बुधवार, 18 जनवरी 2012

पानी में अपने भी जहाज़ चला करते थे...खुशदीप





कहां गई वो बचपन की अमीरी हमारी,
जब पानी में अपने भी जहाज़ चला करते थे
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सिरहाने मीर के आहिस्ता बोलो,
अभी तक रोते-रोते सो गया है...
-मीर तक़ी मीर

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स्लॉग ओवर...

डॉक्टर मक्खन से...क्या प्रॉब्लम है...

मक्खन...तबीयत ठीक नहीं है मेरी...

डॉक्टर...शराब पीते हो...

मक्खन...सुबह का वक्त है, डॉक्टर...
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इसलिए मेरा छोटा पैग ही बनाना

13 टिप्‍पणियां:

  1. पानी में ही नहीं सभी जगह राज था। अनुपस्थिति बढ़ती जा रही है।

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  2. शीर्षक से कुछ और ही लगा था ...
    खैर वे भी क्या दिन थे ...

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  3. दिन तो अभी भी कहीं नही गए जी,
    पहले पानी में जहाज अब ख्वाबों में
    अपने हवाई जहाज चला करते हैं.

    सिरहाने बहुत जोर से बोलियेगा हजूर
    सोते सोते भी शोर सुनने की आदत जो है.

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