गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

1989 से क्या-क्या बदल गया सचिन!...खुशदीप



सचिन तेंदुलकर ने 1989 में पाकिस्तान के दौरे से इंटरनेशनल क्रिकेट करियर की शुरुआत की...तब से अब तक 23 साल में देश में क्या-क्या बदला...
उस वक्त देश में टीवी चैनल के नाम पर सिर्फ दूरदर्शन था...
उस वक्त देश में घरेलू एयरलाइंस के तौर पर सिर्फ इंडियन एयरलाइंस थी...
सचिन के पदार्पण से कुछ महीने पहले ही पेप्सी ने देश में प्रवेश किया था...कोका-कोला की देश में दोबारा एंट्री 1993 में हुई थी...1989 में कॉरबोनेटेड ड्रिंक्स के बाज़ार पर थम्स अप, कैम्पा कोला, गोल्ड स्पॉट, लिमका और सिट्रा छाए हुए थे...
उस वक्त देश में कारों में सिर्फ मारुति, अंबेसडर, प्रीमियर पद्मिनी और स्टेंडर्ड रोवर ही उपलब्ध थीं...
उस वक्त एक डॉलर की कीमत 17 रुपये 50 पैसे थी...

सचिन के टीम इंडिया में शामिल होने से कुछ दिन बाद ही राजीव गांधी को प्रधानमंत्री के पद से हटना पड़ा था और वीपी सिंह की इस पद पर ताजपोशी हुई थी...उस वक्त कांग्रेस और जनता दल के बाद बीजेपी तीसरे नंबर की पार्टी थी...
तब डीवीडी का अविष्कार नहीं हुआ था और सीडी का देश में मिलना दुर्लभ था...
उस साल की सबसे बड़ी बॉलीवुड हिट फिल्म सलमान ख़ान और भाग्यश्री की अभिनीत मैंने प्यार कियाथी
अयातोल्ला खोमेनी ने उसी साल सलमान रश्दी के नॉवल द सेटेनिक वर्सेज़ को लेकर उनकी हत्या के लिए तीस लाख डॉलर का इनाम रखा था...
उस वक्त कलकत्ता मेट्रो का एक ही फेस चालू था...
उस वक्त कोलकाता (2001) का नाम कलकत्ता, मुंबई (1995) का नाम बॉम्बे और चेन्नई (1996) का नाम मद्रास ही था...
उस वक्त भारत में मैक्डॉनल्ड, केएफसी, पिज्ज़ा हट,  डोमिनोज़, कैफ़े कॉफी डे और शॉपर्स स्टॉप का नामो-निशान तक नहीं था...
अगर सचिन के करियर के दौरान चीज़े कैसे बदली हैं, ठीक से जानना है तो देश में पेट्रो उत्पादों की कीमतों में आए बदलाव को जानिए...1 अप्रैल 1989 को पेट्रोल साढ़े आठ रुपये लीटर, डीज़ल साढ़े तीन रुपये लीटर और मिट्टी का तेल सवा दो रुपये लीटर था...और रसोई गैस का सिलेंडर उस वक्त 57 रुपये 60 पैसे का था...
चीज़ें और वक्त काफ़ी बदल चुका है...और सचिन आप!....




(स्रोत- अनंत रंगास्वामी, फर्स्ट पोस्ट डॉट कॉम)

8 टिप्‍पणियां:

  1. सचिन का भाव भी पेट्रोल और गैस सिलेंडर जैसा बढ़ चुका है ।

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  2. सचिन भी बहुत बदले हैं, पहले कुछ हजार मिलते थे, फिर लाख हुए अब करोड़ों या खरबों से खेल रहे हैं। राजसभा के सदस्‍य भी बन गए हैं और भारतरत्‍न की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।

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  3. मज़े आ गए जी पढ़ कर .

    उस समय हम भी थे, और उस समय हमारी पगार ३०० रुपये माहवार थी.. प्रेस में अप्रेंटिस पर थे.

    वाकई ही स्वर्णयुग था. अगर ये सब सचिन के आने से बदला तो काश सचिन नहीं आये होते :):):)


    वैसे मेरे जैसे कई हज़ार कोम्पोजर भी सचिन के साथ करिअर शुरू किये .... सचिन बाबा जरूर संन्यास लेकर मौज करेंगे... पर बाकि कारीगर का क्या हाल होगा..

    शोले फिल्म से
    नाच बसंती नाच... जब तक तेरे पैर चलेंगे, तब तक वीरू की जिंदगी..

    वही हाल सभी कारीगर का होता है .. जब तक उँगलियाँ चलेंगी... तभी तक तेरे प्राण, यहाँ कोई वीरू नहीं है.

    बढिया पोस्ट लिखी खुशदीप जी, शुभकामनाएं.

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  4. शायद वक्त बदलता है ..कुछ लोगो को वक्त बदलता है...कुछ लोग वक्त के साथ बदलते हैं...कुछ लोग वक्त से पीछ रह जाते हैं...पर कुछ लोगो से वक्त इतना खुश होता है कि वो उनको बदलने की जरुरत नहीं समझता

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