गुरुवार, 13 अगस्त 2015

आज़ादी के जश्न से पहले यह विडियो ज़रूर देखें...खुशदीप



15  अगस्त आ गया है...आज़ादी का दिन...हम खुशकिस्मत हैं कि आज़ाद देश में जन्मे और जीवन में जो बनना चाहा, उसके लिए हमें अपनी योग्यता और क्षमता के अनुसार अवसर मिले...समाज में बिना किसी चुनौती के...बिना कोई तिरस्कार सहे...लेकिन सभी इतने भाग्यशाली नहीं हैं...आपने कभी इसी देश में रहने वाले उस समुदाय के बारे में सोचा है, जिसके लिए हाल तक किसी फॉर्म में जेंडर का कॉलम भरना ही टेढ़ी खीर था...

इसी समुदाय का कोई सदस्य अगर अपनी पसंद का करियर चुनना चाहता है, उसके पास तमाम योग्यता और क्षमता के साथ आगे बढ़ने का जज़्बा भी है लेकिन क्या उसके लिए रास्ता उतना ही आसान होता है जितना कि हम तथाकथित सामान्य लोगों के लिए...हम खुद को सामान्य कैसे कह सकते हैं अगर हम इस समुदाय (हिजड़ा या ट्रांसजेंडर्स) को खुशी के मौकों पर नाचने-गाने के अलावा कहीं और देख ही नहीं सकते...

भला हो सुप्रीम कोर्ट का जिसने 14 फरवरी 2014 को ऐतिहासिक फैसले में इस समुदाय को थर्ड जेंडर की पहचान दी...यहीं नहीं सरकार से इन्हें सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े समुदाय के तौर पर नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने के लिए भी कहा। लेकिन सिर्फ कोर्ट के फैसले पर ही बात खत्म नहीं हो जाती...इस समुदाय को पूरा न्याय तब मिलेगा जब समाज भी इनके लिए अपनी सोच को बदले...इस बात को समझे कि इस समुदाय को भी सम्मान के साथ रहने का अधिकार है जितना कि मुझे और आपको...मेरा यही मानना है कि नौकरियों और शिक्षा में अगर किसी को वास्तव में ही आरक्षण की ज़रूरत है तो इसी समुदाय को है।

यथार्थ पिक्चर्स ने 12 अगस्त को यू-ट्यूब पर एक विडियो अपलोड किया है...एक बार इस विडियो को देखिए...यकीन मानिए और कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं रह जाएगी....

(यू ट्यूव विडियो...आभार यथार्थ पिक्चर्स)

संसद की 'दीवार'...खुशदीप



संसद में जो कुछ आज हुआ, पहले कांग्रेस के सवाल और फिर सुषमा स्वराज के जवाब, उन्हें सुनकर फिल्म दीवार और उसमें लिखे सलीम-जावेद के डॉयलॉग बहुत याद आए....





संसद की दीवार

हमें एक ललित लिस्ट मिली है, जिसमें उन लोगों के नाम हैं जो भगौड़ों की मदद करते है, उनसे मदद लेते हैं, और भी ऐसे कई काम जो कानून की नजर में गुनाह हैंऔर उस लिस्ट में एक नाम तुम्हारा भी है ...लो इस पर साइन कर दो….

क्या है ये?

इसमे लिखा है कि तुम अपने सारे गुनाह कबूल करने को तैयार हो... तुम सब बताओगे कि कब किस भगौड़े की मदद की, कब किस भगौड़े या उसके करीबियों से मदद ली...परिवार के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए कब क्या क्या किया...सब सच बताओगे...फिर इस इस्तीफ़े पर साइन कर दो....


मैं इस पर साइन करने के लिए तैयार हूं...लेकिन अकेले नहीं...जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने अपने एक करीबी को अंकल सैम की जेल से छुड़ाने के लिए भोपाल गैस बॉम्बर को देश से भागने दिया...जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने दलाली के तोपची को छुपने और देश से भागने में मदद की...इसके बाद मामा बॉय तुम जिस कागज पर कहोगे मैं साइन करने को तैयार हूं...

दूसरो के पाप गिनाने से तुम्हारे अपने पाप कम नहीं होगें...ये सच्चाई नहीं बदल सकती कि तुम भगौड़े की मदद के ज़िम्मेदार हो...और जब तक ये दीवार बीच में हैं हम एक छत के नीचे नहीं रह सकते...संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष एक साथ नहीं रह सकते...हम यहां से जा रहे हैं...चलिए नेताजी अपनी साइकिल लेकर हमारे साथ बाहर चलिए...

तुम्हें जाना हो तो जाओ नेताजी नहीं जाएंगे...

हमने कहा नेताजी हमारे साथ चलो...

नेताजी दबी आवाज़ में पहली बार बोलते हैं...नेताजी यहीं रुकेंगे...

नहीं नेताजी तुम ऐसा नहीं कर सकते...हम जानते हैं नेताजी साम्प्रदायिकता का कितना विरोध करते हैं...हम जानते हैं नेताजी विपक्ष की एकता के लिए कितना जोर देते हैं...नेताजी यहां नहीं रुक सकते...

नेताजी....मामा बॉय तुम भूल रहे हो कि सीबीआई का तोता अब तुम्हारे कब्ज़े में नहीं रहा...सीबीआई का तोता अब इनके पिंजड़े में है...इसलिए नेताजी यहीं रुकेंगे...तुम्हे जाना है तो जाओ...