रविवार, 26 जनवरी 2014

#YWMA आइडिया दो, दस लाख जीतो...खुशदीप

 24  जनवरी की शाम कई मायनों में बड़ी खुशगवार गुज़री...इंडीब्लॉगर्स की ओर से नोकिया-ल्यूमिया के आयोजन में शिरकत का न्योता था...इंडीब्लॉगर्स की दिल्ली में पहले हुई ब्लॉगर्स मीट में हिस्सा ले चुका था...इसलिए आश्वस्त था कि आयोजन शानदार ही होगा...दूसरा कारण ये भी था कि इंडीब्लॉगर्स ने पिछले साल देशनामा को पॉलिटिकल न्यूज़ की कैटेगरी में अवॉर्ड से नवाज़ा था...

एक ओर सबसे बड़ी बात कि मेरा बेटा सृजन जो यदा-कदा अंग्रेज़ी में ब्लॉग लिखता है (www.enlightedmind.blogspot.in), उसने भी इस आयोजन में शिरकत लेने की इच्छा जताई..सृजन दिल्ली के सेंट स्टीफंस, कालेज में बीएससी ऑनर्स (फिजिक्स) के सेकंड इयर में है, उसे पढ़ाई से ही फुर्सत नहीं मिलती...लेकिन इस कार्यक्रम में सृजन के पंसदीदा टेक गुरु राजीव मखनी आ रहे थे, इसलिए वो इसमें हिस्सा लेना चाहता था...ख़ैर हम बाप-बेटे की जोड़ी ने कार्यक्रम में भागीदारी के लिए इंडीब्लॉगर्स में रजिस्ट्रेशन करा दिया...मैंने सतीश सक्सेना जी और शाहनवाज़ भाई से भी रजिस्ट्रेशन के लिए फोन पर कहा था, लेकिन वो दोनों ही शायद अपनी व्यस्तता के चलते ऐसा नहीं कर पाए...



कार्यक्रम दिल्ली के ओबरॉय होटल में शाम को सात बजे शुरू होना था...लेकिन मैं और सृजन वहां करीब साढ़े सात बजे पहुंचे...तब तक ओबरॉय का बॉल रुम खचाखच भर चुका था...इंडीब्लॉगर्स का करीब साढ़े तीन सौ ब्लॉगर्स को न्योता था लेकिन हॉल में इससे कहीं ज़्यादा लोग नज़र आ रहे थे...किसी तरह हॉल में सबसे पीछे हमने भी अपने बैठने लायक दो सीट ढूंढ ली...

मंच पर एंकरिंग की ज़िम्मेदारी राजीव मखनी ने संभाल रखी थी...उनके साथ भोली सूरत वाले इंटरनेशनल फेम शेफ़ विकास खन्ना और उद्यमी-एंजेल इन्वेस्टर विशाल गोंदाल भी मंच पर मौजूद थे...(ये एंजेल इन्वेस्टर क्या होता है, कोई मुझे बताएगा क्या भाई)...


हम आधा घंटा देर से पहुंचे थे, पहले क्या हो गया था पता नहीं, लेकिन उस वक्त राजीव नोकिया के यूअर विश इज़ माई एप सीज़न 2’ के बारे में बता रहे थे...यही समझ आया कि आप को अपनी इच्छा के अनुसार मोबाइल एप्लीकेशन (एप) के लिए आइडिया बताना है...अगर आप का आइडिया पंसद आ गया तो समझो कि आप की बस पौं बारह है...

कार्यक्रम में आगे क्या हुआ, इससे पहले आप को ये बता दूं कि नोकिया- यूअर विश इज़ माई एपका आयोजन पिछले साल भी हुआ था...भारत समेत दुनिया के इस पहले एप रियल्टी टीवी शो के लिए करीब 38 हज़ार आइडिया आयोजकों को मिले थे, इस बार सीज़न 2 के लिए ये लक्ष्य करीब 50 हज़ार आइडिया जुटाने का है...इस हंट को इस बार करने वाले जज़ेस में राजीव मखनी, विकास खन्ना और विशाल गोंदाल के अलावा नौकरी डॉट कॉम के एक्जेक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट संजीव भीखचंदानी और एक्ट्रेस कल्की केकला (चौंकिए मत, इस नाम का रहस्य भी आगे खोलता हूं)...

सीज़न 2 के लिए पहले तीस आइडिया शार्ट लिस्ट किए जाएंगे...मार्च के मध्य में इन आइडिया पर आधारित नौ कड़ियों वाला रियल्टी शो एनडीटीवी प्राइम चैनल पर प्रसारित होगा...विजेता को दस लाख रुपये और दो उप-विजेताओं को क्रमशपांच लाख और दो लाख रुपये की राशि इनाम में दी जाएगी...इसके अलावा तीन और भाग्यशाली लोगों को नोकिया-ल्यूमिया 1520 मोबाइल दिया जाएगा...

इंटरनेशनल आडियंस से आइडिया आमंत्रित करने के साथ ही शो  को देश भर में भागीदारी के लिए युवाओं के पास ले जाया जाएगा...फरवरी में इसके लिए दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर के कॉलेजों में फेस्टिवल होंगे...इन फेस्टिवल के ज़रिए तीन लोगों को वाइल्ड कॉर्ड के ज़रिए अंतिम तीस कंटेस्टेंट्स में जगह मिलेगी...

इसके अलावा 17 से 21 फरवरी तक सोशल मीडिया वीक का आयोजन बैंगलोर, बार्सिलोना, कोपेनहेगन, हैम्बर्ग, लागोस, मिलान, न्यूयॉर्क और टोक्यो में होगा...चार हज़ार टॉप आइडिया को नोकिया DVLUP में प्रकाशित किया जाएगा...इस पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य विंडोज़ फोन स्टोर के लिए एप्स विकसित करना है...आप इच्छुक हैं तो आप भी अपने फेसबुक वॉल पर या ट्विटर हैंडलर पर एप के लिए आइडिया दे सकते हैं, इसके लिए आपको आइडिया से पहले बस #YWMA टाइप करना होगा...नोकिया फिर खुद ही आपको ट्रैक कर आपकी भागीदारी सुनिश्चित कर देगा...

चलिए ये तो था कार्यक्रम का उद्देश्य...अब आपको बताता हूं कि वहां हुआ क्या-क्या...जैसा कि पहले ही बता चुका हूं कि जब हम पहुंचे तो मंच पर राजीव मखनी, विकास खन्ना और विशाल गोंदाल मौजूद थे...

राजीव बता रहे थे कि आइडिया देते वक्त लोगों की वाइल्ड इमेजिनेशन कहां-कहां तक जा सकती है...जैसे कि पिछले साल एप्स के लिए मिले आइडियाज़ में एक सज्जन का कहना था कि ऐसा एप विकसित होना चाहिए, जिससे कि कुत्ते, बिल्ली, कीड़े-मकोड़ों की आवाज़ को पहले वो इनसानों के समझने लायक भाषा में बदल दे और फिर इनसान की भाषा को इसी तरह कुत्ते, बिल्ली और कीड़े-मकोड़ों के पास पहुंचा दे...

राजीव के मुताबिक एक आइडिया पर हमेशा कूल रहने वाले मास्टर शेफ विकास खन्ना भी बहुत भड़क गए थे...ये आइडिया था कि किसी भी डिश की फोटो को देखकर मोबाइल एप के ज़रिए उसकी पूरी रेसिपी सामने आ जाए...विकास का कहना था कि एक रेसिपी को बनाने में शेफ को ना जाने कितने महीनों तक मशक्कत करनी पड़ती है और ये जनाब सिर्फ फोटो के ज़रिए रेसिपी जानना चाहते थे...

कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले ब्लॉगर्स से भी एट रेंडम स्टेज पर बुलाकर आइडिया पूछे जा रहे थे...एक ऐसा किशोर भी स्टेज पर आया जिसका ब्लॉग LOVE पर ही आधारित था...इस किशोर के लिए मैंने राजीव मखनी को चिट पर लिख कर सुझाव दिया कि इसे मटुकनाथ ऑफ ब्लॉगिंगका टाइटल दिया जाना चाहिए...और लव पर कोई एप विकसित होता है तो उसे भी पटना के प्रोफेसर (लवगुरु) मटुकनाथ को ही समर्पित करना चाहिए...

मंच से साथ ही सवाल पूछ कर नोकिया की ओर से इनाम भी बांटे जा रहे थे...जैसे विकास खन्ना ने सवाल पूछा कि घर के मक्खन का रंग सफेद लेकिन अमूल मक्खन का पीला क्यों होता है...जो ट्विटर या फेसबुक पर सबसे पहले जवाब देता, उसे ही इनाम मिलता...एक ब्लॉगर समरदीप सिंह ने जवाब दिया...YELLOW…इस पर विकास ने चुटकी ली कि तू दिमाग में मुझसे भी बड़ा है...खैर हॉल में से एक आवाज़ आई कि ANNATO की वजह से अमूल मक्खन पीला होता है...विकास ने फिर एक्सप्लेन किया कि ANNATO पीले रंग का बड़े अच्छे फ्लेवर वाला मसाला होता है...ये सवाल भी पूछा गया कि एक्ट्रेस KALKI KOECHLIN के नाम का सही उच्चारण क्या होता है...कोई कोएचलिन तो कोई कोएशलिन बता रहा था...इस पर राजीव मखनी ने बताया कि कल्की ने उन्हें खुद अपने नाम का सही उच्चारण बताया है- कल्की केकला (चौंके ना आप भी सुनकर, यही सही है)

मुज़फ्फरनगर से आए एक बच्चे ने एप के लिए आइडिया दिया कि जो लोग डॉयबिटीज की वजह से रसगुल्ला नहीं खा सकते, उनके लिए एप दबाते ही रसगुल्ले की पूरी खुशबू महसूस होनी चाहिए...इन सबके बीच कुछ बहुत अच्छे आइडियाज़ भी सामने आए जैसे कि अंग दान (ORGAN DONATION)  के लिए हमें पता नहीं होता कि कहां जाकर ऐसा किया जा सकता है...इसके लिए एप के जरिए आपके शहर या नजदीकी अंगदान केंद्रों की लिस्ट उपलब्ध कराई जा सकती है...

एक आइडिया ये भी था कि मूक-बधिर की साइन-लैंग्वेज़ को देखकर उसे भाषा में बदलने वाला एप विकसित होना चाहिए...एक ओर बड़ा अच्छा आइडिया सामने आया कि महिलाओं को घर से बाहर होने पर लघु-शंका के लिए वॉशरूम्स (लू) ढ़ूंढने में बड़ी परेशानी होती है...इसके लिए लू-लोकेटर के नाम से ऐसा एप विकसित होना चाहिए, जिससे आप किसी भी शहर में हों, वहां आपको पास में मौजूद सार्वजनिक वॉशरूम्स (लू) की जानकारी मिल जाए...

कार्यक्रम की एक और खास बात थी कि विकास खन्ना, राजीव मखनी और विशाल सभी लोगों से बहुत आत्मीयता के साथ मिल रहे थे....लग ही नहीं रहा था कि विकास खन्ना इतनी बड़ी सेलेब्रिटी है...इस कार्यक्रम में विकास की माताजी भी आई हुई थीं...मोस्ट ऐलिजेबल बैचलर विकास से मैंने पूछा कि अभी आपको आपकी काजोल मिली या नहीं...इस पर विकास ने पंजाबी में उत्तर दिया कि मैंने तो इंटरव्यू में सिमरन जैसी लड़की को जीवनसाथी बनाने की इच्छा व्यक्त की थी...लोगों ने काजोल वैसे ही बना दिया...

ऐसे ही हंसी-मजाक के पलों के साथ खाने का वक्त आ गया...खाना शानदार था...जो लोग बोल-बोल कर थक गए थे, उनके लिए गला तर करने का भी इंतज़ाम था...चलिए पूरा आंखो देखा हाल सुना दिया...अब दस लाख रुपये जीतने के लिए एप्स का आइडिया सुझाने के लिए भिड़ाइए अपना दिमाग...वाइल्ड इमेजिनेशन वाले आइडिया यहां टिप्पणियों में भी व्यक्त कीजिए तो पोस्ट और मज़ेदार हो जाएगी...

जैसे कि यहां मैं एप के लिए अपना आइडिया देता हूं...

ऐसा एप बनना चाहिए जिसे दबाते ही ऐसी फ्रीक्वेंसी निकलें जो अर्णब गोस्वामी की फ्रीक्वेंसी से मैच कर उन्हें तत्काल चुप करा दें....


(नोट- आपका ये ब्लॉग देशनामा ब्लॉग अड्डा अवार्डस के लिए शार्टलिस्ट हुआ है...अगर आप इसे वोट देना चाहें तो इस लिंक पर जाकर फेसबुक लाइक या ट्वीट के ज़रिए दे सकते हैं)



बुधवार, 22 जनवरी 2014

‘आप’ की अंधी गली में उलझा आम आदमी...


'आप' की अंधी गली में उलझा आम आदमी...

बड़े बोल बोलना आसान, अमल करके दिखाना बेहद मुश्किल...

-सुधीर एस. रावल

(सुधीर जी के इस लेख ने मुझे बहुत प्रभावित किया, इसलिए अपने ब्लॉग पर उनकी आज्ञा से इसे प्रकाशित कर रहा हूं)

दो दिन तक दिल्ली की सरकार को सड़क पर ला कर रख देने लाने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आखिर कदम वापस खींच लिए. उन्होंने जीत का दावा करते हुए अपना धरना मंगलवार को खत्म कर दिया. दिल्ली के दो एसएचओ को छुट्टी पर भेजे जाने से ही केजरीवाल को संतुष्ट हो जाना था तो बड़ा सवाल ये ही कि दिल्ली को दो दिन तक उन्होंने बंधक क्यों बनाए रखा? दिल्ली के लोगों को ये कहने को मजबूर क्यों कर दिया कि ये आम आदमी पार्टी नहीं आम आदमी प्रॉब्लम है.



राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के बड़े-बड़े वादों के साथ केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में 28 सीटें बेशक जीती थीं लेकिन सरकार बनाने के लिए बहुमत से वो फिर भी दूर थी. सरकार बनाने के लिए आप ने उसी कांग्रेस से समर्थन लिया, जिससे किसी तरह का तालमेल ना करने के लिए केजरीवाल अपने बच्चों की कसम तक खाने से पीछे नहीं हटते थे.

जनादेश की इच्छा के विपरीत बेमेल गठबंधन के ज़रिए बनी आप की सरकार ने एक महीने में जिस तरह का आचरण दिखाया है, वो अपने आप में दिल्ली के साथ देश के लोगों को बेचैन करने वाला है. सवाल ये है कि केजरीवाल और उनके सहयोगी आखिर चाहते क्या हैं? क्या चुनावी वर्ष में वो पूरे देश में वैसी ही अराजकता फैलाना चाहते हैं, जिसका परिचय उन्होंने दिल्ली में पिछले दो दिन में दिया, वो भी ऐसे वक्त जब देश गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रहा था.

ये नहीं भूलना चाहिए कि केजरीवाल अपने दलबदल के साथ जिस रेल मंत्रालय के सामने धरना दे रहे थे, वहां से राजपथ साथ ही सटा हुआ है. इसी राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड के अलावा इसकी पूर्व ड्रेस रिहर्सल भी की जाती है. ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों के वहां पहुंचने से हज़ारों करोड़ों रुपये के रक्षा उपकरणों की सुरक्षा को खतरा हो सकता था.

सूत्र बताते हैं कि जब सेनाध्यक्ष जनरल विक्रम सिंह ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के कैबिनेट सेक्रेटरी अजित सेठ से गहरी चिंता जताई तभी उपराज्यपाल नजीब जंग के ज़रिए केजरीवाल को कड़ा संदेश दिया गया. केजरीवाल को फेससेविंग के तहत दो एसएचओ को छुट्टी पर भेजना ही पर्याप्त लगा. लेकिन यहां ये सवाल उठ सकता है कि केजरीवाल ने अपने एक मंत्री सोमनाथ भारती की खातिर जिस तरह का आचरण दिखाया, जिस तरह के बयान दिए, क्या ये एक मुख्यमंत्री का राजधर्म है ? क्या दिल्ली पुलिस के जवानों को वर्दी उतार कर धरने पर शामिल होने के लिए कहना, एक चुनी हुई सरकार के मुखिया को शोभा देता है ?

पिछले एक साल में राष्ट्रीय स्तर पर चान   रविंद केजरीवाल और उनकी  मी पार्टीको दिल्ली की जनता ने 4 दिसंबर को हुए चुनाव में अपेक्षा से अधिक समर्थन दिया. साथ ही जताया कि लोगों की आशाएं हमेशा प्रमाणिकता, ईमानदार, सकारात्मक परिवर्तन, शिक्षित एवं साफ सुथरे नेतृत्व के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी होती हैं. लेकिन केजरीवाल, उनके निकट सहयोगियों और आम आदमी पार्टीसे जुड़ी पिछले एक महीने की घटनाओं पर गौर करें, तो कई भ्रम टूटते दिखे. आप के नेताओं के बोल और बर्ताव हैरान करने वाले बेशक ना हो लेकिन आम आदमी के लिए परेशान करने वाले ज़रूर हैं.

ज्यादा दिन नहीं बीते, जब देश ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल को ज़ोर देकर कहते सुना था-  कांग्रेस और भाजपा, दोनों को माफिया चला रहे हैं, हमारे सभी सदस्य ईमानदार एवं चरित्रवान है और किसी के खिलाफ अदालत में कोई आपराधिक मामला नहीं चल रहा. हमने सीडब्ल्यूजी मामले में शीला दीक्षित के विरुद्ध षडयंत्र, धोखाधड़ी एवं भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराध के 370 पन्ने के सबूत पुलिस को सौंपे हैं और अगर एक सप्ताह मे एफआईआर दर्ज नहीं करेंगे तो हम अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे. चुनाव के बाद भाजपा या कांग्रेस का साथ नहीं लेंगे. जनलोकपाल 15 दिन में पेश करेंगे. वित्तीय भ्रष्टाचार का कोई भी मामला सामने आया तो कड़े कदम उठाएंगे...आदि आदि...

अब यही केजरीवाल शीला दीक्षित के लिए कह रहे हैं कि सबूत मिलने पर कार्रवाई करेंगे. उनके चरित्रवान सदस्यों में से देशराज राघव के खिलाफ माफिया होने एवं मिलावट करने जैसी गंभीर शिकायत लोकायुक्त में पेश की गई है. एक सदस्य विशेष रवि के भाई चकित रवि कुछ समय पहले ही अपहरण के केस मे संलिप्त होने की वजह से जेल में है. हरीश अवस्थी जैसे उनके अन्य एक साथी पर भी आपराधिक केसों में संलिप्त होने का आरोप है. बादलपुर विधानसभा सीट के लिए दो करोड़ लेने की बातें हवा में तैर रही हैं. ये आरोप भी नए नही है कि पार्टी के कर्ताधर्ता भारत विरोधी विदेशी तत्वों से भी चंदे के नाम पर मोटा पैसा धड़ल्ले से ले रहे हैं.

ऐसे आरोपों से इतर एक और बड़ा सवाल है...शासन का...एक महीने में जिस तरह का शासन आपने दिल्ली को दिया है, वो अपने आप में साबित करता है कि अनुभवहीन और नीतिविहीन सरकार से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं? जनलोकपाल को 15 दिन में लागू करने के बड़े बोल बेशक बोले गए हों लेकिन सच ये है कि ये क़ानून पास करना उनके अधिकार क्षेत्र में है ही नहीं. भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए जनता को स्टिंग ऑपरेशन करने की बेतुकी सलाह देने वाली इस सरकार में प्रशासन लकवाग्रस्त होने लगा है. जनता की शिकायतों को दूर करने के लिए बिना सोचे समझे.सड़क पर जनता दरबार लगाना, फिर आपाधापी मचने पर ऐसी कवायद से हमेशा के लिए तौबा कर लेना, खुद ही अपना मखौल बनवाना नहीं तो और क्या है?

केजरीवाल का कहना है कि लोकसभा चुनाव के लिए हर क्षेत्र के लोगों से राय लेकर ही किसी का टिकट फाइनल किया जाएगा. इसके लिए हर उम्मीदवार का नाम फाइनल होने से पहले एक निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा. ऐसा है तो फिर कुमार विश्वास का अमेठी से नाम कैसे फाइनल कैसे हो गया. आपकी एक सदस्य टीना शर्मा ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में लोकसभा सीटों के लिए शाजिया इल्मी, आशुतोष, संजय सिंह, दिलीप पांडे और आशीष तलवार के नाम पहले ही फाइनल किए जा चुके हैं, फिर और लोगों से क्यों उम्मीदवारी के लिए बेकार में फॉर्म भराए जा रहे हैं.

आम आदमी पार्टीके ही एक नेता कुमार विश्वास इस तरह से बयान देते हैं जैसे उन पर किसी का अंकुश है ही नहीं. ये वही पांच सितारा कवि हैं जिन पर इमाम हुसैन, सिख धर्मगुरु और भगवान शंकर के लिए आपत्तिपूर्ण टिप्पणियां करने की वजह से धार्मिक भावनाओं को भड़काने का केस दर्ज हो चुका है. पार्टी के एक और नेता प्रशांत भूषण कश्मीर और माओवादियों पर विवादित बयान देकर सुर्खियों में छाए रहे. हालांकि सुविधा के अनुसार केजरीवाल ने इन बयानों को प्रशांत भूषण की निजी राय बता कर पल्ला झाड़ लिया.

आपकी दिल्ली में सरकार बनते ही इसके लक्ष्मीनगर सीट से विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने तेवर जता कर साफ़ कर दिया था कि पार्टी में अंदरखाने बहुत कुछ सुलग रहा है. 15 दिन बाद बिन्नी ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल को झूठों का सरताज करार दिया. बिन्नी का कहना था कि- वचन लेने के बाद भी आम आदमी पार्टी के मंत्री लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूम रहे हैं, पार्टी लोकतांत्रिक पद्धति से नहीं सिर्फ चार-पांच व्यक्तियों के लिए फैसलों पर ही चल रही है. महिला सुरक्षा का आश्वासन दिया गया था लेकिन दिल्ली में एक डेनिश महिला का गैंगरेप होने पर सभी ने चुप्पी साध ली. बिजली एवं पानी के बिल में भी सरकार ने जो कुछ किया वो लीपापोती वाला ही है, केजरीवाल बेईमान, झूठे एवं तानाशाह हैं...वगैरा...वगैरा...

अभी तक आपकी ओर से दूसरे राजनीतिक दलों पर प्रहार किए जाते थे, अब आप खुद सवालों के कटघरे में है. यूपी, उत्तराखंड और हरियाणा में पार्टी के नेताओं को सभाओं के दौरान लोगों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ रहा है. यही नहीं अभी तक मीडिया खास तौर पर न्यूज़ चैनल जिस व्यक्ति को राष्ट्रीय हीरो के तौर पर पेश कर रहे थे,वही अब केजरीवाल और आप पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं.

सोशल मीडिया और यू ट्यूब पर भी केजरीवाल और आप की कथनी और करनी में फर्क और दोहरे मापदंडों को लेकर कई तरह के प्रमाण सामने आ रहे हैं. केजरीवाल और उनकी टीम के विचारों में अस्थिरता और अपरिपक्वता के साथ ही आचरण में अवसरवादिता के आरोप उनके विरोधी खुल कर लगाने लगे हैं. दिल्ली की जनता ने जिस भरोसे और उम्मीदों के साथ आप को वोट दिया था, अब वो खुद को ठगा सा महसूस करने लगी है. उसका सवाल है कि केजरीवाल दिल्ली को सुशासन देने की जगह ये किस तरह की राजनीति कर रहे हैं, जो दिल्ली के लोगों की परेशानियां सुलझाने की बजाए उन्हें और बढ़ा रही है.

न्यूज़ चैनलों को देखकर राजनीतिक राय बनाने वाला मध्यम वर्ग हैरान एवं बेचैन है. कुछ वक्त पहले तक वो जिन्हें निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा का संकल्प लेने वाला नेता समझ कर उनके बोलों को बहुत गंभीरता से ले रहा था, वही अब उनका असल में आचरण देखकर खुद को अंधी गली में खड़ा महसूस कर रहा है. अरविंद केजरीवाल का समर्थन करने वाला बुद्दिजीवी वर्ग भी उलझन में है कि किस तरह इन लोगों का बचाव किया जाए?

इरादा नेक होना, उसको बयां करना अच्छी बात है, लेकिन इससे ज़्यादा अहम होता है उस पर गंभीरता से अमल करके दिखाना. देश में साफसुथरी छवि वाले जनप्रतिनिधि ही चुन कर आएं, ज़्यादा से ज़्यादा अच्छे लोग सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बनें, ये आदर्श स्थिति जितनी जल्दी बने उतना ही भारत और इसके नागरिकों के लिए अच्छा होगा. दिल्ली विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी का राजनीति का सकारात्मक पक्ष भी सामने आया था. नैतिकता और शुचिता का आग्रह उस वक्त इतना बड़ा था कि हॉर्स ट्रेडिंग की बजाय विपक्ष में बैठने की सोच जैसे अभूतपूर्व और सुखद दृश्य भी देखने को मिले थे. लेकिन ये सब कुछ इतनी जल्दी नेपथ्य में चला जाएगा, किसी ने सोचा नहीं था. अब सवाल यही है कि क्या एंटी-पॉलिटिक्स की ये पॉलिटिक्स ज़्यादा से ज़्यादा पॉवर हथियाने का ही क्या एक हथियार है? सवाल गहरा है, लोकसभा चुनाव तक शायद ये धुंधली तस्वीर बिल्कुल साफ़ हो जाए...


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सोमवार, 20 जनवरी 2014

हमी से मुहब्बत, हमी से लड़ाई...खुशदीप


दिल्ली में कड़ाके की ठंड बेशक पड़ रही है लेकिन अरविंद केजरीवाल एंड कंपनी ने यहां का पारा गर्म कर रखा है...दिल्ली पुलिस को लेकर आप और कांग्रेस में ठनी हुई है...लेकिन  इस नूरा कुश्ती में समर्थन छोड़ने या वापस लेने को कोई तैयार नहीं है...



आज से 50 साल पहले एक फिल्म आई थी लीडर...इसमें दिलीप साहब और वैजयंती माला पर एक गाना फिल्माया गया था...आज आप और कांग्रेस के रिश्तों पर ये बिल्कुल फिट बैठ रहा है...बस दिलीप साहब जो कह रहे हैं उसकी जगह कांग्रेस और वैजयंती माला की जगह आप को रख कर ये गाना सुनिए...कसम से मज़ा ना आए तो कहिएगा..

हमी से मुहब्बत, हमी से लड़ाई,
हमी से मुहब्बत, हमी से लड़ाई,
अरे मार डाला, दुहाई-दुहाई,
अरे मार डाला, दुहाई-दुहाई,

                           अभी नासमझ हो, उठाओ ना खंजर,
                           अभी नासमझ हो, उठाओ ना खंजर,
                            कही मुड़ ना जाए तुम्हारी कलाई,
                             अरे मार डाला,  दुहाई-दुहाई...

 सितम आज मुझ पर जो तुम ढा रही हो,
बड़ी खूबसूरत नज़र आ रही हो,
ये जी चाहता है के खुद जान दे दूं,
ये जी चाहता है के खुद जान दे दूं,
मुहब्बत में आए ना तुम पर बुराई,
अरे मार डाला, दुहाई-दुहाई...

हमें हुस्न की हर अदा है गवारा,
हसीनों का गुस्सा भी लगता है प्यारा,
उधर तुमने तीर-ए-नज़र दिल पे मारा,

इधर हमने भी जान पर चोट खाई,
हमी से मुहब्बत, हमी से लड़ाई,
अरे मार डाला, दुहाई-दुहाई,

करो ख़ून तुम यू ना मेरे जिगर का,
बस इक वार काफ़ी है तिरछी नज़र का,
यही प्यार को आज़माने के दिन हैं,
यही प्यार को आज़माने के दिन हैं,
किए जाओ हमसे यूही बेवफ़ाई,
हमी से मुहब्बत, हमी से लड़ाई,
अरे मार डाला, दुहाई-दुहाई,

                         अभी नासमझ हो, उठाओ ना खंजर,
                         अभी नासमझ हो, उठाओ ना खंजर,
                           कही मुड़ ना जाए तुम्हारी कलाई,
                            अरे मार डाला,  दुहाई-दुहाई...


(नोट- आपका ये ब्लॉग देशनामा ब्लॉग अड्डा अवार्डस के लिए शार्टलिस्ट हुआ है...अगर आप इसे वोट देना चाहें तो इस लिंक पर जाकर फेसबुक लाइक या ट्वीट के ज़रिए दे सकते हैं)


शनिवार, 18 जनवरी 2014

मोदी को लेकर अमेरिका का धर्मसंकट...खुशदीप

अपने ब्लॉग के स्टैट्स देखता हूं तो सुखद आश्चर्य होता है कि भारत से ज़्यादा पाठक अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से आ रहे हैं...यानि भारतीय दुनिया में कहीं भी जाकर बस जाए लेकिन उनसे देश की माटी की महक कभी दूर नहीं होती...अपनी भाषा, अपनी ज़मीन, अपने लोगों के बारे में जानने की उनकी ललक हमेशा बनी रहती है...देश में पल-पल क्या हो रहा है, इस पर उनकी बारीक नज़र बनी रहती है...

कल से पहले तक केजरीवाल एंड कंपनी और उनकी आम आदमी पार्टी मीडिया की सारी सुर्खियां बटोर रही थी...उससे पहले नरेंद्र मोदी देश में चाहे किसी चुनावी सभा को संबोधित करते थे या किसी अन्य कार्यक्रम में शिरकत करते थे, उसका पूरा का पूरा सजीव प्रसारण हर न्यूज़ चैनल अपना परम धर्म समझता था...दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने चुनाव में बेहतर प्रदर्शन क्या कर दिखाया कि मीडिया का पूरा फोकस उधर मुड़ गया...केजरीवाल मुख्यमंत्री बन गए...पानी, बिजली जैसे धड़ाधड़ फैसले लिए गए...केजरीवाल की ईमानदारी के कसीदे पढ़े जाने लगे...सरकार बनते ही आप के एक विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने तेवर दिखा कर साफ कर दिया था कि आम आदमी पार्टी में सब कुछ गुडी-गुडी नहीं है...पंद्रह दिनों बाद उन्होंने बग़ावत का बम फोड़ दिया...यही नहीं केजरीवाल को बिन्नी ने झूठों का सरताज भी करार दे दिया...इन सब घटनाओं के चलते लग रहा था कि आप के सिवा देश में ख़बर लायक कुछ बचा ही नहीं....

फिर अचानक 17 जनवरी को ख़बरों के मिज़ाज में कुछ टर्न आया...वजह बने राहुल गांधी...वही राहुल गांधी जिन्हें चार राज्चों में विधानसभा चुनाव के बाद मीडिया बिल्कुल भाव नहीं दे रहा था...ज़िक्र भी किया जाता था तो उनकी अनुभवहीनता, कमज़ोर नेतृत्व क्षमता की वजह से...यहां तक कि कुमार विश्वास जैसे व्यक्ति को भी अमेठी जाकर ताल ठोकने की वजह से सुर्खियों में पूरा स्थान दिया गया....लेकिन दिल्ली में 17 जनवरी को तालकटोरा गार्डन में राहुल ने एआईसीसी के अधिवेशन में क्या ताल ठोकी कि सबको उनमें जोश नज़र आने लगा...राहुल की स्पीच और आस्तीनें  चढ़ाने के लिए जहां उनका उपहास किया जाता था वहीं अब मीडिया को उनमें संभावनाएं नज़र आने लगीं...चालीस मिनट की स्पीच के बाद ये चमत्कार कैसे हो गया...क्या ये इमेज मेकओवर के लिए पीआर कंपनियों पर खर्च किए जा रहे पांच सौ करोड़ रुपये का चमत्कार है या फिर कुछ और...

17 जनवरी की रात से एक और घटना मीडिया पर छाई हुई है...राहुल को मुश्किल से जो भाव मिल रहा था वो शाम आते आते केंद्रीय मंत्री और ट्विटर बॉय शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत की ओर मुड़ गया...दिल्ली के लीला होटल के एक कमरे में सुनंदा मृत पाई गईं...इससे पहले पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार से सुनंदा की ट्विटर पर तकरार को लेकर न्यूज़ चैनलों पर खूब मसाला लगाकर परोसा जा रहा था...एक प्रमुख चैनल पर तीनों के शाट्स पर दिल तो बच्चा है जी, दिल है कि मानता नहीं जैसे गाने बजा कर कार्यक्रम दिखाया जा रहा था...क्या मीडिया का ये रवैया और ट्विटर की चीं..चीं.. ही सुनंदा पुष्कर की जान लेने का कारण बने..क्या विदेश की तरह अब भारत में भी नेताओं की प्राइवेट लाइफ मीडिया और सोशल मीडिया के रडार पर रहेगी...या प्राइवेसी में दखल की बारीक सीमा कहां से शुरू होती है, इस पर भी देश में कोई बहस छेड़े जाने की आवश्यकता है या नहीं...

एक ओर ख़बर ने मेरा ध्यान खींचा...ये दुनिया भर में प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम के 27 जनवरी को आने वाले अंक के एक लेख को लेकर है...प्रसिद्ध कॉलमनिस्ट माइकल क्रॉली ने ये लेख लिखा है...इसमे कहा गया है कि भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के अपनी मेड के कथित वीज़ा फ्रॉड को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तकरार से ज़्यादा कठिन वक्त आगे आने वाला है..क्रॉली के मुताबिक दोनों देशों के बीच एक प्रसिद्ध व्यक्ति के वीज़ा को लेकर बड़ा तनाव सामने आ सकता है...ये व्यक्ति हैं नरेंद्र मोदी...



टाइम मैगजीन का भी मानना है कि मई में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की अच्छी संभावनाएं हैं...ऐसा हुआ तो मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनेगे...लेकिन मोदी के वीज़ा पर अमेरिका ने 2005 से ही रोक लगा रखी है...अमेरिका ने ये कदम मोदी पर 2002 के गुजरात दंगों को लेकर उनके आलोचकों के आरोपों के आधार पर उठाया था...अमेरिका ने नौ साल पहले जब ये फैसला लिया था उस वक्त मोदी का प्रोफाइल राज्य स्तर के नेता का था...अब दृश्य बदल चुका है...बीजेपी के पीएम उम्मीदवार होने की वजह से उनका प्रोफाइल राष्ट्रीय स्तर का हो गया है...

यहां एक हाईपोथेटिकल सवाल किया जा सकता है कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो क्या तब भी मोदी के वीज़ा पर अमेरिका रोक लगाए रखेगा...इस सवाल पर अमेरिका के नीतिनिर्धारक बंटे हुए हैं...नवंबर में अमेरिकी कांग्रेस में एक प्रस्ताव पेश कर अमेरिकी विदेश विभाग से मांग की गई थी कि मोदी के अमेरिका में प्रवेश पर रोक जारी रखी जाए...इस प्रस्ताव को अमेरिकी कांग्रेस में दो मुस्लिम समेत 43 सह-प्रायोजक मिले...

लेकिन साथ ही अमेरिका में रियलिस्ट्स और कारोबारी नेताओं का मत दूसरा है...वो विदेशी निवेश को लेकर मोदी के खुले दृष्टिकोण से अपने लिए भारत में अपार संभावनाएं देखते हैं...अमेरिका के अंदर या बाहर मोदी के आलोचक उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर मोदी के वीज़ा पर रोक के लिए दबाव बनाएंगे...लेकिन बराक ओबामा राष्ट्रीय हितों को सबसे ज़्यादा तरज़ीह देते हैं..ऐसे में वो नीतियों को लेकर लचीला रुख दिखाते रहे हैं...टाइम मैगजीन के अनुसार अमेरिका ऐसे देशों से भी वर्षों से कारोबारी संबंध रखता रहा है जो भारत की तुलना में उसके बहुत कम मित्र रहे हैं...

ये सच है कि वीज़ा पर रोक लगाकर अमेरिकी सरकार ने जता दिया था कि मोदी और गुजरात हिंसा को लेकर वो क्या राय रखती है...लेकिन वाशिंगटन के नई दिल्ली के साथ रिश्ते इससे कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं...इसलिए अगर मोदी पीएम बन जाते हैं तो इन संबंधों को इस एक मुद्दे का बंधक बन कर नहीं रहने दिया जा सकता...टाइम के मुताबिक दोनों देशों को आगे की ओर कदम उठाने की आवश्यकता है...और इन्हें मोदी के अतीत का हवाला देकर पीछे नहीं धकेलने नहीं दिया जाना चाहिए...यानि भारत के सवा अरब लोगों की तरह अब अमेरिका को भी इंतज़ार है अगले लोकसभा चुनाव के नतीजों का...


(नोट- आपका ये ब्लॉग देशनामा ब्लॉग अड्डा अवार्डस के लिए शार्टलिस्ट हुआ है...अगर आप इसे वोट देना चाहें तो इस लिंक पर जाकर फेसबुक लाइक या ट्वीट के ज़रिए दे सकते हैं)

बुधवार, 15 जनवरी 2014

ब्लॉग अड्डा अवॉर्ड्स शार्टलिस्ट जारी...खुशदीप


पिछले साल आपके ब्लॉग देशनामा को पॉलिटिकल न्यूज़ की कैटेगरी में इंडीब्लॉगर्स अवार्ड मिला था तो इसकी सूचना सबसे पहले मुझे सरदार ऑफ ब्लॉगपी एस पाबला जी ने फेसबुक पर दी थी...







आज ब्लॉग अड्डा वालों की ओर से ये मेल मिला है-

Dear Khushdeep Sehgal,

We hope you are doing well! We're sure to keep that smile pasted on your face with what we've got to tell you!

We are drafting this mail with a lot of happiness! Congratulations! Your blog has been shortlisted by our jury as one of the top blogs in India for the BlogAdda Blog Awards!

You are as close as possible to the finish line and at such a stage, you don't want to let it go, do you? 

For the last leap we want the community to like, tweet, comment and tell us who their favourite is! Have a look at all the top blogs, 'Like & Tweet' to encourage and increase your favourite blog's chance of winning! 

Every vote is ought to make a difference, for your blog to reach the top 3! Tell your family and friends to spread the word! Visit http://win.blogadda.com/awards now to 'Like' & 'Tweet' your favorite blogs!

May The Best Blogs Win!

Do let us know if you have any further queries and we will be glad to assist you.

Thanks,
Best Regards,
Team @ BlogAdda.com

जूरी ने हिंदी में मेरे ब्लॉग समेत कुल नौ ब्लॉग शार्टलिस्ट किए हैं...



·         Rohitash Kumar


·         Ashu


·         Khushdeep Sehgal


·         Dr. Parveen Chopra




·         Smart Indian


·         Himanshu Kumar Pandey


·         Mohinder Kumar


·         Roshan Jaswal Vikshipt

इस लिंक पर आप अपनी पसंद के किसी भी ब्लॉग को उसके नाम पर जाकर फेसबुक लाइक या ट्वीट के ज़रिए प्रमोट कर सकते हैं...



(नोट- बड़े दिनों से ब्लॉगिंग में वीरानी छाई हुई थी...इन अवार्ड्स से शायद फिर हमेशा की उठापटक की तरह इस बार भी हिंदी ब्लॉगिंग में कुछ जान आए)