रही ना पूरी अनपढ़ की अनपढ़...खुशदीप
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मक्खन अपनी कार के दो पहिये अचानक उतारने लग गया...
मक्खनी ने कहा...ये क्या कर रहे हो? कार के दो पहिये क्यों उतार रहे हो?
मक्खन...चुप कर ज़ाहिल औरत, रही ...
बिना शब्द की पोस्ट...खुशदीप
Posted on Thursday, April 26, 2012 by Khushdeep Sehgal in
Labels:
best short film,
don't waste food,
hunger
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hunger
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सचमुच , हिला कर रख दिया !
ReplyDeleteजूठा छोड़ने वालों पर ज़ुर्माना होना चाहिए .
कहीं कहीं कुत्ते भी इंसान से बेहतर जीवन जीते हैं .
उफ्फ्फ....वाकई ..
ReplyDeleteफिल्मकार ने एक हकीकत को अंजाम दिया है। लेकिन यह विभत्स हकीकत अधूरी है। इतने लोग धरती पर भूख से इसलिए नहीं मरते कि कुछ लोग जरूरत से अधिक खाते हैं। बल्कि इस लिए कि धरती पर मानवोपयोगी पदार्थों का वितरण उचित और न्यायिक रीति से नहीं होता। मुझे पता है कुछ साल पहले मेरे ही नगर में एक भाई ने अपनी दो बहनों की जान इसी भूख के कारण ले ली थी। उस के खिलाफ मुकदमा चला लेकिन उस ने पहले ही दिन स्वीकार कर लिया कि उस ने अपनी बहनों की हत्या का अपराध किया है। हर हाथ को काम और मुहँ को रोटी का जमाना तभी आएगा जब हम चाहेंगे।
ReplyDelete.......
ReplyDelete........
खुशदीप भाई, मैंने बिलकुल यही हालत अपने देश में देखी है... दावत के बाद भूखे बच्चों को ज़मीन से उठाकर खाते हुए देखकर रोना आ गया था...
ReplyDeleteउफ्फ्फ अभी भी कितने लोग भर पेट खाना नहीं खा पाते हैं....
वाकई
ReplyDeletehadd hai..:(
ReplyDeleteऔर कम से कम भारत जैसे देश में ऐसी हर मौत के लिए सीधे सीधे घोटालेबाज नेताओं और जमाखोर पूंजीपतियों को जिम्मेदार ठहरा के उन पर हत्या का मुकदमा चलाया जाना चाहिए
ReplyDeleteबहुत पहले देखी थी सच मे हिल गये थे...
ReplyDeleteभयंकर है। हिले इसलिए नहीं कि मैने इससे बड़ी गरीबी देखी है। मैने देखा है लोगों को जानवर के मल से गेहूँ के दाने बीनते और इस प्रकार जुटाये अन्न से दो रोटी खाते हुए।
ReplyDeleteअन्न के लिये तरसते गरीब, अन्न का तिरस्कार करते अमीर..
ReplyDeleteउफ़ ………कितना वीभत्स सत्य है ………कब समझेंगे हम अन्न की कीमत ………बहुत पहले एक विज्ञापन आया करता था जिसमे अन्न की कीमत दर्शायी जाती थी जब कृष्ण द्रौपदी के बरतन से एक चावल का दाना खाते हैं और उस मे तृप्त हो जाते हैं ………कि अन्न के एक एक दाने की कितनी महत्ता है मगर ना जाने हम लोग कब ये समझेंगे?
ReplyDeleteत्रासद स्थिति है।
ReplyDeleteब्लॉग बुलेटिन में एक बार फिर से हाज़िर हुआ हूँ, एक नए बुलेटिन "जिंदगी की जद्दोजहद और ब्लॉग बुलेटिन" लेकर, जिसमें आपकी पोस्ट की भी चर्चा है.
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