गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो यहां हैं...खुशदीप




दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है भारत...

लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है संसद...

लेकिन देश की शान इसी संसद में एफडीआई जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस के दौरान ये हैं हमारे कुछ माननीयों के मुखारबिंदुओं से निकले सद्वचन...

जम्हूरा (बीजेपी के एक सांसद के लिए लालू यादव ने कहा)

मुहब्बत में तुम्हें आंसू बहाना नहीं आता, बनारस आकर  बनारस  का पान खाना नहीं आता...(लोकसभा में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज के लिए लालू प्रसाद यादव की तुकबंदी)

आपको गांठें खोलना नहीं आता, मसखरी के अलावा बोलना नहीं आता...(लालू यादव के लिए सुषमा स्वराज की जवाबी तुकबंदी)

आप इतना अच्छा बोलती हैं कि ऐसा लगता है कि सब सही बोल रही हैं...(सुषमा स्वराज के लिए कपिल सिब्बल)

इनकी तो आइडियोलॉजी ही फॉरेन है, फॉरेन डायरेक्ट आइडियोलॉजी (एफडीआई)....(लेफ्ट के लिए कपिल सिब्बल)

आपको फ्राई के लिए 24 इंच के आलू चाहिए तो अंबाला आइए...( कांग्रेस सांसद और हरियाणा के सीएम के साहबज़ादे दीपेंद्र हुड्डा)

किसान के बेटे हो पहले आलू और लौकी का फ़र्क तो समझ लीजिए...(दीपेंद्र हुड्डा को सुषमा स्वराज का जवाब)

लोमड़ी को वोट नहीं मिले तो उसने कहा अंगूर खट्टे हो गए....(सुषमा स्वराज के बयान से नाराज़ मायावती)

बेवकूफ़...(कांग्रेस सांसद प्रभा ठाकुर के लिए बीजेपी के वेंकैया नायडू)

ये सब पढ़ लिया, अब नीचे का वीडियो भी देख लीजिए...



12 टिप्‍पणियां:

  1. लोकतंत्र में सब जायज, क्या कटाक्ष क्या गाली।

    जनता केवल "बेचारी", हालत जिसकी माली।।

    ..... सादर!

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  2. माननीय है जी कुछ भी कह सुन सकते है!!!

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  3. एक एक बहस बहुत कुछ सिखा जाती है..

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  4. इन पर कुछ कहना अवमानना हो सकती है !

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  5. बस इन्हें ही हिन्द पर नाज़ नहीं। हम आम लोग ख्वामख्वाह सेंटी हुए जाते हैं।

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  6. आज के युवा वही सीखेंगे जो देखेंगे .... बढ़िया

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  7. बड़ी बड़ी बातें --- हाँ हाँ --- करते हैं !

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  8. बेहतरीन संकलन है!
    और अंतिम चलचित्र भी गज़ब है.. साझा करने के लिए शुक्रिया! :)

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