मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

जुर्म देखो, उम्र नहीं...खुशदीप

निर्भया...दामिनी...बिटिया...कुछ भी कहिए 16 दिसंबर गैंग रेप की वारदात को एक साल होने को आ गया....क्या देश की इस बेटी को पूरा इंसाफ़ मिल पाया...बिटिया के पिता दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में ये गुहार लेकर पहुंचे कि वारदात के एक नाबालिग दोषी (जो अब बालिग हो चुका है) को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से सिर्फ तीन साल सुधार गृह में भेजे जाने की सज़ा इंसाफ़ नहीं है...उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2000 को असंवैधानिक करार देकर रद्द करने की मांग की है...सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनेलिटी तय करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है...इस संबंध में महिला और बाल विकास मंत्रालय से चार हफ्ते में जवाब मांगा गया है...ये मंत्रालय पहले से ही गंभीर अपराधों के मामले में जुवेनेलिटी की उम्र 18 से घटाकर 16 साल करने पर काम कर रहा है...क्या है देश-विदेश में क़ानून...कैसे यूएऩ कनवेंशन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने बांध रखे हैं भारत के हाथ... इस मुद्दे से जुड़े हर सवाल पर जानो दुनिया न्यूज़ चैनल पर दो दिसंबर को आज का मुद्दा में बहस हुई...देखिए इस लिंक पर...




5 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल ठीक है जुर्म के हिसाब से सज़ा देनी चाहिए !

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  2. सही कहा आपने जैसा जुर्म वैसी सजा ...

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  3. सजा मिलनी चाहिये, पूरे होशोहवास में किया गया अपराध है।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (04-12-2013) को कर लो पुनर्विचार, पुलिस नित मुंह की खाये- चर्चा मंच 1451
    पर भी है!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. कल 05/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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