सोमवार, 11 मई 2015

घण्टा न्यूज़ : अम्मा के भक्त ने की खुदकुशी की कोशिश...खुशदीप


अम्मा के भक्त भावविभोर हैं। करीब दो दशक तक बेचारी अम्मा को नाहक परेशान किया गया। कर्नाटक हाईकोर्ट के जज को 10 सेकंड नहीं लगे अम्मा को ‘दोषी नहीं’ क़रार देने में।  तमिलनाडु में कहीं पटाख़े छोड़े जा रहे हैं। कोई अम्मा के पोस्टर को दूध से नहला रहा है। अगर फ़ैसला अम्मा के हक़ में नहीं आता तो आंसुओं का ऐसा सैलाब उमड़ता कि कावेरी के पानी लिए कर्नाटक से तमिलनाडु का बरसों से चल रहा विवाद एक झटके में ख़त्म हो जाता। लेकिन जहां तमिलनाडु में जश्न का माहौल है, वहीं बेंगलुरू जेल में अम्मा के मुरीद कैदी जयाभक्त ने खुदकुशी की कोशिश भी की।

आप कहेंगे ये भक्त कैसा है, जो खुदकुशी को खुशकुशी मानते हुए जान देने पर तुल गया। जी नहीं, ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस कैदी ने खुशी में नहीं वियोग में ही ये अतिवादी कदम  उठाने का फ़ैसला किया।




चलिए अब ज़्यादा नहीं उलझाते। बता ही देते हैं कि माज़रा क्या है। दरअसल जयाभक्त उसी जेल में था जहां अम्मा ने पिछले साल 27 सितंबर से 18 अक्तूबर तक तीन हफ्ते बिताए थे। अम्मा की ज़मानत पर तब रिहाई होने पर जयाभक्त बहुत परेशान हुआ था। उसे ये ग़म ही खाए जा रहा था कि वो अब जेल में रोज़ अम्मा के दर्शन नहीं कर पाएगा। तब किसी तरह जयाभक्त को समझाया गया कि अम्मा सिर्फ ज़मानत पर रिहा हुई हैं। ऊपरी अदालत ने अम्मा को कसूरवार माना तो फिर जेल आ सकती हैं। बेचारे जयाभक्त ने किसी तरह कलेजे पर पत्थर रखकर खुद को मनाया।

वो एक-एक दिन का इंतज़ार करने लगा कि कब अम्मा जेल में वापस आएंगी और वो हर दिन उनके दर्शन कर अपने जीवन को कृतार्थ  कर सकेगा। लेकिन सोमवार को जैसे ही अम्मा को हाईकोर्ट ने बरी किया तो जयाभक्त का रहा-सहा हौसला जवाब दे गया। अम्मा के दोबारा जेल आने की कोई संभावना ना देखकर जयाभक्त दहाड़ें मार-मार कर रोने लगा। इसी संताप ने जयाभक्त को मानसिक अवसाद की स्थिति में ला दिया।

जयाभक्त को जब अम्मा के बरी होने की जानकारी मिली, उस वक्त वो अपनी बैरक से बाहर था। ख़बर मिलते ही वो बदहवासी में इधर से उधर दौड़ने लगा। अंतत: उसने आठ पायदान वाली सीढ़ी की ऊँचाई से छलांग लगा दी। अम्मा के प्रताप से जयाभक्त की जान बच गई। उसे पैर में ‘मामूली फ्रैक्चर’ ही हुआ। जयाभक्त की अवस्था के बारे में ये सारी बातें तमिलनाडु के निवर्तमान मुख्यमंत्री जब पत्रकारों को बता रहे थे तो उनकी आंखों से गंगा-जमुना की धारा बहते हुए साफ़ देखी जा सकती थी।

हालांकि जेल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रथम द़ृष्टया ये दुर्घटना का मामला लगता है। इन सूत्रों के मुताबिक सीढ़ियों पर जयाभक्त के शारीरिक संतुलन(मानसिक नहीं) खोने की वजह से ये हादसा हुआ।

जेल की सुरक्षा से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि घटना के करीब दो घंटे बाद बाहर से आए कुछ लोग जयाभक्त से मिले थे। उसी के बाद एक सुइसाइड नोट सामने आया। इस नोट में जयाभक्त ने साफ़ किया था कि उसने क्यों आठ सीढ़ियों वाली पाँच फीट की जानलेवा ऊँचाई से कूद कर जान देने की कोशिश की। हालांकि अम्मा की पार्टी के नेताओं ने जयाभक्त को आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी किसी बात से साफ़ इनकार किया। इन नेताओं के मुताबिक जयाभक्त जैसे अम्मा के हज़ारों भक्त हैं, जो उनके लिए कभी भी जान देने को तैयार रहते हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने ‘घंटा न्यूज़’ को बताया कि अम्मा के भक्त जेल में इसलिए जान दे रहे हैं कि वो उन्हें हमेशा अपनी आंखों के सामने रखना चाहते हैं। यही जन-जन के नेता की पहचान है। लोग अम्मा को भगवान की तरह सर्वत्र देखना चाहते हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक वो जेल में अम्मा की एक प्रतिमा स्थापित करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे कि वहां फिर खुदकुशी की कोशिश जैसी नौबत ना आए।

(डिस्क्लेमर- व्यक्तिपूजा की इस ख़बर के 100 फ़ीसदी झूठ होने की 'घंटा न्यूज़' गारंटी देता है, ये प्रयास आपको शायद न्यूज़ रूपी उस कचरे से ज़्यादा अच्छा लगे, जहां सच को तोड़मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की जाती है।)

1 टिप्पणी:

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