मंगलवार, 31 मई 2011

भविष्य की ख़बरें आज ही जानिए...खुशदीप

आदमी को अपना आने वाला कल जानने की बड़ी इच्छा होती है...अब ये इच्छा ही उसे ज्योतिषियों के द्वार पर ले जाती है...लेकिन हर कोई तो पॉल बाबा (ऑक्टोपस) की तरह सटीक नहीं होता...जो वर्ल्ड कप फुटबाल की तरह हर आने वाले मैच का नतीज़ा बताता जाए...लेकिन कुछ चीज़ें इतनी निश्चित हो जाती है जिनके बारे में अनुमान कोई भी लगा सकता है...ऐसे ही कुछ भविष्य की ख़बरें आपको आज बताने जा रहा हूं...




अजमल कसाब ने वृद्धावस्था की अमूमन होने वाली बीमारियों के चलते दम तोड़ दिया...


गोलमाल पार्ट 27 रिलीज हो गई है...तुषार कपूर अब भी कुछ बोल पाने (या अभिनय करने में) असमर्थ हैं...


शरद पवार संपत्ति के मामले में आधी दुनिया के मालिक हो गए हैं....


क्लीन शेवन मर्दों ने देर रात को चलने वाली कैब्स में सफ़र करना छोड़ दिया है...


फेसबुक को अलग देश घोषित कर दिया गया है...


दूरसंचार में 6-जी घोटाले पर सरकार ने जल्दी ही दूध का दूध और पानी का पानी करने का दावा किया है...


लक्षद्वीप लायन्स आईपीएल को ज्वाइन करने वाली 63वीं टीम है...


सचिन तेंदुलकर एक लाख रन बनाने से सिर्फ 999 रन दूर हैं...


प्रधानमंत्री ने दोहराया है कि पाकिस्तान के साथ लंबित सभी मुद्दों को आपसी बातचीत के ज़रिए सुलझा लिया जाएगा...


स्लॉग ओवर


एक पति ने पत्नी को चांटा मार दिया...थोड़ी देर बाद मनाने के लहज़े में पति ने पत्नी से कहा...आदमी जिससे प्यार करता है, उसी पर हक़ समझते हुए गुस्सा करता है...

पत्नी ये सुनने के बाद आराम से उठी और पति के दोनों गालों पर ताड़-ताड़ झन्नाटेदार रसीद कर दिए...

पति हक्का-बक्का...

पत्नी ने कहा...

...

...

...

तुम क्या समझते थे, मैं तुमसे कम प्यार करती हूं...


Hilarious Heart Attack...Khushdeep (A must for Doctors)

शनिवार, 28 मई 2011

वी वान्ट कंसेशन फॉर कसाब...खुशदीप

ओसामा बिन लादेन ने मरहूम होने के बाद ज़रूर अपने को कोसा होगा, काश भारत में ही जाकर किसी जेल में बंद होता...कबाब-बिरयानी खाने को अलग मिलते...भारत सरकार के पैसे पर हिफ़ाज़त अलग से होती...

मुल्ला उमर अगर अब भी ज़िंदा है तो उसके लिए मौका अच्छा है, कंधार हाईजैक की नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर भारत में आकर सरेंडर कर दे...फिर दस साल तक तो बाल भी बांका न होने की गारंटी है...आखिर मर्सी पेटीशन सिक्वेंस में लगेगी...और ये सिक्वेंस है कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेती...हमरी न मानो तो अफज़लवा से पूछो...

खैर छोड़िए, लादेन और मुल्ला उमर को...आते हैं दो साल 6 महीने से सरकारी मेहमान बने हुए अजमल कसाब पर...अगर मुंबई की आर्थर रोड में जेल में कसाब को कबाब मिलने की ख़बर सही है तो पहले से कितना मोटा हुआ कह नहीं सकता...सेहत तो पहले भी भरपूर थी...



महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि कसाब की सिक्योरिटी पर रोज़ दस लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं...ऊपर से इंडो तिब्बत बार्डर पुलिस ने ग्यारह करोड़ का बिल और थमा दिया...आईटीबीपी का कहना है कि उसके डेढ़ सौ जवान कसाब की सिक्योरिटी के काम में लगे हुए हैं...अब ग्यारह करोड़ का फटका महाराष्ट्र सरकार के हाथ में आया तो उसका हिलना लाज़मी था...एक ही झटके में ऐलान कर दिया...नहीं चाहिए हमें आईटीबीपी...कसाब की सिक्योरिटी महाराष्ट्र पुलिस ही कर लेगी...महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर आर पाटिल ने नाराज़गी जताते हुए ये और कह दिया कि कसाब को संभाल कर रखने की ज़िम्मेदारी पूरे देश की है अकेली महाराष्ट्र सरकार की नहीं...

आर आर पाटिल भूले नहीं हैं कि मुंबई हमले के बाद किस तरह उन्हें डिप्टी सीएम और गृह मंत्री की गद्दी छोड़नी पड़ी थी...पाटिल एनसीपी के हैं इसलिए केंद्र पर वार करने में उन्हें कोई हिचक महसूस नहीं होती...हां, कांग्रेस के होते तो ज़रूर हाईकमान के डंडे का डर सताता...पाटिल साहब ने एक और गजब की बात कही है...आईटीबीपी ने जो ग्यारह करोड़ का बिल भेजा है, उसमें केंद्र सरकार को कुछ कंसेशन करना चाहिए...क्या बात है साहब...हर तरफ बाय वन, गेट वन फ्री का ज़माना है, डिस्काउंट का बोलबाला है तो कसाब की सिक्योरिटी के बिल में क्यों नहीं मिलेगा कंसेशन...यही दुआ कर रहा हूं कि कल को पाटिल साहब नारा लगाना ही न शुरू कर दें...वी वान्ट कंसेशन फॉर कसाब....

शुक्रवार, 27 मई 2011

कॉमेडी ऑफ टेररस...खुशदीप

लिस्ट तो लिस्ट है...ठीक वैसे ही जैसे कभी धर्मेंद्र की फिल्म रखवाला का गाना बड़ा हिट हुआ था...दिल तो दिल है...
हां तो जनाब मैं बात कर रहा था उस लिस्ट की जो हम वक्त-वक्त पर बना कर पाकिस्तान को सौंपने का अनुष्ठान पूरा करते रहते हैं...जब पाकिस्तान के सम्मानित मेहमान ओसामा बिन लादेन का एबटाबाद की आलीशान हवेली में रहना अमेरिका को रास नहीं आता या मुल्ला उमर की आईएसआई के हाथों खातिरदारी की खबरें आती हैं तो हमें भी याद आ जाता है कि हमारे कुछ बंदों को भी पाकिस्तान ने परमानेंट गेस्ट बना रखा है...हम फिर पाकिस्तान को लिस्ट सौंप कर कहते हैं...बहुत कर ली आपने कराची के क्लिफ्टन में दाऊद की मेहमाननवाजी, अब हमें सौंप दीजिए..

इस पर पाकिस्तान का जवाब होता है, कौन दाऊद...

हाय, कौन न मर जाए पड़ोसी मुल्क के इस भोलेपन पर...लेकिन हमारी सरकार का अदब भी देखिए...फिर भी इसी उम्मीद पर जिए जा रहे हैं...एक दिन तो पाकिस्तान का दिल बदलेगा...और वो लाहौर से दिल्ली को आने वाली बस में इंडिया के सारे मोस्ट वांटेड को बिठा कर वाघा बार्डर खुद छोड़ने आएगा...चलिए ये तो रही पाकिस्तान की बात...

अब ज़रा ली जाए अपने घर की भी खबर...पाकिस्तान को हम इस तरह मोस्ट वांटेड की लिस्ट बनाकर सौंपते हैं जैसे घर पर किराना स्टोर से मंगाए जाने वाले सामान की लिस्ट बनाई जाती है...लिस्ट में हॉफ सेंचुरी पूरी करनी थी, इसलिए कुछ ऐसे महानुभावों के नाम भी जोड़ दिए जो यहां भारत में गिरफ्तार होने के बाद ज़मानत पर छूटे हुए हैं या फिर जेल में बंद हैं...अब बेचारी सीबीआई, इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो या मुंबई पुलिस सवा अरब की आबादी में से किस-किस का हिसाब रखे, कौन अंदर है कौन बाहर, कौन यहां हैं या कौन पाकिस्तान में...

अब लिस्ट में पचासा पूरा करना है तो करना है...अब भई थोड़ी बहुत चूक तो हो ही जाती है...क्या फर्क पड़ता है मसला नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी लिस्ट का हो या घर में चौके-चूल्हे को जलाए रखने वाली किराना स्टोर की लिस्ट का...चिदम्बरम साहब ने इस गूफ-अप को ह्यूमन एरर कह कर पल्ला झाड़ ही लिया है...अब ये बात अलग है कि इस कॉमेडी ऑफ टेररस से पाकिस्तान को भी कहने का मौका मिल गया है कि लिस्ट के बाकी लोगों को भी देखो, भारत में ही कहीं झुमरी तलैया में किशोर कुमार के गाने सुनते न मिल जाएं...



वाकई पाकिस्तान तो पाकिस्तान, मेरे देश की सरकार भी पूरी महान...


TO REALIZE SOMETHING, A MUST READ

शनिवार, 21 मई 2011

सतीश सक्सेना: ब्लॉगिंग के दिलीप कुमार...खुशदीप

फिल्म इंडस्ट्री में दिलीप साहब से ऊंचा वकार ( कद) किसी का नहीं है...अदाकारी की यूनिवर्सिटी कोई है तो वो सिर्फ और सिर्फ दिलीप कुमार ही हैं...आज भी जब खाली होता हूं तो कोशिश यही रहती है दिलीप साहब की कोई यादगार फिल्म देखूं...शायद दिलीप साहब अकेले ऐसे कलाकार होंगे जिन्होंने अपनी पहली फिल्म से आज तक बालों का एक जैसा ही स्टाइल रखा...हां कॉस्ट्यूम या पीरियड फिल्मों में करेक्टर की डिमांड हुई तो उन्होंने विग ज़रूर लगाए...कल सतीश सक्सेना भाई जी की पुरानी पोस्टों को बांच रहा था...इन पोस्टों में अलग अलग फोटों में सतीश भाई की बानगी देखकर मुझे यकायक दिलीप साहब के दिलकश स्टाइल याद आ गए...ऐसे में सतीश भाई को ब्लॉगिंग का दिलीप कुमार न कहूं तो क्या कहूं...आप भी ज़रा इस फोटो फीचर में गोता लगाइए और फिर कहिए...के मैं झूठ बोल्या...

गिली-गिली छू, खेल होता है शुरू...

कसम से बस पैमाना ही है, अंदर निर्मल जल है...

सादगी भी कयामत की चीज़ होती है...

अंधेरे में जो बैठे है, ज़रा नज़र उन पर भी डालो, अरे ओ रौशनी वालों...


नहीं भई, मैं फिल्म ज़ंज़ीर का शेर ख़ान नहीं हूं...

मैं चुप रहूंगा...

ये जो चिलमन है, दुश्मन है हमारी...

लक्स सौंदर्य का कमाल...

जाने क्या ढूंढती रहती हैं ये आंखें मुझमें...शायद इनसान...


फोटो ऑफ द मिलेनियम...

गुरुवार, 19 मई 2011

औरत की बोली...खुशदीप

 मेरठ रहता था...बचपन, पढ़ाई, किशोरावस्था में यारों के साथ धमाल...उम्र के साथ सब छूटता गया...शहर भी...मस्तमौला अंदाज़ भी...मेरठ में ही जवानी की दहलीज पर कदम रखा...शहर के जिस हिस्से आबू लेन में हम रहते थे वो पॉश इलाका माना जाता था, अब तो आबू लेन मेरठ का सबसे बड़ा कॉमर्शियल सेंटर है...उस वक्त हॉन्डा बाइक (हीरो हॉन्डा नहीं) नई नई आई थी...अपुन को भी उसकी सवारी गांठने का बड़ा शौक था...उस पर चढ़ कर खुद को मुकद्दर का सिकंदर के अमिताभ से कम नहीं समझते थे...हॉन्डा पर मतलब से या बेमतलब शहर में घूमने का बड़ा शौक था...पूरे शहर में तन कर निकलते थे...लेकिन शहर में एक हिस्सा ऐसा भी था कि जब वहां से गुजरते तो सारी हेकड़ी न जाने कहां फुर्र हो जाती थी...उस एरिया से निकलते हुए आंखें बस नीचे सड़क को ही निहारती रहती थीं...मज़ाल हैं कि आंख ऊपर उठा कर देख भी लें...भले ही सामने किसी से भिड़ जाएं...वो एरिया था कबाड़ी बाज़ार...मेरठ का रेड लाइट एरिया...नीचे हॉर्डवेयर की होलसेल मार्केट...और ऊपर की मंज़िलों पर बाईजियों के कोठे... कभी उस एरिया से पास होना बहुत मजबूरी हो जाती थी तो सांस रोककर वहां से निकलना पड़ता था...कभी भूल से निगाह ऊपर उठ भी जाती तो छज्जों एक जैसा नज़ारा ही दिखता...सुबह दस-ग्यारह बजे भी सजी-संवरी सेक्स-वर्कर्स...नीचे से गुज़रने वालों को ऊपर आने के इशारे करती हुईं...उस वक्त ऐसा लगता था कि न जाने खुद से कौन सा पाप हो रहा है जो यहां से गुज़रना पड़ रहा है...

वहां का पूरा माहौल बड़ा रहस्यमय लगता था...उसी एरिया की सड़क से कुछ दूसरी कॉलोनियों में रहने वाली भले घरों की लड़कियों को भी स्कूल-कालेज जाने के लिए पास होना पड़ता था...मैं तब यही सोचा करता था कि जब लड़का होने के बावजूद मेरी हालत यहां से निकलते हुए खराब हो जाती है तो इन भले घरों की लड़कियों को यहां से पास होते हुए कैसा महसूस होता होगा...इस सवाल का जवाब उस वक्त तो नहीं मिला था...
 
लेकिन आज ब्लॉग पर एक पोस्ट पढ़ने के दौरान मिला...इस पोस्ट में नई छप कर आई किताब औरत की बोली का ज़िक्र है...किताब को लिखा है पत्रकारिता-लेखन की जाने मानी हस्ताक्षर और ब्लॉगवुड की सम्मानित सदस्य गीताश्री ने....
 
सामयिक प्रकाशन से छपी किताब के एक अंश  को प्रभात रंजन जी ने अपनी पोस्ट में जगह दी है...गीताश्री की इस मुद्दे पर बेबाक बानगी की झलक के लिए किताब की कुछ पंक्तियों को यहां दे रहा हूं...
 
खैर.. रानी बाई ने नाचना गाना शुरु किया..."चाल में ठुमका, कान में झूमका...कमर पे चोटी लटके..हो गया दिल का पुरजा पुरजा"। लगे पचासो झटके। शामियाने में जोर से सिसकारियां गूंजी। कोने से कोई उठा गाता हुआ..वो तेरा रंग है नशीला,,अंग अंग है नशीला...पैसे फेंके जाने लगे, बलैया ली जाने लगीं। रानी बाई के साथ और भी लड़कियां थीं, वो भी ठुमक रही थीं, फिर देखा, रानी बाई किसी रसूखदार से दिखने वाले बंदे के पास गईं और अपने घूंघट से दोनो का चेहरा ढंक लिया। जब लौटी तो पैसो की बरसात होने लगी। शामियाने में हर कोई पैसे लुटा रहा था। साजिंदे और सहयोगी लड़कियां पैसे चुने और ठुमके लगाएं। विचित्र सा था सब कुछ। जीवन में पहली बार ये सब देख रही थे। गाना, बजाना, नाच और वो बाई! वो जितनी अच्छी लग रही थी, उतना ही बुरे लग रहे थे शामियाने में जमघट लगाए बैठे लोगों का व्यवहार। चुपके-चुपके हम लोग देख रहे थे वो सब। हमारे लिए वो सब बेहद नया था, लेकिन बड़ों की नजर में यही गुनाह था। कोई देखता तो हमारी पिटाई तय थी। मेरे साथ इस 'चोरी' में शामिल चचेरी बहनो ने कई बार कहा भी कि चल अब चलते हैं..और वो चली भी गईं। मैं अकेली नाच में डूबी सोचती रही कि अंदर लड़कियां नाच रही हैं तो हमें देखने से क्यो मना कर रहे हैं। तभी मुझे तलाशती हुई चाची आई। एक थप्पड़ जमाया और घसीटती हुई ले चलीं। वह बड़बड़ा रही थीं..."अगर चाचा ने देख लिया तो मार डालेंगे। चल अंदर शादी हो रही है, वहां बैठ...।" उस महाआंनद से वंचित होने से चिढी हुई मैंने पूछ ही लिया..."क्यों, लड़कियां ही तो नाच रही हैं, मैं क्य़ो नहीं देख सकती?" " वे लड़कियां नहीं, रंडी हैं,रंडी...समझी। रंडी की नाच हमारे यहां औरतें नहीं देखती। ये पुरुषों की महफिल है, जहां इनका नाच होता है। देखा है किसी और को,है कोई औरत वहां..सारे मरद हैं-" चाची उत्तेजना से हांफ रही थी। मेरे दिल का पुरजा पुरजा हो गया था। मैं मंडप के पास बैठी सोचती रही। फिर अपने हमउम्र चचेरे भाई से जानकारी बटोरी तो पता चला वे मुजफ्फरपुर से आई हैं, जहां एक पूरा मोहल्ला उन्हीं का है। इनके कोठे होते हैं, वे शादियों में नाचती गाती है, यही उनका धंधा है...आदि आदि....।
 
तस्वीर का पूरा रुख जानने के लिए आपको प्रभात रंजन जी के इस लिंक पर जाना होगा...
 
शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं!


मंगलवार, 17 मई 2011

मैं कोई झूठ बोल्या...खुशदीप





युवराज की किसानी...

राहुल गांधी आठ किसानों के साथ प्रधानमंत्री से मिले...भट्टा पारसौल के किसानों का दर्द बताया...राहुल के साथ प्रधानमंत्री के निवास, ७ रेसकोर्स रोड गए किसानों ने कभी सपने में भी न सोचा होगा, प्रधानमंत्री कभी अपने घर में उनसे रू-ब-रू होंगे...होते क्यों न...युवराज जो उनके साथ आए थे...

लोकि कहदें ऐणू ...राहुल का किसानों के लिए दर्द
मैं कहदां...सियासत की खेती...
मैं कोई झूठ बोल्या...
मैं कोई कूफ्र घोल्या...
कोई न, भई कोई न, भई कोई न...



बंगाल पर ममता...

ममता बनर्जी दिल्ली आकर सोनिया गांधी से मिलीं...प्रधानमंत्री से मिलीं...ज़ाहिर है सारे मुद्दों पर बात हुई होगी...बंगाल में कांग्रेस से कौन-कौन मंत्रिमंडल में शामिल होगा...दिल्ली में ममता की जगह तृणमूल कांग्रेस से कौन रेल मंत्री बनेगा...रेल मंत्री के अलावा भी क्या तृणमूल कोटे से कोई और कैबिनेट मंत्री बनेगा...लेकिन ममता ने पत्रकारों के एक सवाल का जवाब नहीं दिया...सवाल था पेट्रोल की कीमत बढ़ने पर ममता की प्रतिक्रिया...यही ममता थीं जिन्होंने बंगाल में चुनाव से पहले पेट्रो दामों में बढ़ोतरी को मज़बूती से वीटो कर दिया था...

लोकि कहदें ऐणू ...बंगाल के लिए ममता
मैं कहदां... प्रांतीयता को सलाम
मैं कोई झूठ बोल्या...
मैं कोई कूफ्र घोल्या...
कोई न भई कोई न, भई कोई न...


स़ड़क पर बीजेपी...

बीजेपी ने पेट्रोल कीमतों की बढ़ोतरी के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन किया...जगह जगह जाम किया...वाह री बीजेपी...जिन लोगों से हमदर्दी दिखाने के लिए प्रदर्शन किया, उन्हीं का जीना बेहाल कर दिया...सब ज़रूरी काम छोड़कर लोगों को कड़क धूप में घंटों परेशान देखा गया...क्या अन्ना हजारे जैसा विरोध का तरीका नहीं अपना सकते...जो कुछ हो जंतर मंतर जैसी ही किसी जगह पर हो...न लोगों को परेशानी और रंग भी आए चोखा...लेकिन अन्ना हजारे जैसे आमरण अनशन पर बैठने वाला नेता कहां से लाए बीजेपी...

लोकि कहदें ऐणू...विरोध की राजनीति
मैं कहदां...घड़ियाली आंसू
मैं कोई झूठ बोल्या,
मैं कोई कूफ़्र घोल्या....
कोई न भई कोई न भई कोई न...



जयललिता की ताजपोशी...

जयललिता ने बड़े समारोह में चौथी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री की शपथ ली...समारोह में तालियां बजाने के लिए नरेंद्र मोदी, चंद्रबाबू नायडू, ए बी बर्धन, अजित सिंह जैसे नेता भी जुटे...लेकिन जयललिता के दिमाग में दिल्ली घूम रही थी...आखिर सोनिया ने खुद फोन पर बधाई दी...अगले हफ्ते जयललिता दिल्ली आएंगी...पूरी कोशिश करेंगी करुणानिधि की डीएमके का केंद्र से भी पूरी तरह पत्ता कटाने की...फिर तो कांग्रेस का हाथ थामने में ही समझदारी है...ललिता जी ठीक कहती हैं...

लोकि कहदें  एणू ...शिष्टाचार का तकाजा
मैं कहंदा...मौकापरस्ती का बाजा...
मैं कोई झूठ बोल्या...
मैं कोई कूफ्र घोल्या...
कोई न भई कोई न भई कोई न...



लेफ्ट की ठसक

बंगाल जैसे गढ़ से भी लेफ्ट का सफाया हो गया...दिल्ली में लेफ्ट की बैठक में फिर भी दावा किया गया लेफ्ट में अब भी बहुत जान है...अपने घर की फ़िक्र छोड़ कर्नाटक के हालात पर ज़्यादा दुख जताया...कहा येदियुरप्पा को फौरन बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए...सीपीएम के दिल्ली में बैठने वाले तुर्कों शुक्र मनाओ अच्युतानंदन ने केरल में हार के बावजूद यूडीएफ को कड़ी टक्कर दी...वरना आप ने बेचारे अच्युतानंदन का चुनाव से पहले ही बोरिया बिस्तर बांधने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी...

लोकि कहंदे ऐणू...लेफ्ट का हौसला
मैं कहदां...रस्सी जल गई पर बल नहीं गया...
मैं कोई झूठ बोल्या...
मैं कोई कूफ़्र घोल्या...
कोई न भई कोई न भई कोई न...


अब ये गाना भी सुन लीजिए...





शनिवार, 14 मई 2011

ओसामा का सच जो आपको चौंका देगा...खुशदीप




हर कोई ये जानना चाह रहा है कि ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद में पाकिस्तानी सेना की ठीक नाक के नीचे छिपे रहने की सटीक जानकारी ओबामा को किसने दी...आखिर पच्चीस करोड़ डॉलर का इनाम था ओसामा के सिर पर...कोई भी इतनी बड़ी रकम के लालच में आ सकता था...कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि अल क़ायदा में नंबर दो अयमान अल जवाहिरी ने ही लादेन के बारे में एक-एक सूचना अमेरिकी सरकार को उपलब्ध कराई और इसी वजह से अमेरिका पिन-प्वाइंट कार्रवाई कर सका...लेकिन मेरे हाथ कुछ और ही जानकारी लगी है...मुझे यकीन है कि इस और आपका ध्यान पहले नहीं गया होगा...लीजिए अब दिल थाम कर सुनिए इसे...

एबटाबाद में हवेली में छिपे होने की जानकारी ओबामा प्रशासन को खुद ओसामा बिन लादेन ने दी थी...जी हां, खुद लादेन ने...आप कहेंगे, लादेन को क्या ज़रूरत थी अपनी मौत खुद बुलाने की...आ बैल, मुझे मार, कहने की...आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी लादेन की...वो मजबूरी थी...



...



...



...



...



तीन-तीन पत्नियों के साथ एक ही मकान में छह साल तक रह कर दिखाइए...वो भी घर से बाहर जाए बिना...आखिर लादेन के सब्र के लदने की भी कोई हद होती...बेचारे से रहा नहीं गया तो खुद ही अमेरिकी नेवी सील्स के कमांडो को संदेश भेज दिया, मुझे किसी भी तरह यहां से हमेशा हमेशा के लिए मुक्ति दिलाओ...यहां तक कि मौत भी कबूल होगी...

Lady on the phone and Makkhan...Khushdeep

ब्लॉगिंग बेकार बेदाम की चीज़ है...खुशदीप




दिल तो बच्चा है जी...
कुछ भी चाह सकता है...
कभी खुश होकर उछलने लगता है...
गाने लगता है...आज मैं ऊपर, आसमां नीचे...
और कभी उखड़ कर गाने लगता है...ये दुनिया, ये महफ़िल मेरे काम की नहीं...
यानि दिल तो है दिल, दिल का क्या कीजे...
अब दिल का नाम आया है तो यक़ीनन मुहब्बत भी साथ आएगी ही...
और मुहब्बत आप जानते ही हैं बड़े काम की चीज़ है...
ऐसे में मुहब्बत का दूसरा नाम अगर ब्लॉगिंग हो जाए तो...
जिन्होंने दोनों को आजमाया है वो जानते हैं कि दोनों में कोई फ़र्क नहीं है...
मुहब्बत होती है तो टूट कर होती है...
ब्लॉगिंग भी होती है तो कूट कर होती है...
आशिकी में खोट किसी को भी दीवाना बना दे...
लेकिन ब्लॉगिंग में चोट किसी को भी सयाना बना दे...

बस यही तक कर सकता था ओरिजनल तुकबंदी...लेकिन मुहब्बत का ज़िक्र किया है तो त्रिशूल फिल्म का गाना ज़ेहन में खुद-ब-खुद कौंधने लगा...मुहब्बत बड़े काम की चीज़ है...फिल्म में अमिताभ बच्चन हालात के जले हैं...इसलिए गाने में मुहब्बत को बेकार बेदाम की चीज़ बताने में ज़रा देर नहीं लगाते...लेकिन उन्हें समझाने के लिए बाबा भारती (शशि कपूर) और बाबी भारती (हेमा मालिनी) एड़ी चोटी का ज़ोर लगा देते हैं...और आखिर में मनवा कर ही छोड़ते हैं कि मुहब्बत बड़े काम की चीज़ है...इसका मतलब ब्लॉगिंग भी बड़े काम की चीज़ है...आगे बढ़ने से पहले त्रिशूल फिल्म का ओरिजनल गाना देख-सुन लीजिए...




इस गाने के बोलों में मुहब्बत और चाहत की जगह ब्लॉगिंग को फिट कर दिया जाए तो कुछ इस तरह का गीत बनेगा...

इंटरनेट पर छपते हैं ब्लॉगिंग के किस्से,
हक़ीक़त की दुनिया में ब्लॉगिंग नहीं है...
ज़माने के बाज़ार में ये वो शह है,
के जिसकी किसी को ज़रूरत नहीं है...
ये बेकार बेदाम की चीज़ है,
ये कुदरत के इनाम की चीज़ है
ये बस नाम ही नाम की चीज़ है,
हां, काम की चीज़ है, ब्लॉगिंग बड़े काम की चीज़ है,
ब्लॉगिंग से इतना ख़फ़ा होने वाले,
चल आज तुझको ढिठाई सिखा दे,
तेरा दिल जो इतना रूठा पड़ा है,
वहा कोई चिकना घड़ा बिठा दें,
ब्लॉगिंग बड़े काम की चीज़ है,
हां, काम की चीज़ है....



नोट- ये बाबा भारती, बाबी भारती का क्या चक्कर है, इसके बारे में जानना है तो आपको अनूप शुक्ल जी की इस पोस्ट को बांचना होगा...

मेरे पास समय कम होता जा रहा है मेरी प्यारी दोस्त

Funny Video- Charlie again bit my finger

बुधवार, 11 मई 2011

बेटी की नज़र में एक अनसंग हीरो...खुशदीप

आज एक पोस्ट को पढ़ने के बाद से विचलित हूं...क्या ऐसे इनसान भी इस दुनिया में हो सकते हैं...आज जब लोग स्वार्थ के लिए अपनों का इस्तेमाल करने से नहीं चूकते...इसके विपरीत क्या कोई ऐसा भी हो सकता है जो दुनिया की भलाई के जुनून में अपनी पत्नी और चार छोटे बच्चों को भी छोड़ दे...वो भी ऐसा शख्स जिसके पास कभी करोड़ों रुपये की संपत्ति और कारोबार रहा हो...कॉमरेडों के वो आइिडयल थे और लालू यादव, नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेताओं के लिए गुरुदेव...दूसरों को नेता बनाने की कुव्वत लेकिन खुद सत्ता के लोभ से हमेशा दूर रहे...

राम मनोहर लोहिंया, जय प्रकाश नारायण किंगमेकर बने लेकिन खुद कभी किंग नही बने...लेकिन उनके काम को जनता ने पहचाना और वो नेताओं से कहीं ऊपर महानायक बने...अब अन्ना हज़ारे भी इसी राह पर निकले हैं...लेकिन हमारे समाज में कुछ ऐसे अनसंग हीरो भी हैं जो पूरा जीवन दूसरों के लिए समर्पित कर देते हैं, बदले में अपने नाम की भी चाहत नहीं करते...ऐसे ही एक अनसंग हीरो हैं- सुरेश भट्ट...सुरेश भट्ट जी का छह साल पहले ब्रेन हैमरेज हुआ था...अब वो दिल्ली के एक ओल्ड होम में गुमनाम ज़िंदगी जी रहे हैं...जो नेता उन्हें गुरुदेव कहते थे, वो भी उनकी सुध लेने के लिए कभी एक मिनट नहीं निकाल सके...सुरेश भट्ट जी के बारे में उनकी बेटी असीमा भट्ट ने कविता के ज़रिए जो भावनाएं व्यक्त की हैं, उन्हे पढ़ने के बाद देश की हर बेटी को मेरा सैल्यूट...


अपने पिता सुरेश भट्ट के साथ असीमा भट्ट.



बस असीमा की कविता की दो पंक्तियां यहां लिख रहा हूं...

क्या यह वही पिता है मेरा...
साहसी, फुर्तीला,क्या मेरे पिता बूढ़े हो रहे है?
सोचते हुए मैं एकदम रूक जाती हूं,
आखिर पिता बूढ़े क्यों हो जाते हैं?
पिता, तुम्हें बूढ़ा नहीं होना चाहिए,
ताकि दुनिया भर की सारी बेटियां
अपने पिता के साथ,
दौडऩा सीख सके दुनिया भर में...

पूरी कविता और सुरेश भट्ट जी के बारे में और जानने के लिए आपको इस लिंक पर जाना होगा...वहां असीमा का संबल बढ़ाना मत भूलिएगा...

अब दुनिया के सामने एक सवाल हैं मेरे पापा-सुरेश भट्ट

दस मई को कैफ़ी आज़मी साहब की नौंवी पुण्यतिथि थी...कैफ़ी साहब की याद को सलाम करते हुए उन्हीं का लिखा फिल्म कागज़ के फूल का ये गाना सुनिए...

मंगलवार, 10 मई 2011

सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया...खुशदीप

सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया,
दिल ने अगर चराग जलाए तो क्या किया...

हम बदनसीब प्यार की रुसवाई बन गए,
खुद ही लगा के आग़ तमाशाई बन गए,
दामन से अपने शोले बुझाए तो क्या किया,
दिल ने अगर चराग जलाए तो क्या किया...
सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया...

ले ले के हार फूलों के आई तो थी बहार,
नज़रें उठा के हम ने ही देखा न एक बार,
आंखों से अब ये पर्दे हटाए तो क्या किया...
दिल ने अगर चराग जलाए तो क्या किया...
सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया...



गायक- तलत महमूद, संगीतकार- रवि, गीतकार-प्रेम धवन, फिल्म- एक साल (1957 )

अरे अरे ये क्या आप तो इस गाने के बोलों को किसी और घटनाक्रम से जोड़ कर देखने लगे...जनाब ऐसा कुछ नहीं कल यानि 9 मई को तलत महमूद साहब की तेरहवीं बरसी थी...
                                            
गायक तो भारतीय सिनेमा में एक से बढ़ कर एक हुए हैं, लेकिन तलत साहब की मखमली आवाज़ में लहर के साथ जो जादू था, वो बेमिसाल था...24 फरवरी 1924 को मंजूर अहमद के तौर पर नवाबों के शहर लखनऊ में जन्म लिया...बचपन से ही गायकी के शौकीन...घर में इच्छा जताई तो अब्बा हुजूर ने फरमान सुना दिया...गायकी या घर में से एक को चुनना पड़ेगा...तलत साहब ने गायकी को चुना...सोलह साल की उम्र से ऑल इंडिया रेडियो पर गाना शुरू कर दिया...1941 में एचएमवी ने तलत साहब की गज़लों का पहला रिकार्ड जारी किया...तलत साहब ने उस वक्त कलकत्ता का रुख किया...जहां के एल सहगल, उस्ताद बरकत अली ख़ान जैसे दिग्गज गज़ल गायकों का डेरा था...कुछ साल तक तलत ने वहीं अपने को मांजा...तब तक उनकी प्रसिद्धी पूरे देश में फैल चुकी थी...चालीस के दशक के मध्य में हिंदी फिल्मों में गाना शुरू किया तो फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा...1949 में आरजू के लिए तलत साहब का गाया गाना...ए दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहां कोई न हो...पूरे देश की ज़ुबान पर चढ़ गया था...तलत साहब ने सोलह फिल्मों में अभिनय भी किया...1992  में तलत साहब को पद्मभूषण मिला... 9 मई 1998 को 74 साल की उम्र में तलत साहब का मुंबई में निधन हुआ...


तलत साहब के कुछ प्रसिद्ध गाने...


हमसे आया न गया...(देख कबीरा रोया, 1957)
जाएं तो जाएं कहां....(टैक्सी ड्राईवर, 1954)
तस्वीर बनाता हूं...(बारादरी, 1955)
दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है...(मिर्ज़ा गालिब, 1954)
इतना न मुझसे तू प्यार जता (छाया, 1961)
शाम ए गम की कसम (फुटपाथ, 1953)
जलते हैं जिसके लिए (सुजाता, 1959)
मेरी याद में तुन न आंसू बहाना (मदहोश, 1951)
फिर वही शाम, वही गम, वही तन्हाई ( जहां आरा 1964)
ए मेरे दिल कहीं और चल (दाग़, 1952)
अंधे जहां के अंधे रास्ते (पतिता, 1953)

वैसे ऊपर वाले गाने के बोलों को लेकर अब भी कुछ शुबहा हो तो तलत साहब का शमशाद बेगम के साथ फिल्म बाबुल (1950) के लिए गाया ये प्यारा सा गीत सुन लीजिए...शकील बदायूनीं के बोलों को नौशाद ने सुर दिए थे...(वैसे ब्लॉगिंग से भी अपना इश्क इससे कुछ कम नहीं)....


शनिवार, 7 मई 2011

एक नेता, अनेक ब्लॉगर...खुशदीप




इस पोस्ट का पूरा मज़ा लेना है तो पहले ये गीत ज़रूर सुन लीजिए...




ये अनेक क्या है, दीदी...

अनेक यानि बहुत सारे...


बहुत सारे, क्या बहुत सारे...


अच्छा बताती हूं...


जैसे...


सूरज एक...


चंदा एक...


ब्लॉगर अनेक...


अच्छा तो ब्लॉगरों को अनेक भी कहते हैं...


नहीं...नहीं...


देखो फिर से बताती हूं...


सूरज एक...


चंदा एक...


ब्लॉगर अनेक...


देखो, देखो...एक गिलहरी,...


पीछे पीछे एक और गिलहरी...


एक एक करके हो गईं अब अनेक गिलहरियां...


एक तितली, अनेक तितलियां...


एक ब्लॉगर, एक-एक अनेक ब्लॉगर...


अनेक ब्लॉगरों की कहानी सुनोगे...


हां, सुनाओ...

एक ब्लॉगर, अनेक ब्लॉगर...


सम्मान चुगने बैठ गए थे...


कोरस...दीदी हमें भी सुनाओ, हमें भी सुनाओ....


एक ब्लॉगर, अनेक ब्लॉगर


सम्मान चुगने बैठ गए थे...


वहीं एक नेता ने जाल बिछाया था...


नेता, नेता क्या होता है दीदी...


नेता...ब्लॉगर पकड़ने वाला...


तो फिर क्या हुआ...उसने ब्लॉगरों को पकड़ लिया...


उन्हें मार दिया...


ऊं...ओह...


हिम्मत से जो जुटे रहें तो बड़ा काम भी होवे...


भैया...बड़ा काम भी


होवे भैया...
1...2...3...फुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र.....


चतुर ब्लॉगर, सयाने ब्लॉगर...


मिलजुल कर, जाल ले कर...


भागे ब्लॉगर...


फुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र.....


दूर एक गांव में ब्लॉगरों के दोस्त चूहे रहते थे...


उन्होंने उनका जाल काट दिया...


देखा एकता में कितनी शक्ति है...


दीदी अगर हम एक हो जाएं तो क्या कोई भी काम कर सकते हैं...


हां हां क्यों नहीं...


तो क्या गूगल के पेड़ के आम भी तोड़ सकते हैं...


हां, मगर जुगत लगानी होगी....


जुगत ???


*
* *
* * * *

अच्छा ये जुगत...वाह बड़ा मज़ा आएगा...


हो गए एक...


बन गई ताकत...


बन गई हिम्मत...


ब्लॉगजगत के निवासी सभी जन एक हैं...-2


पोस्टों का रंग-रूप, कंटेंट, चाहें अनेक हैं...-2


बेला, गुलाब, जूही, चम्पा, चमेली...


फूल हैं अनेक किंतु माला फिर एक है...-2


एक-अनेक-एक अनेक...


सूरज एक, चंदा एक, ब्लॉगर अनेक...


एक गिलहरी, अनेक गिलहरियां...


एक तितली, अनेक तितलियां...


एक ब्लॉगर, अनेक ब्लॉगर...




प्रेरणा
विनय चंद्रा जी का गीत...हिंद देश के निवासी...(एक चिड़िया, अनेक चिड़िया नाम से मशहूर)


मॉरल ऑफ द सॉन्ग
एक नेता, सिर्फ एक नेता, अच्छे भले प्रोग्राम का फच्चर बना देता है...

चौक्का पोस्ट...खुशदीप

स्वर्णिम वाक्य...
अगर आप दो मिनट रोज़ घुटनों पर बैठ कर ऊपर वाले को याद करते हैं तो ज़िंदगी भर आपको खड़ा रखने में ये घुटने कभी दग़ा नहीं देंगे....

---------------

सेफ़-अनसेफ़


अब ये साबित हो गया है इस दुनिया में सबसे अन-सेफ़ देश पाकिस्तान और सबसे सेफ़ देश भारत है...

पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन तक सेफ़ नहीं है...

भारत में अजमल कसाब भी सेफ़ है...

-----------------------------------

COMPLETE OR FINISHED

कोई भी इंग्लिश डिक्शनरी आपको Complete और Finished का फ़र्क इस आसानी से नहीं बता पाती कि आप समझ सकें...


कुछ लोगों का कहना है कि Complete और Finished  में कोई फ़र्क नहीं होता...लेकिन मैं कहता हूं फ़र्क होता है, बहुत होता है...कैसे भला...

जब आप Right One से शादी करते हैं तो आप Complete होते हैं...

जब आप Wrong One से शादी करते हैं तो आप  Finished हो जाते हैं...

और जब कभी Right One आपको Wrong One के साथ पकड़ लेती है तो आप Completely Finished हो जाते हैं..

----------------
स्लॉग ओवर


मक्खनी ने मक्खन के लिए शर्त रखी कि जब भी वो किस करेगा तो उसे मनी-बॉक्स में एक नोट डालना पड़ेगा...

छह महीने बाद मनी-बॉक्स खोला तो मक्खन बड़ा हैरान...

मक्खनी से पूछ ही बैठा...ओ जी, मैंने तो दस-दस के ही नोट डाले थे ये सौ, पांच सौ, हज़ार के नोट कैसे निकल रहे हैं...

......

......

.......


मक्खनी...हर कोई तुम्हारी तरह कंजूस नहीं होता....

शुक्रवार, 6 मई 2011

समारोह और मेरे हिंदी ब्लॉगिंग छोड़ने का असली सच...खुशदीप




सोचा तो था ज़ुबान सिए रखूंगा...लेकिन कहते हैं न कोई बात दिल में दबाए रखो तो वो नासूर बन जाती है...इसलिए अंदर की सारी आग़ बाहर निकाल देने में ही सबकी भलाई है...तो आज आप भी दिल थाम लीजिए, ऐसा सच बताने जा रहा हूं, जिसकी आपने कल्पना-परिकल्पना कुछ भी नहीं की होगी...न नुक्कड़ पर और न ही चौपाल पर...अब यही सोच रहा हूं, कहां से शुरू करूं...ज़्यादा पीछे गया तो गढ़े मुर्दे उखाड़ने वाली बात हो जाएगी...इसलिए सीधे शनिवार, 30 अप्रैल पर ही आता हूं...यानि वो तारीख जिसका मैं भी दूसरे सारे ब्लॉगरों की तरह बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था....

30 अप्रैल की सुबह सतीश सक्सेना (जिनका अब तक मैं बड़ा सम्मान करता था, लिहाज़ करता था, अब क्या करता हूं, इसी पोस्ट में आगे पता चलेगा) ने मेरे साथ शाहनवाज के घर चलने का प्रोग्राम बनाया...शाहनवाज के घर ही दिनेशराय द्विवेदी जी पिछली रात से टिके हुए थे...सतीश जी ने अपनी गाड़ी से मुझे कॉलोनी के गेट से पिक किया और शाहनवाज के घर की ओर कूच किया...इस दौरान मैं देख रहा था कि सतीश जी के चेहरे पर बड़ी शातिर मुस्कान थी...इस तरह का भाव जैसे किसी बहुत बड़े मिशन के लिए निकले हो...मुझसे कहने लगे कि अगर मेरा साथ दो तो बहुत तगड़े नोट कमा सकते हो...मैं चौंका, आज तो सम्मान कमाने के लिए घर से निकला हूं...ये नोट कहां से आ गए...वैसे भी नोटों का नाम सुनकर किसके कान खड़े नहीं हो जाते...

सतीश जी....जैसे जैसे मैं कहता जाऊं, तुम्हें बस वैसे करते जाना है...बस एक बात का ध्यान रखना, अपना दिमाग़ कहीं नहीं लगाना है...

मैंने कहा... भाई जी मुझे करना क्या है, पहले ये बताओगे या भूमिका ही बांधे जाओगे...


सतीश जी को लगा कि मैं कहीं हत्थे से न उखड़ जाऊं, सीधा काम की बात पर आ गए...मुझे हिदायत देते हुए कहा...आज तुम समारोह में सम्मान नहीं लोगे और साथ ही हिंदी ब्लॉगिंग को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ने का ऐलान करोगे...

मैं....मुझे पागल कुत्ते ने काटा है, जो हिंदी ब्लॉगिंग छोडूंगा...

इस पर सतीश जी ने डॉन वाले अंदाज़ में लाल-लाल आंखों से मुझे घूरते हुए कहा...बेटा करना तो तुझे पड़ेगा ही, अब चाहे हंस कर निभा या रो कर...

सतीश जी के ये तेवर मैंने पहले कभी नहीं देखे थे...उनकी अंटी से निकल रहा रिवॉल्वर मुझे साफ नज़र आ रहा था...ये देखकर मेरी घिग्घी बंध गई और ज़ुबान से आवाज़ तक नहीं फूट रही थी...फिर भी हिम्मत करके पूछ ही लिया कि आखिर जनाब मेरा कसूर क्या है, जो मुझे आपने बंधक बना रखा है...ये सुनते ही वो शत्रुघ्न सिन्हा वाले स्टाइल में बोले... खामोश, मुझ से ज़ुबान लड़ाता है...काट कर चील-कौओं के आगे डाल दूंगा...

अब मैंने चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी...


सतीश जी ने प्रवचन जारी रखा...तमक कर बोले...बेटा आज आया है ऊंट पहाड़ के नीचे...तेरा तो मैं सर्कस जैसा हाल कर दूंगा और जगह जगह टिकट लगाकर कमाई करूंगा...इसके अलावा अंडरवर्ल्ड कनेक्शन ने भी तेरे ऊपर खूब पैसा लगा रखा है....ये सब सुनना, मेरे चकराने के लिए काफ़ी था....लेकिन अभी एटम बम गिरना बाकी था...सतीश जी आगे बोले...तेरे ब्लॉगिंग छोड़ देने से किसी पर असर पड़े या न पड़े लेकिन मेरी तिजौरी ज़रूर बढ जाएगी....

मैंने पूछा...कैसे....

जवाब मिला...जब तू ब्लॉगिंग छोड़ देगा तो कयास लगाए जाएंगे कि दोबारा शुरू करेगा या नहीं...बड़ों का आदेश और छोटों का प्यार मानेगा या नहीं....जब तक तू सोचने का काम करेगा तब तक पूरी दुनिया में अंडरवर्ल्ड के ज़रिए मुझे सट्टा लगाने का मौका मिलेगा...इस सट्टे को खेल का रुख देखकर ही मोड़ दिया जाएगा....यानि ये देखा जाएगा कि किस पहलु पर ज़्यादा दांव लगा है....फिर उसी हिसाब से सट्टे को फिक्स किया जाएगा...अभी तक का जो ट्रैंड है, उसके मुताबिक तेरे ब्लॉगिंग दोबारा शुरू कर देने से हमें छप्पर फाड़ दौलत कमाने का मौका मिलेगा...इसलिए जैसा बताया, बस वैसा ही तुझे करना होगा...

अब जब ये सुना तो मुझे सतीश भाई में एक साथ नीरा राडिया, अजहरूद्दीन नज़र आने लगे...लाइव फिक्सिंग की जीती-जागती मिसाल मेरी आंखों के सामने थी...अब मरता क्या न करता, सतीश भाई के हितों के लिए मुझे ये पोस्ट लिखनी पड़ रही है...वरना...वरना क्या...जानते नहीं सतीश भाई का गुस्सा कितना भयंकर है...

एक बात और ये शाहनवाज़ और द्विवेदी जी को भी आप भोला-भाला मत समझिए...ये भी बहती गंगा में हाथ धोने के लिए सतीश भाई के साथ हाथ मिलाए हुए हैं...सबने मिलकर मेरा पोपट बनाया हुआ है...यहां तक कि मेरे प्यारे मक्खन, मक्खनी, गुल्ली और ढक्कन का भी अपहरण कर लिया गया...कभी उन्हें कोटा में छुपाया जा रहा है तो कभी दिल्ली में...अब ब्लॉगर भाइयों आप ही निकालो मुझे डॉन सतीश सक्सेना के गैंग के चंगुल से...




नोट...कौन कहता है कि व्यंग्य को सीरियसली नहीं लिखा जा सकता...

सतीश भाई का अब मैं सम्मान ही नहीं करता बल्कि उन्होंने मुझे यार का दर्ज़ा भी दे दिया है...ऐसा कैसे हुआ, इसका राज़ कोई मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ही बता सकता है....






रविवार, 1 मई 2011

Good Bye...सबको राम-राम...खुशदीप



कसम खाई है कि कल दिल्ली में हुए प्रोग्राम के बारे में कुछ नहीं लिखूंगा...लिखूंगा क्या,हिंदी ब्लॉगिंग में तो संभवत मेरी ये आखिरी पोस्ट है...आप सब ने जो बीस महीने में मुझे इतना प्यार दिया, उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया...बस और कुछ नहीं कहना...कल के प्रोग्राम पर भड़ास के यशवंत जी की ये रिपोर्टिंग पढ़ लीजिए....

ब्लागरों की जुटान में निशंक के मंचासीन होने को नहीं पचा पाए कई पत्रकार और ब्लागर