शनिवार, 30 जुलाई 2011

लोकपाल-वाल छोड़ो, करप्शन लीग की बात करो...खुशदीप





अन्ना हजारे के जनलोकपाल को सरकार ने लंका लगा दी...अब सरकार कमोवेश सभी राजनीतिक दलों की सहमति से जो लोकपाल लाना चाहती है वो ऐसा वॉचडॉग होगा, जिसके मुंह में न दांत होंगे और न ही पेट में आंत...उसके गले में सरकार का पट्टा होगा...यानि उसे गुर्राने का भी अधिकार नहीं होगा...हां, अगर सरकार और नेताओं के तलवे चाटता रहेगा तो सब सुख सुविधाओं को भोगेगा...ज़रूरत तो ऐसे लोकपाल की है जो भ्रष्टाचारियों को काट कर रैबीज़ का रोगी बना दे, जिससे कोई उनकी आगे की पीढ़ियों में भी भ्रष्टाचार की सोचने की ज़ुर्रत न कर सके...

सरकार ने अपने लोकपाल में प्रधानमंत्री, उच्च न्यायपालिका, वरिष्ठ नौकरशाह, सांसदों का सदन में बर्ताव, विधायकों का विधानमंडलों में बर्ताव, पंचों का पंचायत मे बर्ताव सब लोकपाल के दायरे से बाहर कर दिया है...अन्ना फाउल फाउल का शोर मचा कर सोलह अगस्त से दूसरी आज़ादी की लड़ाई के लिए लाठी-गोली खाने की बात कर रहे हैं....

बाबा रामदेव को औकात दिखाने के बाद सरकार का दुस्साहस सत्तर के दशक के इंदिरा-संजय गांधी वाले दंभ के पास पहुंच गया है...तो क्या अब देश मिस्र, ट्यूनीशिया जैसी जास्मिन क्रांति देखने के लिए तैयार है...ऐसी क्रांति जिसका कोई राजनीतिक रंग न हो...

इसी सारी रस्साकशी के बीच बीस जुलाई को एक बहुत ही प्रैक्टीकल सुझाव इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की तरफ से आया है...मूर्ति ने प्रख्यात अर्थशास्त्री कौशिक बसु की उस राय को अहम बताया है जिसमें घूस को क़ानूनी दर्जा का देने की बात की गई है...मूर्ति के मुताबिक अगर घूस को कानूनी जामा पहना दिया जाए तो घूस देने वाला शख्स घूस लेने वाले को बेनकाब कर सकेगा....

आईआईटी गांधीनगर में 32 वें विक्रम साराभाई मेमोरियल लेक्चर के दौरान 'Towards a corruption free India'विषय पर व्याख्यान देते हुए मूर्ति ने कहा कि 'जैसे-जैसे भ्रष्टाचार में कमी आएगी देश की आर्थिक तरक्की की रफ्तार तेज होती जाएगी' ...कौशिक बसु की सलाह का जिक्र करते हुए मूर्ति ने कहा कि मौजूदा समय में घूस लेना या देना-दोनों गैर कानूनी है... इसलिए दोनों आपसी सहमति से चुप रहते हैं...

ये कुछ वैसा ही जैसे पश्चिम के देशों में खेलों पर सट्टा लगाने (बेटिंग) की कानूनी तौर पर अनुमति है...उस पर सरकारों को ज़रूर टैक्स भी मिलता होगा...भारत में सट्टा क़ानूनी तौर पर ज़ुर्म है, लेकिन शायद दुनिया में सबसे ज़्यादा सट्टा लगाने वाले देशों में भारत का शुमार होता है...क्रिकेट की हर बड़ी सीरीज के दौरान देश में अरबों के सट्टे की बात आती है...सटोरिये पकड़े भी जाते हैं...लेकिन क्या सट्टा रुकता है...फिर इसे लीगल ही क्यों नहीं कर दिया जाता...टैक्स के तौर पर मोटी रकम तो हाथ आएगी...

अब भ्रष्टाचारियों पर हल्ला-बोल के साथ ऐसे ही कुछ अभिनव प्रयोगों की आवश्यकता है...आप क्या कहते हैं...

स्लॉग ओवर

दुनिया के सब भ्रष्ट देशों के नेताओं के बीच इंटरनेशनल करप्शन लीग शुरू की जानी चाहिए...मेरी चुनी गई भारत की ये टीम इस लीग में खेलने के लिए भेजी जाए तो मेरा दावा है कि खिताब की ओर कोई और माई का लाल देखने की भी गुस्ताखी नहीं करेगा....

शरद पवार (कप्तान)-एनसीपी
बी एस येदियुरप्पा (उप-कप्तान)- बीजेपी
सुरेश कलमाड़ी- कांग्रेस
ए राजा- डीएमके
अशोक चव्हाण- कांग्रेस
विलास राव देशमुख- कांग्रेस
बंगारू लक्ष्‍मण- बीजेपी
दिलीप सिंह जूदेव- बीजेपी
दयानिधि मारन- डीएमके
मनोरंजन कालिया- बीजेपी
स्वर्णाराम- बीजेपी
बाबू भाई कटारा- बीजेपी


अशोक चव्हाण और विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और दोनों ही आदर्श हाउसिंग सोसायटी में घोटाले के आरोपों में फंसे हैं...

दिलीप सिंह जूदेव वाजपेयी सरकार में पर्यावरण मंत्री रह चुके हैं...एक आस्ट्रियाई कंपनी से खनन लाइसेंस दिलाने के नाम पर स्टिंग ऑपरेशन में घूस लेते पकड़े गए थे...साथ ही ये कहते भी- पैसा खुदा तो नहीं, लेकिन खुदा की कसम पैसा खुदा से कम भी नहीं...

बाबू भाई कटारा पिछली लोकसभा में गुजरात के दोहाड़ से बीजेपी सांसद थे...पंजाब की एक महिला को कनाडा कबूतरबाज़ी के ज़रिए ले जाते दिल्ली हवाई अड़़्डे पर रंगे हाथ पकड़े गए थे...

मनोरंजन कालिया और स्वर्णाराम हाल तक पंजाब सरकार में बीजेपी कोटे से मंत्री थे और डेढ़ करोड़ की रिश्वत के मामले में इनका नाम आने पर दोनों को मंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी...

बाकी सारे ही इतने चर्चित नाम हैं कि उनके कारनामों के बारे में बताने की कुछ ज़रूरत ही नहीं...

इब समझ आई ताऊ घणा मशहूर क्यों से...खुशदीप




कल खेल खेल में ई-मेल से मिले चार सवाल आप से पूछ डाले...पहली बात तो ये समझ आई कि अपने ताऊ रामपुरिया क्यों हर ब्लॉगर के दिल में बसे हैं...पहेलियां- सवाल पूछ पूछ कर उन्होंने सभी ब्लॉगरों को चोखा समझदार बना दिया...इससे पहले कि अब शिवम मिश्रा ताऊ का ही लठ्ठ लेकर मेरे पीछे पड़ जाए, कल पूछे गए सवालों की बात कर लूं...पोस्ट को पढ़ा तो खूब ब्लॉगर साथियों ने लेकिन इम्तिहान में बैठने की हिम्मत शिवम मिश्रा, जीवास्वा, संजय झा, एस एम मासूम, रचना और दिनेश राय द्विवेदी सर ही दिखा सके...सतीश सक्सेना भाई आए लेकिन सवालों का जवाब देने की ज़िम्मेदारी मक्खन के सिर पर डालकर पतली गली से निकल लिए...विवेक रस्तोगी भाई आए और सभी सवालों को आसान बताते हुए जवाब दूं या रहने दूं की धमकी देकर रह गए...अजित गुप्ता जी को सवाल देखकर तीतर के दो आगे तीतर, पीछे तीतर गाना याद आ गया....डॉ अनवर जमाल बड़ा सा लिंक लेकर आए लेकिन सवालों का जवाब न देकर ये जानकारी दे गए कि मेरी पोस्ट को ब्लॉग की खबरों में स्थान मिला है...निर्मला कपिला जी ने अन्ना हजारे से प्रेरणा लेकर अनशन का अल्टीमेटम दे डाला...उन्हें शिकायत थी कि द्विवेदी सर को बिना इम्तिहान में बैठे नंबर कैसे मिल गए...निर्मला जी ये गलतफहमी आपको इसलिए हुई क्योंकि मॉडरेशन महाराज किसी भी प्रतियोगी के जवाबों को लीक नहीं होने दे रहे थे...राकेश कुमार जी ने खुला चैलेंज दिया- जाइए क्या कर लेंगे 0 नंबर देकर...

अब एक बार फिर उन छह प्रतियोगियों के जज़्बे को सलाम जिन्होंने पोस्ट की मूलभावना के अनुरूप इसमें भागीदारी की...इसलिए उनके स्पोर्टसमैनशिप को सौ में सौ नंबर...रही बात सवालों की तो सारे जवाब कोई नहीं दे पाया...ये रहा सभी प्रतियोगियों का प्रदर्शन...

एस एम मासूम         3 जवाब सही         75%


जीवास्वा                    2 जवाब सही          50%

शिवम                       1 जवाब सही          25%


रचना                        1 जवाब सही         25%



संजय झा                 1 जवाब सही         25%



दिनेशराय द्विवेदी   1 जवाब सही         25%
 
सभी सवालों का सही जवाब जानने के लिए आपको इस लिंक पर जाने का कष्ट उठाना पड़ेगा...




शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

अपना आईक्यू जानना है तो...खुशदीप




कहते हैं सवालों के जरिए किसी का भी आईक्यू जाना जा सकता है...आईक्यू बोले तो इंटेलीजेंस क्योशेंट...बुद्धिमत्ता का पैमाना...लेकिन मेरा यहां आईक्यू का मतलब दूसरा है...क्या है, ये कल आपको बताऊंगा...आज मैं अपने इंगलिश ब्लॉग पर कुछ आसान से सवाल पूछ रहा हूं...आपको बस उनका जवाब देना है...सवालों के जवाब और अपनी कारगुज़ारी जानने के लिए आपको कल तक सब्र करना पड़ेगा...देर किस बात की दिखाइए अपनी स्मार्टनेस और हो जाइए शुरू...एक बात और बता दूं कि कम्पीटिटिव एग्ज़ाम्स में कई बार हम बहुत से आसान जवाब इसलिए मिस कर जाते है. क्योंकि हम ये सोचते हैं ज़रूर इसमें कोई पेंच होगा, वरना इतना आसान सवाल कोई पूछता है...चलिए अब सवालों और आपके बीच से मैं हटता हूं...ये रहा लिंक...Know your IQ...Khushdeep



बुधवार, 27 जुलाई 2011

हौसले की अरुणिमा....खुशदीप




कल अरुणिमा को एम्स के ट्रॉमा सेंटर से छुट्टी मिल गई...करीब साढ़े तीन महीने बाद अरुणिमा ने अपने पैरों पर खड़े होकर फिर नई ज़िंदगी की ओर कदम बढ़ाए...नई उम्मीद के साथ...आप अरुणिमा को भूले तो नहीं हैं...नेशनल लेवल की यूपी की वॉलीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा जिसे ग्यारह अप्रैल को चेन लूटने का विरोध करने पर बदमाशों ने चलती ट्रेन से धक्का दे दिया था...23 साल की अरुणिमा को बुरी हालत में पहले बरेली इलाज के लिए ले जाया गया....अरुणिमा का बायां पैर काटना पड़ा...इन्फेक्शन दूसरी टांग में भी फैल रहा था कि मीडिया में उसकी स्टोरी आने के बाद खेल मंत्री अजय माकन ने सुध ली और अरुणिमा को दिल्ली एम्स लाकर भर्ती कराया गया...अरुणिमा के लिए इनोवेशन नाम की कंपनी ने करीब साढ़े तीन लाख रुपये में अमेरिका से कृत्रिम पैर मंगाया...डॉक्टरों का कहना है कि इस कृत्रिम पैर के सहारे अरुणिमा बिना सहारे चल-फिर सकेगी...

वॉलीबॉल में भारत का नाम रौशन करने का अरुणिमा का सपना बेशक टूट गया हो लेकिन अरुणिमा का आत्मविश्वास बरकरार है...अरुणिमा अब पैरालंपिक्स खेलों (विकलांगों का ओलंपिक्स) में भारत की नुमाइंदगी के लिए मेहनत करना चाहती है...अरुणिमा के मुश्किल के दिनों में खेल मंत्रालय, रेलवे, यूपी सरकार के अलावा क्रिकेटर हरभजन सिंह और युवराज सिंह ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया...ब्यूटीशियन शहनाज़ हुसैन ने ट्रॉमा सेंटर अपनी ट्रेनर भेज कर अरुणिमा को ब्यूटीशियन करियर के गुर सिखाए, ताकि ज़रूरत पड़ने पर अरुणिमा इस हुनर का अपनी आय बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सके...

अरुणिमा तुम्हारे हौसले को सलाम करते हुए ये गीत तुम्हें समर्पित...


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कौन कहता है प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार, काले धन, आतंकवाद जैसी समस्याओं का मुंहतोड़ जवाब नहीं दे सकते...नहीं यकीन आता तो देखिए ये लिंक....Manmohansingham....Khushdeephttp://en.deshnama.com/2011/07/manmohansinghamkhushdeep.html

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

इनसान भी फूलों की तरह खिल सकते हैं...खुशदीप




दावा है इनसान को इससे ज़्यादा खूबसूरत पहले कभी नहीं देखा होगा...यहां सारे फूल, पत्तियां, पंखुड़ियां, तने, इनसानों के बने हैं...












आप हिम्मत हार जाते हैं और किसी काम को आप ये कह कर छोड़ देते है कि इसे करना मेरे बस की बात नहीं, याद रखिए जिस पल आप खुद को उस काम से अलग करते हैं, उसी के अगले पल से जीत शुरू होती है...इसलिए कोशिश कभी नहीं छोड़नी चाहिए...दो चूहों के माध्यम से समझिए ज़िंदगी के इस फ़लसफ़े को...Determination is life...Khushdeep

रविवार, 24 जुलाई 2011

ब्लॉगिंग का ट्रांजिशन पीरियड...खुशदीप



वाकई ब्लॉगिंग का ट्रांजिशन पीरियड चल रहा है...किसी की चिंता है ब्लॉगिंग का ट्रैफिक फेस बुक की ओर मुड़ गया है...कोई गूगल प्लस से रास न आने पर खुद को वहां से हटाने की बात कर रहा है...ट्विटर की चींचीं की ओर भी ब्लॉगर्स का झुकाव बढ़ रहा है...किसी की फ़िक्र है टिप्पणियों की धारा दिल्ली की यमुना नदी की तरह सूखती जा रही है...और कहीं एक दिन सरस्वती नदी की तरह पूरी तरह विलुप्त ही न हो जाए...

वाकई आज टैक्नोलॉजी के आगे मानव नतमस्तक है, वही टैक्नोलॉजी जिसे मानव ही हर दिन उन्नत से उन्नत करता जा रहा है...हिंदी ब्लॉगिंग, इंग्लिश ब्लॉगिंग, फेसबुक, गूगल प्लस, ट्विटर, दखल मैंने भी हर जगह दे रखा है, लेकिन हालत वही जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स, मास्टर ऑफ नन जैसी है...फेसबुक पर जाने का वैसे तो कम ही मौका मिलता है लेकिन किसी पोस्ट पर मल्टीपल चैट की तरह कई लोग जुड़ जाएं तो आनंद भी खूब आता है...गूगल प्लस लगता है फेसबुक की बढ़ती लोकप्रियता को टक्कर देने के लिए ही बनाया गया है...अभी इसे जमने में थोड़ा वक्त लग सकता है...

ट्विटर बेसिकली सेलेब्रिटीज़ का शगल है...लोग बड़े बड़े नामों का फॉलोअर बनकर खुद को धन्य समझते हैं...हां इसका ये फायदा ज़रूर है कि आप नामी हस्तियों से जो कहना चाहते हैं, वो ट्विटर के माध्यम से उन तक पहुंचा सकते हैं...मुझे तो ये भी लगता है कि ये बड़े नाम इतने ऊंचे मकाम पर पहुंच गए हैं कि इन्हें हमारे जैसे घर-बार चलाने के लिए हाथ-पैर मारने जैसी कोई चिंता नहीं है...तभी तो बौद्धिक जुगाली की चीं-चीं के लिए इतना वक्त निकाल लेते हैं...

इस सारी उठापटक से कोई भी कनफुजिया सकता है...फिर सोचता हूं कि नेट के इस मकड़जाल में कौन सा रास्ता ठीक रहेगा...ये सोच ही रहा था कि पुरानी किसी पोस्ट का सुनाया ये किस्सा याद आ गया...

कई सदियों पहले की बात है...एक सिद्ध पुरुष अपने चेले के साथ भ्रमण पर निकले हुए थे...घूमते-घूमते एक गांव में पहुंचे...वहां पूरा गांव सिद्ध पुरूष की सेवा में जुट गया...कोई एक से बढ़ कर एक पकवान ले आया...कोई हाथ से पंखा झलने लगा...कोई पैर दबाने लगा...किसी ने नरम और सुंदर बिस्तर तैयार कर दिया...सुबह उठे तो फिर वही सेवाभाव...सिद्ध पुरुष का गांव से विदाई लेने का वक्त आ गया...गांव का हर-छोटा बड़ा उन्हें विदा करने के लिए मौजूद था...सिद्ध पुरुष ने गांव वालों के लिए कहा...जाओ तुम सब उजड़ जाओ...यहां से तुम्हारा दाना-पानी उठ जाए...


सिद्ध पुरुष के मुंह से ये बोल सुनकर उनके चेले को बड़ा आश्चर्य हुआ...ये महाराज ने गांव वालों की सज्जनता का कैसा ईनाम दिया लेकिन चेला चुप रहा...गुरु और चेला, दोनों ने फिर चलना शुरू कर दिया...शाम होने से पहले वो एक और गांव में पहुंच गए...


ये गांव क्या था साक्षात नरक था...कोई शराब के नशे में पत्नी को पीट रहा है...कोई जुआ खेलने में लगा है...कोई गालियां बक रहा है...यानि बुराई के मामले में हर कोई सवा सेर...सिद्ध पुरुष को देखकर कुछ गांव वालों ने फब्तियां कसना शुरू कर दिया...ढोंगी महाराज आ गया...सेवा तो दूर किसी ने गांव में पानी तक नहीं पूछा...खैर गांव के पीपल के नीचे ही किसी तरह सिद्ध पुरुष और चेले ने रात बिताई...विदा लेते वक्त सिद्ध पुरुष ने गांव वालों को आशीर्वाद दिया...गांव में तुम सब फूलो-फलो...यहीं दिन दूनी, रात चौगुनी तरक्की करो...यहीं तुम्हे जीवन की सारी खुशियां मिलें...


चेला वहां तो चुप रहा लेकिन गांव की सीमा से बाहर आते-आते अपने को रोक नहीं पाया...बोला...महाराज ये कहां का इंसाफ है...जिन गांव वालो ने सेवा में दिन-रात एक कर दिया, उन्हें तो आपने उजड़ने की बद-दुआ दी और जो गांव वाले दुष्टता की सारी हदें पार कर गए, उन्हें आपने वहीं फलने-फूलने और खुशहाल ढंग से बसे रहने का आशीर्वाद दे दिया...

ये सुनने के बाद सिद्ध-पुरुष मुस्कुरा कर बोले...सज्जनों में से हर कोई जहां भी उज़ड़ कर जाएगा, वो उसी जगह को चमन बना देगा...और इन दुर्जनों में से कोई भी स्वर्ग जैसी जगह भी पहुंचेगा तो उसे नरक बना देगा...इसलिए अच्छा यही है कि वो जहां है, वहीं बसे रहे...इससे और दूसरी जगह तो बर्बाद होने से बची रहेंगी...

शनिवार, 23 जुलाई 2011

बुश और ओबामा के बीच टॉप सीक्रेट बातचीत...खुशदीप



क्या आप जानते हैं कि जनवरी 2009 में जब बराक ओबामा ने अमेरिका के राष्ट्रपति की गद्दी संभाली थी और जॉर्ज बुश ने व्हाईट हाउस से विदा ली थी तो ओबामा और बुश के बीच क्या सीक्रेट बातचीत हुई थी...इस बातचीत के दौरान दोनों की पत्नियां मिशेल ओबामा और लॉरा बुश भी गवाह थीं...बुश ने ओबामा को क्या गुप्त मंत्र दिए थे...चलते चलते लॉरा की मिशेल के लिए क्या सीख थी...बुश ने हेलिकॉप्टर के पायलट को बीच में कहां रुकने के आदेश दिए थे...ये सब बातें जानकर आप चौंक उठेंगे...ओबामा, बुश, मिशेल, लॉरा ने उस वक्त सीक्रेट लैंग्वेज का इस्तेमाल किया था...

जानना चाहते हैं ये सारी बातें...जानना क्या चाहते हैं, खुद अपनी आंखों से ही देखिए ये टॉप सीक्रेट वीडियो...ये ज़रूर बताइएगा, ये कौन सी भाषा में बात कर रहे हैं...


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शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

डीयू, एंजेलिना जोली के होंठ, प्रीति जिंटा का डिंपल...खुशदीप



दिल्ली यूनिवर्सिटी में नए-नवेले छात्र-छात्राओं का कल पहला दिन था...इन्हें फ्रैशर्स और स्टूडेंट्स की ज़ुबान में फच्चा कहा जाता है...अब पहला दिन था तो फर्स्ट इम्प्रेशन इज़ लास्ट इम्प्रेशन...यानि कॉलेज को ये सोचकर कूच कि आज ही सबको अपनी पर्सनेल्टी से चित कर देना है...इसके लिए तैयारी भी ज़ोरदार की गई...


गार्गी कॉलेज में अनु को दाखिला मिला है...वो ये सोचकर ही परेशान थी कि उसके होंठ एंजेलिना जोली की तरह खूबसूरत क्यों नहीं है...फौरन कॉस्मेटोलॉजिस्ट के क्लीनिक का रास्ता पकड़ा गया...उसने लिप-ऑगमेन्टेशन की सलाह दी...घरवालों को महज़ बीस-पच्चीस हज़ार का फटका लगा...लेकिन अनु के पतले होंठ भरे-भरे हो गए...लुक्स को लेकर कोई समझौता नहीं...





इसी तरह कमला नेहरू कालेज की पूजा को कॉलेज जाने से पहले मलाल था कि हंसते हुए उसके गालों पर डिम्पल (गड्ढा) क्यों नहीं पड़ते...प्रीति जिंटा की तरह...पूजा ने इस चाहत को पूरा करने के लिए मैक्सिलो-फेशियल सर्जन का सहारा लिया...पच्चीस हज़ार रुपये खर्च कर पूजा को डिम्पल वाली मुस्कान मिल गई...अब पूरे कॉन्फिडेंस के साथ पूजा जी पहले दिन कॉलेज गईं...



दिल्ली की डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ सोनल सोमानी का भी कहना है कि पिछले दिनों खूबसूरती की सर्जरी के लिए उनके पास स्टूडेंट्स की तरफ़ से कई इन्क्वायरिज़ आईं...ज़ाहिर हैं इनमें से कई ने बनावटी सुंदरता के लिए ट्रीटमेंट भी कराए होंगे...आज के स्टूडेंटस का यही मंत्र है कि आगे बढ़ने के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं स्मार्टनेस भी ज़रूरी है...

हिंदुस्तान टाइम्स या टाइम्स ऑफ इंडिया के सिटी पुलआउट उठा कर देख लीजिए...एक पूरा पन्ना सि्र्फ डीयू के छात्र-छात्राओं के फैशन को ही समर्पित होता है...देखकर ऐसा लगता है कि किसी फैशन डिजाइनर ने अपना नया कलेक्शन लांच किया है...कई जगह ड्रैसेज और एसेसरीज़ की कीमत भी लिखी हुई होती है...दस हज़़ार की जीन्स, तीन हज़ार का टॉप, चार हज़ार का पर्स...

ऐसे में सोचता हूं कि जिन बच्चों के मां-बाप इतना मोटा खर्च करने की हैसियत नहीं रखते होंगे, उन बेचारों पर क्या बीतती होगी...फिर सोचता हूं वो शायद पढ़ाई में ही दिल लगाते होंगे...अब वो पैसे के दम पर हासिल की गई स्मार्टनेस नहीं दिखाएंगे तो क्या पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाएंगे...आप क्या सोचते हैं इस बारे में....

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मक्खन ने अपनी मासूम दलील से जज को कैसे प्रभावित किया, जानना चाहते हैं तो इस लिंक पर जाइए...



गुरुवार, 21 जुलाई 2011

इनसान है शीशे के, पत्थर का ज़माना है....खुशदीप





हिंदी सिनेमा ने कई ऐसे मधुर गीत दिए हैं जो फिल्म के पिट जाने की वजह से ज़्यादा पॉपुलर नहीं हो पाए...ऐसा ही मेरी पसंद का एक गीत है फिल्म फ़लक (द स्काई) से...ये फिल्म 1988 में आई थी...के.शशिलाल नायर ने इसे डायरेक्ट किया था...फिल्म में राखी गुलज़ार, जैकी श्रॉफ़ और माधवी की मुख्य भूमिकाएं थीं...जिस गीत का यहां मैं ज़िक्र कर रहा हूं इसे निदा फ़ज़ली साहब ने लिखा है...कल्याणजी आनंदजी के संगीतबद्ध किए गए गीत को मोहम्मद अज़ीज़ की आवाज़ ने निखार बख्शा है...आप भी पढ़िए, सुनिए, देखिए ये गीत...

चलती चाकी देख कर दिया कबीरा रोय
दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोए...

इक रोज़ हसाना है, इक रोज़ रूलाना है,
इक रोज़ हसाना है, इक रोज़ रूलाना है,
इनसान से किस्मत का, इनसान से किस्मत का,
ये खेल पुराना है,
इक रोज़ हसाना है, इक रोज़ रूलाना है...


हालात के हाथों में हर कोई खिलौना है,
हर कोई खिलौना है,
माथे पे जो लिखा है हर हाल में होना है,
हर हाल में होना है,
इनसान है शीशे के, इनसान है शीशे के,
पत्थर का ज़माना है...
इक रोज़ हसाना है, इक रोज़ रूलाना है...

जीवन के ये पल, ये आज, ये कल मेरे हैं न तेरे है,
होठों की हंसी आंखों की नमी, सब वक्त के घेरे है.
जो वक्त से लड़ता है,
जो वक्त से लड़ता है,
पागल है...दीवाना है....
इक रोज़ हसाना है, इक रोज़ रूलाना है,
इनसान से किस्मत का ये खेल पुराना है...

- निदा फ़ज़ली


बुधवार, 20 जुलाई 2011

ज़िंदगी कितनी बदल गई...है ना...खुशदीप




सिर्फ़...


मैं उस वक्त में लौटना चाहता हूं जब...
मेरे लिए मासूमियत का मतलब,

सिर्फ खुद का असल होना था...

मेरे लिए ऊंचा उठने का मतलब,

सिर्फ झूले की पींग चढ़ाना था...

मेरे लिए ड्रिंक का मतलब,

सिर्फ रसना का बड़ा गिलास था...

मेरे लिए हीरो का मतलब,

सिर्फ और सिर्फ पापा था...

मेरे लिए दुनिया के शिखर का मतलब,

सिर्फ पापा का कंधा था...

मेरे लिए प्यार का मतलब,

सिर्फ मां के आंचल में दुबकना था...

मेरे लिए आहत होने का मतलब,

सिर्फ घुटनों का छिलना था...

मेरे लिए दुनिया की नेमत का मतलब,

सिर्फ बैंड बजाने वाला जोकर था...

अब वज़ूद की सर्कस में मै खुद जोकर हूं,

ज़िंदगी कितनी बदल गई...है ना...



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PhD यानि पीएचडी का असली मतलब जानते हैं, नहीं जानते तो इस लिंक पर जाइए...

रविवार, 17 जुलाई 2011

मुंबई धमाके, सुपरस्टार्स का जश्न और कैंडल मार्च....खुशदीप


13 जुलाई की शाम को मुंबई सीरियल ब्लास्ट से दहली...दो दिन बाद 16 जुलाई को शाहरुख ख़ान के घर मन्नत में जश्न मनाया जा रहा था...डबल-डबल खुशी का...एक तो शाहरुख के दो परम सखाओं- ऋतिक रोशन और फरहान की ताज़ा रिलीज फिल्म ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा के हिट होने की खुशी...दूसरी खुशी उसी दिन फिल्म की हीरोइन कैटरीना कैफ़ के जन्मदिन की थी...ज़ाहिर है इस खुशी में इन सितारों के जितने भी यार-दोस्त हैं, सभी शरीक हुए...और वो सब कुछ हुआ होगा जो हाई-प्रोफाइल पार्टियों में होता है...ये भुलाकर कि दो दिन पहले मुंबई किस तरह लहूलुहान हुई थी...19 घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए...अब भी अस्पतालों में भर्ती कई घायलों की हालत नाज़ुक बनी है...

कौन सी दुनिया में रहते हैं ये सुपरस्टार्स...खाते मुंबई का हैं, तो कुछ दिन उसी मुंबई के लिए संयम नहीं दिखा सकते थे...जश्न मनाना भी था तो चुपचाप ही मना लेते...पब्लिसिटी मैनेजर्स के ज़रिए पेज थ्री तक इसकी ख़बरें पहुंचाना ज़रूरी था...जिनके अपने हमेशा के लिए चले गए, कम से कम उन्हीं का ख्याल कर लिया होता...खैर छोड़िए, इन सितारों की कोई फिल्म रिलीज होनी हो तो उसके प्रमोशन के लिए ये सब कुछ करने को तैयार रहते हैं...फिल्म का थीम किसी सामाजिक मुद्दे से जु़ड़ा है तो कहना है क्या...फिर इन्हें सारे सोशल ऑब्लिगेशन्स भी याद आ जाते हैं...

इसी सोशल ऑब्लिगेशंस पर याद आया कि मैंने 26/11 हमलों को एक साल पूरा होने पर एक पोस्ट लिखी थी जो आज भी प्रासंगिक है, उसे यहां री-ठेल रहा हूं...

लेट अस प्रेप्येर फॉर कैंडल मार्च

"हमको कैंडल लाइट विजिल करना मांगता...आफ्टरऑल 26/11 का फर्स्ट एनिवर्सरी है...हम देश के रिस्पांसिबल सिटीजन है...हमारा भी कुछ मॉरल ड्यूटी बनता है...कैसे पता चलेगा कि हमारा सोशल ऑब्लिगेशन कितना स्ट्रॉन्ग है"...


शहर के इलीट क्लब में 25 नवंबर को यही हॉट डिस्कशन था...एक तरफ किटी की टेबल पर विदेशी परफ्यूम में तर-बतर मोहतरमाएं...और दूसरी तरफ बिलियर्डस की टेबल पर शाट लेते हुए जेंटलमैन
...साइड टेबल पर करीने से लाल परी से भरे क्रिस्टल के पैमाने भी सजे हुए हैं...


हां तो यंग मेन एंड यंग लेडीज़ (यहां उम्र जितनी भी हो जाए लेकिन चेहरे पर पैसे की चमक सबको एवरग्रीन यंग रखती है)...क्या प्रपोजल्स है कल के लिए...सोशल फंड से अभी एडवांस पास करा लेते हैं...कल कोई दिक्कत नहीं आएगी...


सबसे पहले मिसेज दारूवाला उठती हैं...मेरे ख्याल से कल इलीट क्लब से सिटी मॉल तक आधे किलोमीटर का कैंडल लाइट मार्च निकाला जाए...हमारे जैसी सेलिब्रटीज़ इसमें हिस्सा लेंगी तो शहर के आम लोगों को इससे अच्छा इन्सपिरेशन मिलेगा...मिसेज दारूवाला की बात खत्म होने से पहले ही क्लैपिंग से क्लब गूंज उठता है...


मिस्टर हाथी तत्काल मिसेज दारूवाला के प्रपोजल को सेकंड करते हैं...हां तो ठीक रहा कल हम सब शाम को पांच बजे क्लब में मिल रहे हैं...पहले वेलकम मेनू सेट कर लिया जाए...हाई टी और जूस के साथ चीज़ सैंडविच और गार्लिक ब्रेड ठीक रहेगी...भई हम सारे ही कलरी-कॉन्शियस है...ऐसा है सब को वॉक करना है तो सब को पाकेट में रखने के लिए ड्राई-फ्रूट्स के पैक दे दिए जाएंगे...एनर्जी का लेवल मेंटेन रहेगा...आपसे एक रिक्वेस्ट है, ड्राई-फ्रूट्स के पैक पाकेट में ही रखिएगा..ओपन करने से आम लोगों में अच्छा मैसेज नहीं जाएगा...


अभी मिस्टर हाथी ने अपनी बात भी पूरी नहीं की थी कि लड़खड़ाते कदमों से मिस्टर पीके माइक के पास आकर बोले...अरे मिस्टर हाथी मरवाएंगे क्या...इतनी लंबी वॉक...वो भी सूखे-सूखे...गला तर करने का भी कोई प्रपोजल होगा या नहीं..इस पर मिस्टर हाथी ने जवाब दिया...मिस्टर पीके...यू भी न...टू मच...बडी़ जल्दी वरी करने लग जाता है...अरे वॉक के बाद सिटी माल के ओपन टेरेस रेस्तरां में डिनर से पहले कॉकटेल का भी अरेजमेंट रख लेते हैं...वैसे कैंडल लाइट मार्च से थोडी दूरी पर एक मोबाइल कार-ओ-बार भी कन्वीनिएंस के लिए साथ-साथ चलेगी...


अभी ये बात चल ही रही थी कि मिस कलरफुल खडी़ हो गईं...मिस्टर सेक्रेट्री हमको आपसे एक शिकायत होता...पिछली बार जेसिका लाल इश्यू पर कैंडल लाइट मार्च निकाला था तो आपने प्रेस के जिन लोगों को इन्वाइट किया था, उन्हें ज़रा भी न्यूज़-सेंस नहीं था...मैंने उस ओकेशन के लिए स्पेशल चेन्नई से कांजीवरम की साड़ी मंगाया था...लेकिन अगले दिन पेज थ्री पर मेरा एक भी फोटोग्राफ नहीं छपा...मेरा दस हज़ार रुपया पानी में चला गया ...इस बार उन्हें पहले से ही अलर्ट कर दीजिएगा कि कल कैंडल लाइट मार्च को कवर करते हुए वैसा सिली मिस्टेक न हो...चाहें तो एंगल वगैरहा सेट करने के लिए एक बार फुल ड्रेस रिहर्सल भी कर लेते हैं...सभी रिस्पेक्टेड लेडीज़ ने मिस कलरफुल की बात को ज़ोरदार क्लैपिंग के साथ एप्रिशिएट किया...

इसके बाद सभी ने आखिरी नोट पर कल के प्रोग्राम की सक्सेस के लिए चीयर्स किया...


(...धन्य है हमारे ये सोशेलाइट्स)
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TRUTH OF KEY COUNTRIES OF THE WORLD...KHUSHDEEP

शनिवार, 16 जुलाई 2011

मक्खन का हाल कैसा है पता भी है आपको...खुशदीप



देश का माहौल गर्म है...आतंकवाद के मुंबई पर फिर वार से हर भारतीय के दिल में उबाल है...लेकिन वो उबलने के सिवा और कर भी क्या सकता है....जिन्हें करना है वो खुद ही एक-दूसरे की टांग-खिंचाई में लगे हैं...और तो और, महाराष्ट्र सरकार के दो मुख्य धड़ों में खुद ही जूतम-पैजार हो रही है...सीएम पृथ्वीराज चव्हाण (कांग्रेस) खामियों का ठीकरा एनसीपी से जुड़े गृह मंत्री आर आर पाटिल (जनाब 26/11 हमले के वक्त भी महाराष्ट्र के गृह मंत्री थे) के सिर पर फोड़ रहे हैं तो एनसीपी की पृथ्वीराज को ही सलाह है पहले आइना देख ले...जिस वक्त धमाके हो रहे थे दिल्ली में केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय फैशन शो में रैम्प पर मॉडल-बालाओं को थिरकते देखने की महत्ती ज़िम्मेदारी निभा रहे थे...अब धमाकों की खबर मिलने पर शो बीच में छोड़ देते तो फैशन इंडस्ट्री की तौहीन नहीं हो जाती...सहाय के इस कारनामे की निंदा बीजेपी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने की...लेकिन जब पता चला फैशन शो बीजेपी के ही राष्ट्रीय सचिव अशोक प्रधान की डिजाइनर बेटी के कलेक्शन को प्रमोट करने के लिए था तो बीजेपी को भी काटो तो खून नहीं...सहाय और प्रधान रैंप के साथ बिल्कुल अगली पंक्ति में ही कंधे से कंधा मिलाए बैठे थे...क्या नज़ारा था, सारे मतभेद भुलाकर कांग्रेस-बीजेपी साथ-साथ और आम आदमी का मुकद्दर आतंकवादियों के हाथ...

खैर छोड़ो ये सब टंटे मैं तो आपको मक्खन का किस्सा सुनाने चला था...

ढक्कन मक्खन से...कि गल, बड़ा उदास लग रहा है...

मक्खन....घर में दो पैसे की इज़्ज़त नहीं...

बीवी कोई गल सुनदी नहीं...

मुंडा कोई काम करदा नहीं...

कुड़ी (बेटी) दे लछण ठीक नहीं...


नौकर डरदा नहीं...

ड्राइवर नू रास्ते नहीं पता...


वॉचमैन नौकरी छडन दी धमकी देता रहता है...

मक्खन का दर्द सुनकर ढक्कन ठंडी सांस लेकर बोला....

मक्खणां तेरा हाल ते बिल्कुल मनमोहन सिंह वरगा (जैसा) हो गया वे...

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शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

ये जीना भी कोई जीना है लल्लू...खुशदीप


मुंबई के जज़्बे को सलाम...नेताओं के मुंह से ये जुमला सुनकर त्रासदी की इस घड़ी में भी चेहरे पर विद्रूप सी हंसी आए बिना नहीं रहती...आतंकवादी धमाके करें या  26/11 जैसे हमलों से मुंबई को बंधक बना लें...सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटने वाले नेताओं के वही घिसे-पिटे बयान अब ऐसे लगते हैं जैसे कानों में गर्म सीसा उढ़ेला जा रहा है...

मुंबई के ताजा सीरियल ब्लास्ट के बाद नेताओं के मुखार-बिन्दु से निकले गए उवाच और उन पर कॉमन-मैन का दर्द...

गृह मंत्री पी चिदंबरम

मुंबई सीरियल ब्लास्ट खुफिया तंत्र की खामी नहीं है...आतंकवादी हमले भारत में किसी भी शहर में हो सकते हैं...दुनिया में किसी भी जगह को पूरी तरह महफूज़ नहीं कहा जा सकता....मुंबई में 31महीने बाद आतंकवादी वारदात हुई है...

कॉमन मैन...बड़ा धन्यवाद है चिदंबरम जी आपका कि 31 महीने तक मेरी जान बचाए रखी...वैसे एक बात बताइए, ये जीना भी कोई जीना है लल्लू...
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कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह

हम ये नहीं कह सकते कि कोई आतंकवादी घटना नहीं होगी...हमारा रिकॉर्ड पाकिस्तान से बेहतर है, जहां हर हफ्ते आतंकवादी घटनाएं होती हैं...


कॉमन मैन...दिग्गी राजा चिंता मत करो, जिस रास्ते पर आप और आपकी सरकार चल रही है, भारत को भी पाकिस्तान बना कर ही छोड़ोगे...
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कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी


देश में हर आतंकी हमले को रोकना मुश्किल है...सरकार के उठाए कदमों की वजह से 99फीसदी आतंकवादी हमलों को रोकने में कामयाबी मिली है...सिर्फ एक फीसदी हमले रह गए हैं जिन्हें रोकने के लिए भी हमें कोशिश करनी चाहिए...


कॉमन मैन...चलिए पीएम इन वेटिंग के नाते युवराज ने अब हर मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना तो सीख लिया है...लेकिन ऐसा तो मत बोलिए जो ज़ख्मों पर मरहम लगाने वाला कम और नमक छिड़कने वाला ज़्यादा है...जिसे आप एक फीसदी कह रहे हैं, ज़रा उस हमले में मारे गए किसी निर्दोंष के घरवालों से पूछिए कि आपका ये बयान उन्हें सुनने में कैसा लगेगा....


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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह


आतंक के इस बर्बर कृत्य की निंदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं...


कॉमन मैन...प्रधानमंत्री जी आपके पास वैसे ही बोलने के लिए अपने शब्द होते कहां  हैं...
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बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी

ज़ीरो टॉलरेंस और ज़ीरो टॉक की नीति पर चलते हुए पाकिस्तान से सभी तरह की बातचीत बंद कर देनी चाहिए...


कॉमन मैन...सही कह रहे हैं आडवाणी जी....लेकिन देश ये भी नहीं भूला है कि जब आप गृह-मंत्री थे तो पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने किस तरह ठीक आपकी नाक के नीचे संसद पर हमला किया था...2003 में मुंबई के इसी झावेरी बाज़ार को आतंकवादियों ने निशाना बनाया था...लेकिन इसके बावजूद आपके स्टेट्समैन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने करगिल के सूत्रधार मुशर्रफ़ की नज़र उतारते हुए इस्लामाबाद जाकर पाकिस्तान से बातचीत शुरू करने की नींव डाली थी....

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खैर छोड़िए, नेताओं को इन सबसे क्या लेना-देना...मुंबई के जज़्बे को सलाम कीजिए और काम पर चलिए...

बुधवार, 13 जुलाई 2011

देश एक, प्रधानमंत्री अनेक...खुशदीप

सरकार ने टीम अन्ना के जनलोकपाल बिल की ये कह कर घिच्ची घोप दी कि सिविल सोसायटी देश की संसदीय परंपरा और संविधान से ऊपर नहीं हो सकती...सीपीआई जैसे इक्का दुक्का दलों को छो़ड़ कर देश की तमाम सियासी पार्टियों ने भी सरकार के ही सुर में सुर मिलाया...मुख्य विपक्षी दल बीजेपी का रवैया तो सबसे विचित्र रहा...अन्ना हज़ारे से बीजेपी का पूरा कुनबा मिला...लेकिन सरकार की बुलाई सर्वदलीय बैठक में बीजेपी ने ही सवाल दागा कि आखिर सिविल सोसायटी को सरकार ने इतना भाव ही क्यों दिया था...सरकार ने पहले राजनीतिक दलों से ही राय ले ली होती तो सिविल सोसायटी का गुब्बारा फूलने से पहले ही पंचर हो जाता...खैर छोड़िए ये सब....क्या सरकार और क्या दूसरे राजनीतिक दल अपने हर काम को जायज़ ठहराने के लिए संसद और संविधान की दुहाई देते हैं...चलिए मान लेते हैं इनकी बात...लेकिन संविधान ये भी तो कहता है कि मंत्रियों को चुनने का विशेषाधिकार सिर्फ प्रधानमंत्री के पास ही होता है...लेकिन क्या हमारे देश के मौजूदा प्रधानमंत्री के विवेक से ही मंत्री बन रहे हैं और हट रहे हैं...या देश में कुछ 'सुपर प्रधानमंत्री' भी हैं जिनके आगे प्रधानमंत्री भी लेमडक (लुंजपुंज) हो जाते हैं...



सोनिया गांधी के हाथ में पीएम का रिमोट कंट्रोल होने का रोना तो विपक्षी दल रोज़ ही रोते रहते हैं...सोनिया के सुपर होने की बात से पीएम भी इनकार नहीं करते...2009 में यूपीए की दूसरी पारी शुरू हुई तो नीरा राडिया टेपकांड के ज़रिए सच सामने आया कि ए राजा को किस तरह मंत्री की कुर्सी मिली...राजा के नाम पर प्रधानमंत्री ने करुणानिधि से खुले तौर पर नाराज़गी भी जताई लेकिन करुणानिधि ने उन्हें वीटो कर राजा को ही मंत्री बनाया...यानि यहां 'सुपर प्रधानमंत्री' करुणानिधि साबित हुए...

लेकिन इस बार जो हुआ, वो तो पहले इस देश में कभी नहीं हुआ था...एक अदना से मंत्री ने प्रधानमंत्री को ही अंगूठा दिखा दिया...रविवार को यूपी के मलवां और असम के रांगिया में एक ही दिन में दो ट्रेन हादसे हुए...प्रधानमंत्री ने रेल राज्य मंत्री मुकुल राय (नए फेरबदल में सिर्फ शिपिंग राज्य मंत्री) को पहले निर्देश दिया कि मलवां में राहत कार्यों में कोई कसर न छोड़ी जाए...मुकुल राय के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी..जबकि रेल राज्य मंत्री के नाते उत्तर प्रदेश उन्हीं के कार्यक्षेत्र में आता था...प्रधानमंत्री को झक मार के दूसरे रेल राज्य मंत्री मुनियप्पा को मलवां भेजना पड़ा...प्रधानमंत्री ने फिर मुकुल राय से असम के रांगिया जाने के लिए कहा तो भी उन्होंने कोई तवज्जो नहीं दी...किसी पत्रकार ने सवाल पूछा तो कार का दरवाज़ा ये कहते पटक कर आगे बढ़ गए...रेल मंत्री मैं नहीं प्रधानमंत्री खुद हैं...

ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद से रेल मंत्रालय का पदभार प्रधानमंत्री के पास ही था...प्रधानमंत्री असम से ही राज्यसभा सांसद हैं...इसी वजह से भी वो मुकुल राय को असम भेजना चाहते थे...लेकिन मुकुल राय ने रविवार को कोलकाता जाकर अपनी आका ममता बनर्जी के साथ जंगलमहाल क्षेत्र के दौरे को तरजीह दी...प्रधानमंत्री को ये ठगा सा जवाब दे दिया कि मैंने नार्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जनरल मैनेजर से बात कर ली है वहां सब ठीकठाक है, कुछ लोग मामूली तौर पर घायल हुए हैं, इसलिए वहां मेरे जाने की ज़रूरत नहीं है...मुकुल राय ने एक बात और कही कि वो हावड़ा स्टेशन पर आने वाले घायलों की खोजखबर ले रहे थे...यानि हावड़ा से आगे उन्हें कुछ और नज़र आता ही नहीं...मुकुल राय ने जिस तरह प्रधानमंत्री के कद को बौना किया उससे यही लगता है कि उनकी नज़र में सिर्फ एक ही 'सुपर प्रधानमंत्री' हैं- ममता बनर्जी...इस मामले में ममता बनर्जी ने भी प्रधानमंत्री की गरिमा का ध्यान रखने की जगह जिस तरह मुकुल राय का बचाव किया वो दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा...तृणमूल कांग्रेस ने आधिकारिक बयान में कहा कि रांगिया में राहत कार्य पूरा हो गया था, इसलिए मुकुल राय वहां नहीं गए...इतना सब होने के बावजूद प्रधानमंत्री की हिम्मत नहीं हुई कि रेल मंत्रालय की ज़िम्मेदारी कैबिनेट मंत्री के नाते किसी कांग्रेसी नेता को सौंप सकें...तृणमूल के दिनेश त्रिवेदी को ही रेल मंत्रालय सौंपा गया..

डीएमके के 'सुपर प्रधानमंत्री' करुणानिधि बेटी कनिमोझी के जेल जाने को लेकर इतने नाराज हैं कि उन्होंने ये बताना ही मुनासिब नहीं समझा कि डीएमके से किन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जाए...राजा और दयानिधि मारन की छुट्टी के बाद खाली हुए मंत्रालयों को भरने की भी हिम्मत प्रधानमंत्री की नहीं हुई...प्रधानमंत्री का कहना है कि डीएमके के लिए दो कैबिनेट पद रिक्त रखे जा रहे हैं...राजा और मारन ने भी तभी इस्तीफा दिया था जब चेन्नई से करुणानिधि ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था...ऐसे ही अगर एनसीपी के मंत्रियों या सांसदों का भी मामला होगा तो उनके लिए शरद पवार का हुक्म ही पत्थर की लकीर होगा न कि प्रधानमंत्री का...चलो ये तो रहे सहयोगी दल...कांग्रेस को केंद्र में सरकार चलाने के लिए समर्थन देने के बदले आंखें तरेर सकते हैं...लेकिन मंत्रिमंडल में मंगलवार को फेरबदल के बाद कांग्रेस के ही श्रीकांत जेना, गुरुदास कामत, वीरप्पा मोइली ने जिस तरह बगावती तेवर दिखाए हैं, उनसे तो यही लगता है कि अपनी पार्टी में भी प्रधानमंत्री की बात को काटने वालों की कमी नहीं है...क्या अब भी प्रधानमंत्री कहेंगे कि मैं मजबूर नहीं मज़बूत प्रधानमंत्री हूं...

स्लॉग ओवर

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दांत दुखने पर डेंटिस्ट के पास गए...

डेंटिस्ट ने मुआयने के लिए प्रधानमंत्री से मुंह खोलने के लिए कहा...

प्रधानमंत्री वैसे ही बैठे रहे...अब डेंटिस्ट एक्ज़ामिन कैसे करे...

थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद डेंटिस्ट हार कर बोला...सर, कम से कम यहां तो अपना मुंह खोल दीजिए...

सोमवार, 11 जुलाई 2011

बीएस पाबला यानि नदिया न पिए कभी अपना जल, वृक्ष न खाए कभी अपना फल...खुशदीप


ग्यारह जुलाई का दिन खास है...अपने लिए तो सभी ब्लॉग लिखते हैं लेकिन एक ब्लॉग जो पूरे ब्लॉगजगत की खुशियों को साझा करने के लिए मंच देता है...वो ब्लॉग आज अपनी 500वीं पायदान पार करने जा रहा है...खुशी जन्मदिन की हो या वैवाहिक वर्षगांठ की, सबसे पहले सूचना पाबला जी से ही मिलती है...पिछले साल मेरी वैवाहिक वर्षगांठ या जन्मदिन पर जितनी बधाईयां मिली थीं, उससे पहले किसी साल में नहीं मिली थी...सिर्फ पाबला जी के ब्लॉग की मेहरबानी से...

मुझे पिछले साल ताज्जुब इस बात पर भी हुआ था कि मैंने कभी उन्हें नहीं बताया था कि मेरी वैवाहिक वर्षगांठ कब है लेकिन 17 अक्टूबर की पूर्वसंध्या पर ही उन्होंने मुझे फोन पर बधाई दी तो मैंने उनसे पूछा भी था कि आपको कैसे पता चला...लेकिन उन्होंने नहीं बताया....ठीक वैसे ही जैसे हम पत्रकार कभी अपने सोर्स का खुलासा नहीं करते...पाबलाजी वाकई वो ब्लॉगयोगी हैं जिन्होंने इस विधा को वर्चुएल्टी से निकालकर रिएल्टी में बदला है...

सब की खुशियों को याद रखने वाले पाबला जी बस अपने जन्मदिन या वैवाहिक वर्षगांठ पर पोस्ट नहीं लगाते...इस संबंध में पाबला जी को एक गीत समर्पित है जो पहली बार मैंने उन्हीं से सुना था...आप भी वो गीत पढ़िए, सुनिए, देखिए, गुनगुनाइए...

नदिया न पीए कभी अपना जल,

वृक्ष न खाए कभी अपने फल,
अपने तन का,मन का, धन का दूजों को जो दे दान है,
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है,
नदिया न पीए कभी अपना जल...


अगर किसी का तन जले और दुनिया को मीठी सुहास दे
दीपक का उसका जीवन है जो दूजों को अपना प्रकाश दे,
धर्म है जिसका भगवद् गीता, सेवा ही वेद-कुरान है,
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है,
नदिया न पीए कभी अपना जल...


चाहे कोई गुणगान करे, चाहे करे निंदा कोई,
फूलो से कोई सत्कार करे या काटे चुभा जाए कोई,
मान और अपमान ही दोनों जिसके लिए समान है
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है...
नदिया न पीए कभी अपना जल...







(फिल्म-कण कण में भगवान-1963, गायक- महेंद्र कपूर, गीतकार- भरत व्यास, संगीतकार- पंडित शिवराम)
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ब्लडी इंग्लिश ने पति को कैसे धोखा दिया...जानना चाहते तो हैं इस लिंक पर जाइए...

Bloody English...Khushdeep



शनिवार, 9 जुलाई 2011

धर्म-पत्नी का मतलब...खुशदीप


स्वामी जी से एक भक्त बोला...


स्वामी जी, ऐसी पत्नी को क्या कहेंगे जो...

सुंदर हो...

लंबी हो...

बुद्धिमान हो...

सौभाग्यशाली हो...

सहनशील हो...

पति को समझती हो...

कभी झगड़ा न करती हो...

स्वामी जी बोले...

....

....

अफ़वाह....
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धर्म-भाई का मतलब...धर्म का भाई...यानि जो असली का भाई न हो...

धर्म-पिता का मतलब- धर्म के पिता...यानि जो असली का पिता न हो...

धर्म-बहन का मतलब- धर्म की बहन...यानि जो असली की बहन न हो...

तो...

फिर...

धर्म-पत्नी का मतलब असली की पत्नी क्यों...
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एक शख्स कुंभ के मेले में प्रार्थना कर रहा था...

हे प्रभु न्याय करो...

हे प्रभु न्याय करो...

हमेशा भाई-भाई को बिछड़वाते हो...

कभी पति-पत्नी पर भी ट्राई करो...


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पत्नी...तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया कि तुम्हारी पहले ही रानी नाम की पत्नी है...

....

....

पति...मैंने बताया तो था कि तुम्हें रानी की तरह ही रखूंगा...

(निर्मल हास्य)
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जानना चाहते हैं, कौन ज़ोर-शोर से कह रहा है...कांग्रेस पार्टी ज़िंदाबाद...तो इस लिंक पर जाइए...


Congress Party...You are Great...Khushdeep

शिरडी के साई बाबा को भी नहीं छोड़ा...खुशदीप


देते हैं भगवान को धोखा, इन्सां को क्या छोड़ेंगे...45 साल पहले आई मनोज कुमार की फिल्म उपकार का ये गाना शिरडी में हक़ीक़त साबित हुआ है...12 जून को एक अज्ञात भक्त ने शिरडी के साई बाबा को 25 लाख रुपये की शॉल चढ़ाते हुए दावा किया था कि वो सोने के असली तार, हीरे-जवाहरात से जड़ी है...लेकिन शिरडी साई संस्थान के वैल्यूअर ने शॉल की जांच की तो वो नकली निकली...25 लाख की शॉल 25 हज़ार की भी नहीं निकली...जब शिरडी साई संस्थान ने शॉल चढ़ाने वाले भक्त से संपर्क साधा तो वो भी हैरान रह गया...भक्त का कहना है कि पुणे के जिस कारीगर से उसने शॉल बनवाई, उसी ने धोखा किया है...भक्त ने शिरडी साई संस्थान को 25 लाख रुपये देने की भी पेशकश की है...इस पूरे वाकये ने शिरडी में चढ़ने वाले चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं...आखिर शॉल के नकली होने का पता चलने में एक महीने का वक्त क्यों लग गया...सोने-चांदी और बड़ी नकद राशि की भेंट को लेकर शिरडी साई संस्थान में क्या तौर-तरीके हैं, इसके खुलासे के लिए पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए...

अब हर कोई तो ट्रावणकोर के राजे-महाराजों की तरह ईमानदार होगा नहीं...जो केरल के पद्मनाभ मंदिर की तरह तहखानों में जमा अकूत खजाने को भगवान की संपत्ति समझेगा...राजे-रजवाड़े खत्म होने के बाद ये राजघराना चाहता तो सारी संपत्ति को चोरी-छिपे ठिकाने लगा सकता था...लेकिन उसने ऐसा नहीं किया...अब ज़रूर सबकी नज़रों में आ जाने की वजह से पांच लाख करोड़ के खजाने की हिफ़ाज़त को ख़तरा हो जाएगा...खैर बात हो रही थी, शिरडी के साई बाबा को चढ़ी 25 लाख की नकली शॉल की...देखिए अपनी आंखों से ही उस शॉल को...


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जानना चाहते हैं, कौन ज़ोर-शोर से कह रहा है...कांग्रेस पार्टी ज़िंदाबाद...तो इस लिंक पर जाइए...

गुरुवार, 7 जुलाई 2011

कौन है 'असली'...अन्ना हज़ारे या शंभूदत्त शर्मा...खुशदीप


  अन्ना हज़ारे का नाम आज देश में ही नहीं सात समंदर पार भी जाना जाता है... लेकिन शंभूदत्त शर्मा का नाम आप सब में बहुत कम जानते होंगे...सच बताऊं तो आज से पहले मैंने भी कभी शंभूदत्त जी के बारे में नहीं सुना था...ये तो भला हो बीबीसी के विनीत खरे का, जिनकी रिपोर्ट पढ़कर मैंने शंभूदत्त जी के बारे में जाना...93 बसंत देख चुके शंभूदत्त शर्मा दिल्ली में ही रहते हैं...जोश इतना है कि इस साल तीस जनवरी को शंभूनाथ जी ही लोकपाल के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठने वाले थे...टीम अन्ना के आग्रह पर शंभूदत्त जी ने अनशन का इरादा त्यागा था...आप भी इस रिपोर्ट में शंभूदत्त जी की खरी-खरी सुनकर सोचने को मजबूर होंगे कि क्यों अपार जनसमर्थन मिलने के बावजूद अन्ना का आंदोलन धार नहीं पकड़ सका...ऐसी धार जो सरकार की शातिर चालों को उसी के वार से काट सके...पढ़िए ये रिपोर्ट, मेरी तरह बहुत कुछ नया जानने को मिलेगा...

'असली' अन्ना ने कहा मांगे अव्यावहारिक


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स्वंर्ग पहुंच कर विजय माल्या ने क्या किया...पढ़िए इस लिंक पर...

ONE AND ONLY VIJAY MALLYA...KHUSHDEEP


सोमवार, 4 जुलाई 2011

नसबंदी कराओ, नैनो ले जाओ...खुशदीप




परिवार नियोजन का नाम लेते ही संजय गांधी का नाम ज़ेहन में आता है...सत्तर के दशक में संजय गांधी ने परिवार नियोजन के नाम पर जबरन नसबंदी का जो कहर बरपाया था, उसे लोग आज तक नहीं भूले हैं...स्कूलों में बच्चों को वज़ीफ़ा या फीस में राहत के लिए भी पहले पिता की नसबंदी का सर्टिफिकेट लाकर देना होता था...लेकिन इस तानाशाही सख्ती का जनता ने कैसा करारा जवाब 1977 में इंदिरा-संजय को दिया था, वो लोकतंत्र का कभी न भूलने वाला अध्याय है...संयोग से उन दिनों में कांग्रेस का चुनाव चिह्न भी गाय-बछड़ा ही हुआ करता था...

संजय गांधी ने जो एक्सपेरिमेंट भारत में करना चाहा था, वैसा ही कुछ चीन में हुआ...चीन ने अस्सी के दशक के शुरू में आबादी पर लगाम लगाने के लिए फरमान सुनाया कि किसी भी नवदंपत्ति को एक बच्चे से ज़्यादा करने की इजाज़त नहीं होगी...अब चीन तो चीन है...सख्ती से सरकारी हुक्म पर अमल हुआ...चीन में आबादी की वृद्धि की रफ्तार पर लगाम लग गई...ढाई दशक बीत जाने के बाद चीन को महसूस हुआ कि आबादी को स्थिर करने के चक्कर में लिंग अनुपात असंतुलन या विवाह को लेकर अन्य सामाजिक परेशानियों का खतरा बढ़ रहा है तो उसने एकल संतान पॉलिसी में रियायत देने का फैसला किया ...अब ऐसे युवक-युवती जो मां-बाप की अकेली संतान रहे हैं, और उनकी उम्र शादी लायक हो गई है तो वो शादी के बाद दो बच्चे कर सकते हैं...यानि एकल संतान का फरमान उन पर लागू नहीं होगा...

नई जनगणना के मुताबिक भारत में आबादी सवा अरब तक पहुंच गई है...आबादी की वृद्धि की दर में भारत में भी कमी आई है...लेकिन ये कमी इतनी संतोषजनक नहीं है कि हम चैन से बैठ जाएं...यही हालत रही तो वो दिन दूर नहीं है जब आबादी में हम चीन को भी पीछे छोड़ देंगे...चीन का भू-भाग भारत से कहीं बड़ा है...इसलिए चीन की तुलना में भारत को आबादी का दंश कहीं ज़्यादा सहन करना पड़ रहा है...गरीबी, कुपोषण, स्वास्थ्य ये सारी समस्याएं इसीलिए हैं कि हम सीमित संसाधनों से इतनी बड़ी आबादी की ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकते...

सत्तर के दशक में संजय गांधी का परिवार नियोजन कार्यक्रम इतना बदनाम हुआ कि बाद में इसका नाम ही बदल कर परिवार कल्याण कर दिया गया... बड़े परिवार की अपेक्षा छोटे परिवार के फायदों को लेकर हमारे देश में भी पिछले दो-तीन दशक में काफी जागरूकता आई है...लेकिन अब भी इस दिशा में काफी कुछ किया जाना बाकी है...यहां भ्रांतियां किस कदर फैलती है, इसका सबूत पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के दौरान भी दिखा...गलतफहमी के चलते कुछ लोगों ने बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने से ही इनकार कर दिया...उन्हें डर था कि कहीं ये उनकी वंशबेल को रोकने की साज़िश तो नहीं...ये तो भला हो उन्हीं के बड़े-बुज़ुर्गों का जिनके समझाने पर ये भ्रांति दूर हो पाई...ये तय है कि छोटा परिवार ही हमारे सुखी भविष्य के साथ खुशहाल और सशक्त भारत की भी पहचान हैं...इस विषय में देश में जो भी जागरूकता आई है वो लोगों के स्वेच्छा से रुचि लेने से ही संभव हो सकी है...देश के जिन इलाकों में अब भी लोग छोटे परिवार की ज़रूरत को लेकर सजग नहीं है, वहां अभिनव मुहिम चलाए जाने की सख्त आवश्यकता है...सरकार को भी चाहिए कि ऐसे इलाकों में छोटा परिवार अपनाने वालों को प्रोत्साहित करें...जिससे दूसरे भी उनसे प्रेरणा ले सकें...

ऐसी ही एक रिपोर्ट राजस्थान के झुंझनू ज़िले से आई है...बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक यहां लोगों को नसबंदी के प्रति आकर्षित करने के लिए नैनो कार इनाम में देने की योजना शुरू की गई है...



कार के अलावा मोटर साइकिल, टेलीविज़न, मिक्सर ग्राइंडर भी इनामों की सूची में है...झुंझनू के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी सीताराम शर्मा ने बीबीसी को बताया कि पहली जुलाई और सितंबर अंत के बीच नसबंदी करवाने वाले लोगों को एक कूपन दिया जाएगा और इन सभी कूपनों को इकट्ठा कर लाटरी के माध्यम से विजेता का नाम घोषित किया जाएगा...झुंझनू काफ़ी शिक्षित इलाक़ा है... यहाँ जनसंख्या दर बेहद कम है और यहाँ की आबादी 21 लाख के आसपास है....पिछले 10 सालों में जनसंख्या बढ़ने की दर 11.28 प्रतिशत रही है...


झुंझनू के ज़िलाधिकारी अंबरीश कुमार बताते हैं कि नसबंदी करवाने के लिए पहले भी सरकार प्रलोभन देती रही है और हर व्यक्ति को क़रीब 2000 रुपए दिए जाते हैं, लेकिन इस योजना से उम्मीद है कि ज़्यादा लोग नसबंदी करवाने के लिए आगे आएँगे...अंबरीश कहते हैं कि ऐसी योजना समाज के निचले वर्ग के लोग ही अपनाते हैं और कोशिश है उनके लिए इस योजना को और आकर्षक बनाना....इन इनामों को राजस्थानी सेवा संघ नाम के एक स्थानीय ट्रस्ट ने प्रायोजित किया है... ट्रस्ट से जुड़े हुए निर्मल झुनझुनवाला कहते हैं कि ट्रस्ट ने ये काम समाज के लिए किया है...ट्रस्ट की तरफ़ से ये प्रस्ताब अंबरीश कुमार के सामने रखा गया था, जिन्हें ये बात बहुत पसंद आई..निर्मल बताते हैं कि उनका ट्रस्ट कई जगह शैक्षणिक संस्थान चलाता है और ये करीब 60 साल पुराना है...

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ओसामा बिन लादेन इतनी आसानी से क्यों मारा गया...यह राज़ जानना चाहते हैं तो इस लिंक पर जाईये....






रविवार, 3 जुलाई 2011

अन्ना हज़ारे क्यों गांधी नहीं हो सकते...खुशदीप




एक एसएमएस बड़ा चल रहा है...चवन्नी यानि चार आना को प्रचलन से बाहर क्यों किया...दरअसल सरकार को अन्ना शब्द से ही इतना खौफ़ हो गया है कि उसे चवन्नी में ही चार-चार अन्ना नज़र आने लगे थे...एक अन्ना को ही झेलना मुश्किल है, फिर चार अन्ने कैसे झेले जाते...सत्याग्रह में वाकई ही बड़ी ताकत होती है...लेकिन ज़रूरी है कि उसमें सिर्फ सत्य का ही आग्रह हो...यही वजह है कि गांधी जी के 1930 में दांडी यात्रा के दौरान किए गए नमक सत्याग्रह को अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले 10 महत्वपूर्ण आंदोलनों की सूची में दूसरे स्थान पर रखा है...गांधी जी के सत्याग्रह और नौ अन्य आंदोलनों की बात बाद में...पहले देश के मौजूदा हालात की बात कर ली जाए...

अन्ना हज़ारे
अन्ना हज़ारे कल तक कह रहे थे कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने मंच पर नहीं आने देंगे...

आज वही अन्ना अपने सिपहसालारों के साथ राजनीतिक दलों के द्वारे-द्वारे जाकर समर्थन मांग रहे हैं...

कांग्रेस
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कह रहे हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन कैबिनेट में उनके कुछ साथियों और कांग्रेस में कुछ नेताओं की राय इससे अलग है...

फिर आप प्रधानमंत्री किस बात के हैं...न्यूक्लियर डील पर जैसे सख्त तेवर आपने दिखाए थे, वो अपनी पार्टी में एक राय बनाने के लिए आज क्यों नहीं दिखा रहे हैं...

बीजेपी
पहले सरकार लोकपाल पर अपने बिल का ड्राफ्ट पेश करें, फिर पार्टी अपनी राय व्यक्त करेगी कि प्रधानमंत्री, उच्च न्यायपालिका, संसद में सांसदों के बर्ताव को लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए या नहीं...

क्यों भाई, अन्ना जब आपके द्वारे गए तो आपके पूरे कुनबे ने उनसे भेंट की, फिर आपको आज साफ़ तौर पर पार्टी की राय बताने में क्या परेशानी है...

नीतीश कुमार
अन्ना की तारीफ़ की...अन्ना से अपनी तारीफ़ भी करा ली...बिहार में लोकायुक्त के गठन की बात भी मान ली...

लेकिन अन्ना से मुलाकात के दौरान लोकपाल बिल पर अपने पत्ते छुपाए रखे...क्यों नीतीश जी आप तो साफ़गोई के लिए जाने जाते हैं, फिर यहां गोल-मोल बात क्यों...

कहने का लब्बोलुआब यही है कि अन्ना लाख कोशिश कर ले लेकिन सभी राजनीतिक दल एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं...कौन सांसद चाहेगा कि उसके संसद में किए आचरण को लेकर लोकपाल उस पर चाबुक चलाए...


चलिए आज के हालात का ज़िक्र तो हो गया...अब बात बापू के सत्याग्रह और दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले नौ अन्य आंदोलनों की... बापू ने मार्च 1930 में अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से 24 दिन की यात्रा शुरू की थी....यह यात्रा समुद्र के किनारे बसे शहर दांडी के लिए थी, जहां जा कर बापू ने औपनिवेशिक भारत में नमक बनाने के लिए अंग्रेजों के एकछत्र अधिकार वाला कानून तोड़ा था...

टाइम ने ‘नमक सत्याग्रह’ के बारे में लिखा है कि इस सत्याग्रह ने ब्रिटिश वर्चस्व तोड़ने के लिए भावनात्मक एवं नैतिक बल दिया था...भारत पर ब्रिटेन की लंबे समय तक चली हुकूमत कई मायने में चाय, कपड़ा और यहां तक कि नमक जैसी वस्तुओं पर एकाधिकार कायम करने से जुड़ी थी...औपनिवेशिक हुकूमत के तहत भारतीय न तो खुद नमक बना सकते थे और न ही बेच सकते थे... उन्हें ब्रिटेन में बना और वहां से आयात किया गया महंगा नमक खरीदना पड़ता था...

पत्रिका ने ‘बापू’ के बारे में लिखा है कि करिश्माई व्यक्तित्व के धनी स्वतंत्रता आंदोलन के नेता महात्मा गांधी की दांडी यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग उनके साथ जुड़ गये...गांधी के साथ उन्होंने समुद्र से नमक बनाया...इसकी वजह से हजारों भारतीय कुछ महीने के अंदर गिरफ्तार किये गये...इससे एक चिंगारी भड़की जो सविनय अवज्ञा आंदोलन में बदल गई...इसने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष और स्वयं गांधी को पारिभाषित किया...‘नमक सत्याग्रह’ ने विदेशी हुकूमत के पतन का भावनात्मक और नैतिक आधार दिया...

टाइम ने 10 प्रभावशाली आंदोलनों की सूची में अमेरिकी स्वतंत्रता आंदोलन में निर्णायक भूमिका निभाने वाली ‘बोस्टन चाय पार्टी’ को पहले स्थान पर रखा है...वर्ष 1963 में वाशिंगटन में निकाले गये ‘सिविल राइट मार्च’ को तीसरा स्थान मिला है...इस सूची में समलैंगिक अधिकारों को लेकर वर्ष 1969 में न्यूयार्क में चले स्टोनवाल आंदोलन को चौथा, वियतनाम युद्ध के खिलाफ वाशिंगटन में हुए विशाल प्रदर्शन को पांचवा, ईरान में 1978 के मोहर्रम विरोध प्रदर्शन को छठवां और 1986 में हुए पीपुल पॉवर विरोध प्रदर्शन को सातवां स्थान दिया गया है...चीन में थ्येन आन मन चौक पर विरोध प्रदर्शन को आठवें, दक्षिण अफ्रीका में केपटाउन के पर्पल रेन प्रोटेस्ट को नौंवे और मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के खिलाफ इस वर्ष जनवरी में हुए विशाल प्रदर्शन को पत्रिका ने 10वें स्थान पर रखा है...

क्या आपको अन्ना हज़ारे या बाबा रामदेव के आंदोलनों में ऐसा दम नज़र आता है कि वो भारत में क्रांतिकारी परिवर्तन का आधार तैयार करें और टाइम की फेहरिस्त में अगला स्थान मिल जाए...
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आप सब के लिए चेतावनी...कभी रजनीकांत पर हंसने की भूल मत कर बैठिएगा...क्या कहा...क्यों...तो इस लिंक को पढ़ लीजिए...


Never ever try to laugh at Rajnikanth....Khushdeep

शनिवार, 2 जुलाई 2011

भावी सास-बहू की विलायती तकरार...खुशदीप


सास-बहू के झगड़े सिर्फ भारत में ही नहीं होते...मुल्क कोई सा भी हो इस रिश्ते की तकरार से बचा नहीं रह सकता...वो कहते हैं न घर में दो बर्तन होंगे तो खड़केंगे ही...अब सास होगी तो बहू को ऊंच-नीच समझाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझेगी ही...ये बात अलग है कि बहू इन नसीहतों को ओल्ड फैशन्ड बताते हुए एक कान से सुने और दूसरे कान से निकाल दे...

हां तो जनाब मैं आज पोस्ट में एकता कपूर के मेलोड्रामा...क्योंकि सास भी कभी बहू थी...जैसा कोई किस्सा नहीं सुनाने जा रहा...ये किस्सा सीधे विलायत यानि ब्रिटेन से इम्पोर्ट किया है...बराया मेहरबानी बीबीसी...

अक्सर जब कोई बड़ी घटना होती है, तो अंग्रेज़ी में कहावत है ‘दिस इज़ द मदर ऑफ़ ऑल इवेंट्स’...लेकिन ब्रिटेन में ईमेल से जुड़ी एक ऐसी घटना हुई है जिसे ‘मदर ऑफ़ ऑल ईमेल’ की जगह 'मदर-इन-लॉ ऑफ़ ऑल ईमेल' कहा जा रहा है...हुआ ये कि ब्रिटेन में 60 साल की एक महिला कैरोलिन बोर्न ने अपने सौतेले बेटे की मंगेतर हेडी विदर्स को उसकी बुराईयाँ करते हुए और शिष्टता का पाठ पढ़ाते हुए लंबा चौड़ा ईमेल लिख डाला...और वो ईमेल अख़बारों में प्रकाशित हो गया...अब उल्टा सास कैरोलिन की ही बुराई हो रही है... ट्विटर पर लोग लिख रहे हैं कि पहले कैरोलिन को ख़ुद शिष्टता के कुछ क़ायदे सीखने चाहिए....


कैरोलिन बोर्न

दरअसल भावी बहू हेडी कुछ दिन पहले अपने मंगेतर और होने वाली सासू माँ यानी कैरोलिन के घर बतौर मेहमान रहने गईं...लेकिन शायद होने वाली सासू माँ को हेडी की कुछ आदतें पसंद नहीं आईं...बस फिर क्या था कैरोलिन ने हेडी को उसकी ‘कमियाँ’ बताते हुए लंबा चौड़ा ईमेल लिख डाला और नसीहतें भी दीं कि कैसे उन्हें सुधारा जाना चाहिए...

मसलन, सासू माँ ने बेटे की मंगेतर को लिखा..." जब किसी के घर मेहमान होते हैं तो आप आकर ये नहीं बताते कि आप क्या खाएंगे और क्या नहीं..जब तक कि आपको किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी न हो....जब किसी दूसरे के घर में मेहमान होते हैं तो देर तक सोते नहीं रहते जबकि उस घर में लोग जल्दी उठते हों....आपको उस घर के क़ायदे मानने होंगे...किसी की भी महल या क़िले में शादी नहीं होती, जब तक कि आप ख़ुद उसके मालिक़ न हों, ये ढीठपन और सेलिब्रिटी जैसा व्यवहार है."



इसके अलावा सासू कैरोलिन ने लिखा, "तुम्हारे माता-पिता तुम्हारी शादी के ख़र्च के लिए ज़्यादा पैसे नहीं दे सकते... इसमें कुछ बुराई नहीं है सिवाय इसके कि आमतौर पर माना जाता है कि माता-पिता बेटियों की शादी के लिए पैसे बचाते हैं. अगर ऐसा है तो ये गरिमामय होगा कि आप अपना स्टैंडर्ड कम करो और सामान्य समारोह में शादी करो."

कैरोलिन ने शायद सोचा होगा कि उन्होंने ईमेल भेज दिया है और मामला यहीं ख़त्म हो जाएगा...लेकिन इस संदेश की आलोचनात्मक शैली से अचंभित हेडी ने संदेश अपनी एक दोस्त को भेजा... और यहाँ से होते-होते संदेश इंटरनेट पर पहुँच गया...इंग्लैंड में फूलों की खेती करनी वाली कैरोलिन जिन्हें पहले कोई नहीं जानता था, अब वे और उनकी तस्वीर ट्विटर जैसे माध्यमों पर हर ओर है...

फ़र्क़ ये है कि अब होने वाली बहू नहीं बल्कि होने वाली सासू माँ आलोचना के घेरे में हैं...उनके बेटे ने मीडिया से कहा है कि वे काफ़ी शर्मिंदा हैं लेकिन इसके अलावा कोई टिप्पणी नहीं की है...टीकाकारों का कहना है कि अगर कैरोलिन की कुछ बातें सही भी हैं लेकिन उन्हें कहने का तरीक़ा और अंदाज़ शिष्ट नहीं है...

अब हम विशुद्ध भारतीय इस मसले पर क्या राय रखते हैं...सासू मां ने सही किया था या गलत...

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Never ever try to laugh at Rajnikanth....Khushdeep