बुधवार, 25 अप्रैल 2012

दिल्ली की टैगलाइन बनाओ, 50 हज़ार जीतो...खुशदीप ​​




कभी किसी जगह  के साथ  उसकी टैगलाइन  इतनी  रच-बस  जाती  हैं कि उसकी पहचान ही बन जाती हैं..जैसे कि केरल  के लिए  " God's own country" ...आजकल  दिल्ली के लिए भी उसके पूरे मिज़ाज  को बताने वाली ऐसी ही तीन-चार शब्दों की  अंग्रेज़ी-हिंदी में टैगलाइऩ  ढूंढी  जा ​रही है...इसके लिए आप भी अपनी रचनात्मक  मेधा का इस्तेमाल  कर सकते हैं...नौ मई तक  दिल्ली टूरिज्म  को  आप अपनी एंट्री भेजकर 50 हज़ार ​रुपए  के ईनाम  के साथ प्रशस्तिपत्र पा  सकते हैं...साथ  ही आपको टैगलाइन के लिए क्रेडिट भी मिलेगा...सोच क्या रहें हैं कागज़-पेन लीजिए और​ हो जाइए शुरू अपना क्रिएटिव कौशल  दिखाने के लिए...ज़्यादा जानकारी के लिए दिल्ली टूरिज्म  का  ये रहा लिंक...​

आपकी आसानी के लिए कुछ राज्यों के लिए पहले से प्रचलित  टैगलाइन्स...

Andhra Pradesh...The Kohinoor of India
Madhya Pradesh...The very heart of India
Chattisgarh...Full of surprises
Rajasthan...Simply colourful / the Grand canvas
Pondichery...Give me a break
Orrisa...The soul of India
Tamil Nadu...Experience yourself
U.P....Amazing heritage Great Experience
West Bengal...Complete Destination
Goa...365 days on a holiday

​चलिए गंभीर बात  खत्म, अब  मक्खन उवाच  शुरू...​

मक्खन से मैंने कहा कि तू भी टैगलाइन  के लिए  दिमाग  लड़ा, शायद  तेरा   ही   नाम  चमक   जाए....
उसने  कहा- इसमें  क्या  है  सरजी,  हमारे  देश  में  तो  हर   जगह   के  नाम   में   पहले  से  ही  कुछ   मतलब   है... मैंने पूछा- कैसे  भला ..तो  उसने  एक-एक  करके  ऐसे  नामों  की  लिस्ट  मतलब   के  साथ   गिनानी  शुरू  की...लिस्ट  खत्म  होने  के  बाद  आप  भी  मान  जाएंगे कि  मक्खन  क्यों  है  "रियल  जीनियस"...  

1=Large State
"Maha-Rastra"
.
2=Place of Kings
"Raja-Sthan"
.
3=Mr. City
"Shri-Nagar"
.
4=Rhythm of Eyes
"Nayni-Tal"
.
5=Face
"Surat"
.
6=Unmarried Girl.
"Kanya-Kumari"
.
7=No Zip.
"Chen-Nai"
.
8=Come in Evening.
"Aa-Sam"
.
9=Go and Come.
"Go-Aa"
.
10=Answer State.
"Uttar-Pradesh"
.
11=Make Juice.
"Bana-Ras"
.
12=Do Drama.
"Kar-Natak"
.
13=Green Gate.
"Hari-Dwar"
.

मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

बकौल जस्टिस काटजू 90 % भारतीय 'मक्खन'...खुशदीप​




भारत में हर 10 में  से  9 भारतीय  'मूर्ख'  हैं...यानि 'मक्खन' हैं...जैसे ठंडा मतलब  कोका-कोका...ऐसे ही 'मूर्ख'  मतलब  'मक्खन'...नब्बे फीसदी ​भारतीयों  को 'मूर्ख' और कोई नहीं सुप्रीम  कोर्ट के रिटायर्ड जज और भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष  जस्टिस एम एल काटजू बता रहे हैं...​​जस्टिस काटजू का कहना  है  कि नब्बे फीसदी ​भारतीयों के पास 'अनसाइंटिफिक टेंपर' है  यानि अवैज्ञानिक  मिज़ाज  है...जस्टिस  काटजू ने नब्बे फीसदी भारतीयों को 'मूर्ख'  बताने  के पीछे 10 कारण गिनाए हैं, जिनके आधार पर वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं... ये रहे वो कारण...


 1. तमिल लोग भारत के सर्वश्रेष्‍ठ और सबसे तेज दिमाग वाले, प्रतिभावान लोगों में शुमार हैं...इसके बावजूद वे भारत में सबसे ज्‍यादा अंधविश्‍वास करने वाले लोग हैं...  


2. दूसरी बात, ज्‍यादातर मंत्री और यहां तक कि हाई कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश अपने ज्‍योतिषियों से राय-मशविरा करके उनके द्वारा बताए गए मुहूर्त में ही शपथ ग्रहण करते हैं...  


3. सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए कुछ फ्लैट तय हैं, उन्‍हीं फ्लैटों में से एक हर जज को आवंटित होता है... ऐसे ही एक फ्लैट में कभी किसी जज के साथ कोई हादसा हुआ था...इसके बाद से उस फ्लैट को मनहूस बताते हुए किसी जज ने उसमें रहना मंजूर ही नहीं किया... अंतत: तत्‍कालीन मुख्‍य न्‍यायाधीश ने चिट्ठी लिखी कि उस फ्लैट को जजों को आवंटित किए जाने वाले फ्लैट की सूची से ही हटा दिया जाए///इसके बाद ऐसा ही किया गया और उसके बदले दूसरा फ्लैट सूची में शुमार किया गया...  


4. कुछ साल पहले मीडिया में खबर चली कि भगवान गणेश दूध पी रहे हैं...इसके बाद दूध पिलाने वाले भक्‍तों की भीड़ लग गई... इसी तरह एक चमत्‍कारिक चपाती की चर्चा भी खूब चली इस तरह के 'चमत्‍कार' होते ही रहते हैं... 


5. हमारा समाज बाबाओं से प्रभावित है...इस कड़ी में ताजा वह हैं जो तीसरी आंख होने का दावा करते हैं...भगवान शिव की तरह...  


6. जब मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज था, उस दौरान ऐसी खबर आई थी कि तमिलनाडु में किसी शख्‍स ने पानी से पेट्रोल बनाने की तकनीक ईजाद कर ली है...कई लोगों ने इस पर यकीन किया... मेरे एक सहयोगी ने भी कहा कि अब पेट्रोल सस्‍ता हो जाएगा, लेकिन मैंने कहा कि यह धोखा है और बाद में यह धोखा साबित हुआ...  


7. शादी पक्‍की करने से पहले ज्‍यादातर माता-पिता ज्‍योतिषि से मिलते हैं...कुंडली मेल खाने पर ही शादी पक्‍की होती है...बेचारी मांगलिक लड़कियों को अक्‍सर नकार दिया जाता है,  जबकि उसकी कोई गलती नहीं होती...  


8. हर रोज टीवी चैनलों पर अंधविश्‍वास को बढ़ावा देने वाले तमाम कार्यक्रम दिखाए जाते हैं...ब्रॉडकास्‍ट एडिटर्स एसोसिएशन इन्‍हें रोकने की बात करता है, लेकिन बाजार के दबाव में उन्‍हें रोका नहीं जा रहा है... अफसोस की बात है कि भारत में मध्‍य वर्ग का बौद्धिक स्‍तर काफी नीचा है...वे फिल्‍मी सितारों की जिंदगी, फैशन परेड, क्रिकेट और ज्‍योतिष से जुड़े कार्यक्रम ही पसंद करते हैं... 


9. ज्‍यादातर हिंदू और ज्‍यादातर मुसलमान सांप्रदायिक हैं...1857 के पहले ऐसा नहीं था...यह एक सच है कि हर समुदाय के 99 फीसदी लोग बेहतर हैं, लेकिन उनके अंदर से संप्रदायवाद का वायरस मिटाने में काफी समय लग जाएगा...  


10. इज्‍जत के नाम पर जान लेना, दहेज के लिए हत्‍याएं, कन्‍या भ्रूण हत्‍या जैसी सामाजिक कुरीतियां आज भी भारत में मौजूद हैं....


(दैनिक  भास्कर  के इनपुट  पर साभार आधारित)

स्लॉग ओवर 
जस्टिस  काटजू की राय  वाली  इस  रिपोर्ट  के बारे में जब  से मक्खन  ने सुना है, उसके पैर  ज़मीन  पर  नहीं पड़  रहे...हंस  रहा है कि वो खुद ​ ​को इस  देश  में अपने जैसा एक  ही नमूना समझता था...लेकिन  यहां तो...

रविवार, 22 अप्रैल 2012

मक्खन इज़ बैक...खुशदीप​


हिंदी ब्लागिंग  में इन दिनों मुझे खालीपन और  भारीपन  दोनों ही महसूस  हो रहा है...खालीपन  इसलिए  कि  मेरे  पसंद  के कुछ ब्लागरों ​ने लिखना बहुत  कम  कर  दिया है...और भारीपन  किसलिए...ये बताने  की  ज़रूरत  नहीं..कुछ  पोस्ट  पढ़  कर  आप  खुद  ही  महसूस  कर  सकते हैं...खैर ​छोड़िए, सब की अपनी सोच है और सबको अपने हिसाब  से लिखने की स्वतंत्रता है...​यहां तो कभी  माहौल  को  लाइट  करने  की कोशिश  की  जाए  तो उसमें भी कहां से  कहां की बात जोड़  कर  टंटा खड़ा करने  की  कोशिश  की  जाती है...चलिए  जब  वो अपनी राह  नहीं  छोड़  सकते  तो हम  क्यों पीछे  हटें....इसलिए  आज  मक्खन  इज़  बैक...
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डॉक्टर  मक्खन  से...​
​​आई  एम  सॉरी,  तुम्हारी  पत्नी  मक्खनी  अब  दो  दिन  की  ही मेहमान  है...​
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​मक्खन...​
​​आप क्यों परेशान  होते हैं...
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मेरा  क्या है  जहां  बीस  साल  निकाल  दिए,  वहां ये दो दिन भी जैसे-तैसे कट जाएंगे...

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मक्खन  का  मक्खनी  से  झगड़ा  हो  गया...​
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​मक्खन  गुस्से  में  घर  से  बाहर  जाने लगा...​
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​मक्खनी  ने  पूछा....अब  जा  कहां रहे  हो...​
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​मक्खन...मरने  जा  रहा  हूं...​
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​मक्खनी  ने  कहा...एक  मिनट  ठहरो...​
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​मक्खनी ने  मक्खन  को डेयरी मिल्क चाकलेट  लाकर दी और  बोली...
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कोई  भी शुभ काम  करने  से  पहले  कुछ  मीठा  खा  लेना  चाहिए...काम अच्छा  होता  है...


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गुल्ली स्कूल  से  खुशी खुशी  घर  आया...​

आते  ही  मक्खन से बोला...​
डैडी जी,  डैडी  जी...कल  से आप  की  सारी  फ़िक्र  दूर  हो  जाएगी...​
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मक्खन...
क्यों भई,  कल  कौन सा अलादीन  का चिराग   हाथ  लग  जाएगा,  जो हमारी  कड़की  दूर  कर  देगा...​
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गुल्ली...
ओ,  नहीं  डैडी  जी...
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मेरी मैथ्स टीचर  ने  कहा  है कि कल  वो  पैसों  को रुपयों में बदलना सिखाएगी...​
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मक्खन  पर  बिजली  का  तार  गिर  गया...​

मक्खन  तड़प  तड़प  कर  मरने  लगा...​

एक  मिनट  बाद  उसे  कुछ  याद  आया  और  वो  सीधा खड़ा  होकर  कपड़े  झाड़ता  हुआ  बोला...​
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साल्या ने खामख्वाह तरा कड देता, दो दिना दी ते पूरे शहर  विच बत्ती ही नहीं आंदी  पई...​ 
​​(सालों ने खामख्वाह डरा दिया, दो दिन से तो पूरे शहर में  बिजली ही नहीं आ रही...)

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

अस्सी साल पहले का जयपुर देखिए...खुशदीप


नोस्टेलजिया कहिए या कुछ और मुझे बीते दौर के फोटोग्राफ बहुत आकर्षित करते हैं...और अगर पुराने वक्त को दर्शाती कोई मूविंग फिल्म  मिल जाए तो कहना ही क्या...ऐसी ही एक फिल्म आपसे शेयर करना चाहता हूँ ...ये फिल्म अस्सी साल  पहले के जयपुर की है...फिल्म ज़ाहिर है ब्लैक  एंड व्हाईट है लेकिन आठ दशक पहले की गुलाबी नगरी के हर रंग को बड़ी शिद्दत के साथ इसमें उकेरा गया है...पूरी फिल्म में इक्का-दुक्का मोटर वाहन ही नज़र आते हैं...पतलून में भी कोई भारतीय बड़ी मुश्किल से ही फिल्म में कही मिलेगा...एक और बात भी इस  फिल्म में नज़र आएगी कि जानवर भी उस  वक्त आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी के कितने अहम  हिस्सा थे...एक  जनाब ने तो तेंदुए को ही बाज़ार में खाट पर अपने साथ  बिठा रखा  है...



चलिए 1932 के जयपुर और आपके बीच  मैं ज़्यादा देर नहीं रहता ...जेम्स ए  फिट्ज़पैट्रिक  की बनाई इस  फिल्म का आनंद लीजिए...​



साभार: Fitzpatrick pictures​
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सोमवार, 16 अप्रैल 2012

कोका-कोला की झप्पी...खुशदीप



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मुन्ना भाई  एमबीबीएस  में संजय  दत्त  की जादू की झप्पी बड़ी मशहूर  हुई  थी...लेकिन  आज  मैं आपको दूसरी झप्पी के बारे में बताने जा रहा हूं...इसमें आपको बस  एक  वेंडिंग  मशीन  को झप्पी देनी होती है...और  बदले में आपको मिलता है कोका-कोला का कूल-कूल  कैन ...वो भी एकदम  फ्री...कोका-कोला ने सिंगापुर  में यूथ  को टारगेट  करने वाली ये नई मार्केटिंग  रणनीति अपनाई  है...ओपन  हैप्पीनेस  कैम्पेन  के नाम  से इस  तरह  की  पहली मशीन  नेशनल  यूनिवर्सिटी आफ  सिंगापुर में लगाई  ग ई है...यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राएं भी एक  सुबह  अचानक  कैम्पस  में इस  मशीन  को लगा देखकर  हैरान  रह  गए...​
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​आप खुद ही देखिए इस  मशीन का डेमो...​
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​कोका-कोला वाले शाहनवाज़  बताएं कि भारत  में इस  मशीन को कब ला रहे हैं...

गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

क्यों कहते हो फिर बेटियों को लक्ष्मी...खुशदीप



कब बदलेगी संस्कारवान होने का दावा करने वाले इस देश की सोच .....


बेबी फलक ने दिल्ली के एम्स में15 मार्च को दम तोड़ा, दो साल की फलक  को 18 जनवरी  को  बड़े  बुरे  हाल  में 
अस्पताल लाया गया था...उसके सिर को पटक पटक कर मारा गया था...

बुधवार सुबह तीन महीने की आफरीन ने बंगलौर के  एक सरकारी अस्पताल  में दम  तोडा...पिता  पर  ही  बेटे  की  चाहत
में आफरीन पर बेतहाशा ज़ुल्म ढहाने का आरोप है...मासूम के शरीर पर सिगरेट से दागे जाने के भी निशान मिले...


ग्वालियर के नरेंदर राणा को अपनी दो दिन की बच्ची को तम्बाकू  देकर  मारने  के आरोप में गिरफ्तार  किया  गया  है 


देवी, अब तुम्हारा लिंग निर्धारण हो गया है, अब बताओ भ्रूण में ही हत्या  पसंद  करोगी या इस दुनिया में  आते  ही, या फिर  बलात्कार और  हत्या  के लिए थोड़ा बड़े होने का इंतज़ार करोगी....


बुधवार, 11 अप्रैल 2012

बस यही देखना बाकी था...खुशदीप



आजकल टीवी पर एक एड दिखाया जा रहा है...बस इसी की कसर बाकी रह गई थी...पहले आप भी इस एड को देख लीजिए...


अब एचटी सिटी के आज के अंक का यह लेख पढिये...

TV ad for fair privates slammed

Anew television commercial for a personal hygiene wash that promises ‘fairer’ private parts for women has come under attack from viewers, ad gurus and women’s right activists. The ad for Clean and Dry Intimate wash by Midas Care, shows a wife serving tea to a disinterested husband. After she 
cleans herself (there’s a graphic that shows how the product lightens the private part), their romance perks up.
Advertisement professional and author Anuja Chauhan says, “It’s insane to project a personal hygiene product like this. There is way too much pressure on looking fair. At least the private parts should be spared!” Agrees Barkha Singh, chairperson, Delhi Commission for Women. “Sexing up the ad and promising fairer private parts is ridiculous.” Fashion designer Rina Dhaka calls the ad “shocking and horrifying.”
“It speaks of a country with a sick mind.” Twitter, too, is abuzz with jokes on the ad. “After watching the ad, I’m expecting people to mention “must have fair skin AND privates” on matrimonial websites,” wrote a user, E-tard. Ad guru Prahlad Kakkar sarcastically calls it a ‘futuristic product’. “It’s meant for a time when girls would be roaming around pantyless,” he says.
The spokesperson for Midas-Care defends, “The wash keeps the skin clean, fair and safe from infections. Fairness is just one of the many offerings.”  Relationship expert Jai Madan agrees it’s no big deal. “Darkening of the private area is a common problem. What’s the big deal?
मैं इस लिंक पर एड के खिलाफ शिकायत कर रहा हूँ, आप भी करेंगे क्या..

मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

ये तीसरा ब्लॉगर कौन है...खुशदीप




फिजिक्स का सिद्धांत  है कि रबर की गेंद  को जितना पटक  कर ज़मीन पर मारोगे, उतना ही वो आपके सिर पर चढ़ कर नाचेगी...अगर गेंद को यूहीं ज़मीन पर लुढ़का दो तो वो वही पड़ी रहेगी...लेकिन  आजकल  ब्लॉग-जगत पर क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम पूरे उफ़ान  पर है...पलीता लगाने वाले भी हरदम  मौके की तलाश  में बैठे हैं...आग को भड़का कर उस पर हाथ सेंकना इनका शगल है...ये लोग मोबाइल, ई-मेल, चैटिंग  जैसे माध्यमों से नारदमुनि की भूमिका निभाने में पारगंत  होते हैं...कान के कच्चे लोगों को ये इस तरह पेड़ पर चढ़ाते हैं कि बेचारे को उतरने का रास्ता ही नहीं सूझता...​
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​कुछ  और तरह के भी कलाकार हैं...ये बिना बुलाए  मेहमानों की तरह कहीं भी प्रगट होकर समर्थन देना शुरू कर देते हैं...ठीक वैसे ही जैसे समाजवादी ​पार्टी और बीएसपी केंद्र में यूपीए सरकार को समर्थन देती रहती हैं...ये समर्थन के नाम पर ऐसा गड्ढा खोदते हैं कि समर्थन का लाभार्थी ही उसमें​ फंस कर रह जाता है...​
​​
​ब्लॉग जगत की ऐसी ही प्रजातियों के लिए ये पंक्तियां...​
​​
एक  ब्लॉगर  पोस्ट  लिखता है,​
​एक ब्लॉगर पोस्ट पढ़ता है,​
​एक तीसरा ब्लॉगर  भी है,​
​जो न पोस्ट लिखता है,​
​न पोस्ट के मर्म  को पढ़ता है..​
​वह  सिर्फ पोस्ट से खेलता है,​
​मैं पूछता हूं- ये तीसरा ब्लॉगर कौन है​ ?
ब्लॉग की समूची दुनिया मौन है...

शनिवार, 7 अप्रैल 2012

आवाज़ दे ...कहां हैं...खुशदीप ​​




​ऐसा दुर्लभ  ही होता है कि सिनेमा या टीवी पर कभी कोई दृश्य देखकर आप पूरी तरह उसके साथ जुड़ जाते हैं, रम  जाते हैं, उस  लम्हे में खुद को  इलैक्ट्रिफाइंग  महसूस  करने लगते हैं...अपने काम  के सिलसिले में मुझे कुछ  ऐसा ही अनुभव  हुआ..​
​​
​बंटवारे के दर्द  के साथ  एक  नामचीन  हस्ती को 1947  में सरहद  के उस  पार  रहने का फैसला लेना पड़ा...वो हस्ती, जिसकी खूबसूरती और सुरीले गले ने बड़े पर्दे के ज़रिए  सभी को अपना दीवाना बना रखा था...दोस्त, साथी सभी से जुदा होने की टीस...हुनर  कूट  कूट  कर  भरा था तो सरहद  के उस  पार  भी चाहने वालों की तादाद  कम  नहीं थी...प्रशंसकों से बेशुमार प्यार  मिला लेकिन  उस  हस्ती के दिल  में एक  कसक  हमेशा बनी रही कि उस  माटी की खुशबू  फिर से महसूस  कर सके जिस  माटी ने प्रसिद्धि के  शिखर पर पहुंचाया...उस  हस्ती को 35 साल  बाद हिंदुस्तान  आने का मौका मिला...एक  शख्स जिसने 35  साल  पहले एक  फिल्म में उस  हस्ती के साथ  लीड  रोल  किया था,  मंच  पर  स्वागत  के लिए  खड़ा था...दोनों ने एक  दूसरे के लिए  क्या कहा, ये देखने- सुनने से ज़्यादा महसूस करने  की बात  है...​नोस्टेलजिया का जादू है...
​​
​इस  लिंक  पर जाकर वीडियो को गौर से देखिए, फिर बताइए आपको कैसा महसूस हुआ ...

आवाज़   दे ...कहां  है...

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

कान्फिडेंस हो तो केआरके जैसा...खुशदीप​



​​केआर के तो आपको याद  होगा...केआरके यानि कमाल  राशिद  ख़ान...जनाब  ने शाहरुख  ख़ान  के एसआरके की तरह  ही अपना नाम  केआरके रखा है...देशद्रोही जैसी फिल्म बना चुका ये शख्स दुबई  में रियल  इस्टेट  का कारोबार  होने का दावा करता है...​बिग बास  के एक  सीज़न में उग्र बर्ताव  की वजह  से केआरके को बाहर कर  दिए  जाने से पूरा देश  जानता है...आजकल  जनाब  का शगल  ट्विटर पर उटपटांग टिप्पणियां करने का है...कभी बिपाशा बसु पर  निशाना साधता है तो कभी किसी और  स्टार पर...बिग  बास  में केआरके को ये कहते सबने सुना था कि उसका दूध  हालैंड  से आता है, पानी फ्रांस  से और चाय  लंदन  से...इक्कीस  हज़ार वर्ग  फीट  की विला में रहने का दावा करने वाला ये शख्स अपने कारोबार का टर्नओवर  एक  अरब  रुपए  बताता है...
​​​
​ट्विटर पर केआरके को लेकर आज  चुटकुले भी बड़े मशहूर है...केआरके एक  पेट्रोल  पंप पर गया तो वहां लिखा था कि यहां मोबाइल  का इस्तेमाल ​ करना मना है...केआरके ने फौरन  अपने सभी जानने वालों को मोबाइल  निकाल  कर काल  की कि अभी वो थोड़ी देर उसे काल न  करें, वो बहुत बिजी  है...
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​अभी तक  आप रजनीकांत के बारे में बहुत कुछ  सुनते रहे हैं, अब देखिए  कि क्यों केआरके रजनी सर से ज़्यादा ग्रेट है...

​​रजनीकांत  टाइगर वुड्स के साथ  गोल्फ खेलते हैं, लेकिन  केआरके वुड्स में टाइगर्स  के साथ  गोल्फ खेलता है...

रजनीकांत  बिना गिलास  वाइन  पी सकते हैं, लेकिन  केआरके रजनीकांत  के  बिना ही पी सकता है...

रजनीकांत की एक  हज़ार गर्ल  फ्रैंड्स हैं, लेकिन  वो सारी केआरके की एक्स हैं...
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​रजनीकांत ने सुसु किया तो एक  नहर  बन गई, केआरके ने सुसु करना बंद  किया तो जंगल  रेगिस्तान में तब्दील हो गया...

रजनीकांत  एक  पत्थर से दो चिड़िया मार सकते हैं, केआरके जब  दिखता है तो पक्षी प्रवास  पर दूसरे देशों में चले जाते हैं...​​
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​रजनीकांत  कार्टून की तरह एक्टिंग कर सकते हैं, कार्टूनों की सबसे बड़ी इच्छा केआरके करने की है...

रजनीकांत  अपने प्रोटेक्शन  के लिए  बाडीगार्ड्स रखते है, बाडीगार्ड्स  अपनी सुरक्षा के लिए  केआरके रखते हैं...

रजनीकांत कई बार मौत का नज़दीक से अनुभव कर चुके हैं,  मौत  एक  बार केआरके का ​अनुभव कर चुकी है...
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ऊपर वाला ही बचाए  केआरके से....

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

बोल्डनेस छोड़िए हो जाइए कूल...खुशदीप​



​​बोल्डनेस  को लेकर ब्लाग-जगत का माहौल उबाल  पर है...दैहिक  रिश्तों के विमर्श  से अलग  कुछ  कूल-कूल  बातें करना  ज़रूरी है...ऐसे में लाफ्टर की  डोज़  से बढ़िया और क्या रास्ता है...​
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​दुनिया के सबसे पहले मर्द और औरत  की शादी सबसे आदर्श  थी...​




उस  आदमी  को  उस औरत  से कभी ये नहीं सुनना पड़ता था कि उसकी शादी और  कितने-कितने अच्छे और योग्य मर्दों से  हो सकती थी...​

उस औरत  को ये नहीं सुनना पड़ता था कि उस आदमी  की मां कितना बढ़िया खाना बनाती थी...
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एक  गलती जो आपकी ज़िंदगी बदल  सकती है...​
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​रिकार्ड  ब्रेकिंग....​

दस  लाख  आइडिया कनेक्शन  सिर्फ  तीन  दिन में बिक गए, सिर्फ  आइडिया के एड में एक  प्रिंटिंग  मिस्टेक  की वजह से...​
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'आइडिया कैन चेंज यूअर वाइफ़'..
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नारदमुनि की शादीशुदा महिलाओं को सलाह...​

अगर आपका पति आपको अचानक रोमांटिक संदेश भेजने लगे तो खुश होने से पहले ये  भी सोचिए कि पति को उसके मोबाइल पर ये संदेश कौन भेज रहा है...​
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​मेरा काम पूरा हुआ...​
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नारायण...नारायण...​
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राहुल की शादी 

उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी आम आदमी के दर्द को नहीं समझ पाए, इसलिए चुनाव में कांग्रेस की बुरी गत हुई...​
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​अब आम आदमी के दर्द को सही तरह समझना है तो राहुल को पहले शादी करनी पड़ेगी न....​
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पत्ती (चाय) और पति में क्या समानता है...​
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दोनों की किस्मत में उबलना लिखा है, वो भी महिला के हाथों...​
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मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

ऑटिज्म : खास बच्चों के लिए खास केयर...खुशदीप




सोमवार को खास दिन था...विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस...हमारे देश में ऑटिज्म को आम लोगों ने उस वक्त अच्छी तरह जाना जब शाहरुख ख़ान ने माई नेम इज़ ख़ान में इसी बीमारी से शिकार रिज़वान के किरदार को निभाया..सात साल पहले अजय देवगन ने भी फिल्म मैं ऐसा ही हूं  में ऑटिज्म से पीड़ित नायक की भूमिका निभाई थी...संयोग से दो अप्रैल को ही अजय देवगन का जन्मदिन पड़ता है....​
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सबसे पहले ऑटिज्म है क्या, इसे जान लिया जाए....​
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​ये एक ऐसा मस्तिष्क रोग है, जो बच्चों में बोलचाल, क्रिएटिविटी और सामाजिक बर्ताव को नुकसान पहुंचाता है...थोड़ा बड़ा होने पर बच्चा अपनी ही दुनिया  में खोया रहता है, बोलने में दिक्कत महसूस करता है, वार्तालाप को समझ नहीं पाता है, बहुत चुप-चुप रहता है या बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है...​
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​स्थिति कितनी भयावह है, ये इसी बात से अंदाज़ लगाया जा सकता है कि हर साल एड्स, डायबिटीज और कैंसर से ज़्यादा बच्चे ऑटिज्म के शिकार हो रहे हैं...​ऊपर से ये भी हक़ीक़त है कि किसी भी मेडिकल जांच से इस बीमारी को पकड़ा नहीं जा सकता...बच्चे के जन्म के दो-तीन साल तक तो घरवालों को बीमारी का पता ही नहीं चलता...ऐसे में इन स्थितियों में मां-बाप के लिए सावधान हो जाना बहुत ज़रूरी है...​

1. बच्चा छह महीने का हो जाने पर भी किलकारी न भरे...​
​2. नौ महीने में भी बच्चा मुस्कुराना शुरू न करे...​
​3. एक साल की उम्र में भी किसी बात पर प्रतिक्रिया न दे...​
4. सवा साल का होने पर भी किसी शब्द को न दोहरा पाए...​
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​इस बीमारी का बेशक कोई इलाज नहीं है लेकिन जागरूकता से इसके खिलाफ ज़रूर उठ खड़ा हुआ जा सकता है...कुछ कुछ वैसे ही जैसे शाहरुख ने माई नेम इज़ ख़ान में कर दिखाया था...​
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​दुनिया की बात की जाए या भारत की औसतन हर सौ बच्चों में से एक बच्चा ऑटिज्म का शिकार है...अमेरिका में हर साल इस बीमारी पर 126 अरब डालर खर्च किए जाते हैं....भारत में पिछले दस साल में ऑटिज्म पीड़ितों की संख्या छह गुणा बढ़ गई है...2003 में अनुमान था कि महज़ बीस लाख लोग इसकी चपेट में है...लेकिन अब ये संख्या 1.36 करोड़ का आंकड़ा छू रही है...लड़कियों के मुकाबले लड़कों में ऑटिज्म का खतरा चार से पांच गुणा ज़्यादा रहता है...

ये एक ऐसा न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर है जिसमें दिमाग के टेम्पोरल और आकसीपटल एरिया का विकास सामान्य तरीके से नहीं हो पाता..इस कारण व्यक्ति में संचार, सामाजिक संवाद कौशल, भावनाएं और गतिविधियां जैसे खेलना आदि खत्म सी हो जाती है...​
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​​ऑटिज्म के कारण...

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी के लिए आनुवांशिक कारण काफ़ी ज़िम्मेदार है...इसके अलावा डिलीवरी के दौरान बच्चे को पूरी तरह से ​आक्सीजन न मिल पाना...गर्भावस्था में किसी तरह की परेशानी, जिसमें कोई बीमारी, पोषक तत्वों की कमी, किसी दवा का रिएक्शन शामिल है...

उपचार... 

बीमारी के स्तर के आधार पर मरीज का इलाज किया जाता है...इलाज के लिए दवाएं और थेरेपी इस्तेमाल में लाई जाती है...इनमें डवलपमेंटल थेरेपी, लैंगेवज थेरपी, सोशल स्किल्स थेरेपी, ​आक्यूपेशनल थेरेपी की जाती है...इनके ज़रिए बच्चों के जीवन और कार्यों की गुणवत्ता में वृद्धि की जाती है...​
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​ध्यान से देखा जाए तो बच्चे के जन्म के छह माह से एक साल के भीतर ही पता चल जाता है कि बच्चा सामान्य व्यवहार कर रहा है या नहीं...ऐसी स्थिति में तुरंत एक्सपर्ट डाक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए...क्योंकि वक्त बीतने के साथ बच्चे में जटिलता उतनी ही बढ़ती जाती है...दिल्ली के एम्स में बाल व किशोर मनोचिकित्सक क्लिनिक में  ऑटिज्म  के शिकार बच्चों के लिए शुक्रवार का दिन विशेष रूप से तय किया गया है...


(अमर उजाला में सोमवार को ऑटिज्म पर खास जानकारी देना समाज के प्रति जागरुक पत्रकारिता का उत्कृष्ट उदाहरण है, इसके लिए अखबार की टीम और रिपोर्टर अमलेंदु भूषण खां को विशेष तौर पर साधुवाद...)