रविवार, 30 अक्तूबर 2011

पल दो पल या ज़िंदगी हर इक पल...खुशदीप




रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होती, ख्वाबों की और उमंगों की, मियादें ख़त्म नहीं होती...

कल यूहीं खाली बैठा अपनी पसंदीदा  फिल्म कभी-कभी के गाने सुन रहा था...साहिर लुधियानवी साहब ने इस फिल्म के लिए एक ही गाने को दो बार लिखा...मैं पल दो पल का शायर हूं...और फिर...मैं हर इक पल का शायर हूं...पहला वर्जन फिल्म के ओपनिंग सीन में तब आता है जब अमिताभ और राख़ी गुलज़ार कॉलेज में पढ़ रहे होते हैं...अमिताभ कॉलेज के स्टेज से गाते हैं...दूसरा वर्जन फिल्म के क्लाईमेक्स में ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी के दौरान बैकग्राउंड में बजता है...

फिल्म में अमिताभ और राखी एक दूसरे को पसंद करने के बावजूद एक दूसरे के नहीं हो पाते...ये कहते हुए अलग हो जाते हैं कि हमें कोई हक़ नहीं बनता कि अपने ख्वाब सच करने के लिए अपने मां-बापों के अरमानों का गला घोट दें...राखी की शादी शशि कपूर और अमिताभ की वहीदा रहमान से हो जाती है...वक्त गुज़रता है शशि-राखी का बेटा ऋषि कपूर और अमिताभ-वहीदा की बेटी नीतू सिंह (वहीदा के पहले रिश्ते से बेटी) एक दूसरे को चाहने लगते हैं...कुछ टर्न लेने के बाद ऋषि और नीतू की शादी होती है...वहां अमिताभ भी होते हैं और राखी भी...गाना बजता है लेकिन उसके बोल बिल्कुल उलट गए होते हैं...अब इन बोलों में आए बदलाव की खूबसूरती को आप खुद ही महसूस कीजिए...वाकई ज़िंदगी के कुछ पल कितने ख़ूबसूरत होते हैं, जिन्हें आदमी चाहे भी तो कभी भुला नही सकता...



मैं पल दो पल का शायर हूं...
पल दो पल मेरी कहानी है,
पल दो पल मेरी हस्ती है,
पल दो पल मेरी जवानी है,
मैं पल दो पल...


मुझसे पहले कितने शायर आए और आकर चले गए,
कुछ आहें भरक लौट गए कुछ नगमे गा कर चले गए,
वो भी इक पल का किस्सा थे, मैं भी इक पल का किस्सा हूं,
कल तुमसे जुदा हो जाऊंगा जो आज तुम्हारा हिस्सा हूं...
मैं पल दो पल...


कल और आएंगे नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले,
मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले,
कल कोई मुझको याद करे, क्यों कोई मुझको याद करे,
मसरूफ़ ज़माना मेरे लिए क्यों वक्त अपना बर्बाद करे,


मैं पल दो पल का शायर हूं...


 
 
----------------------------
 
मैं हर इक पल का शायर हूं...

हर इक पल मेरी कहानी है,
हर इक पल मेरी हस्ती है,
हर इक पल मेरी जवानी है,
मैं हर इक पल...


रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होती,
ख्वाबों की और उमंगों की, मियादें ख़त्म नहीं होती,
इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है,
इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है,
मैं हर इक पल...


तुझको मुझको जीवन अमृत, अब इन हाथों से पीना है,
इनकी धड़कन में बसना है, इनकी सांसों में जीना है,
तू अपनी अदाएं बख्श इन्हें मैं अपनी वफ़ाएं देता हूं,
जो अपने लिए सोची थीं कभी वो सारी दुआएं देता हूं,


मैं हर इक पल का शायर हूं...
...................................
 
 
 
 
सच में रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होती...
 
----------------------------------------------------------

इस लिंक पर मिलिए दुनिया के स्मार्टेस्ट कुत्ते से... 


A dog having 2 million Facebook fans



शनिवार, 29 अक्तूबर 2011

जादू तो बहुत देखे होंगे पर ऐसा नहीं...खुशदीप



 
 
इस लिंक पर जाकर खुद देखिए...

MAGIC DUO DOUBLE FANTASY


.....................................................................................................

अच्छी लाइफ के लिए टॉनिक चाहते हैं इसे पढिये
Six lovely thoughts can change your life...






गुरुवार, 27 अक्तूबर 2011

अख़बार की तरह हर ब्लॉगर ज़रूरी होता है...खुशदीप



दीवाली बीत गई...आज गोवर्धन है...अखबारों की छुट्टी की वजह से आज की सुबह बड़ी सून है...किसी चीज़ की अहमियत तभी पता चलती है, जिस दिन वो नहीं होती...अखबार पढ़ना रूटीन में शामिल है...लेकिन इस अखबार को हमारे घर तक पहुंचाने में कितनी मेहनत लगती है, उस पर हमने शायद ही कभी गौर किया हो...कड़कती ठंड हो या बारिश, तड़के तीन बजे ही हॉकर किस तरह उठ कर कलेक्शन सेंटरों पर पहुंचते हैं...अखबारों को तरतीब से लगाते हैं और फिर घर घर बांटने के लिए निकलते हैं...कभी अखबार लेट पहुंचे या कोई दूसरा अखबार गलती से डाल जाए तो हम हॉकर की खबर लगाने में देर नहीं लगाते...लेकिन अखबार लेट होने के पीछे कई बार ऐसे कारण भी होते है जिस पर इनसान का बस नहीं चलता, जैसे कलेक्शन सेंटर पर अखबार की गाड़ियों का ही लेट पहुंचना...

मुझे याद है जब मैं प्रिंट मीडिया में था तो मेरठ से नोएडा रोज़ अप-डाउन करता था...रात को दो-ढाई बजे ड्यूटी खत्म करने के बाद ट्रिब्यून अखबार की टैक्सी से मेरठ वापस जाया करता था...ट्रिब्यून की पचास-साठ कापियां ही मेरठ बंटने के लिए जाया करती थी...लेकिन इसके लिए भी अखबार ने इतना पैसा खर्च कर बिना नागा ये सर्विस जारी रखी हुई थी...अखबार को पहुंचाने के लिए डेडलाइन हुआ करती है...लेकिन सर्दियों में कई बार इतना कोहरा हो जाता है कि हाथ को हाथ भी नहीं सूझता...ऐसे में भी गाड़ी का मंज़िल तक पंहुचना कितना बड़ा ज़ोखिम होता है, इसका अहसास मुझे उन्हीं दिनों में हुआ था...उस गाड़ी का ड्राइवर कुलवंत इतना एक्सपर्ट था कि ऐसे हालात में भी उसने कभी अखबार लेट नहीं होने दिया...

ऐसे कई लोग हैं, जिनका हमें अहसास हो न हो, लेकिन वो हमारी सहूलियत के लिए चुपचाप कर्मपूजा में लगे रहते हैं...आज अगर आपको अखबार नहीं मिला, और उसकी कमी महसूस कर रहे हैं तो हॉकर, एजेंट, ड्राइवरों जैसे अनसंग हीरो को याद कीजिए, जिनकी वजह से हम रोज़ अपने आस-पास और दुनिया जहान की ख़बरों से रूबरू होते हैं...अखबारों का महत्व आज लोकल खबरों के लिए ज़्यादा है...देश-दुनिया के बड़े शहरों की ख़बरें तो ख़बरिया चैनलों से हर वक्त मिलती ही रहती हैं...लेकिन अपने आसपास क्या हो रहा है, इसके लिए आज भी अखबार से सस्ता और अच्छा साधन और कोई नहीं है...

आज जैसे अखबार की कमी महसूस हो रही है, ऐसा ही अहसास तब भी होता है जब ब्लॉग पर नियमित लिखने वाले ब्लॉगर नागा करते हैं...अब उन्हें रोज़ पढ़ते बेशक महसूस नहीं होता हो...लेकिन उनकी पोस्ट कई दिन तक न आने पर कहीं न कहीं उनकी कमी खलने लगती है...ऐसा ही अभी हुआ जब निर्मला कपिला जी स्वास्थ्य कारणों से ब्लॉग जगत से काफ़ी दिन तक दूर रहीं...ऊपर वाले का शुक्र है कि अब वो पहले से कहीं बेहतर हैं और ब्लॉग पर फिर से हाज़िरी का उन्होंने ऐलान कर दिया है...इसी तरह अदा जी भी पिछले कई महीनों से निजी प्रायोजन में व्यस्त हैं...मुझे यकीन है कि उनके मधुर गीतों, लेखन शैली, चुटकीली टिप्पणियों को जिस तरह मैं मिस कर रहा हूं, और सब ब्लॉगर भी कर रहे होंगे...शोभना ने पीएचडी में व्यस्त होने की वजह से ब्लॉगिंग को पूरी तरह तिलांजलि दे रखी है...महफूज़ मियां का भी ब्लॉगिंग से लिया अवकाश ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा...इसके अलावा कुछ ब्लॉगर ऐसे भी हैं जिन्होंने लिखने की फ्रीक्वेंसी पहले से बहुत घटा दी है...जैसे कि अपने सतीश सक्सेना भाई...ये हरदिलअजीज ब्लॉगर आजकल एक-एक पोस्ट को लिखने में पंद्रह-बीस दिन का गैप ले रहे हैं....

कुछ ब्लॉगर ऐसे हैं जो फेसबुक पर ज़्यादा सक्रिय होने की वजह से ब्लॉगिंग में कम दिख रहे हैं...जो ज़रूरी कामों में व्यस्त हैं, उनके लिए कामना है कि उन्हें अपने उद्देश्यों में पूरी कामयाबी मिले...लेकिन उनसे ये इल्तज़ा भी है कि वंस इन ए ब्लू मून कभी-कभार चाहे माइक्रोपोस्ट के ज़रिए ही सही, ब्लॉग पर हाज़िरी ज़रूर लगा दिया करें...उनके लेखन के फैंस का इतना तो हक़ बनता है भाई...क्योंकि...

हर एक ब्लॉगर ज़रूरी होता है...





............................................................................................................................

मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

खुशियों के दीप जलाते चलो...खुशदीप

खुशियों के दीप जलाते चलो,
ब्ल़ॉगिंग की गंगा बहाते चलो...


किसी दीये की लौ दूसरे दीयों को रौशन करने के बाद कम नहीं होती....इस लिए कभी दूसरों के काम आना, सुख-दुख बांटना और ज़रूरतमंदों की मदद करना बंद मत कीजिए...ऐसा करने से आप अपने जीवन को और अधिक सार्थक मायने देंगे...


दीपों का पर्व आप सब के जीवन में खुशियों और आनंद की बहार लाए...इसी कामना के साथ...



,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,




सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

ब्लॉगिंग, लाइफ़ और कूड़े के ट्रक का क़ानून...खुशदीप



एक दिन एक सज्जन ने एयरपोर्ट जाने के लिए टैक्सी ली...टैक्सी ड्राइवर कुशल प्रोफेशनल की तरह सारे नियमों का पालन करते हुए टैक्सी चला रहा था...अचानक साइड की पार्किंग लेन से एक कार निकल कर सामने आ गई...टैक्सी ड्राइवर ने पलक झपकते ही ब्रेक दबाए...कुछ इंचों से ही टैक्सी उस कार से भिड़ने से रह गई... कार चलाने वाले शख्स ने फौरन खिड़की से मुंह निकाल कर टैक्सी ड्राइवर को उलटा सीधा कहना शुरू कर दिया...टैक्सी ड्राइवर ने ये देखकर हल्की सी मुस्कान के साथ उस शख्स को वेव किया...

टैक्सी में जो सज्जन बैठे थे, उन्हें ये बड़ा अजीब लगा...फिर सोचा टैक्सी ड्राइवर कार चलाने वाले उस शख्स को पहले से जानता होगा..तब भी सज्जन से रहा नहीं गया...आखिरकार उन्होंने पूछ ही लिया...तुमने ऐसा बर्ताव क्यों किया...इस शख्स ने तुम्हारी कार का हुलिया बिगाड़ कर हम दोनों को अस्पताल भेजने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी...

इसके बाद उस टैक्सी ड्राइवर ने जो जवाब दिया, उसे उन हाईक्वालीफाइड सज्जन ने पूरी ज़िंदगी के लिए गांठ बांध लिया...बांध क्या लिया, उसे कूड़े के ट्रक का नियम नाम दे दिया...

दरअसल टैक्सी ड्राइवर ने कहा था...कई लोग कूड़े के ट्रक की तरह होते हैं...वो अपने में हताशा, निराशा, क्रोध, गाली-गलौज का कूड़ा साथ ले कर चलते हैं...जब ये कूड़ा उनके अंदर लबालब हो जाता है तो ये उसे बाहर गिराना शुरू कर देते हैं...कभी आप भी इन कूड़े के ट्रकों का निशाना बन सकते हैं...उनके इस कृत्य को आप व्यक्तिगत तौर पर न लें...बस एक प्यारी सी स्माइल दे, उनके  अच्छे होने के लिए विश करें और अपने काम पर आगे बढ़ जाएं...दूसरे के फेंके कूड़े को अपने पास रखने की भूल न करें...न ही उसे काम की जगह, घर और सड़क-गलियों पर दूसरे लोगों में फैलाएं...








निष्कर्ष...ज़िंदगी को सही मायने में जीने और खुश रहने के लिए ज़रूरी है कि दूसरे के फेंके कूड़े से अपना दिन बर्बाद मत होने दें...ज़िंदगी में दस प्रतिशत वो होता है जो आपको मिला है, नब्बे प्रतिशत वो होता है, जिस तरीके से आप खुद ज़िंदगी को लेते हैं....तो आज से अपने हर दिन को कूड़ा-मुक्त रखें, प्रसन्न रहें...फिर देखिए ज़िंदगी आनंदम् ही आनंदम्...


(based on e-mail )

सवाल...क्या ब्लॉगिंग में भी कूड़े के ट्रक के नियम को अपना कर नहीं चलना चाहिए...
------------------------------------------------

Wife's nose biter Husband



रविवार, 23 अक्तूबर 2011

बोल मत कि लब आज़ाद नहीं तेरे...खुशदीप



‘खिला नहीं सकते तो पैदा क्यों करते हो? मारना जुर्म है तो पैदा करना जुर्म क्यों नहीं है?’ एक पिता का क़त्ल करने वाली लड़की फांसी के फंदे पर झूलने से पहले ये सवाल पूछे तो समझा जा सकता है कि उसे कैसी भयावह परिस्थितियों से गुज़रना पड़ा होगा...पाकिस्तान के फिल्मकार शोएब मंसूर ने अपनी नई फिल्म बोल में यही सवाल शिद्दत के साथ उठाया है...

गीताश्री


मुझे इस फिल्म के बारे में नुक्कड़ पर गीताश्री की पोस्ट पढ़ कर जानकारी मिली...गीताश्री से शिकायत है कि वो अपने ब्लॉग पर बहुत कम लिखती हैं...लेकिन जब लिखती हैं तो कमाल करती हैं...एक ही पोस्ट में कई दिनों से न लिखे होने की सारी कसर पूरी कर देती हैं...इस बार उन्होंने फिल्म 'बोल' के कथानक पर कलम चलाई है...



फिल्म में एक बेटी अपने कट्टïर रूढि़वादी पिता के खिलाफ आवाज बुलंद करती हैं...महिलाओं को पुरुषों के सामने तुच्छ समझने की सदियों पुरानी परंपरा का मुकाबला करने का साहस करती हैं...हकीम साहब की दिल दहलाने वाली कहानी है...वह चाहते हैं कि उनकी पत्नी एक बेटे को जन्म दे जिससे भविष्य में उनका खानदान चलता रहे और उनका नाम रोशन रहे...इस चक्कर में उनकी पत्नी 14 बेटियों को जन्म देती हैं, जिनमें सात ही जिंदा रहती हैं... उनकी आठवीं औलाद ‘किन्नर’ है...फिल्म में भावनाओं का उफान गजब का है...बड़ी बेटी ( हुमैमा मलिक) और पिता (मंजर सेहबाई) की सोच हर मुद्दे पर अलग-अलग है...

बोल को सही तरह से समझने के लिए गीताश्री की इस पोस्ट को ज़रूर पढ़िए और वहीं अपनी राय देना मत भूलिए...बोल..कि बोलना है जरुरी
...................................................................................................................

Meet One Eyed Shark


शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

दूध का गिलास...खुशदीप


 एक गरीब लड़का स्कूल जाने से पहले दरवाज़े-दरवाज़े जाकर चीज़ें बेचा करता था...एक दिन उसकी ज़ेब में दस सेंट का सिक्का ही था और उसे भूख लग रही थी...उसने सोचा अब जो भी घर आएगा, वहां वो कुछ खाने को मांग लेगा...उसने दरवाज़े पर नॉक किया...एक सुंदर सी महिला ने दरवाज़ा खोला...लड़का हिचकिचा गया और खाने की जगह सिर्फ पानी पिलाने का ही आग्रह किया...लेकिन महिला को लड़के की शक्ल से ही पता चल गया कि वो भूख से परेशान है...महिला ने लड़के को बड़े गिलास में दूध लाकर दिया...



लड़के ने धीरे से दूध पिया और फिर पूछा...आपको मैंने कितने पैसे देने हैं...इस पर महिला का जवाब था...कुछ नहीं, मेरी मां ने मुझे सिखाया है, किसी ज़रूरतमंद की मदद के लिए कोई कीमत नहीं वसूलनी चाहिए...

इस पर लड़के ने कहा...तो मैं दिल से आपका शुक्रिया करता हूं...

उस लड़के ने घर से निकलते हुए न सिर्फ अपने को मज़बूत महसूस किया बल्कि उसका ईश्वर और मानवता में विश्वास भी बढ़ गया था...

कई साल बाद जिस महिला ने लड़के को दूध पिलाया था, वो गंभीर रूप से बीमार पड़ गई...स्थानीय डॉक्टरो को उसकी बीमारी ठीक से समझ नहीं आई...महिला को इलाज के लिए बड़े शहर में रेफर कर दिया गया...वहां महिला की दुर्लभ बीमारी को डिस्कस करने के लिए नामी स्पेशलिस्ट्स को बुलाया गया...उन्हीं में डॉ हॉवर्ड कैली भी थे...

अत्यंत व्यस्त रहने वाले डॉ कैली महिला के इंस्पेक्शन के लिए उसके वार्ड में आए....डॉ कैली ने बेहोश महिला के चेहरे को कुछ देर तक गौर से देखा...थोड़ी देर मौन रहने के बाद उन्होंने जूनियर डॉक्टर से कन्सल्ट किया...जूनियर डॉक्टर ने महिला के बचने की कोई उम्मीद नहीं बताई...डॉ कैली ने महिला के सारे पेपर अपने केबिन में मंगाए...फिर शुरू हुई महिला को बचाने की जंग...डॉ कैली की कड़ी मेहनत रंग लाई...महिला के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा...एक दिन महिला के हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने की बारी भी आ गई...


Dr. Howard Kelly


महिला के इलाज के फाइनल बिल साइन होने के लिए डॉ कैली के पास भेजे गए...डॉ कैली ने बिल देखने के बाद उसके साइड पर नोट लिखा और महिला के पास भेज दिया...महिला ये सोच कर परेशान थी कि अब उसका सब कुछ हॉस्पिटल के इस मोटे बिल को चुकाने में ही चला जाएगा...महिला ने बिल की रकम देखने के लिए डरते-डरते लिफाफा खोला...महिला की नज़र बिल के कोने में पेन से लिखी एक मोटी इबारत पर गई...लिखा था...








"बिल का पूरा भुगतान कई साल पहले हो चुका है, दूध के एक गिलास से...."

(Signed) Dr. Howard Kelly

महिला की आंखों में आंसू थे...आंसुओं के उसी धुंधलके के छटने पर रूम के दरवाजे पर हाथ में गुलाब लिए डॉ कैली खड़े नज़र आए...

(नोट- आप कुछ अच्छा करते हैं तो एक दिन उसका फल मिलता ज़रूर है सूद के साथ...आपको न सही किसी और को ही सही...लेकिन ये दुनिया तो रहने के लिए कुछ बेहतर बनती है...

है....न...)
------------------------------------------
MEET ONE EYED SHARK

गुरुवार, 20 अक्तूबर 2011

भारत 15 साल बाद...खुशदीप





INDIA AFTER 15 YEARS...................

...............................................................................................

...............................................................................................

...............................................................................................


1 जनवरी 2025

भारतीय प्रधानमंत्री अमेरिका को आर्थिक सहायता पैकेज देने के लिए वाशिंगटन डीसी के दौरे पर...


स्विट्जरलैंड और लग्ज़मबर्ग जैसे देशों को कहीं पीछे छोड़ भारत दुनिया का सबसे अमीर देश...


अमेरिका में हवेली में छुपा दाऊद इब्राहिम भारत की एनआईए कार्रवाई में मारा गया...


स्कॉटलैंड यार्ड के आला अधिकारी यूपी पुलिस से रिफ्रेशर ट्रेनिंग लेने के लिए लखनऊ में ...


1 भारतीय रुपया= 76 अमेरिकी डॉलर ...


भारत में पेट्रोल 10 रुपये लीटर...


डीज़ल 7 रुपये लीटर ...


सोना 500 रुपये प्रति दस ग्राम...

-----------------------------------------------

ये सब हक़ीकत में बदल सकता है अगर आप मक्खन की भविष्य के प्रधानमंत्री की दावेदारी का समर्थन करें...

----------------------------------------

क्यों ? क्या देश के लोगों को सपने दिखाने का अधिकार सिर्फ राजनेताओं का है...अब तो गैर राजनीतिक लोग भी देश से भ्रष्टाचार मिटा कर रामराज्य लौटने के सपने दिखाने लगे हैं...अब सपने सपने ही रहने हैं तो क्यों न बड़े सपने दिखाए जाएं...मक्खन महाराज का कहना है कि ये क्या बिजली, सड़क, पानी जैसी छोटी छोटी तुच्छ चीज़ों का ख्वाब पाल कर अपना स्टैंडर्ड गिराते हो...सपने देखो तो बड़े देखो...इसमें कौन सा आप की जेब से कुछ जाना है...

SO VOTE, SUPPORT & ELECT MAKKHAN THE GREAT....



HAPPY DREAMING.....
--------------------------------------------




बुधवार, 19 अक्तूबर 2011

अन्ना ! लोहे को लोहा ही काट सकता है...खुशदीप




टीम अन्ना के लिए मंगलवार बड़ा घटनापूर्ण रहा...एक ही दिन में ये सब कुछ घटा...

सुबह-
रालेगण सिद्धि गांव के सरपंच जयसिंह राव मापारी का राहुल गांधी से मिले बिना गांव लौटना....


दोपहर-
टीम अन्ना की कोर कमेटी के दो सदस्यों-गांधीवादी पी बी राजगोपाल और वाटरमैन राजेंद्र सिंह का इस्तीफ़ा


शाम-
लखनऊ में टीम अन्ना की कोर कमेटी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर चप्पल चलना...

रालेगण सिद्धि गांव के सरपंच के दिल्ली से बैरंग लौटने का मैं पिछली पोस्ट में भी ज़िक्र कर चुका हूं...इसलिए आगे बात बढ़ाता हूं...एकता परिषद के बैनर तले गरीब मजदूर आदिवासियों के लिए ज़मीन के हक़ की लड़ाई लडने वाले राजगोपाल मंगलवार को केरल में थे...वहीं से टीम अन्ना कोर कमेटी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर अलग होने की जानकारी दे दी...रेमन मैगासायेसाये पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने टीम से अलग होते वक्त कहा कि उन्होंने कोर कमेटी की सदस्यता के लिए कोई आवेदन नहीं किया था, इसलिए इस्तीफ़ा देने की भी कोई ज़रूरत नहीं है...राजगोपाल और राजेंद्र सिंह दोनों ने ही भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के राजनीतिक दिशा में मुड़ जाने को कारण बताते हुए खुद को टीम अन्ना से अलग किया...ये भी कहा कि हिसार में पार्टी विशेष के खिलाफ वोट न देने की अपील करने का फैसला लेने से पहले कोर कमेटी में उनकी राय नहीं जानी गई थी...इसी बात पर टीम अन्ना के अहम सदस्य जस्टिस संतोष हेगड़े भी नाखुशी जता चुके हैं...

चलिए मान लेते हैं इतनी बड़ी कमेटी है, इतना बड़ा आंदोलन है, सभी सदस्यों को साथ लेकर चलना संभव नहीं हो सकता...मतभेद होंगे तो कुछ लोग अलग भी होंगे....लेकिन सवाल यहां भी ये हो सकता है कि टीम अन्ना की तरफ से सारे रणनीतिक फैसले क्या दो-तीन लोग ही ले रहे हैं और उन पर बिना कोर कमेटी में आम सहमति बनाए अमल भी शुरू कर दिया जाता है...शायद यही स्थिति भ्रम पैदा कर रही है...और लगता है रालेगण में बैठे अन्ना तक भी सही संदेश नहीं पहुंच पाता...प्रशांत भूषण का उदाहरण सामने है...कश्मीर पर प्रशांत के बयान को लेकर अन्ना उनकी कोर कमेटी से विदाई के हक़ में नज़र आते हैं...लेकिन ऐसा हो नही पा रहा है...

अब बात अरविंद केजरीवाल को लखनऊ में चप्पल से निशाना बनाने की...जालौन के जितेंद्र पाठक ने ये हरकत की...जितेंद्र पाठक की धुनाई कर पुलिस के हवाले कर दिया गया...मंच से अरविंद ने चप्पल चलाने वाले पाठक को माफ करने का भी ऐलान किया...बाद में यूपी पुलिस ने दावा किया कि जितेंद्र पाठक ने खुद को कांग्रेस सेवा दल का पूर्व सदस्य बताया है...पुलिस के मुताबिक पाठक का कहना था कि अरविंद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं, इसीलिए उसने उन पर निशाना साधा...एक हफ्ता पहले दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण के चैंबर में उन पर हमला किया गया था तो हमलावरों में से एक तेजिंदर सिंह बग्गा के बारे में कहा गया था कि वो कभी भारतीय जनता युवा मोर्चा से जु़ड़ा रहा था...कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने फौरन बग्गा के इस कनेक्शन को तूल देने में देर नहीं लगाई थी...आज लखनऊ में केजरीवाल पर चप्पल चलाने वाले पाठक पर यूपी की बीएसपी सरकार ने मौके को भुनाने में देर नहीं लगाई...देर रात को ही डीआईजी से प्रेस कान्फ्रेंस करा के पाठक के कांग्रेस कनेक्शन के बारे में बताया...

टीम अन्ना के आमंत्रित सदस्य सुनीलम ने रालेगण सिद्धि में केजरीवाल पर हमले के लिए कांग्रेस पर ही उंगली उठाई...अन्ना ने खुद भी कहा है कि वो सेहत ठीक होने पर खुद भी लखनऊ जाएंगे...अन्ना रालेगण में मीडिया वालों के लगे परमानेंट मेले से खुद ही परेशान हैं...दिन-रात के सवालों से तंग अन्ना ने मौन पर जाना ही बेहतर समझा...

खैर ये तो सब चलता ही रहेगा...अब एक दो ज़रूरी सवालों पर बात कर ली जाए...केजरीवाल कह रहे हैं कि यूपी में मायावती और मुलायम के हाथ में कुछ नहीं है, जनलोकपाल बिल पास कराना सिर्फ सोनिया गांधी के हाथ में है...इस पर मेरा कहना है- मुलायम और मायावती के हाथ में क्या नहीं है...दोनों के पास लोकसभा में 43 सीटें हैं...अगर दोनों आज बाहर से दिया जा रहा यूपीए को समर्थन हटा दें तो आज ही मनमोहन सिंह सरकार गिर जाएगी...फिर टीम अन्ना इन्हें क्यों बख्श रही है...

दूसरी बात राजनीति से टीम अन्ना को इतना परहेज़ क्यों...लोहे को जब लोहा ही काट सकता है तो फिर क्यों नहीं खुद भी राजनीति में उतरा जाए...राजनीति के गटर को साफ़ करना है तो गटर में उतरना ही पड़ेगा...बाहर खड़े रह कर शोर मचाते रहने और राजनीतिक दलों से खुद ही अपनी गंदगी साफ करने की उम्मीद करना बेमानी है...मेरी राय में तो हिसार में टीम अन्ना को कांग्रेस का विरोध करने की जगह खुद अपना उम्मीदवार खड़ा करना था...संसद में चाहे टीम अन्ना का एक ही आदमी पहुंचे, सदन में आवाज़ तो उठाएगा...अब भी टीम अन्ना रणनीति बदले और आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में प्रतीकात्मक तौर पर कुछ सीटों पर वहीं से लोकल ईमानदार आदमियों को चुनकर चुनाव लड़ाए...अगर जनता वाकई इन लोगों के साथ आ गई तो चुनाव लड़ने के लिए खर्च के इंतज़ाम के साथ वोट भी देगी...जिसे जनता जिताने पर आ जाए उसे कोई नहीं हरा सकता...इसके आगे बाहुबल और धनबल भी हार जाते हैं...

तीसरा सवाल मेरी टीम अन्ना से पहले से ही एक आशंका से जु़ड़ा है...जिसकी वजह से उस पर खांटी राजनेता निशाना साध रहे हैं...और वो है सभी वर्गों को साथ लेकर चलना...अगर टीम अन्ना अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और दलितों के कल्याण को लेकर खुल कर अपना चिंतन नहीं जताती तो इन वर्गों में उसके लिए आशंकाएं बनी रहेंगी और वो अन्ना के पीछे लगे लोगों को खाए पिए अघाए लोगों का ही अखाड़ा मानते रहेंगे...

-------------------------------------------------------------

मक्खन की दीवाली...खुशदीप


मंगलवार, 18 अक्तूबर 2011

अन्ना कृष्ण हो सकते हैं पांडव कहां से लाएं...खुशदीप


जिसका आगाह मैंने किया था, वही टीम अन्ना के साथ हो रहा है...सियासी तिकड़में अन्ना हज़ारे को घेरती जा रही हैं...मैंने बीच में आलोचना की कसौटी पर टीम अन्ना को रखकर कुछ लिखने की कोशिश की थी तो काफी कुछ सुनने को मिला था...वो ऐसा दौर था, जब मैं अन्ना हूं के शोर में कोई कुछ सुनने को तैयार ही नहीं था...मैंने तब भी कहा था कि लोकतंत्र में माइवे या हाइवे के ट्रैक पर चलने से कभी मंजिल तक नहीं पहुंचा जा सकता...मैं अब भी इसी बात को दोहरा रहा हूं...

महाभारत की तरह आज कलयुग में युद्ध लड़ा जाना है...लेकिन यहां कौरव और कोई नहीं बल्कि भ्रष्टाचार, सत्तालोलुपता, नेताओं का अहंकार, कॉरपोरेट का लालच, भूख, गरीबी, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, साम्प्रदायिकता, तालीम में भेदभाव, जातपात, किसानों की दुर्दशा, प्रांतवाद जैसे सौ दुश्मन है....इसके लिए किसी पार्टी विशेष पर हमला बोलने से ही बात बनने वाली नहीं...कांग्रेस जाएगी, दूसरी पार्टी आ जाएगी, सांपनाथ जाएंगे, नागनाथ आ जाएंगे...अन्ना कुछ करें न करें, कांग्रेस को तो उसका अहंकार ही ले डूबेगा...

अन्ना के गांव रालेगण सिद्धि के सरपंच जयवीर सिंह मापारी और अन्ना के निजी सहायक सुरेश पठारे को दिल्ली बुलाकर युवराज राहुल गांधी से मुलाकात का वक्त न मिलना अपने आप में ही सब कुछ कह देता है...अब केरल के सांसद पी टी थॉमस सफाई देते फिर रहे हैं कि गफलत के लिए वो ज़िम्मेदार है...वो सही से कम्युनिकेट नहीं कर पाए...या तो राहुल जानबूझ कर नहीं मिले या फिर उनके सिपहसालार ही इतने नाकारा है कि किसी भी चीज़ को सही तरह से हैंडल नहीं कर पा रहे, सही तरह से मैसेज नहीं दे पा रहे और नतीजा कांग्रेस की पहले से ही गोता लगाती हुई छवि को भुगतना पड़ रहा है...अन्ना ने रालेगण के सरपंच को फौरन गांव लौटने को कहा है...लेकिन इसी बीच एक खबर ऐसी भी आ रही है कि अन्ना ने राहुल को रालेगण आकर खुद विकास कार्यों का जायज़ा लेने के लिए न्यौता भेजा है....अन्ना के भतीजे विनायकराव देशमुख ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में अन्‍ना की ओर से कहा, ‘अन्‍ना का संदेश साफ है कि राहुल का रालेगण में स्‍वागत है... अन्‍ना को नई पीढ़ी के नेतृत्‍व को लेकर राहुल से काफी उम्‍मीदें हैं...’ गौरतलब है कि विनायक राव महाराष्‍ट्र में यूपीए की बड़ी योजनाओं के क्रियान्‍वयन के कांग्रेस प्रभारी भी हैं... उन्‍होंने अन्‍ना हजारे के आरएसएस से संबंधों को भी सिरे से खारिज किया...हालांकि उन्‍होंने कहा कि हजारे को एनडीए के शासनकाल में राज्‍यसभा सीट की पेशकश की गई थी लेकिन उन्‍होंने ठुकरा दिया था...
अन्ना खुद रालेगण गांव के ही पद्मावती मंदिर के निकट एक वट वृक्ष के नीचे बैठे हैं और उनके मौन व्रत का मंगलवार को तीसरा दिन है...



अब फिर लौटता हूं अन्ना के श्रीकृष्ण की तरह युद्ध में सारथी होने पर...हिसार के नतीजों के बाद टीम अन्ना बहुत खुश है...जता रही है कि कांग्रेस उसके रोडमैप पर नहीं चली तो देश भर में जब भी चुनाव होंगे उसके अरमानों को हिसार की तरह ही कुचल दिया जाएगा...अब ये बात दूसरी है कि हिसार से बीजेपी के समर्थन से हरियाणा जनहित कांग्रेस के जो कुलदीप विश्नोई जीते हैं, वही टीम अन्ना को श्रेय देने के लिए तैयार नहीं है...टीम अन्ना की तरफ से भी विरोधाभासी संदेश जनता में जा रहे है...पहले अन्ना ने कहा था कि वो जनचेतना जगाने के लिए उन राज्यों का दौरा करेंगे जहां विधानसभा चुनाव होने हैं...अन्ना अब इसे टालकर मौनव्रत पर बैठ गए हैं...लेकिन अन्ना टीम के दो अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया ज़रूर अब भी यूपी के दौरे पर निकले हुए हैं...अन्ना कह रहे हैं कि कांग्रेस जनलोकपाल बिल शीतकालीन सत्र में पास करा दे तो वो उसके बाद कांग्रेस का भी समर्थन करने के लिए तैयार है...

अन्ना टीम में पेंच प्रशांत भूषण को लेकर भी काफी दिखे...कश्मीर पर जनमत संग्रह संबंधी प्रशांत के बयान के बाद अन्ना के हावभाव ऐसे ही दिख रहे हैं कि वो प्रशांत को अपनी कोर कमेटी से बाहर का रास्ता दिखाने के हक़ में हैं...लेकिन अन्ना के बिना ही केजरीवाल, सिसौदिया नोएडा में कोर कमेटी की बैठक कर ऐलान कर देते हैं कि प्रशांत कोर कमेटी में बने रहेंगे...बैठक में किरण बेदी और प्रशांत भूषण विदेश में होने की वजह से हिस्सा नहीं ले सके...प्रशांत के पिता शांति भूषण ज़रूर बैठक में मौजूद रहे...अन्ना ने अब भी यही संकेत दिए हैं कि प्रशांत को टीम में रखने या न रखने पर विचार किया जाएगा...उधर जस्टिस संतोष हेगड़े भी कह चुके हैं कि हिसार में टीम अन्ना को कांग्रेस को वोट न देने की अपील से बचना चाहिए था...रामलीला मैदान पर बढ़-चढ़ कर दिखने वाली मेधा पाटकर दो दिन पहले श्रीनगर में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट को हटाने के लिए रवाना होने वाली रैली को हरी झंडी दिखा रही थीं...

टीम अन्ना के ये कैसे पांडव है भाई जो पहले तो स्वघोषित तौर पर देश के कर्णधार होने का दावा कर बैठे और अब खुद ही अपनी ढपली, अपने राग वाले संकेत दे रहे हैं...कहीं राजनीति को निशाना बनाकर राजनीति को साधने की राजनीति ही तो टीम अन्ना के कुछ सदस्यों के मन में नहीं है...अगर ऐसा है तो फिर तो भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई का राम ही मालिक है...

रविवार, 16 अक्तूबर 2011

पति-पत्नी के रिश्ते का सच...खुशदीप

कल अपनी पोस्ट पर करवा-चौथ के कुछ क्रैकर्स छोड़े थे...अब उसके इफैक्ट को न्यूट्रलाइज़ करना भी ज़रूरी है...चलिए आज पति-पत्नी के रिश्ते का एक सच बता देता हूं...ऐसा सच जिसे आसान से एक प्रयोग से आप भी आज़मा सकते हैं...

अपनी बात को समझाऊं, इससे पहले एक सवाल...

शादी की अंगूठी हमेशा चौथी उंगली (Ring Finger) यानि अनामिका में ही क्यों पहनी जाती है...चीन में इसको बड़े खूबसूरत और तार्किक ढंग से समझाया जाता है...हाथ की हर उंगली का प्रतीक किसी रिश्ते से होता है... जैसे...

अंगूठा या Thumb-  माता-पिता


तर्जनी या Index Finger-  भाई-बहन


मध्यमा या Middle Finger-  खुद की प्रतीक


अनामिका या Ring Finger-  जीवन-साथी (पति या पत्नी)


कनिष्ठा या Little Finger-  बच्चे


चलिए अब उंगलियों के रिश्तों से संबंध को समझ लिया...





अब दिए हुए चित्र के मुताबिक दोनों हाथ की हथेलियों को सामने लाएं और बीच की उंगलियों को मोड़ कर साथ लगाएं, फिर अंगूठों और बाकी तीन-तीन उंगलियों के सिरों को भी आपस में जुड़ने दें...

अब माता-पिता के प्रतीक अंगूठों को अलग करने की कोशिश करें...आसानी से हो जाएंगे क्योंकि माता-पिता पूरी ज़िंदगी आपके साथ नहीं रह सकते...उन्हें कभी न कभी आपको एक दिन छोड़कर जाना ही होगा...

अब दूसरे रिश्ते की बारी...अंगूठों को पहले के तरह ही जोड़ कर इंडेक्स फिंगर या तर्जनियों को अलग कीजिए...ये भी आसानी से अलग हो जाएंगी...यानि भाई-बहन भी साथ नहीं रह सकते...उनके अपने परिवार होंगे, उन्हें अपनी ज़िंदगी जीनी होगी...

अब तर्जनी को फिर जोड़ लीजिए और सबसे छोटी उंगलियों यानि कनिष्ठाओं को अलग करने की कोशिश कीजिए...ये भी खुल जाएंगी...क्योंकि आपके बच्चों को भी एक दिन शादी कर घर बसाने होंगे और वो अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीना पसंद करेंगे...

अब छोटी उंगलियों को फिर जोड़ लीजिए...अब अपनी अनामिका यानि रिंग फिंगर (चौथी उंगलियों) को अलग करने की कोशिश कीजिए...

बताइए क्या अलग होती हैं...उन्हें थोड़ा सा भी अलग करने के लिए कितना ज़ोर लगता है...

यही है पति-पत्नी का रिश्ता...
----------------------------------------------------------



अब देखिए सिलसिला फिल्म के क्लाईमेक्स से पहले का ये दृश्य...फिल्म में रेखा से प्रेम के बावजूद हालातवश  अमिताभ को जया से शादी करनी पड़ती है...लेकिन शादी के बाद भी रेखा से मिलने का सिलसिला जारी रहता है...फिल्म में रेखा के साथ अमिताभ सिख दोस्त के फंक्शन में मेहमान के नाते जाते हैं...यहां सब पति-पत्नी जोड़ों में गुरु ग्रन्थ साहिब की आरती करते हैं... रेखा के पास बैठे होने के बावजूद पत्नी जया ही अमिताभ के ज़ेहन में घूम रही होती है...यहीं फिल्म में इस्टेब्लिश होता है कि अग्नि के सामने सात फेरे लेकर लिए गए रिश्ते से ऊपर कुछ नहीं हो सकता...अमिताभ जया के पास लौट जाते हैं...

शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

करवा-चौथ क्रैकर्स...खुशदीप



दिन करवा चौथ का है...बाइचांस आज मेरा भी ड्यूटी से ऑफ है...अब हर छुट्टी वाले दिन बच्चों के साथ बच्चा बन कर धमाल करने की आदत है...लेकिन आज थोड़ा सब्र से काम करना पड़ रहा है...वरना हर घंटे बाद कुछ न कुछ डिलीशियस खाने की मांग होती रहती थी...लेकिन पत्नीश्री के उपवास की वजह से आज डिमांड कम कर रखी हैं...ज़्यादातर रेडीमेड खाने की चीज़ों से ही काम चलाया जा रहा है...देर शाम चांद साहब के दीदार होने के बाद ही छुट्टी वाले दिन के खाने के सारे अरमान निकाले जाएंगे...

करवा चौथ पर आज मैसेज भी बहुत बढ़िया आ रहे हैं...किसी ने लिखा...आप दोनों का सात जन्मों तक यूहीं साथ बना रहे...मैंने उन सज्जन को रिप्लाई किया...जनाब, मैंने आपका क्या बिगाड़ा है...

फिर एक मैसेज आया जिसमें पत्नियों को अजय कुमार झा स्टाइल वनलाइना में परिभाषित करने की कोशिश की गई है...Wife is a world's fastest money reducing agent...कुछ भी हो जनाब ने बात तो पते की लिख भेजी है...

अब एक और मैसेज पर गौर फ़रमाइए...

पत्नी लंगर के प्रसाद जैसी होती है, जिसमें चाहते हुए भी कोई नुस्ख नहीं निकाल सकते, श्रद्धा और मजबूरी से चुपचाप छकते (खाते) जाए और प्रभु के गुण गाते रहें...

इंटरनेटी युग है इसलिए ऑनलाइन सॉवी एक महाशय का ये मैसेज भी देखिए...

Steve Jobs is started working with God to make i-wife : Beauty with brains and desperately needed Mute Button...

करवा चौथ पर गिफ्ट की भी बात होती है तो एक बिजनेसमैन पति महाराज पत्नी के लिए डायमंड का सेट लेकर आए...नतीजे में पत्नी छह महीने तक पति से नहीं बोली...एक्चुअली गिफ्ट लाने से पहले दोनों में यही डील हुई थी...


इस मैसेज पर आप क्या कहेंगे...

एक शादी की पार्टी में अचानक डीजे ने एनाउंस किया...जितने विवाहित पुरुष हैं वो सब उस शख्स के पास जाकर खड़े हो जाएं जिसने उनकी ज़िंदगी को खुशगवार बनाया है...दो तीन मिनट में ही काउंटर पर ड्रिंक सर्व कर रही बार-टेंडर के पास जमघट लगने से उसके पिसने जैसी नौबत आ गई...

पतिदेव भाईयों ऊपर वाला सब पढ़ कर खुश होने से पहले सोनल रस्तोगी का फेसबुक वॉल पर लिखा ये मैसेज ज़रूर याद रखिएगा...

सौ सुनार की एक लुहार की...

सभी विवाहित भाइयों को ये सूचित किया जाता है कि आज के दिन सावधानी और धीरज से काम लें...भूखी शेरनी ज़्यादा ख़तरनाक होती है....हैप्पी करवा चौथ!! ;)

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

साधना की गिरफ्तारी...देखी दुनिया की यारी...खुशदीप


झुमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में....फिल्म मेरा साया में पर्दे पर गाने वाली अभिनेत्री साधना की तो याद होगी आपको...हम दोनों, मेरा साया, इंतकाम, अनीता, मेरे महबूब, राजकुमार, एक मुसाफिर एक हसीना, गीता मेरा नाम, वक्त, आरजू जैसी बेशुमार हिट फिल्में देने वाली साधना 70 साल की उम्र में मुंबई में गुमनामी की ज़िंदगी जी रही हैं...साधना का माथे पर बालों की लट वाला स्टाइल आज भी साधना कट के नाम से मशहूर है...

साधना के नाम से कल अचानक एक न्यूज़ पैच देखकर हैरानी हुई...साधना को कल मुंबई में गिरफ्तार किया गया और फिर पांच हज़ार रुपये की ज़मानत पर रिहा कर दिया गया...पिछले साल साधना ने अगस्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि सांताक्रूज में जिस तीन हज़ार वर्ग फीट के फ्लैट में वो रह रही हैं, उसे खाली करने के लिए उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई...साधना इस घर में कई दशकों से बतौर किराएदार रह रही हैं...उनके पति निर्माता-निर्देशक आर के नैयर की सोलह साल पहले मौत हो चुकी है...साधना अब इस घर में अकेले ही रहती हैं...

साधना तिमंजिला संगीता बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर स्थित जिस घर में रह रही हैं उसका मालिकाना हक मशहूर गायिका आशा भोसले के पास है...इसी बिल्डिंग की पहली मंजिल पर बीते ज़माने की ही अभिनेत्री बेबी नाज़ रहती हैं...सबसे ऊपरी मंजिल पर रहने वाले बिल्डर यूसुफ लकड़ावाला से साधना का कानूनी वाद चल रहा है...साधना की शिकायत के मुताबिक यूसुफ लकड़ावाला बिल्डिंग को नए सिरे से बनाना चाहता है और उसने फ्लैट खाली करने के लिेए धमकाते हुए कहा था कि अगर ऐसा नहीं किया तो साधना की लाश के टुकड़े भी किसी को नहीं मिलेंगे....साधना का आरोप है कि उनके घर पर पत्थर भी बरसाए गए....

साधना के इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए यूसुफ लकड़ावाला ने बांद्रा मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में अवमानना का केस दर्ज करा दिया...यूसुफ लकड़वाला के वकील के मुताबिक साधना को धमकाने की शिकायत पर पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन की जांच की थी और साधना की शिकायत को झूठा पाया था...इसी मामले में साधना को दो बार जून और अगस्त में कोर्ट में पेश होने का समन जारी किया गया था...लेकिन साधना बीमारी को कारण बताते हुईं पेश नहीं हुईं...इसी साल 18 अगस्त को साधना ने अदालत में अपने वकील से संदेश भिजवाया कि वो बीमार रहती हैं इसलिए उन्हें पेशी से छूट दी जाए....यूसुफ लकड़ावाला ने बांद्रा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर कहा कि साधना झूठ बोल रही हैं और उन्हें कार्टर रोड के एक निजी क्लब में चार घंटे तक ताश खेलते हुए यूसुफ की लड़की साना ने देखा और उसकी वीडियो फिल्म भी बना ली...जिसे शिकायत के साथ सबूत के तौर पर पेश किया गया... साधना आखिरकार कल कोर्ट में पेश हुईं तो उन्हें तकनीकी तौर पर गिरफ्तार दिखाकर पांच हज़ार रुपये की ज़मानत पर रिहा कर दिया गया...अब साधना को 15 दिसंबर को अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है...

पिछले साल इस मामले ने तूल पकड़ा था तो बॉलीवुड से कोई साधना की मदद करने के लिए आगे नहीं आया था...सिवाय सलमान ख़ान के....सलमान खान ने कहा था कि साधना आंटी को तंग करने वालों को छोड़ेगे नहीं...लेकिन कल जब साधना को पकड़ा गया तो सलमान अपनी फिल्म एक था टाईगर की शूटिंग के लिए देश से बाहर थे...

साधना की इस कहानी को पढ़ने के बाद लगा कि सितारों की चमकती-दमकती दुनिया अपना वक्त बीतने के बाद कितनी बेरंग और फीकी हो जाती है...जब तक साधना का सूरज चढ़ कर बोला, उन्हें सलाम बजाने वालों की कमी नहीं रही होगी....लेकिन अब उम्र के इस पड़ाव पर कोई हाल पूछने वाला भी नहीं...करीना कपूर और करिश्मा कपूर की मां और पूर्व अभिनेत्री बबीता साधना की चचेरी बहन हैं...पता नहीं उन्होंने भी साधना का हाल लिया या नहीं...स्टारडम खो जाने के बाद सितारों का अपना खाली वक्त गुज़ारना भी समस्या होता होगा...ऐसे में कोई शराब को गले लगा लेता है तो कोई ताश को अपना साथी बना लेता है...बचाखुचा पैसा खत्म हो जाने के बाद पुराने ज़माने के कई बड़े नामों को अपने आखिरी दिन गुरबत और मुफलिसी में भी काटते देखा गया है...गुरुदत्त ने इसी का अक्स फिल्म कागज के फूल में शिद्दत के साथ दिखाया था...देखी ज़माने की यारी, बिछुड़े सभी बारी-बारी...

आजकल के सितारे बहुत समझदार है...अपने कल के लिए पहले से ही बहुत सोच कर चलते है और दूसरे कामों में अच्छा निवेश करके रखते हैं जिससे भविष्य में अपनी और परिवार की ज़िंदगी मज़े से चलती रहे...अब पता नही साधना की माली हालत कैसी है...लेकिन साधना के कठिनाई के दिनों में सलमान ख़ान का मदद के लिए आगे आना, अच्छी बात है...देखना है सलमान विदेश से लौटने के बाद अपनी साधना आंटी के लिए क्या करते हैं...फिलहाल साधना की फिल्म इश्क पर ज़ोर नहीं का ये मेरा पंसदीदा गाना सुनिए...



गुरुवार, 13 अक्तूबर 2011

प्रशांत भूषण की पिटाई और 'दूसरी आज़ादी' के साइड इफैक्ट्स...खुशदीप



पहला दृश्य...

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी मिशन के सलाहकार ताहिर हुसैन अंद्राबी ने मंगलवार को यूएन महासभा में बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का कभी अभिन्न अंग नहीं रहा है और कश्मीर घाटी में शांति चुनाव से नहीं संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के मुताबिक जनमत संग्रह से आएगी...

दूसरा दृश्य...

दिल्ली में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में मशहूर वकील और टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण की ताबड़तोड़ लाइव पिटाई...हमला करने वाला एक शख्स 24 साल का इंद्र वर्मा मौके पर ही धरा गया...दो हमलावर भाग गए...उनके नाम तेजिंदर सिंह बग्गा और विष्णु बताए जा रहे हैं...इंद्र वर्मा का कहना है कि प्रशांत भूषण पर इसलिए हमला किया क्योंकि उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान को देने की बात की थी...ये लोग प्रशांत भूषण के 25 सितंबर को वाराणसी में दिए गए एक बयान से नाराज़ थे....

इन दोनों दृश्यों का यहां उल्लेख इसलिए कर रहा हूं कि यूएन में पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे को उठाने को किसी ने गंभीरता से लिया हो या न हो लेकिन प्रशांत भूषण की पिटाई के बाद कश्मीर का मुद्दा पूरी दुनिया के नोटिस में ज़रूर आ गया होगा...यानि कश्मीर पर आज भारत के रवैये की वही तस्वीर पूरी दुनिया में गई जिसका ढिंढोरा कश्मीरी अलगाववादी या पाकिस्तान बरसों से पीटते आ रहे हैं...यही संदेश गया कि कश्मीर के हित की जो बात करता है उसका वैसे ही दमन किया जाता है जैसे कि प्रशांत भूषण का दिल्ली में किया गया...

अब उस बयान की पूरे संदर्भ में बात कर ली जाए जो प्रशांत भूषण ने 25 सितंबर को वाराणसी में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में कश्मीर के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिया था...ये रहा वो बयान...

जम्मू-कश्मीर को बल के ज़रिए देश में रखना हमारे लिए घातक होगा...देश की सारी जनता के लिए घातक होगा...सिर्फ वहां की जनता के लिए नहीं पूरे देश की जनता के हित में नहीं होगा...मेरी राय ये है कि हालात वहां नार्मलाइज़ करने चाहिए...आर्मी को वहां से हटा लेना चाहिए...आर्म्ड फोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट को खत्म करना चाहिए...और कोशिश ये करनी चाहिए कि वहां की जनता हमारे साथ आए...अगर उसके बाद भी वो हमारे साथ नहीं है...अगर वहां की जनता फिर भी यही कहती है कि वो अलग होना चाहते हैं...मेरी राय ये है कि वहां जनमत संग्रह करा के उन्हें अलग होने देना चाहिए...

प्रशांत भूषण के इसी बयान की वजह से उनकी वहशियाना अंदाज़ में थप्पड़-घूंसे-लात से पिटाई की गई...



ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि हमला करने के पीछे असल में कौन से संगठन का हाथ है और उसका असली मकसद क्या था...पकड़े गए शख्स इंदर वर्मा ने खुद को श्रीराम सेने की प्रदेश इकाई का मुखिया बताया है...जबकि फेसबुक और ब्लॉग पर सक्रिय भगतसिंह क्रांति सेना के प्रमुख तेजिंदर सिंह बग्गा ने हमले के लिए अपने संगठन को ज़िम्मेदार ठहराया है...प्रशांत भूषण पर हमला करने के बाद जो दो शख्स फरार होने में कामयाब रहे, उनमें विष्णु नाम के हमलावर के साथ खुद तेजिंदर को भी शामिल बताया जा रहा है... 

जहां तक श्रीराम सेने की बात है तो इस संगठन और इसके मुखिया प्रमोद मुतालिक का नाम देश ने दो साल पहले जनवरी 2009 में सुना था...तब इस संगठन के सूरमाओं ने मैंगलोर के एक पब में बैठे लड़के-लड़कियों पर हमला किया था...और दूसरा संगठन भगतसिंह क्रांति सेना आज ही पहली बार प्रमुखता से मीडिया में हाईलाइट हुआ है...इस संगठन का फेसबुक पर एकाउंट होने के साथ हिंदी में अपना ब्लॉग भी है...ट्विटर पर भी संगठन का मुखिया बग्गा ट्विट करता रहता है...ये संगठन छह और लोगों...सैयद अली शाह गिलानी, मीर वाइज़ उमर फारूख़, यासीन मलिक, एस ए आर गिलानी, अंरुधति राय और स्वामी अग्निवेश के खिलाफ भी फरमान जारी कर चुका है...भगतसिंह क्रांतिसेना का कहना है कि इन छह लोगों का देश में कहीं भी कार्यक्रम होगा, उसे संगठन रोकेगा...

दैनिक भास्कर डॉट कॉम से बातचीत में भगतसिंह क्रांति सेना के मुखिया तेजेंद्र बग्गा ने कहा कि भगत सिंह क्रांति सेना का निर्माण का एक साल पहले ही किया गया है....इससे पहले वह भाजपा में ही शामिल थे... लेकिन भाजपा ऐसे कामों की इजाजत नहीं देती थी, जिसके कारण सेना का निर्माण किया... संगठन ने अपने ब्लॉग और फेसबुक पर परिचय में लिखा है-हमने ये तय किया है, देश के किसी भी कोने में हम राष्ट्रविरोधी और भारतीय सेना के विरोध में कोई कार्यक्रम नहीं चलने देंगे...संगठन का ऑफिस नई दिल्ली के विष्णु गार्डन के मंगल बाजार में स्थित है...इसके कई कार्यकर्ता पहले भी कई बार हिरासत में लिए जा चुके हैं...इसके अलावा इनके ऊपर कई मुकदमे भी दर्ज हैं...

20 मई को दिल्ली के हैबिटेट सेंटर में जब अरुंधति राय अपनी किताब ब्रोकन डेमोक्रेसी के लांच पर पहुंची थी तो तेजेंद्र बग्गा, विष्णु गुप्ता समेत चार लोगों ने उनका विरोध किया था जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था...इससे पहले पिछले साल 30 नवंबर को दिल्ली में ही हुर्रियत के नेता मीरवाइज उमर फारुख पहुंचे थे तो सेना के कार्यकर्ताओं ने विहिप,भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथ पहुंच कर उनकी कार के ऊपर अंडे,पत्थर और पानी की बोतलें फेंकी थी...

प्रशांत भूषण पर बुधवार को हुए हमले के बाद भगत सिंह क्रांति सेना के कार्यकर्ता लगातार सोशल नेटवर्किग साइट्स के जरिए इस घटना पर गर्व महसूस कर रहे हैं....फेसबुक पर घटना से छह घंटे पहले ही इस बात का संकेत दे दिया गया था कि आज वह किसी मिशन को अंजाम देने जा रहे हैं...घटना के ठीक कुछ मिनट बाद लिखा गया कि मिशन प्रशांत भूषण कामयाब रहा.. यदि तुमने मेरे देश को तोड़ने की कोशिश की तो मैं तुम्हारा सिर फोड़ दूंगा...

प्रशांत भूषण पर हमले के बाद से कई सवाल एकसाथ ज़ेहन में कुलबुला रहे हैं...लेकिन उनका ज़िक्र अगली पोस्ट में...आज सिर्फ एक सवाल...क्या शहीदे आज़म भगत सिंह के नाम का इस्तेमाल कर किसी को भी फेसबुक या ब्लॉग के ज़रिए इस तरह की हरकतों का प्रचार-प्रसार करने की इजाज़त दी जा सकती है...अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर कोई भी कहीं भी कुछ भी लिख सकता है क्या...

मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

थैंक गॉड, सोनिका को जल्दी ही समझ आ गया....खुशदीप

सोनिका कालीरमन मलिक को बहुत जल्दी समझ आ गई...बिग बॉस शुरू होने के एक हफ्ते के अंदर ही सोनिका ने शो से स्वेच्छा से हटने का फैसला कर लिया...सोमवार को उनकी विदाई भी हो गई...मैंने शो शुरू होते ही सोनिका पर एक पोस्ट लिखी थी...सोनिका, प्रैग्नेंसी और रियलिटी शो...



सोनिका ने छह महीने की गर्भवती होने के बावजूद शो में एंट्री ली थी...लेकिन एक हफ्ते में ही बिग बॉस के घर का नज़ारा देखकर उन्हें समझ आ गया कि यहां तनाव और शो के नियम कायदे उनकी खुद की और आने वाले बच्चे की सेहत के लिए ठीक नहीं है...अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले सोनिका के पति सिद्धार्थ मलिक भी ऐसे हालात को लेकर बहुत चिंतित थे...

मशहूर पहलवान चंदगी राम की बेटी सोनिका इस बात को लेकर बेहद खुश हैं कि वह घर लौट रही हैं और अब वह अपने पति तथा परिवार के साथ शांतिपूर्ण ढंग से रह सकेंगी...एक तरफ जहां सोनिका को घर लौटने की खुशी है वहीं दूसरी ओर बिग-बॉस के घर में मौजूद अन्य महिलाओं ने सोनिया को अश्रुपूर्ण विदाई दी है...साथ ही साथ साथी प्रतिभागियों ने सोनिका को शुभकामनाएं भी दीं...

बिग बॉस ने सोनिका से बात करते हुए खुद माना कि तीन महीने तक दुनिया से कट कर एक घर में बंद रहने से हर प्रतिभागी किसी न किसी स्टेज पर मानसिक तनाव ज़रूर महसूस करता है...

सोनिका पर लिखी पहली पोस्ट में भी मेरा आग्रह यही था...पैसा कमाने में कोई बुराई नहीं है...चाहे वो महिला हो या पुरुष...लेकिन सिर्फ नावल्टी के लिए प्रैंग्नेसी का टीआरपी गिमिक करने पर मुझे आपत्ति थी...मैंने यही कहना चाहा था कि जिस वक्त पति या घर के दूसरे सदस्यों के भावनात्मक साथ की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है, उस वक्त सोनिका का ये फैसला सही नहीं था...और ये सोनिका के पति की ओर से चिंता जताने पर साबित भी हो गया...

चलिए सोनिया ने जल्दी ही सही फैसला कर लिया...अंत भला तो सब भला...

सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

...यहां सब के सर पे सलीब है...खुशदीप

अलविदा जग'जीत'...

8 फरवरी 1941---10 अक्टूबर 2011
 कोई दोस्त है न रक़ीब है,
तेरा शहर कितना अजीब है...

वो जो इश्क था, वो जूनून था,
ये जो हिज्र है ये नसीब है...

यहाँ किसका चेहरा पढ़ करूं,
यहाँ कौन इतना क़रीब है...


मैं किसे कहूं मेरे साथ चल,
यहाँ सब के सर पे सलीब है...


- कलाम-राणा सहरी, आवाज़-संगीत- जगजीत सिंह

रक़ीब...दुश्मन
सलीब...क्रॉस
हिज्र...वियोग, बिछुड़ना

रविवार, 9 अक्तूबर 2011

कुन फाया कुन का रूहानी सुकून...खुशदीप

रणबीर कपूर की नई फिल्म रॉक स्टार की कव्वाली कुन फाया कुन सुनने पर ज़ेहन को बड़ा सुकून देने वाली है...जानने की इच्छा हुई कि कुन फाया कुन का अर्थ क्या है...नेट पर तलाशा तो इसका ये मतलब दिखाई दिया... 'Be! And it is'

इससे ज़्यादा समझ नहीं आया तो नेट को और खंगाला...हिंदी में एक जगह ही ज़िक्र दिखा-

"अल्लाह ताला जब किसी काम को करना चाहते हैं तो इस काम के निस्बत इतना कह देतें हैं कि कुन यानी हो जा और वह फाया कून याने हो जाता है"...

(सूरह अल्बक्र २ पहला पारा आयत 117)

इससे यही समझ आता है कि कुन फाया कुन दुनिया के बनने से जुड़ा है...गाने की एक पंक्ति भी है...जब कहीं पे कुछ नहीं भी नहीं था, वही था, वही था...कुन फाया कुन को और ज़्यादा अच्छी तरह अरबी के जानकार ही समझा सकते हैं...



खैर अब बात रॉक स्टार की ज़ेहन को सुकून देने वाली इस कव्वाली की...इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी इस फिल्म की सबसे बड़ी हाईलाइट ए आर रहमान का दिया संगीत है...रूहानी संगीत रचने में रहमान का कोई सानी नहीं...याद कीजिए...फिल्म जोधा अकबर का ख्वाजा मेरे ख्वाजा, दिल में समा जा, शाहों का शाह तू...अब ऐसा ही जादू रहमान ने कुन फाया कुन में रचा है...इरशाद कामिल के शब्दों को मोहित चौहान के साथ जावेद अली और रहमान ने खुद आवाज दी है...हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर कुछ दिन पहले इम्तियाज अपनी टीम के साथ जियारत करने के लिए पहुंचे तो मोहित चौहान ने वहां खास तौर पर इसे गाया...रणबीर कपूर ने गिटार पर साथ शिरकत की...

अब आप एक बार इस गीत को सुनिए और बताइए सुकून मिला या नहीं...
 

------------------------------------------------------------------------------------------------------












शनिवार, 8 अक्तूबर 2011

नारी शक्ति, शांति का नोबेल और गुजरात...खुशदीप

शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं...एक अंतरराष्ट्रीय, एक राष्ट्रीय...ओस्लो में तीन महिलाओं को संयुक्त रूप से शांति का नोबेल दिए जाने का ऐलान...अहमदाबाद में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी का दस साल पूरे करना...दो बिल्कुल अलग-अलग परिवेश...अलग-अलग घटनाक्रम...लेकिन मुझे समसामयिक घटनाओं में एक-दूसरे का अक्स देखने की आदत है...अब ये आदत बुरी है या अच्छी लेकिन मैं इससे मजबूर हूं...अब ऊपर की दो घटनाओं में मुझे क्या साम्य दिखा, उसकी बात बाद में...पहले शांति के नोबेल की बात कर ली जाए...जिन तीन महिलाओं को ये मिला है, संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी पहचान रहा है...

तवाक्कुल करमान...लिमाह रोबेर्ता गबोवी...एलेन जॉनसन लीफ

मसलन यमन की 32 साल की पत्रकार तवाक्कुल करमान...यमन के हुक्मरान अली अब्दुल्लाह सालेह के खिलाफ देश में लोगों ने संघर्ष की राह पकड़ी तो सत्ता विरोधी नारों में सबसे बुलंद आवाज़ तवाक्कुल की ही थी...इसी तेवर ने तवाक्कुल को लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहरूआ की पहचान दिला दी...

दूसरी महिला है लाइबेरिया की शांति अभियान कार्यकर्ता लिमाह रोबेर्ता गबोवी...लाइबेरिया में दूसरे गृहयुद्ध को खत्म करने के लिए जो वार्ता हुई उसमें गबोवी ने अहम भूमिका निभाई...वूमेन पीस एंड सिक्योरिटी नेटवर्क की प्रमुख के नाते गबोवी ने उसी वक्त महिलाओं के सवाल की बात उठाकर समाज में हक की बात कही...गबोवी ने ये सब तब किया जब लाइबेरिया की सत्ता पूंजीपतियों के हाथ में थी और वो महिलाओं को किसी तरह की आज़ादी देने के खिलाफ थे...

इसी कड़ी में तीसरी महिला एलेन जॉनसन लीफ लाइबेरिया की मौजूदा राष्ट्रपति हैं...72 वर्षीय एलेन को लाइबेरिया में 14 वर्ष के गृहयुद्ध के बाद स्थायित्व कायम करने का श्रेय दिया जाता है...एलेन ने 2005 में जब लाइबेरिया की कमान संभाली थी तो उन्हें अफ्रीका की पहली निर्वाचित राष्ट्र प्रमुख बनने का गौरव हासिल हुआ था...8 बरस पहले तक लाइबेरिया गृहयुद्ध से लहूलुहान  था, तब एलेन लोगों की न्यूनतम ज़रूरतों का सवाल खड़ा कर सत्ता के शिखर तक पहुंचीं... संयोग ही है कि अगले मंगलवार को लाइबेरिया में  दोबारा राष्ट्रपति के चुनाव होने जा रहे हैं...ऐसे में शांति का नोबेल मिलने से एलेन की दावेदारी को और मज़बूती मिली है....

चलिए ये तो हो गई नोबेल की बात...अब चलिए गुजरात...7 अक्टूबर 2001 को केशुभाई पटेल को हटाए जाने के बाद नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री की शपथ ली...और शुक्रवार को मोदी इसी पद पर लगातार दस साल पूरे कर ये उपलब्धि हासिल करने वाले गुजरात के पहले मुख्यमंत्री बन गए...विकास के गुजरात मॉ़डल ने मोदी को देश-विदेश में तारीफ दिलवाई तो पिछले दस साल में उनके खिलाफ आरोपों की फेहरिस्त भी खासी लंबी रही है...2002 की गुजरात हिंसा, फ़र्जी एनकाउंटर, विरोध करने वाले अफसरों को निशाना बनाने जैसे तमाम आरोपों से मोदी घिरते रहे हैं लेकिन वो इसे विरोधी दलों की बदनाम करने की साज़िश कह कर खारिज करते रहे...खैर सत्ता की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप के दौर चलते ही रहते हैं...लेकिन मोदी के लिए विरोधी दलों से ज़्यादा बड़ी दिक्कत तीन महिलाएं पेश कर रही हैं...


श्वेता भट्ट






ज़ाकिया जाफरी

जागृति पंड्या

साबरमति जेल में बंद निलंबित आईपीएस अफसर संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट...

27 फरवरी 2002 को गुलबर्ग सोसायटी हिंसा में मारे गए पूर्व सांसद एहसान ज़ाफरी की पत्नी ज़ाकिया जाफरी...

और बीजेपी के ही दिवंगत नेता हरेन पंड्या की पत्नी जागृति पंड्या...गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री हरेन पंड्या की 26 मार्च 2003 को अहमदाबाद में एक पार्क के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी...

इन तीनों महिलाओं को ही इंसाफ़ का इंतज़ार है...

ज़ाकिया जाफरी अकेली शख्स हैं जिन्होंने 2002 की हिंसा को लेकर मोदी को कोर्ट में की गई शिकायत में अभियुक्त बनाया है...तो श्वेता भट्ट के पति संजीव भट्ट कोर्ट में हलफनामा देकर कह चुके हैं कि 2002 में मोदी ने एक मीटिंग में एक वर्ग का गुस्सा निकलने देने की बात वरिष्ठ अफसरों से कही थी...अब संजीव भट्ट जेल में हैं...उनके खिलाफ एक कांस्टेबल के डी पंत ने बयान दिया है कि भट्ट ने उससे जबरन मोदी के खिलाफ बयान दिलाया था...संजीव भट्ट की पत्नी केंद्र सरकार को दो चिट्ठियां भेजकर शिकायत कर चुकी हैं कि उनके पति के साथ किसी आतंकी जैसा बर्ताव किया जा रहा है...साथ ही भट्ट की जान को खतरा बताते हुए पति और अपने परिवार के लिए सिक्योरिटी की मांग की...वही जागृति पंड्या अपने पति की हत्या की दोबारा जांच पर ज़ोर दे रही हैं...सीबीआई के निदेशक को लिखी चिट्ठी में जागृति ने अपने पति की हत्या के असल दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए केस को दोबारा खोलने की मांग की है...इस केस में गुजरात हाईकोर्ट ने शार्पशूटर असगर अली समेत 12 दोषियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया लेकिन आपराधिक साज़िश और पोटा के तहत आतंकवाद के आरोपों का दोषी माना...इससे पहले पोटा अदालत ने सभी बारह आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद सुनाई थी...जागृति पंडया ने अपने घर की पुलिसवालों से जासूसी कराने का आरोप लगाते हुए मोदी, गुजरात के डीजीपी और अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर को कानूनी नोटिस भी भेजा है...इस नोटिस में 15 दिन में जवाब मांगा गया है...

कहने वाले अब भी कह रहे हैं कि मोदी के खिलाफ़ राजनीतिक द्वेष के चलते संजीव भट्ट जैसे अफसरों को खड़ा कर बयान दिलाए जा रहे हैं...लेकिन अगर नारी की त्रिशक्ति एकस्वर में प्रतिकार कर रही है तो क्या उन्हें भी राजनीति की दुहाई देकर खारिज कर दिया जाना चाहिए...उनमें से भी दो ऐसी महिलाएं जो अपने पतियों को खो चुकी हैं और एक ऐसी महिला जो अपने पति की जान को खतरा बता रही है...मातृशक्ति का संघर्ष कैसे तस्वीर बदल सकता है ये इस साल नोबेल के शांति पुरस्कार की महिला त्रिशक्ति ने सारी दुनिया को दिखा ही दिया है...
----------------------------------------------------------------

In Delhi, a meal for two that costs Rs 40,000 ($1000)








गुरुवार, 6 अक्तूबर 2011

गब्बर जी, माफ़ करना गलती म्हारे से हो गई...खुशदीप

आज दशहरा है...बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन...

लेकिन आज मैं गब्बर को याद कर रहा हूं...एक खलनायक को...



लगता है इस महापुरुष के चरित्र चित्रण में हमसे कोई भूल हो गई है...इसका अहसास कल मुझे फेसबुक पर विचरण करते हुआ...फेसबुक पर फ्रेंड सर्किल में निधि बिटिया भी है...मनसा वाचा कर्मणा वाले राकेश कुमार जी की होनहार बिटिया...निधि ने फेसबुक पर जो लिंक दे रखा था, उसे पढ़कर ही मुझे लगा कि गब्बर के साथ इतिहास ने नाइंसाफ़ी की है...आपको यकीन नहीं आता तो इस लिंक पर क्लिक कर खुद ही पढ़ लीजिए...

मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

सोनिका, प्रैग्नेंसी और रियलिटी शो...खुशदीप





टीवी रियलिटी शो में स्वयंवर,घरों के झगड़े, गाली गलौज का फंडा अब बासी हो चुका है...अब टेलीविजन के परदे पर शादी से आगे के लेवल की तैयारी है...क्या अब रियलिटी शो के नाम पर नेशनल टेलीविजन पर शिशु के जन्म के ज़रिए टीआरपी बटोरने का बंदोबस्त किया गया है...दो अक्टूबर को शुरू हुआ बिग बॉस सीज़न पांच इसी दिशा में बढ़ता नज़र आ रहा है...इस बार छह महीने की गर्भवती सोनिका कालीरमन मलिक ने प्रतियोगी के तौर पर बिग बॉस में एंट्री लेकर इतिहास बना डाला है...

देश के मशहूर पहलवान रहे मास्टर चंदगी राम की बेटी सोनिका खुद भी पहलवान है...दोहा एशियाई खेलों में 72 किलोग्राम वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी सोनिका हरियाणा में जन्मी हैं और फिलहाल अमेरिका के कैलिफोर्निया में एनआरआई पति सिद्धार्थ मलिक के साथ रहती हैं...दोनों की शादी 2009 में हुई थी...सिद्धार्थ मलिक खुद भी मार्शल आर्ट में अमेरिका में नेशनल चैंपियन रह चुके हैं...सोनिका टीवी की दुनिया से अनजान नहीं हैं...उन्हें अक्षय कुमार के रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी फियर फैक्टर में भी प्रतियोगी के तौर पर लोग देख चुके हैं....

हां तो लौटते हैं फिर बिग बॉस पर...पिछले सीज़न में इस रियलिटी टीवी शो में टीवी कलाकार सारा ख़ान और अली मर्चेंट की हाउस में ही शादी को खूब प्रचारित किया गया था...हालांकि दोनों की पहले शादी हो चुकी थी लेकिन बिग बॉस के लिए शादी के ड्रामे को दोहराया गया...बिग बॉस का सीज़न चार खत्म होते ही सारा और अली की शादी टूटने की खबरें भी सामने आ गई थीं...पिछली बार हाउस में शादी...तो इस बार क्या सोनिका की प्रैग्नेंसी को भुनाने की तैयारी है...छह महीने के गर्भ के साथ सोनिया की एंट्री लगती तो किसी मार्केटिंग रणनीति का ही हिस्सा है...बिग बॉस का प्रसारण दिसंबर अंत तक चलना है...ऐसे में अगर सोनिका तीन महीने तक खुद को एलीमिनेशन से बचा लेती हैं या खुद ही बीच में प्रोग्राम छोड़ कर जाने का निर्णय नहीं लेती तो क्या शिशु का जन्म हाउस में ही होगा...सोनिका के साथ कॉन्ट्रेक्ट में साफ़ है कि हाउस में उनके नियमित मेडिकल चेकअप और देखरेख का पूरा इंतज़ाम किया जाएगा...दो अक्टूबर को सलमान ख़ान ने भी सोनिका को इंट्रोड्यूस कराते वक्त नसीहत दी थी कि हाउस के अंदर ज़्यादा तनाव नहीं लेना, वरना शिशु की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा...इस पर हाज़िर जवाब सोनिका ने कहा था कि तनाव मैं क्यों महसूस करूंगी, तनाव तो दूसरे सदस्यों को होगा...

सोनिका की एंट्री के साथ ही ये बहस ज़ोर पकड़ने लगी है कि क्या आयोजकों और सोनिका का ये फैसला सही है...क्या बच्चे के जन्म जैसे सृष्टि के पवित्र विधान को भी इस तरह तमाशे का ज़रिया बना जायज़ है...ऐसे वक्त में जब परिवार के सदस्यों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, उनसे दूर रहना क्या मानसिक और शारीरिक तौर पर सोनिया के लिए सही है...कया ये आने वाले बच्चे के साथ भी खिलवाड़ नहीं है...क्या ऐसा वक्त आ गया है कि रियलिटी शो के नाम पर कुछ भी दिखाया जा सकता है...क्या मोटी फीस और फेम के लिए प्रतियोगी नितांत निजी जीवन को भी तमाशे का ज़रिया बनने दे सकते हैं...आप क्या कहते हैं...
--------------------------------------------------------------

क्या आप जानते हैं कि आज अगर रावण जिंदा होता तो अच्छे अच्छे मैनेजमेंट गुरुओं की छुट्टी कर देता...




बार बार ये बाढ़ आए, सामल साहब का दिल ये गाए...खुशदीप


धन्य हो प्रभु प्रफुल्ल सामल...आप जैसे क्रांतिकारी सोच वाले महापुरुष ने खुद को उड़ीसा तक ही कैसे सीमित कर रखा है...वो भी अदना सा पर्यटन मंत्री बन कर...आप जैसे स्टेट्समैन को तो निर्विरोध प्रधानमंत्री चुना जाना चाहिए...फिर देखिए देश विकास की दौड़ में किस तरह हर हर्डल को पार करता हुआ आगे बढ़ता है...ये आप जैसा ग्रेट थिंकर ही सोच सकता है कि भारत की आपदाएं भी कैसे सकारात्मक नतीजे दे सकती है...



अब आपको ज़्यादा नहीं घुमाता...प्रफुल्ल सामल उड़ीसा की बीजेडी सरकार के नगीने हैं...उड़ीसा इन दिनों बाढ़ की मार से कराह रहा है...लेकिन सामल साहब का कहना है कि उड़ीसा की मौजूदा बाढ़ राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने का सुअवसर है...ये क्या...आप तो ये पंक्तियां पढ़ कर ही त्यौरियां चढाने लगे...अरे जनाब सामल द स्टेट्समैन के विचार पहले पूरी तरह जान तो लीजिए...आप भी न कायल हो जाएं तो फिर कहिएगा...



हां तो साहेबान...सामल जी ने ये क्रांतिकारी बयान पिछली 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर दिया...उनका कहना था कि लोग देखना चाहते हैं कि बाढ़ से प्रभावित ज़िले कैसे लगते हैं...फ्लड जोन टूरिस्ट जोन भी है...लोग बाढ़ प्रभावित इलाकों को एन्जॉय करेंगे...सामल ट्रैवल और हास्पिटेलिटी सेक्टर के नुमाइंदों की मौजूदगी में ये बयान दे रहे थे...

.सामल साहब का कोई कसूर नहीं...उन्होंने तो कटक में हर शाम को नराज बैरेज पर लगने वाला मेले जैसा नज़ारा देखा होगा..जहां उफनती महानदी को देखने के लिए बड़ी तादाद में लोग बाल-बच्चों के साथ आते हैं...कमाई का मौका देख चाट पकौड़ी, आइसक्रीम. चिप्स, कोल्ड ड्रिंक बेचने वाले कई हॉकर भी वहां पहुंच जाते हैं...अब ये सब देखकर मंत्री जी ने अपने महकमे को बढ़ावा देने वाला बयान दे दिया तो भला कौन सा गुनाह कर दिया...ये विरोधी पार्टियों में कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं को न जाने क्यों पेट में दर्द हो गया...बीजेपी के प्रदेश मुखिया जुआल ओराम कहते हैं...बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोग खाने और पीने के पानी के बिना तड़प रहे हैं और मंत्री पर्यटन को बढ़ावा देने का राग अलाप रहे हैं...क्या बाढ़ पीड़ितों का दर्द कोई तमाशा है...

उड़ीसा के कांग्रेस प्रमुख निरंजन पाठक ने भी सामल को मानवीय आपदा को भुनाने की कोशिश के लिए जमकर आड़े हाथ लिया है...कहा है...मंत्री कुदरत के क़हर को टूरिज्म पैकेज के रूप में बेचना चाह रहे हैं...पूर्व कृषि मंत्री और बीजेडी के वाइस प्रेज़ीडेंट डॉ दामोदर राउत ने भी सामल के बयान को गलत वक्त पर दिया गया गलत बयान माना है..उड़ीसा में हालिया बाढ़ में 41 लोगों की जान जा चुकी है, दस ज़िलों (केंद्रपारा, जाजपुर, बालासोर,क्योंझर, मयूरभंज, कटक, जगतसिंहपुर, अंगुल, पुरी, खुर्दा) में पच्चीस लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं....2-23 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है...उड़ीसा सरकार ने केंद्र से करीब सवा तीन हज़ार करोड़ का राहत पैकेज मांगा है...केंद्र सरकार की एक टीम मौके का मुआयना कर गई है...जल्दी ही उसकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार राहत का ऐलान करेगी...

अरे आपने सामल साहब का बयान अमानवीय तो करार दे दिया...लेकिन सोचो किसी भी प्राकृतिक आपदा के बाद बिलखते लोग...और उन्हें देखने के लिए विशेष टूरिज्म पैकेज के तहत दुनिया भर से आते सैलानी...होटल और टूरिज्म इंडस्ट्री की कितनी बल्ले बल्ले हो जाएगी...अरे गरीब को तो आज नहीं तो कल तो मरना ही है...लेकिन उसके दर्द से किसी के लिए डॉलर की बरसात होती है तो हर्ज़ ही क्या है...देखा नहीं डैनी बॉयल ने स्लमडॉग मिलियनेयर्स में कैसे भारत की गरीबी दिखाकर अपनी तिजोरियां भरी थीं...अब जो बिकता है उसे क्यों न बेचा जाए..गरीबी, भूख, बाढ़ को भी सेलेबुल कमोडिटी बनाने वाले सामल द ग्रेट को मेरी नज़र में तो अर्थशास्त्र का अगला नोबल पुरस्कार दिया जाना चाहिए...

रविवार, 2 अक्तूबर 2011

तीसरा बच्चा करने पर अब जेल होगी ?...खुशदीप




केरल के चिल्ड्रन कोड बिल की आजकल बड़ी चर्चा है...इस बिल के मुताबिक किसी दंपती के तीसरे बच्चे की स्थिति में पति महाशय को जेल की हवा खानी पड़ सकती है...राज्य सरकार इसे लागू करेगी या नहीं, ये अभी तय नहीं...लेकिन जस्टिस वी आर कृष्ण अय्यर की अगुवाई वाले बारह सदस्यीय आयोग ने इसी आशय वाले बिल का ड्राफ्ट केरल सरकार को सौंपा है...केरल में इस वक्त उम्मन चांडी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरपरस्ती वाली यूडीएफ सरकार है...कमीशन ऑन राइट्स एंड वेलफेयर ऑफ वुमेन एंड चिल्ड्रन के मुताबिक तीसरे बच्चे की संभावना के तहत पिता पर न्यूनतम दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा या तीन महीने की साधारण जेल होगी....साथ ही सरकारी सुविधाएं और फायदे अभिभावकों को नहीं दिए जाएंगे...हालांकि बच्चों को किसी प्रकार के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा...

आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षित गर्भपात मुफ्त किया जाना चाहिए... साथ ही किसी को भी धर्म, क्षेत्र, जाति या किसी अन्य आधार पर ज्यादा बच्चे रखने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए...आयोग का गठन राज्य सरकार द्वारा सात अगस्त 2010 को किया गया था, उस वक्त लेफ्ट के नेतृत्व वाले एलडीएफ का केरल में शासन था...आयोग से महिलाओं और बच्चों के अधिकार और दायित्व संहिता तैयार करने को कहा गया था...

आयोग की रिपोर्ट आते ही सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि कहीं केरल को आदर्श राज्य बनाने के चक्कर में राज्य सरकार अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी तो नहीं मार बैठेगी...खास तौर पर राज्य में मौजूद 44 फीसदी अल्पसंख्यक समुदाय इस प्रस्ताव पर किस तरह की प्रतिक्रिया दिखाता है, इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा...ये किसी से छुपा नहीं है कि देश का सबसे साक्षर ‌राज्य बनने के बाद केरल विकास में भी काफी आगे निकला है...लेकिन अब चीन की तर्ज़ पर जनसंख्या वृद्धि दर पर अंकुश लगाने के लिए उसके फॉर्मूले को अपनाना क्या देश में संभव है...चीन में कम्युनिस्ट शासन है, वहां डंडे के ज़ोर पर कुछ भी किया जा सकता है...लेकिन भारत जैसे लोकतंत्र में ऐसा करने से कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं...एक सवाल ये भी उठ रहा है जुड़वा बच्चों को एक गर्भधारण माना जाए या दो... अगर दूसरी बार भी जुड़वां बच्चे हुए तो क्या होगा...

आप इस मुद्दे पर क्या कहते हैं...क्या केरल में दो बच्चों की बाध्यता मानवाधिकार के खिलाफ है...या आपको लगता है कि देश की आबादी पर नियंत्रण पर पाने के लिए यही कारगर तरीका है...

(नोट...आप सबसे निवेदन है कि विचार रखते हुए सिर्फ मुद्दे पर ही केंद्रित रहें)

शनिवार, 1 अक्तूबर 2011

कहीं आप भी इन 22 लोगों में तो नहीं...खुशदीप


वही हुआ जिसका डर था...फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्क वेबसाइट्स और ब्लॉग्स पर निरंकुश होकर कुछ भी कह देना, किसी की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ कर अभद्र रूप दे देना, गाली-गलौज करना, ये अब आपको कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी लगवा सकता है...जोश में भी होश बने रहने चाहिए...

आप किसी आंदोलन के साथ हैं, अच्छी बात हैं...आप किसी के आलोचक हैं, अच्छी बात है...लेकिन जिसके आप खिलाफ है उसके लिए भी अपने विचारों को प्रकट करते वक्त शब्दों की मर्यादा बनाए रखना बहुत आवश्यक है...किसी के फोटो से खिलवाड़ कर भद्दे कमेंट्स के साथ प्रकाशित करना ये सब बहुत भारी भी पड़ सकता है...जिस वेबसाइट या ब्लॉग पर कोई दूसरा भी आकर कमेंट या चित्रों के ज़रिए ऐसी हरकत करता है तो कमेंट देने वाले के साथ-साथ उस वेबसाइट या ब्लॉग को भी मानहानि का समान रूप से ज़िम्मेदार माना जाएगा...जिस तरह बंदूक से निकली गोली और मुंह से निकली बोली कभी वापस नहीं आ सकती, इसी तरह नेट पर आपकी कोई भी गतिविधि (कमेंट, पोस्ट, चित्र) कभी मिटाई नहीं जा सकती...आप डिलीट भी कर देंगे तो भी वो सबूत नष्ट नहीं होगा...आपकी एक मिनट की खता आपको लंबे अरसे तक परेशान कर सकती है...इसलिए नेट पर कोई भी बात लिखने से पहले उसके निहितार्थ के बारे में ज़रूर सोच लेना चाहिए...ये मत मानिए कि आपका कुछ नहीं बिगड़ने वाला....

अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान कई विवादित टिप्पणियां कर उनके समर्थकों की नजर में खलनायक बने कांग्रेस महासचिव और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अब फेसबुक, यू-ट्यूब, ऑर्कुट व ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किग वेबसाइटों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई शुरू की है... सिंह ने इन वेबसाइटों के साथ-साथ इनके जरिए टिप्पणी करने वाले 22 लोगों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करा दिया है...



दिग्विजय ने आरोप लगाया है कि उक्त वेबसाइटों को माध्यम बनाते हुए कई लोगों ने उनके खिलाफ अपमानजनक व आपत्तिजनक बातें लिखीं और उनकी फोटो के साथ छेड़छाड़ कर भद्दी हरकतें की हैं...पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है...दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के वकील रोहित कोचर ने 16 अगस्त को दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी...इसमें बताया गया कि कई लोगों ने फेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब, इबिबो डॉट कॉम, ऑर्कुट, एमएसएन डॉट कॉम और कुछ अन्य वेबसाइटों को माध्यम बनाते हुए दिग्विजय सिंह के बारे में कई अपमानजनक व आपत्तिजनक बातें लिखी हैं..

.

शिकायत में कहा गया है कि इन हरकतों से न सिर्फ दिग्विजय सिंह, बल्कि कांग्रेस पार्टी की छवि को भी ठेस पहुंची है...उनके मुताबिक, जिन वेबसाइटों का लोगों ने इस्तेमाल किया है, वे भी इसके लिए जिम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने इस प्रकार के आपराधिक मकसद के लिए अपनी सेवाएं प्रदान की हैं...इस शिकायत के साथ पुलिस को आपत्तिजनक ईमेल, फोटो आदि भी दी गईं...

इस शिकायत में ऐसे 22 लोगों को नामजद कराया गया है, जिन्होंने फेसबुक व अन्य वेबसाइटों पर दिग्विजय सिंह के खिलाफ कई अभद्र टिप्पणियां की हैं तथा पेस्ट किए गए फोटो से छेड़छाड़ की गई है...मामले की जांच में जुटे साइबर सेल ने लगभग एक माह की तफ्तीश के बाद 29 सितंबर को आईटी एक्ट-66-ए के तहत मामला दर्ज किया है... पुलिस का कहना है कि फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि फेसबुक, ऑर्कुट आदि पर जिस नाम से प्रोफाइल बनाए गए हैं, वे सही नाम पर बने हैं या नहीं...पुलिस सभी आरोपी वेबसाइटों को भी नोटिस भेजकर जल्द ही पूछताछ करेगी...

आप क्या कहते हैं, क्या जोश में भी होश बनाए रखने में ही समझदारी नहीं है....