शुक्रवार, 14 जून 2013

अजनबी बन जाएं हम दोनों...खुशदीप





चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों
चलो इक बार फिर से...

न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की,
न तुम मेरी तरफ़ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से,
न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाये मेरी बातों से,
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कश्मकश का राज़ नज़रों से,
चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों,
चलो इक बार फिर से...


तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से,
मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जलवे पराए हैं,
मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माझी की,
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साये है,
चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों,
चलो इक बार फिर से...

तार्रुफ़ रोग हो जाये तो उसको भूलना बेहतर
ताल्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोड़ना अच्छा,
वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन,
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा,
चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों,
चलो इक बार फिर से...




 

18 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ कालजयी गाने तो शायद इसलिए लिखे जाते हैं कि, याद आते रहें. सुंदर सोच ..!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्राण जी कहां ये कालजयी गाने और कहां आजकल का कचरा...

      किसी ने सही कहा है भारतीय संगीत ने कितनी तरक्की की है...कुंदनलाल सहगल से शुरू हुआ था, बाबा सहगल तक पहुंच गया है...

      जय हिंद...

      हटाएं
  2. सटीक निशाने पे बैठा है .....
    बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. शुक्रिया अशोक जी...

      जय हिंद...

      हटाएं
  3. bhaiya ye dono to shuru se ajnabhi hi the.......:) shayad ye ek matra photo hogi, jisme dono saath the...:)

    उत्तर देंहटाएं
  4. गाना तो ये भी चल रहा होगा- अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सेक्युलर बन ने से तो अच्छा है की अजनबी ही बन जाये सेक्युलर का मतलब एक आंख से अँधा जिसको बस एक का ही पक्ष नज़र आता है दुसरे का साथ कुछ हो तब बोलती बंद रहती है ....

    जय बाबा बनारस...

    उत्तर देंहटाएं
  6. शुभकामनायें खुशदीप भाई !!
    नंगपन की अब कोई हद मुक़र्रर नहीं...

    उत्तर देंहटाएं
  7. इस अफ़्साने को इस खूबसूरत मोड पर छोडने की सजा तो आखिर जनता को ही भुगतनी है. सांडो का क्या? वो तो पाला बदल लेंगे.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. खुशदीप जी,

    चुनाव के बाद के हालात के लिए कुछ और गाने ढूंढ़ कर रखिए
    - अजनबी तुम जाने पहचाने से लगते हो, ये बड़ी अजीब सी बात है ( किशोर कुमार - हम सब उस्ताद हैं ।
    - हमसे का भूल हुई जो यह सजा हमको मिली ( अनवर - जनता हवलदार )
    - सोचा था क्या हो गया, क्या हो गया ( नूरजहां - अनमोल घड़ी )

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सोच समझ कर लिखे गये हैं ये गाने।

    उत्तर देंहटाएं
  10. अभी इतनी जल्दी कुछ मत कहिये ये घाट घाट का पनी पिए लोग होते है , फायदा दिखा तो कुछ दिन बाद गाते मिलेंगे " खुलम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों इस दुनिया से नहीं डरेंगे हम दोनों "

    उत्तर देंहटाएं
  11. ताल्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोड़ना अच्छा

    व्यावहारिकता इसी को कहते है और समझदारी भी,वाह -वाह

    उत्तर देंहटाएं
  12. सटीक ....
    अभी और बहुत गीत गाये जाने बाकी हैं वैसे :)

    उत्तर देंहटाएं
  13. शुक्रिया , इस शानदार गाने के बोल देने के लिए।
    मज़ा आ गया।

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(15-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं