंडल से साभार

दरअसल, मनोविज्ञान मानता है कि अधिकतर इनसानों को परपीड़ा या परनिंदा में रस आता है...जब वो किसी दूसरे इनसान को कोई बेवकूफ़ी या अजीब हरकत करते देखता है, तो वो उसका मखौल बनाने से नहीं चूकता...और पिछले कुछ वर्षों में इस काम के लिए सोशल मीडिया जैसा शक्तिशाली माध्यम भी मिल गया है...कहीं कुछ उलजलूल देखा नहीं कि उसे धड़ाधड़ शेयर करने की होड़ लग जाती है...ऐसा करने वाले को बेशक क्षणिक आनंद मिले लेकिन जिसको मजाक बनाने के लिए शेयर किया जा रहा है, उसका मकसद ज़रूर हल हो जाता है...जितनी बार वो लिंक शेयर किया जाएगा या यूट्यूब पर देखा जाएगा, उतना ही उसके खाते में पैसा आता जाएगा...ज़रूरी नहीं जो अटपटा आप देख रहे हैं या पढ़ रहे हैं, वो उसी का क्रिएशन हो जिसका कि आप नाम साथ पढ़ रहे हों...इसके पीछे मार्केटिंग वाले कुछ दिग्गज दिमाग भी हो सकते हैं...जिनका काम ही ये होता है कि किसी पोस्ट या वीडियो को कैसे वायरल कराया जाए....

अब कुछ मिसालों के साथ आपको ये बात समझाता हूं...बीते साल सोनम गुप्ता बेवफा हैका जुमला सोशल मीडिया पर हिस्टीरिया जैसा छा गया था...2016 के शुरू में इंटरनेट पर दस के नोट की एक तस्वीर दिखी जिस पर लिखा था सोनम गुप्ता बेवफ़ा है’…कोई नहीं जानता कि सोनम गुप्ता का ये नाम असल में किसी का था या बस ये काल्पनिक उड़ान थी...लेकिन समझा गया कि किसी दिलजले आशिक ने नोट पर ये लिखा...अब ये ऐसा ट्रेंड हुआ कि हर किसी की ज़ुबान पर सोनम गुप्ता नाम चढ़ गया...नोटबंदी के बाद 2000 रुपए के नोट शुरू हुए तो उस नोट पर भी किसी ने यही जुमला दोबारा लिख दिया...एक बार फिर सोनम गुप्ता बेवफ़ा है ट्रेंड होने लगा…

ये जब सब हो रहा था तब किसी ने भी ये नहीं सोचा कि सोनम गुप्ता नाम की जो भी लड़कियां या महिलाएं दुनिया भर में होंगी, उन्हें इससे कितनी परेशानी हुई होगी...इस जुमले का अलग तरीके से राजनीति में भी इस्तेमाल हुआ...इस साल पांच राज्य विधानसभाओं के चुनाव में उत्तराखंड भी शामिल था...चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य पार्टी से बगावत कर बीजेपी से जा मिले...उस वक्त भी किसी ने 2000 के नोट पर लिख दिया यशपाल आर्य बेवफ़ा है....ये भी जमकर ट्रेंड हुआ...अब ये बात अलग है कि यशपाल आर्य ना सिर्फ खुद चुनाव जीते बल्कि उनके बेटे संजीव आर्य भी विधायक बन गए...

चलिए अब आपको मिलाते हैं सोशल मीडिया की नई सेंसेशन किरण यादव से...इन मोहतरमा के 22 जुलाई रात 12 बजे तक फेसबुक वॉल पर 9 लाख, 61 हज़ार, 4 सौ 12 फॉलोअर्स दिख रहे थे...इन्होंने अपने प्रोफाइल में ये जानकारी दे रखी है...

Self-Employed
Worked at S&S Infotech Solutions Pvt Ltd
Studied at D.C College Hajipur,vaishali (BIHAR),INDIA
Lives in Delhi, India
Married
From Vaishali, India
Joined March 2014

Joined March 2014 से तात्पर्य फेसबुक ज्वाइन करने से है...किरण यादव की हर पोस्ट को हज़ारों में लाइक्स मिलते हैं...इनका एक खास तरीका भी है...हर पोस्ट के साथ ये अपनी कोई नई फोटो अपलोड भी करती हैं...

फोटो किरण यादव की फेसबुक वॉल से साभार


ज्यादातर पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी को निशाना बनाया होता है...हिन्दी में लिखी जाने वाली इन पोस्ट में वर्तनी और पंक्चुएशन की अशुद्धियां भी खास पहचान हैं...हर कोई हैरान है कि आखिर क्या है इन पोस्ट में जो सोशल मीडिया पर इनका नाम क्रेज बन गया है...क्या इसके पीछे भी कोई मार्केटिंग रणनीति तो काम नहीं कर रही? ये सवाल भी ज़ेहन में उठता है....

किरण यादव के बाद बात ढिंचैक पूजा की...नाम की तरह ही इनका काम भी निराला है....बताया जाता है कि ढिंचैक पूजा खुद ही गाने लिखती है और फिर उन्हें अपनी आवाज में गाकर ही वीडियो शूट कराती हैं...फिर अपने यू ट्यूब चैनल पर इन्हें अपलोड करती हैं...अब ये बात अलग है कि गाने के नाम पर दो-चार लाइनें ही पूरे वीडियो में रिपीट की जाती रहती है...ढिंचैक पूजा पिछले दिनों यू ट्यूब पर दिलों का शूटर है मेरा स्कूटरगाने के साथ लौटीं तो फिर हर तरफ इस वीडियो की चर्चा होने लगी...





अब चाहे चर्चा के पॉजिटिव कम नेगेटिव कारण ज्यादा रहे हों...लेकिन कहते हैं ना कि बदनाम में भी नाम छिपा होता है! ढिंचैक पूजा को यूट्यूब चैनल के जरिये लगभग 22 लाख व्यूअर्स हर महीने मिलने लगे. ढिंचैक पूचा इससे पहले 'स्वैग वाली टोपी', 'दारू दारू दारू', 'सेल्फी मैंने ले ली आज', 'बापू दे दे थोड़ा कैश' जैसे गानों के वीडियो भी अपलोड कर चुकी हैं...जाहिर है यू ट्यूब चैनल से ढिंचैक पूजा को अब तक लाखों की कमाई हो चुकी होगी...


मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहनेवाली ढिंचैक पूजा का असली नाम पूजा जैन बताया जाता है...लेकिन इन दिनों वो दिल्ली में रह रहीं हैं...पूजा के गाने को देख-सुन कर ऐसा कहीं से नहीं लगता कि सुर और ताल से उनका कोई नाता है...लेकिन फिर ऐसा क्या है कि उनके वीडियो इतने चर्चा में रहते हैं...कुछ लोग सुर ताल ना होने को ही ढिंचैक पूजा की यूएसपी मानते हैं...हालांकि एक कंट्रोवर्सी के बाद यू ट्यूब से दो को छोड़कर उनके सारे वीडियो डिलीट हो गए हैं...बताया जाता है कि ढिंचैक पूजा ने खुद ही ऐसा किया...इसके पीछे कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कॉपीराइट का मामला बताया गया है...किसी कथप्पा सिंह (कटप्पा नहीं) नाम के व्यक्ति ने कॉपीराइट को लेकर शिकायत की थी...ढिंचैक पूजा के बारे में ये भी सुना जा रहा है कि दिलों का शूटर वीडियो में ढिंचैक पूजा बिना हेलमेट के स्कूटर चलाता दिखीं, इसलिए पुलिस में किसी ने शिकायत कर दी...दिल्ली पुलिस इसकी जांच कर रही है.

ढिंचैक पूजा को लेकर ये भी कहा जा रहा है कि वो जल्दी ही नया वीडियो रिलीज करेंगी...हालांकि ये पोस्ट फेसबुक पर अनवेरिफाइड अकाउंट से की गई है लेकिन इंटरनेट पर ये वायरल हो चुकी है...कुछ लोग ढिंचैक पूजा से ये भी कह रहे हैं कि भगवान के लिए वो ऐसा पाप ना करें...

ढिंचैक पूजा की तरह ही कुछ साल पहले यूट्यूब पर गाने अपलोड करने के लिए एक नाम बड़ा सुर्खियों में रहा था और वो था डॉक्टर केसी या डॉ के सी चौधरी का...इनके प्रोफाइल के हिसाब से अब इनकी उम्र 73 साल है...


डॉक्टर केसी चौधरी की फेसबुक वॉल से साभार

जनाब एएमयू के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से क्वालिफाइड एमबीबीएस डॉक्टर हैं...ये अपने प्रोफाइल पर अभिषेक बच्चन, शाहरुख़ ख़ान और ओमर अली ख़ान को शान से अपने फैन बताते हैं...अपने बारे में इन्होंने क्या क्या लिख रहा है खुद ही पढ़िए...

Free lance researcher - Medicine, Astrology, Instrumentaion, Software development, Web hosting, Internet marketing, Singing
Aligarh Muslim University
BMI affiliate lyricist, singer, astrologer.
Google DoctorKC to view Abhishek Bachchan tweet.
Author of 12 published books and free medical books
30 years experience of medical practice at own nursing homes at Fatehabad and Paschim Vihar:New Delhi 
Activities and Societies: Life member - Indian Medical Association Life member - Association of Clinical Biochemists of India Facebook page - India Poets & Lyricists
Fans in all countries
Fan page created on Facebook by Omar Ali Khan, Pakistan Movie Producer.

ये जनाब सैकड़ो बॉलिवुड के गानों के साथ इंटरनेशनल हिट्स को भी अपनी आवाज़ में गाकर यू ट्यूब पर अपलोड कर चुके हैं...जिन्हें सुनकर कोई भी समझ सकता है कि सुर ताल से उनका कोई वास्ता नहीं है...यानि यहां भी ये यूएसपी बन गया...



अभिषेक बच्चन जैसे अभिनेता ने डॉक्टर केसी को सुनने के बाद अपने दोस्त फरहान अख्तर का नाम लेते हुए एक बार ट्वीट किया था...

The legend of DOCTOR KC. The dicovery of the century!!!! Check him out on youtube. Farhan, owe you big time for this!!

अब ये बात अलग है कि डॉक्टर केसी ने अभिषेक की इस चुटकी को ही प्रशंसा मान लिया...तभी तो वो अपने प्रोफाइल में शान के साथ लिखते हैं, गूगल करिए अभिषेक के मेरे बारे में ट्वीट को पढ़ने के लिए....

#हिन्दी_ब्लॉगिंग


शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

1983 में जो कपिल ने किया वही 2017 में हरमनप्रीत ने किया...खुशदीप

भारतीय महिला क्रिकेट में मिताली राज और झूलन गोस्वामी के नाम ही अब तक आपने सुन रखे होंगे शायद...अब हरमनप्रीत कौर, राजेश्वरी गायकवाड़, शिखा पांडे, सुषमा वर्मा, दीप्ति शर्मा, पूनम यादव, वेदा कृष्णमूर्ति, पूनम राउत, स्मृति मंधाना इन नामों को भी ज़ेहन में बिठा लीजिए...जिस तरह भारत की ये शेरनियां फॉर्म में हैं उससे मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाली 23 जुलाई के बाद इनका नाम भारत के घर-घर में जाना जाने लगेगा...भारतीय महिला क्रिकेट टीम पहली वर्ल्ड कप जीत से अब बस एक हाथ दूर है...रविवार को इंग्लैंड को उसी के मैदान में मात देकर भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनना है...

गुरुवार को मिताली राज के कुशल नेतृत्व में सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने जिस तरह डिफेंडिंग वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को अपने सामने घुटने टिकवाए, उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है...ध्यान रहे कि इसी वर्ल्ड कप के लीग मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 8 विकेट से परास्त कर इकतरफा जीत हासिल की थी...भारत ने सेमीफाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया को 36 रन से मात देकर उसे घर वापसी का टिकट थमा दिया...इस जीत की सूत्रधार रहीं पंजाब की दिलेर कुड़ी हरमनप्रीत कौर...भारत ने इस मैच में अपनी पारी में कुल 281 रन बनाए जिसमें से अकेली हरमनप्रीत कौर ने 115 गेंद में 171 रन नॉट आउट जड़ डाले...20 चौक्के और 7 छक्के लगाकर हरमनप्रीत ने ऑस्ट्रेलिया की बोलिंग का कचूमर निकाल दिया...

फोटोृृ- हरमनप्रीत कौर की फेसबुक वॉल से साभार


हरमनप्रीत कौर ने लगभग वैसा ही कारनामा किया जैसा कि 1983 में कपिलदेव ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ 175 रन ठोंक कर किया था...कपिल पाजी की वो पारी भारतीय पुरुष क्रिकेट के लिए डिफाइनिंग मोमेंट थी...तो  गुरुवार को हरमनप्रीत कौर की आतिशी पारी भारतीय महिला क्रिकेट के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित होगी...इस मैच में भारतीय बैटिंग में हरमन का साथ जहां कप्तान मिताली राज ने 36 रन बना कर दिया...वहीं बोलिंग में दीप्ति शर्मा, शिखा पांडे और वेटरन झूलन गोस्वामी के सामने ऑस्ट्रेलिया की नामी बैट्सवूमेन की एक नहीं चली...

उम्मीद है कि जिस तरह विराट कोहली, एम एस धोनी, युवराज, शिखर धवन, रोहित शर्मा, भुवनेश्वर, रविंद्र जडेजा, हार्दिक पांड्या का नाम देश का बच्चा बच्चा जानता है, वैसे ही अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्यों के साथ भी होगा...इन महिला खिलाड़ियों की भी ब्रैंड एंडोर्समेंट में वैसे ही पूछ होगी जैसी कि पुरुष क्रिकेटर्स की होती है...भारतीय महिला टीम की वर्ल्ड कप जीत देश में और बच्चियों को भी क्रिकेट या अन्य खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगी...अगर किसी कारण ये टीम वर्ल्ड कप नहीं भी जीतती तो भी इन्होंने फाइनल में पहुंच कर इतिहास तो रच ही दिया है...इसलिए इनकी घर वापसी पर भी वैसा ही जश्न होना चाहिए जैसा कि पुरुष क्रिकेट टीम का जीत के बाद होता है...

वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के इस दमदार प्रदर्शन के लिए कप्तान मिताली राज की जितनी प्रशंसा की जाए वो कम है...मिताली के लिए तो वैसे भी ये टूर्नामेंट जीवन भर के लिए यादगार रहेगा...इसी वर्ल्ड कप में मिताली ने पहले इंग्लैंड की शॉर्ले एडवर्डस के सबसे ज्यादा 5992 रन का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा फिर वो 6000 रन का माइलस्टोन पार करने वाली भी दुनिया की पहली क्रिकेटर बन गईं...


दिग्गज ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल मैच में जिस तरह मिताली ने शानदार कप्तानी की वो भी देखने लायक थी...बस अब देश में सब दुआ कीजिए कि 23 जुलाई को लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में भारत की लाडलियों के हाथों में वर्ल्ड कप की चमचमाती ट्रॉफी के साथ वैसे ही तिरंगा आसमान पर लहराता दिखे जैसा कि 25 जून 1983 को कपिल डेविल्सने कर दिखाया था...

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

सोमवार, 17 जुलाई 2017

नोएडा में मेड को लेकर टकराव की घटना पर याद आई 'पत्नीश्री की मददगार'...खुशदीप


नोएडा की एक हाईप्रोफाइल रिहायशी सोसायटी में बीते हफ्ते जम कर हंगामा हुआ...सेक्टर 78 में स्थित महागुन सोसायटी मे एक मेड को लेकर हिंसा की नौबत आ गई...दरअसल मेड के परिजनों का आरोप था कि उसे फ्लैट मालिक ने घर में बंधक बना कर दो दिन तक पीटा...फिर उसे गंभीर हालात में सोसायटी के पास फेंक दिया गया...इस मेड की गंभीर हालत में तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई...दूसरी ओर, सोसायटी के लोगों का कहना है कि मेड को चोरी के आरोप में पकड़ा गया, जिसके सबूत सीसीटीवी फुटेज में मौजूद हैं और पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी...बताया जा रहा है कि मेड के समर्थन में दूसरी मेड्स, उनके परिजनों और उनके गांव के लोगों ने बीते बुधवार को सोसायटी पर हल्ला बोल दिया...उनके और सोसायटी के सिक्योरिटी गार्ड्स के बीच पत्थरबाजी भी हुई...  

इस घटना में कौन दोषी है, कौन नहीं, ये पता लगाना पुलिस का काम है और वो लगा भी लेगी...लेकिन मेरा इस पोस्ट को लिखने का मकसद दूसरा है...दरअसल महानगरों का जीवन ऐसा हो चला है कि यहां मेड के बिना शायद ही किसी घर का गुजारा चलता हो...यहां अधिकतर न्यूक्लियर परिवार ही रहते है...पति-पत्नी दोनों ही काम पर जाते हों तो घर में साफ़-सफ़ाई, बर्तन से लेकर खाना बनाने तक का काम मेड के ही जिम्मे रहता है...छोटे बच्चों वाले घरों में उनकी देखरेख का काम भी मेड ही करती हैं...ऐसे में एक दिन मेड ना आए तो घर की हालत समझी जा सकती है...

देश के दूरदराज से विकास की दृष्टि से पिछड़े इलाकों से लोगों का पलायन महानगरों की ओर हुआ है...इनमें पुरुष लेबर से जुड़े काम में रोजगार तलाशते हैं...वहीं महिलाएं घरों में मेड के तौर पर आजीविका ढूंढ लेती हैं...मेड रखने के लिए भी दिल्ली-नोएडा जैसे शहर में पुलिस पहले पुलिस वेरीफिकेशन कराना जरूरी है...लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग इसे झंझट का काम मानते हैं और बिना वेरीफिकेशन ही मेड रख लेते हैं...मेड भी इन दिनों आपस में एकजुटता बना कर काम करती हैं...कोई मेड किसी घर के मालिक या मालकिन पर खराब बर्ताव का आरोप लगा कर काम करना बंद कर दें तो बाकी सभी मेड भी वहां काम करने से इनकार कर देती हैं...यहीं नहीं कोई मेड वहां काम करना भी चाहे तो बाकी सभी उस पर दबाव डालकर रोक देती हैं...

नोएडा की घटना कोई मामूली बात नहीं है...ये सामाजिक ताने-बाने में बढ़ती जा रही दूरियों की ओर इशारा है...आर्थिक दृष्टि से अब देश में कई वर्ग बन गए हैं...लेकिन क्या एक दूसरे के बिना किसी का अस्तित्व बनाए रखना मुमकिन है? जब एक नए शहर का प्रोजेक्ट बनाया जाता है तो वहां सिर्फ आर्थिक दृष्टि से मजबूत लोगों को बसाने के बारे में ही नहीं सोचा जाता...वहां मार्केट, लेबर क्लास, सब्जी मंडी हर तरह के तबकों के रहने के लिए जगहें चिह्नित की जाती हैं...जिस तरह गाड़ी चार पहियों पर चलती है उसी तरह समाज भी अलग-अलग तबकों के पहियों के सहारे ही आगे बढ़ता है...अगर कोई ये समझता है कि वो अकेले पहिए से ही गाड़ी को भगा कर ले जाएगा तो ये उसकी नादानी के सिवा कुछ नहीं है...

हमारे देश की सरकार का कंसेप्ट वेलफेयर सरकार का है...यानि ये देखना उसकी जिम्मेदारी है कि कल्याणकारी योजनाओं का समाज के सभी वर्गों को लाभ मिले...खास तौर पर जो वंचित हैं, जो आखिरी पायदान पर खड़े हैं, उन तक भी तरक्की की बयार पहुंचे...सरकार के अलावा ये समाज के हर वर्ग की भी जिम्मेदारी है कि वो सह-अस्तित्व के सिद्धांत का सम्मान करे...अपने लिए उन्नति-प्रगति के रास्ते तैयार करे तो जरूरतमंदों के दुख-दर्द को भी अपने दिल में महसूस करे...

नोएडा की घटना मेड पर केंद्रित है...इसी को लेकर मुझे 28 अगस्त 2009 को लिखी पोस्ट 'पत्नीश्री की मददगार' आ गई...पढ़ेंगे तो आज भी प्रासंगिक लगेगी...आप भी इस विषय पर अपने विचार रखें, बहस को नया आयाम दें तो अच्छा रहेगा...

पत्नीश्री की मददग़ार

आप सोच रहे होंगे कि मैं किस मददग़ार की बात कर रहा हूं. जनाब माया नाम की ये वो मोहतरमा है जो एक दिन घर में अपने चरण ना डालें तो घर में भूचाल-सा आ जाता है. अपना तो घर में बैठना तक दूभर हो जाता है. पत्नीश्री के मुखारबिन्दु से बार-बार ये उदगार निकलते रहते हैं- यहां मत बैठो, वहां मत बैठो. एक तो ये मेरी जान का दुश्मन लैप-टॉप. मैं सुबह से घर में खप रही हूं. इन्हें है कोई फिक्र. पत्नीश्री का ये रूप देखकर अपुन फौरन समझ जाते हैं, आज माया घर को सुशोभित करने नहीं आने वाली है.

तो जनाब ऐसी है माया की माया. वैसे तो ये मायाएं हर घर में आती हैं लेकिन इन्हें नाम से इनके मुंह पर ही बुलाया जाता है. जब ये सामने नहीं होती तो इनके लिए नौकरानी, आया, बाई, माई, कामवाली और ज़्यादा मॉड घर हों तो मेड जैसे संवेदनाहीन शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे इंसान की कोई पहचान ही न हो. किटी पार्टी हो या कोई और ऐसा मौका जहां दो या दो से ज़्यादा महिलाओं की गपशप चल रही हो, वहां ये सुनने को मिल ही जाता है- इन कामवालियों ने तो नाक में दम कर रखा है. जितना मर्जी इनके साथ कर लो, लेकिन ये सुधरने वाली नहीं.

तो जनाब मैं अपनी पत्नीश्री की मददगार माया की बात कर रहा था. माया की तीन साल की एक बेटी है-लक्ष्मी और पति ढाबे पर काम करता है. काम क्या करता है, बस जो मेहनताना मिलता है, ज़्यादातर ढाबे पर ही दारू में उड़ा आता है. माया और उसके पति को यहां नोएडा में एक कोठी में रहने के लिए उसकी मालकिन ने एक छोटा सा टीन की छत वाला कमरा दे रखा है. अब ये भी सुन लीजिए कि ये मालकिन इस दयादृष्टि की माया से कीमत क्या वसूल करती है. कोठी की सफ़ाई, घास की कटाई, पेड़-पौधों में पानी देना, मालकिन के कहीं जाने पर कोठी की चौकीदारी करना और न जाने क्या-क्या. ज़रा सी चूक हुई नहीं कि बोरिया-बिस्तर उठा कर सड़क पर फेंक देने की धमकी. ठीक उसी अंदाज में जिस तरह कभी अमेरिका में गुलामी के दौर में अफ्रीकियों के साथ बर्ताव किया जाता था. ऐसी दासप्रथा नोएडा की कई कोठियों में आपको देखने को मिल जाएगी.

ऐसे हालात में माया को जब भी मैंने घर पर काम के लिए आते-जाते देखा, ऐसे ही लगा जैसे कि किसी तेज़ रफ्तार से चलने के कंपीटिशन में हिस्सा ले रही हो. अब जो मां काम पर आने के लिए छोटी बच्ची को कमरे में अकेली बंद करके आई हो, उसकी हालत का अंदाज़ लगाया जा सकता है. ऐसे में मेरी पत्नीश्री ने भी गोल्डन रूल बना लिया है जो भी दान-पुण्य करना है वो माया पर ही करना है. हां, एक बार पत्नीश्री ज़रूर धर्मसंकट में पड़ी थीं- पहले देवों के देव महादेव या फिर अपनी माया. दरअसल पत्नीश्री हर सोमवार को मंदिर में शिवलिंग पर दूध का एक पैकेट चढ़ाती थीं. दूध से शिवलिंग का स्नान होता और वो मंदिर के बाहर ही नाले में जा गिरता. सोमवार को इतना दूध चढ़ता है कि नाले का पानी भी दूधिया नज़र आने लगता. एक सोमवार मैंने बस पत्नीश्री को मंदिर से बाहर ले जाकर वो नाला दिखा दिया. पत्नीश्री अब भी हर सोमवार मंदिर जाती हैं...अब शिवलिंग का दूध से नहीं जल से अभिषेक करती हैं... और दूध का पैकेट माया के घर उसकी बेटी लक्ष्मी के लिए जाता है.. आखिर लक्ष्मी भी तो देवी ही है ना.

लक्ष्मी की बात आई तो एक बात और याद आई. मेरी दस साल की बिटिया है. पांच-छह साल पहले उसके लिए एक फैंसी साइकिल खरीदी थी. अब बिटिया लंबी हो गई तो पैर लंबे होने की वजह से साइकिल चला नहीं पाती थी... साइकिल घर में बेकार पड़ी थी तो पत्नीश्री ने वो साइकिल लक्ष्मी को खुश करने के लिए माया को दे दी. लेकिन बाल-मन तो बाल-मन ही होता है...हमारी बिटिया रानी को ये बात खटक गई...भले ही साइकिल जंग खा रही थी लेकिन कभी बिटिया की जान उसमें बसती थी..वो कैसे बर्दाश्त करे कि उसकी प्यारी साइकिल किसी और को दे दी जाए...वो लक्ष्मी को दुश्मन मानने लगी.. लाख समझाने पर आखिर बिटिया के कुछ बात समझ आई. दरअसल ये मेरी बिटिया का भी कसूर नहीं है. पब्लिक स्कूलों में एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज़, फ्रेंच-जर्मन भाषाएं न जाने क्या-क्या सिखाने पर ज़ोर दिया जाता है लेकिन ये छोटी सी बात कोई नहीं बताता कि एक इंसान का दिल दूसरे इंसान के दर्द को देखकर पिघलना चाहिए. हम भी बच्चों को एमबीए, सीए, डॉक्टर, इंजीनियर बनाने के लिए तो कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते लेकिन ये कम ही ध्यान देते हैं कि हमारे नौनिहाल कुछ भी बनने से पहले अच्छे इंसान बने.

चलिए अब माया की गाथा यहीं निपटाता हूं. 10 बज गए हैं, माया अभी तक नहीं आई है और पत्नीश्री का पारा धीरे-धीरे चढ़ना शुरू हो रहा है..इससे पहले कि अपने लैपटॉप बॉस को पत्नीश्री के अपशब्द सुनने पड़ें, सीधे स्लॉग ओवर पर आता हूं.

रविवार, 16 जुलाई 2017

महफूज़ के बुलावे पर जुटे ब्लॉगर्स लेकिन मीट नाम से बिदके...खुशदीप

गुरुवार को ऑफिस में व्यस्त था...मोबाइल ऑफिस में मैं साइलेंट पर रखता हूं लेकिन आंखों के सामने ही रखता हूं ताकि पता चल जाए कि किसका है...वाइब्रेशन हुआ तो मोबाइल पर नज़र गई...महफूज़ अली का नाम फ्लैश हो रहा था...बात की तो दूसरी तरफ़ से हक़ वाले आदेश मेें आवाज़ आई...भईया परसों शनिवार को दोपहर 3 बजे 11, अमृता शेरगिल मार्ग पर पहुंचना है...एक छोटा सा गैट-टूगेदर रखा है...अब महफूज़ है तो शॉर्ट नोटिस के लिए आपको तैयार रहना ही होगा...ये टेंशन आपकी है महफूज़ की नहीं...महफूज़ का सीधा फंडा है...नो इफ़ - नो बट, ओनली जट...इसलिए दूसरे सब काम छोड़कर हाज़री लगाना लाज़मी था...गनीमत थी कि महफूज़ ने शनिवार मेरी छुट्टी वाला दिन चुना था...

रैंप पर ना सही लॉन पर ही मॉडलिंग सेशन 


 कुछ साल पहले भी महफूज़ ने इसी तरह इसी लोकेशन पर बुलाया था...यहां गज़ाला जी रहती हैं...उनकी पुरानी शानदार मेज़बानी आज तक याद थी...इसलिए जाने का ये भी एक अट्रैक्शन था...दिल्ली में कहीं आना जाना अब ओला-उबर कैब्स ने आसान कर दिया है...पहुंचते पहुंचते मुझे सवा तीन बज गए...
ओनली जेंट्स क्लब

मेन गेट पर ही टी-शर्ट्स में दो गबरू जवान बात करते दिखाई दिए...पीली टी-शर्ट वाला तो ख़ैर महफूज़ ही था...देखते ही गले मिलकर स्वागत किया...लेकिन नीली टी शर्ट में दूसरे गबरू जवान को गौर से देखा और मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया तो ये क्या...
दो बांके गबरू जवान

अरे ये तो अपने डॉ टीएस दराल सर निकले...जिम जाने का दराल सर पर साफ़ नज़र आ रहा था...हैंडसम तो खैर पहले ही थे अब और निखरे दिख रहे थे...


लेडीज़ क्लब में घुसने की कोशिश करते महफूज़ और इसे कैमरे में कैद करते हितेश

अब सुनिए आगे की...जहां महफूज़ हो, वहां कोई गड़बड़ ना हो, ये भला कैसे हो सकता है...महफूज़ ड्राईंग रूम में जाने वाले गेट की चाबी ही ना जाने कहां रख कर भूल गए...इसलिए पिछले गेट से ही अंदर जाना पड़ा...गज़ाला जी किचन में तैयारियों में व्यस्त थीं, हमारी आवाज़ सुनकर बाहर आईं और चिरपरिचित मुस्कान के साथ हमारा अभिवादन किया...अंदर पहुंचे तो टाइम की पंक्चुअल अंजू चौधरी पहले से ही वहां मौजूूूद थीं...फिर धीरे धीरे और भी लोग आते गए...मुकेश कुमार सिन्हा, शाहनवाज़, तारकेश्वर गिरी, सुनीता शानू, वंदना गुप्ता, हितेश शर्मा, आलोक खरे, ब्रजभूषण खरे, संंजय (एनएसडी से जुड़े अभिनेता मॉम, तलवार जैसी कई फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं), रमेश सिंह बिष्ट...

चाय की टेबल से ही अंदाज़ लगाइए शानदार मेज़बानी का 


पहले ड्राइंग रूम में ही कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स का दौर चलता रहा...साथ ही हंसी मजाक भी...पहले तो ब्लॉगर मीट के नाम पर ही ठहाके लगे...मैंने कहा भई अब ज़रा मीट नाम से परहेज ही किया करो...ना जाने किसे कब क्या गलतफ़हमी हो जाए कि कौन सा मीट है...आधा घंटा वहीं जमे रहे...आलोक खरे, रमेश सिंह बिष्ट, संजय कुमार और हितेश शर्मा से पहली बार मिला...मिल कर अच्छा लगा...हितेश नौजवान घुमक्कड़ी ब्लॉगर है...इनके ब्लॉग का नाम भी घुमक्कड़ी डॉट कॉम है...इस युवा में कुछ करने का जज्बा दिखा...डिजिटल वर्ल्ड में ही पूर्ण रोज़गार की संभावनाएं तलाशने की ओर अग्रसर हितेश की योजनाओं के बारे में जानना सुखद रहा...


गहन विमर्श के लम्हे को कैद करतीं सुनीता शानू, काली टी शर्ट में होस्ट गज़ाला


बातों में टाइम का पता ही नहीं लग रहा था कि फिर गज़ाला जी ने चाय के लिए बाहर लॉन के पास खुली बैठक में बुला लिया...इस घर में हर चीज़ में नफ़ासत दिखाई दी...और खुले लॉन के तो कहने ही क्या...दिल्ली जैसे भीड़-भाड़ वाले शहर में इस तरह की जगह दिल और दिमाग को बहुत सुकून देती है...इतना खूबसूरत नज़ारा देखकर सभी के मोबाइल फ्लैश चमकने लगे...हितेश के पास प्रोफेशनल कैमरा था...इसलिए वो भी अपना फोटोग्राफी का हुनर दिखाने लगे...फोटो खींचते वक्त हर बार की तरह सबसे लंबे होने की वजह से मुझे, शाहनवाज़ और तारकेश्वर को पिछली पंक्ति में खड़ा होना पड़ा...शाहनवाज़ ने चुटकी भी ली कि ये हमारे साथ नाइंसाफ़ी है...फोटो लिए जाते वक्त हम ढक जाते हैं और बस हमारा चांद सा मुखड़ा ही नज़र आता है...


यूपी वाला ठुमका लगाऊं कि हीरो जैसे नाच कर दिखाऊं


फोटो के साथ खाने-पीने का दौर भी चल रहा था...यहां पीने का अर्थ चाय, पानी और कोल्ड ड्रिंक्स ही निकाला जाए...चलिए अब आपको खाने में क्या क्या था वो भी बता ही देते हैं...इडली साम्भर, नारियल चटनी, खांडवी, समोसा, कई तरह की बर्फी आदि...सब इतना स्वाद कि डायटिंग पर होते हुए भी काफ़ी कुछ चट कर गया...गज़ाला जी को पिछली बार की मेज़बानी का अब तक याद था कि मैं चाय में चीनी नहीं लेता...इसलिए वो मेरे लिए बिना चीनी वाली चाय अलग से लेकर आईं...


तू खींच मेरी फोटो, तू खींच मेरी फोटो...


अब इतना पढ़ने के बाद आप सोच रहे होंगे कि ब्लॉगिंग पर भी कोई बात हुई या नहीं...पहली बात तो ये कि बहुत अर्से बाद सब आपस में मिल रहे थे...इसलिए अनौपचारिक बातों पर ज़्यादा ज़ोर रहा...फिर भी सबसे पहले तो इस बात पर खुशी जताई गई कि एक जुलाई से हिन्दी ब्लॉगिंग में दोबारा जान फूंकने की मुहिम को जिस तरह का समर्थन मिला वो वाकई बहुत उत्साहवर्धक है...हर ब्लॉगर शिद्दत के साथ चाहता है कि ब्लॉगिंग की पुरानी चहल-पहल लौटे और अब इसे लेवल 2 की तरह लेते हुए ऊंचे मकाम पर ले जाया जाए...

आज की इस मुलाकात में चर्चा हुई कि किस तरह ब्लॉगर्स सामूहिक प्रयास से आर्थिक मॉडल खड़ा कर सकते हैं...अब बड़े बड़े मल्टीनेशनल प्लेटफॉर्म्स की हिन्दी समेत तमाम भारतीय भाषाओं के कंटेंट पर नज़र है...अंग्रेजी उनके लिए अब सेचुरेशन लेवल पर आ गई है...इसलिए उन्हें भारत में सारी संभावनाएं क्षेत्रीय भाषाओं में ही दिखाई दे रही हैं...इसलिए ब्लॉगर्स को अब कंटेंट को लेकर बहुत सजग हो जाना चाहिए कि उसे कैसे ज़्यादा से ज़्यादा पाठक मिलें...अगर 100-200 ब्लॉगर्स में ही नेटवर्किंग तक हम अपना दायरा सीमित रखेंगे तो बात नहीं बनने वाली...हम आपस में ही टिप्पणियां देते-लेते हुए ही खुश ना हों...हमें अपना पाठक वर्ग बढ़ाते हुए डिजिटल प्रेसेंस की आवश्यकताओँ जैसे SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन), Key Words, SMO (सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन) के बारे में भी बुनियादी जानकारी रखनी होगी...जब आपके पास पाठक वर्ग बनने लगेगा तो जिन प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट की जरूरत है वो आपको अपने साथ जोड़ना पसंद करेंगे...जाहिर है इससे आपके लिए आर्थिक लाभ की भी अच्छी संभावनाएं बनेंगी...आपकी कोशिश यही होनी चाहिए कि कैसे अच्छे से अच्छा कंटेंट देकर अपने पाठक बढ़ाते जाएं...

इसके अलावा आज की बैठक में हिंदी ब्लॉगिंग के लिए चिट्ठा जगत और ब्लॉगवाणी जैसे मज़बूत एग्रीगेटर दोबारा खड़े करने की आवश्यकता जताई गई...ऐसा ठिकाना जहां सभी को हर पुराने नए ब्लॉगर्स की ताजा पोस्ट आते ही उसकी जानकारी मिल जाए...एग्रीगेटर कोई भी हो उसे अच्छी तरह चलाने के लिए हर साल कुछ न्यूनतम खर्च आता है...इसकी भरपाई एग्रीगेटर चलाने वाला अपनी जेब से ही करता रहे तो ये भी सही नहीं है....अब सही मायने में एग्रीगेटर हमारीवाणी (शाहनवाज़) और ब्लॉग सेतु (केवल राम) ही बचे हैं...इन्हें मज़बूती के साथ चलाना है तो 100 से 500 रुपए तक सालाना अंशदान हर ब्लॉगर आसानी से कर सकता है...इस बारे में शाहनवाज़ और केवल राम को साझा प्रस्ताव तैयार कर मेल के जरिए सभी ब्लॉगर्स को भेजना चाहिए...

एक और बात पर चर्चा हुई...अख़बार और वेबपोर्ट्ल्स को आजकल कंटेंट की आवश्यकता होती है तो उन्हें ब्लॉगर्स से बढ़िया मुफ्त का माल और कहां मिलता है...यहां आपको एक बात समझनी चाहिए कि कोई आपकी सामग्री इस्तेमाल करता है तो आप पर एहसान नहीं करता...ये आपकी बौद्धिक संपदा है, जिसे किसी को भी आपकी अनुमति के बिना उठा लेने का अधिकार नहीं है...आप सिर्फ अपना नाम देखकर और अखबार में छपे हैं ये सोचकर ही खुश मत हो जाया करें...इसकी कीमत भी वसूल करें...अखबार जब किसी का लेख छापता है तो उसे आर्थिक भुगतान करता है या नहीं...आखिर वो चैरिटी के लिए तो काम कर नहीं रहे...वो प्रोफेशनली पैसा कमा रहे हैं तो फिर उन्हें ब्लॉगर्स को भुगतान करने में परेशानी क्यों...इस पर ब्लॉगर्स को मिलकर एक नीति बनानी चाहिए...एकता में शक्ति है, ये ब्लॉगर्स का मूलमंत्र होना चाहिए...

ये तो रही आज की बैठक की बातें...आप सब भी, ब्लॉगिंग को मज़बूत करने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है, इस पर अपनी राय से सभी को अवगत  कराएं...#हिन्दी_ब्लॉगिंग का कारवां अब जो दोबारा शुरू हुआ है उसे रूकने नहीं देना है...

जय हिन्द...जय #हिन्दी_ब्लॉगिंग






मंगलवार, 11 जुलाई 2017

पटौदी-शर्मिला से शुरू हुआ क्रिकेट-बॉलिवुड कनेक्शन...खुशदीप


भारत में और कुछ चले ना चले क्रिकेट और सिनेमा खूब चलते हैं...ब्रैंड एंडोर्समेंट की बात हो तो फिल्म स्टार्स और क्रिकेटर्स से ज्यादा पूछ किसी की नहीं...फिल्म स्टार्स और क्रिकेटर्स के आपसी रिश्ते भी 'म्युचुअल एडमायरिंग सोसाइटी' जैसे है...क्रिकेटर्स और हीरोइन्स के अफेयर के कई किस्से सामने आ चुके हैं...

फिल्म स्टार्स में इक्का दुक्का ही ऐसे होंगे जिन्हें प्रोफेशनल क्रिकेट खेलने का अनुभव होगा...लेकिन आजकल जानेमाने क्रिकेटर्स जरूर एक्टिंग में भी हुनर दिखाते नजर आते हैं बेशक ये एड फिल्मस के लिए ही हो...मैदान में जहां वो चौक्के-छक्के मारते नजर आते हैं वहीं स्टूडियोज में डॉयलॉग्स भी बखूबी बोलते नजर आते हैं. मार्केटिंग का जमाना है इसलिए क्रिकेटर्स अपनी ब्रैंड वैल्यू को भुनाना भी जान गए हैं. ये तो है आज की बात...बीते जमाने में कई क्रिकेटर्स ने सीधे बड़े पर्दे पर आ कर एक्टिंग में भी किस्मत आजमानी चाही...ये बात अलग है कि ये सारे क्रिकेटर्स 'वन फिल्म वंडर' ही बन कर रह गए...इन क्रिकेटर्स की कहानी से रू-ब-रू होने से पहले एक दिलचस्प वाकया...

फोटो सौजन्य : क्रिकेटहाईलाइट्स डॉट कॉम 

साठ के दशक में डैशिंग और हैंडसम कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का जादू सभी के सिर चढ़ कर बोलता था...आक्रामक कप्तानी हो या बैटिंग, कवर पर चीते जैसी फील्डिंग, नवाब पटौदी की हर अदा निराली थी...1961 में 20 साल की उम्र में टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले पटौदी 1962 में 21 साल 77 दिन की उम्र में वो भारतीय टीम के कप्तान बन गए...दुनिया में सबसे कम उम्र में कप्तान बनने का रिकॉर्ड पटौदी के नाम 42 साल तक कायम रहा...भारत में आज भी सबसे कम उम्र में कप्तान बनने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है... 

पटौदी के टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण के तीन साल बाद बॉलिवुड में बंगाल की बाला शर्मिला टैगोर ने 'कश्मीर की कली' बन कर करियर का आगाज किया...पटौदी और शर्मिला की पहली मुलाकात 1965 में एक कॉमन फ्रेंड के घर पर हुई...शर्मिला की खूबसूरती पर पटौदी पहली ही नजर में फिदा हो गए...बताते हैं कि पटौदी ने शर्मिला को इम्प्रैस करने के लिए रेफ्रिजेरेटर जैसा कीमती गिफ्ट भी दिया था...धीरे-धीरे शर्मिला को भी पटौदी पसंद आने लगे...बताया जाता है कि पटौदी मैदान पर जब भी कुछ खास करते थे तो शर्मिला सेट पर मौजूद सभी लोगों को चाय-समोसे की पार्टी देती थीं...लेकिन दोनों के परिवारों को ये रिश्ता पसंद नहीं था...पटौदी खानदान नहीं चाहता था कि फिल्मों में काम करने वाली लड़की दुल्हन बनकर घर आए...वहीं शर्मिला का सभ्रांत परिवार नहीं चाहता था कि उनकी लड़की दूसरे धर्म में शादी करे...लेकिन मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी वाली कहावत पटौदी-शर्मिला के रिश्ते में सही साबित हुई..

आखिर 27 दिसंबर, 1969 को वो दिन भी आया जब शर्मिला नवाब पटौदी से निकाह करने के बाद आयशा सुल्ताना बन गईं...रील लाइफ में उन्होंने शर्मिला टैगोर नाम से ही काम करना जारी रखा...पटौदी और शर्मिला की शादी के बाद कयास लगाए जाते थे कि ये जोड़ी ज्यादा दिन तक साथ नहीं रह पाएगी...ये बात अलग है कि 42 साल तक दोनों का शानदार साथ रहा...ये साथ 22 सितंबर 2011 को 70 साल की उम्र में नवाब पटौदी के इंतकाल के साथ टूटा...

यहां ये भी गौर करने लायक है कि मंसूर अली खान पटौदी के पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी भी क्रिकेटर थे. उनके नाम इंग्लैंड और भारत, दोनों देशों की टीमों से टेस्ट खेलने की उपलब्धि दर्ज है...हालांकि पटौदी खानदान में क्रिकेट की विरासत मंसूर अली खान पटौदी तक ही सीमित होकर रह गई लगती है...पटौदी और शर्मिला की तीन संतान हैं- सैफ अली खान, सबा अली खान और सोहा अली खान...

सैफ और सोहा ने मां शर्मिला के नक्शे कदम पर चलते हुए एक्टिंग को अपनाया. वहीं सबा ने जूलरी डिजाइनिंग को करियर बनाया. सैफ अली खान की पहली पत्नी अमृता सिंह से दो संतान हैं- बेटी सारा अली खान और बेटा इब्राहिम अली खान...सारा अली खान बॉलिवुड में आगाज करने को तैयार हैं वहीं 16 साल के इब्राहिम अली खान की क्रिकेट को करियर बनाने में दिलचस्पी नजर नहीं आती...सैफ अली खान की दूसरी पत्नी करीना कपूर से एक संतान है तैमूर अली खान...तैमूर का जन्म 20 दिसंबर 2016 को लंदन में हुआ...अभी ये अंदाज लगाना मुश्किल है कि तैमूर की बड़े होकर दादा-पड़दादा की तरह क्रिकेट में दिलचस्पी जगती है या नहीं... 

मंसूर अली खान पटौदी-शर्मिला टैगोर के बाद क्रिकेटर-फिल्म स्टार जोड़ी के सिलसिले को पाकिस्तान के पूर्व ओपनर मोहसिन खान ने भारत में अपने जमाने की मशहूर हीरोइन रही रीना रॉय से शादी कर आगे बढ़ाया...1 अप्रैल 1983 को हुई ये शादी ज्यादा साल तक नहीं चल सकी...

क्रिकेट और ग्लैमर वर्ल्ड के रिश्ते में अगले नाम जुड़े स्टाइलिश बैट्समैन अजहरूद्दीन और संगीता बिजलानी के...अजहरूद्दीन ने पहली पत्नी नोरीन को तलाक देकर 1996 में संगीता बिजलानी से शादी की...हालांकि बाद में इन दोनों की राहें भी अलग हो गईं...अजहरूद्दीन के ऊपर बनी फिल्म 'अजहर' में इस रिश्ते को भी दिखाया गया था...

हाल के दिनों में क्रिकेटर्स और फिल्म स्टार्स के बीच जोड़ियां बनने का सिलसिला और तेज हुआ है...पहले टर्बनेटर के नाम से मशहूर स्पिनर हरभजन सिंह ने एक्ट्रेस गीता बसरा से शादी की...फिर युवराज सिंह भी हेजल कीच के जीवन साथी बन गए...हाल में टीम इंडिया के सीमर रह चुके जहीर खान ने चक दे फेम एक्ट्रेस सागरिका घाटगे के साथ सगाई की है....इन दिनों भारतीय क्रिकेट की धड़कन माने जाने वाले कप्तान विराट कोहली और फिल्म स्टार अनुष्का शर्मा के अफेयर के चर्चे भी पिछले काफी समय से सुने जा रहे हैं...   

अगली कड़ी में पढ़िएगा वो कौन सा क्रिकेटर है जो सबसे पहले बड़े पर्दे पर हीरो के तौर पर नजर आया...ये क्रिकेटर तो एक फिल्म से आगे नहीं बढ़ सका...लेकिन इस क्रिकेटर के साथ जिस एक्ट्रेस ने अपने करियर का आगाज किया था, उसने आगे चलकर बॉलिवुड में खूब नाम कमाया और अमिताभ बच्चन के साथ भी कई हिट फिल्मों में काम किया...साथ ही और भी ढेर सारे क्रिकेटर्स की कहानी जो बड़े पर्दे पर तो चमके लेकिन सिर्फ एकाध फिल्म में ही...

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

शनिवार, 8 जुलाई 2017

छोरियां अभी तो छोरों से कम ही दिखें...खुशदीप


तारीख- 18 जून 1983

जगह- टर्नब्रिज, वेल्स

ये तारीख और जगह बहुत खास है...या यूं कहिए कि भारत के क्रिकेट की टर्निंग प्वाइंट है ये तारीख...इस दिन एक शख्स ने अकेले दम पर भारतीय क्रिकेट का वो आधार तैयार किया जिसने उस टूर्नामेंट में ना सिर्फ भारत को पहला वर्ल्ड कप दिलाया बल्कि देश में क्रिकेट के सुनहरे काल की बुनियाद रख दी...ये शख्स और कोई नहीं भारत के पूर्व कप्तान कपिल देव हैं...उस तारीख को भारत का मैच जिम्बाब्वे जैसी अपेक्षाकृत नौसिखिया टीम से था...भारत पहले बैटिंग कर रहा था...लेकिन ये क्या एक के बाद एक भारत के दिग्गज बैट्समैन पवेलियन लौटने लगे...17 रन बनते बनते भारत के पाँच विकेट डाउन...गावस्कर 0, श्रीकांत 0, मोहिन्द्र अमरनाथ 5, संदीप पाटिल 1 और यशपाल शर्मा 9 रन बना कर चलते बने...7वें नंबर पर बैटिंग करने कपिल उतरे...तब तक सबने मान लिया था कि भारत गया काम से और वर्ल्ड कप में उसकी चुनौती खत्म...लेकिन कपिल ने हार नहीं मानी...अकेले दम पर लड़ने का फैसला किया...रोजर बिन्नी, मदन लाल और सैयद किरमानी जैसे पुछल्ले बैट्समैन ने कुछ कुछ देर टिके रह कर कपिल का साथ दिया...भारत की पारी खत्म हुई तो स्कोर था 8 विकेट पर 266 रन...इसमें अकेले कपिल का स्कोर था 175 रन...कपिल ने ये रन महज़ 138 गेंद में 16 चौक्कों और 6 छक्कों की मदद से बनाए...फिर भारत ने 235 रन पर जिम्बाब्वे को आल आउट कर मैच 31 रन से जीत लिया...

आज इस मैच को याद कराने का मेरा ख़ास मकसद है...इसमें रोमांच, हीरोइज्म़, सुखद नतीजा वो सभी कुछ था जो  किसी को भी क्रिकेट का मुरीद बना देता...लेकिन अब बताता हूं असली बात...मैं कॉलेज में था और इस मैच की रनिंग कमेंट्री दोस्तों के साथ रेडियो पर सुन रहा था...सांसें रोक देने वाली कपिल की बैटिंग को मैं टीवी पर नहीं देख पाया...मैं क्या दुनिया में कोई भी क्रिकेट प्रेमी इस मैच को टीवी पर नहीं देख सका...ना ही बाद में किसी ने इस मैच की रिकॉर्डिंग को देखा...दरअसल, इस मैच की रिकॉर्डिग हुई ही नहीं थी...उस दिन बीबीसी में हड़ताल की वजह से कोई कैमरामैन मैदान में नहीं पहुंचा...सभी क्रिकेटप्रेमी कपिल के करिश्मे को टीवी पर देखने से वंचित रह गए...मुझे और मेरे दोस्तों को मैच की कमेंट्री रेडियो पर सुनते यही मलाल हो रहा था कि काश टीवी पर इसे देख पाते...गुस्सा भी बहुत आ रहा था...लेकिन भारत मैच जीत गया और बाद में वर्ल्ड कप भी जीता...उस खुमार में सारा गुस्सा काफ़ूर हो गया...

जैसा गुस्सा उस दिन आया, वैसा ही आज स्टार स्पोर्ट्स 2 चैनल पर आया...दरअसल, आज यानि 8 जुलाई को इंग्लैंड के लीसेस्टर में महिला ओडीआई वर्ल्ड कप में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच मैच खेला गया...इस मैच में विशेष तौर पर भारत की कप्तान मिताली राज पर पूरी दुनिया की नजरें थीं...मिताली राज आज के मैच में 41 रन बना लेंती तो दुनिया में वनडे मैचों में 6000 रन पूरे करने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बन जातीं...अफसोस मिताली आज के मैच में ये उपलब्धि हासिल नहीं कर सकीं और साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ मैच में बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट आईं...भारत मैच भी हार गया...मुझे पूरा विश्वास है कि मिताली जल्दी ही ये उपलब्धि हासिल कर, शायद अगले मैच में ही, दुनिया में तिरंगे का मान बढ़ाएंगी...मिताली वैसा ही इतिहास कायम करने में सफल रहेंगी जैसा कि कभी पुरुष क्रिकेट में सुनील गावस्कर और फिर सचिन तेंदुलकर ने बनाया था...(मिताली पर शुक्रवार को मैंने आंकड़ों के साथ पूरी पोस्ट लिखी थी)...



छुट्टी वाले दिन मैं बड़े चाव के साथ आज भारत और साउथ अफ्रीका का मैच देखने बैठा...इसी आस के साथ मिताली को इतिहास बनाते देखूंगा...स्टार स्पोर्ट्स 2 चैनल पर अभी तक महिला वर्ल्ड कप के मैच आते रहे हैं...सोचा कि आज भी मैच आएगा...लेकिन दोपहर बाद मैच शुरू होने के वक्त चैनल लगाया तो जो मैच देखना था वो नदारद...आज कोई 1983 की तरह बीबीसी जैसी हड़ताल भी नहीं थी...फिर क्या वजह ये मैच नहीं दिखाने की...इसके पीछे की वजह है पुरुष प्रधान मानसिकता...जो चैनल के कर्ताधर्ताओं से लेकर मार्केटिंग एजेंट्स तक सभी जगह हावी है...ये मैच इसलिए नहीं दिखाया गया क्योंकि इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका की पुरुष टीमों के बीच लॉर्ड्स पर टेस्ट मैच खेला जा रहा था, जिसे दिखाना इन पुरुष प्रधान सोच वालों के लिए ज़्यादा ज़रूरी था...अरे ये मैच दिखाते तो महिलाओं का मैच भी दिखाते चाहे दूसरे चैनल पर ही सही...ये तो अच्छा है कि इंटरनेटी युग है...इसलिए इंटरनेट के जरिए Hotstar  पर 5 मिनट के विलंबित प्रसारण के साथ भारत और साउथ अफ्रीका महिला वर्ल्ड कप मैच देखने को मिल गया...

अब यहां दिमाग में एक कल्पना कीजिए...मान लीजिए पुरुषों का वर्ल्ड कप हो रहा है...वहीं साथ ही किन्हीं दो देशों में महिला टीमों के बीच टेस्ट मैच हो रहा है...तो क्या कोई टीवी प्रसारक ऐसी ज़ुर्रत करेगा कि पुरुषों के वर्ल्ड कप मैच को ना दिखाकर महिलाओं के टेस्ट मैच को दिखाए...हर्गिज नहीं दिखाएगा जाएगा...क्योंकि दुनिया पुरुष प्रधान सोच और बाज़ारवाद से चलती है...महिलाओं के मैच को टीवी पर दिखाना टीआरपी के नजरिए से फिलहाल बिकाऊ सौदा नहीं है, इसलिए उसे गिराने के फैसले में पलक झपकने का भी वक्त नहीं लिया...

हम अपने देश पर ही आते हैं...ज़रा दिल पर हाथ रख कर बताइए कि जैसे हम क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली आदि को सिर आंखों पर बिठाते हैं, वैसे हमने क्या कभी मिताली राज या बोलिंग लीजेंड झूलन गोस्वामी को मान दिया है...एक ही खेल है...खेल के प्रशासक भी वही हैं, फिर ये भेदभाव क्यों? स्टार पुरुष क्रिकेटर्स पर पैसों की बरसात तो महिला स्टार क्रिकेटर्स पर क्यों नहीं...मिताली राज और झूलन गोस्वामी दोनों की उम्र आज 34 वर्ष है...दोनों ही डेढ़ दशक से भी ज्यादा से भारत की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नुमाइंदगी कर रही हैं...मिताली राज 2004 में ही कप्तान बन गई थीं...इतने लंबे समय तक तो शायद भारतीय पुरुष टीम में कोई भी कप्तान नहीं रहा...महेंद्र सिंह धोनी भी नहीं...

यहां अगर मैं कहूं कि रातों रात भेदभाव खत्म हो जाएगा और महिलाओं से खेलों में बराबरी का व्यवहार होने लगेगा तो ये सिर्फ कोरी कल्पना ही होगी...फिर ये भेदभाव कैसे खत्म होगा...ये तभी होगा जब हम सबसे पहले अपनी मानसिकता बदलेंगे...अधिक से अधिक बेटियां खेल में करियर बनाने के लिए आगे आएं...कोई मिताली-झूलन जी-तोड़ मेहनत कर नाम कमाएं तो उन्हें भी बीसीसीआई, सरकार और प्रायोजकों की तरफ़ से वैसा ही प्रोत्साहन मिले जैसा कि पुरुष स्टार क्रिकेटर्स को मिलता है...ऐसा माहौल बनेगा तो अधिक लड़कियां खेलों की ओर प्रेरित होंगी...क्रिकेट ही क्यों, हर खेल में ही क्यों नहीं...यहां दंगलफिल्म का डॉयलॉग याद आता है, मेडल छोरा लाए या छोरी, मेडल तो मेडल ही होता है, उससे मान तो तिरंगे का ही बढ़ता है...अब दंगल में कोई तो बात होगी जो चीन जैसे खेल प्रधान देश में भी उसका जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है...

भारत में सानिया मिर्जा (टेनिस), साइना नेहवाल, पीवी सिंधू (बैडमिंटन) जैसी कुछ खिलाड़ी अपनी मेहनत से ऊंचे मकाम पर पहुंची लेकिन जहां महिलाओं की टीम स्पर्धाओं का उल्लेख होता है तो उन्हें कवरेज के लिहाज से बोरिंग ही माना जाता है...कवरेज में सबसे ज्यादा भेदभाव होता है...रिसर्च बताती हैं कि स्पोर्ट्स मीडिया आउटलेट्स महिलाओं के गेम की कवरेज को हल्के में लेते हैं...सुस्त कैमरावर्क, कम एक्शन रीप्ले और सब स्टैंडर्ड कमेंट्री...जबकि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विजिबिलिटी ही मैटर करती है...

महिला खेलों को देखने के लिए जितने दर्शक बढ़ेंगे, उतना ही उनसे भेदभाव खत्म होगा...मार्केट फोर्सेज भी मजबूर होंगी...महिला खेलों के लिए अधिक स्पॉन्सर्स आगे आएंगे...उन्हें मेहनताने के तौर पर अच्छी रकम मिलेगी...ब्रैंड इमेजिंग वाली कंपनियां महिला खिलाड़ियों को भी तवज्जो देने लगेंगी...

अभी ये तर्क दिया जाता है कि महिला खेल स्पर्धाओं को अधिक दर्शक नहीं मिलते, इसलिए उन्हें टीवी और मार्केट में ज्यादा भाव नहीं दिया जाता...लड़कियां स्पोर्ट्स को करियर बनाने के लिए ज्यादा आगे आएं...साथ ही स्पॉन्सरशिप्स, कवरेज, खेल संगठनों और आयोजकों में भी पूर्व खिलाड़ी रह चुकी महिलाओं और कुशल महिला प्रशासकों को अधिक जगह मिले तो उनकी सुनी भी जाएगी...अभी तो उनकी भागीदारी ना के बराबर है...इस दिशा में खेल मंत्रालय समेत राज्य सरकारों को भी ध्यान देना होगा...योग्य  महिला खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरी देकर पुरुस्कृत किया जाना चाहिए...उन्हें ये चिंता नहीं होनी चाहिए कि स्पोर्ट्स को करियर बनाने से सम्मानित जिंदगी जी पाएंगी या नहीं...

यहां हम सब को सोच बदलनी होगी...अभी पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान और सीमर वकार यूनुस ने ट्वीट में कहा है कि महिलाओं के वनडे मैचों के लिए ओवर्स की संख्या 50 से घटा कर 30 कर देनी चाहिए...ये खेल को अधिक मनोरजंक और प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगा...कम ओवर होंगे तो तेज गति होगी मतलब ज्यादा दर्शक आएगे...यूनुस के मुताबिक 50 ओवर महिलाओँ के लिए बहुत ज्यादा होते हैं यानि इतने ओवर्स खेलने के लिए जितना स्टैमिना होना चाहिए उतना महिलाओं के पास नहीं होता...वकार यूनुस ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए ये तर्क भी दिया है कि टेनिस में भी तो पुरुषों के लिए मैच में 5 सेट और महिलाओं के लिए सिर्फ 3 सेट ही रखे जाते हैं...यूनुस ये लिखना भी नहीं भूले कि उनके बयान को महिलाओं को लेकर भेदभाव से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए और ना ही उनके मन में कोई दुर्भावना है...

इस सोच के पीछे वकार के अपने तर्क हो सकते हैं लेकिन इसका सटीक जवाब ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेटर एलिसा हीली ने दिया...हीली ने कहा कि महिलाओँ के 50 ओवर के मैच में 530 रन बनना क्या मनोरंजक नहीं है...एक ही  मैच में दो खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया...हीली महिला वर्ल्ड कप में हुए ऑस्ट्रेलिया-श्रीलंका मैच का हवाला दे रही थीं...इस मैच में श्रीलंका की चमारी अट्टापट्टू ने 178 रन की पारी खेली...इसका जवाब ऑस्ट्रेलियाई कप्तान मेग लेनिंग ने 152 रन नाबाद की पारी से अपनी टीम को जिता कर दिया...

आपने सब बातें पढ़ लीं लेकिन अभी सबसे अहम आना बाकी हैं...वो है एक पत्रकार के सवाल में भारतीय महिला टीम की कप्तान मिताली राज का जवाब...दरअसल इस वर्ल्ड कप के लिए भारत से इंग्लैंड रवानगी से पहले बेंगलुरू में मिताली राज से किसी पत्रकार ने ये सवाल पूछ लिया था कि उनका सबसे पसंदीदा पुरुष क्रिकेटर कौन है? इस सवाल का जवाब देने में मिताली ने एक मिनट की भी देर नहीं लगाई...मिताली ने पलटकर कहा कि यही सवाल पुरुष क्रिकेटर्स से क्यों नहीं पूछा जाता कि उनकी पसंदीदा महिला क्रिकेटर कौन सी हैमिताली ने कहा कि मुझसे ये सवाल अक्सर किया जाता है...क्यों मेरा पसंदीदा क्रिकेटर पुरुष ही होना चाहिए, महिला क्रिकेटर क्यों नहीं...

मिताली ने सुलझा हुआ जवाब दिया कि पुरुष क्रिकेटर्स को लेकर कोई दुर्भावना नहीं है...बल्कि पुरुष क्रिकेटर्स ने कुछ मानदंड तय कर रखे हैं जहां तक महिला क्रिकेटर्स को पहुंचना है...हम इसलिए पुरुषों का क्रिकेट देखते हैं कि हमारा स्तर भी उन तक पहुंच जाएं...मिताली ने ये बात मानी कि महिला क्रिकेटर्स को लेकर अब स्थिति में बदलाव आना शुरू हुआ है...इसके लिए बीसीसीआई की कोशिशों की उन्होंने तारीफ भी की...मिताली ने कहा कि पहले महिला क्रिकेट मैचों का टीवी पर प्रसारण नहीं होता था इसलिए उनके बारे में कोई ज्यादा जानता नहीं था...लेकिन बोर्ड ने पिछली दो सीरीज का टीवी प्रसारण किया है...इसके अलावा सोशल मीडिया के आने से भी महिला खिलाड़ियों के हक में आवाज उठने लगी है....

मिताली की आखिरी बात पर ही मेरा जोर है...सोशल मीडिया हमारे हाथ में है...वहां तो हम महिला खिलाड़ियों के हक़ में पुरजोर आवाज़ उठा ही सकते हैं...ऐसा होगा तो खेल के कर्णधारों पर दबाव बढ़ेगा...महिला खिलाड़ियों को अधिक से अधिक मौके, मान-सम्मान मिले, यही हमारी कोशिश होनी चाहिए...यहां सवाल पुरुष खिलाड़ियों को कम कर आंकने का नहीं बराबरी का है...हमारे छोरे कमाल के हैं तो हमारी छोरियां भी किसी से कम हैं के...


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