शनिवार, 3 सितंबर 2011

दिल्ली में शिखा वार्ष्णेय का ख़ैर-मख़दम...खुशदीप

तारीख...31 अगस्त 2011
स्थान... वीमेंस प्रेस क्लब, कनाट प्लेस, दिल्ली

मौका...शिखा वार्ष्णेय के दिल्ली में होने पर छोटा सा गेट-टूगैदर

खास बात...विलायत की पंक्चुएलिटी का पालन करते हुए शिखा निर्धारित टाइम साढ़े ग्यारह बजे प्रेस क्लब पहुंच गई...उस वक्त वहां उन्हें कोई मेजबान नहीं मिला...जब तक वो अकेली रहीं यही सोचती रहीं कि तारीख तीस अगस्त हैं या एक अप्रैल...कहीं अप्रैल फूल तो नही बना दिया...दस मिनट की देरी के बाद मैं, सर्जना शर्मा, राकेश कुमार जी, शशि दीदी (श्रीमति राकेश कुमार) प्रेस क्लब पहुंचे तो हमें देखकर शिखा ने राहत की सांस ली...

खैर छोड़िए, ये सब, बस आप इस फोटो फीचर के ज़रिए जानिए कि गेट-टूगैदर में क्या क्या हुआ...




ये कौन आया, रौशन हो गई महफ़िल जिसके नाम से, हमारी दिल्ली में निकला सूरज शिखा के नाम से...सर्जना शर्मा के साथ शिखा वार्ष्णेय

लाटरी निकलने का मैसेज वंदना गुप्ता के मोबाइल पर आया, उदास सर्जना शर्मा हो गईं....

ये लिखा पढ़ी किस बात की भाई...मैं तो सही पासपोर्ट पर भारत आई हूं...गीताश्री और सर्जना शर्मा हंसते हंसते नज़र रखे हैं कि कहीं कोई गलत जानकारी तो नहीं दे रहीं शिखा...


नहीं दीदी...सच में गिलास में कोई गड़बड़ नहीं बस पीच टी है...घर जाकर पत्नीश्री से शिकायत मत कर दीजिएगा...यही विनती कर रहा हूं शशि दीदी से...गौर से सुन रहे हैं राकेश कुमार जी...



अच्छा तो ऐसे खींची जाती है फोटो...राजीव तनेजा के फोटोग्राफी के हुनर को देख कर यही कह रहे हैं राकेश कुमार जी....


चेक कर लूं, हेयर स्टाइल ठीक तो है न...शायद यही सोच रही हैं संजू भाभी (श्रीमति राजीव तनेजा)


अब ज़रा वाह ताज वाह चाय का शौक फरमा लिया जाए...


इतने सारे फोटो लेने के बाद थोड़ा आराम करते हुए भाई राजीव तनेजा


जाने दो मुझे जाना है....घर जाने को लेट होने पर पर्स उठा कर शायद यही कहना चाह रही हैं सर्जना शर्मा...साथ में गीताश्री और शिखा

चलो भाई सब कुछ हो गया...अब ग्रुप फोटो की रस्म भी पूरी कर ली जाए...(राजीव तनेजा और वंदना गुप्ता यहां भी फोटो खींचने में लगे होने की वजह से फ्रेम में नहीं हैं)

नोट...ये सारी फोटो राजीव तनेजा और वंदना गुप्ता के कैमरों का कमाल हैं....

27 टिप्‍पणियां:

  1. बधाई मिलते रहना जरूरी है |

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  2. वाह खुशदीप जी …………क्या खूब अन्दाज़-ए-बयाँ है…………मज़ा आ गया।

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  3. शिखाजी से मिलने का तो हमारा भी मन था लेकिन चलो अगली बार सही।

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  4. what kind of get-together itis?
    yaha bhi reservation apply kar diya!
    many of us complaining not to be part of this.

    but anyways, pics achhe hain/ enoying to see specially Shikha ji!

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  5. रौशन-ए-महफिल बनी रहे, यह शिखा जलती रहे।

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  6. भारतीय समयानुसार शिखाजी के स्वागत का अच्छा चित्रण । बधाईयों के साथ आभार सहित...

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  7. चित्रों के साथ टिप्पणियाँ बढ़िया हैं ...

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  8. बधाई
    अच्छे लोगो के अच्छे फोटो
    धन्यवाद

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  9. बढिया लगा जी, यूँ मिलना मिलाना...

    सुंदर चित्र..

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  10. यूँ तो हैं यहाँ ब्लोगर बहुत अच्छे,
    कहते हैं कि खुशदीप का है अंदाजे बयाँ और.
    क्या बात है....बढ़िया आयोजन की बढ़िया रिपोर्ट
    और हाँ आपको देरी १० मिनट की नहीं पूरे आधे घंटे की हुई थी ही ही..

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  11. बहुत अच्छा लगा यह मिलन, सुंदर फ़ोटो, खुशदीप जी वा अन्य ब्लागर मित्रो को मै यही कहुंगा कि जो भी ब्लागर विदेश से आते हे( युरोप अमेरिका ओर कानाडा) वो सब समय के पाबंध होते हे, समय की पंक्चुएलिटी का पालन करते हे, ओर समय से पहले ही पहुच जाते हे, बहुत अच्छा लगा यह सब धन्यवाद

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  12. महफिले रोशनी को उधर ही रोक रखेगें क्या ?

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  13. वाह वाह !
    महफ़िल शानदार लग रही है । शिखा जी भी भारतीय हैं । भारतीय समय का पालन उन्हें भी करना चाहिए । :)

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  14. हमें रश्क़ है कि दिल्ली हमेशा घटनापूर्ण होती है।

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  15. वाह दोस्त मिलते रहें यूं ही गलियों में ,
    जब गुज़रेंगे उन गलियों से , दोस्तों की खुशबू से गले मिलेंगे ...

    बहुत खूब , लेकिन आप सब फ़ोटो लगा के बच निकलने की फ़िराक में हैं , मुझे पता है , शिखा जी के सुनाए अनुभव ,खुद उनके मुख से ...क्योंकि शब्दों से तो अक्सर ही सुनते हैं ...बांटिए , हम फ़िर आते हैं अगिला चक्कर में जी । फ़ोटो के कैप्शन धांसू हैं ..

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  16. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की लगाई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  17. हमने भी मुलाकात कर ली... तस्‍वीरों में ही

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  18. सुंदर चित्रों के साथ बहुत बेहतरीन रिपोर्टिंग, आभार.

    हां येह जानकर अति दुख हुआ कि अब भारतीय लोग विदेश जाकर भारतीयता खो रहे हैं. शिखा जी समय पर पहुंची यह बात बहुत नागवार गुजरी. थोडा अपने देश का ख्याल रखते हुये दो पांच मिनट तो लेट आना ही चाहिये था जैसे आप पूरे आधा घंटा लेट आये.:)

    रामराम.

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  19. वाह खुशदीप जी आपने तस्वीरों में और वंदना जी कविता में लंच मिलन का अच्छा ब्यौरा दिया

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  20. हम भी दर्शन कर लिये सबके। शुक्रिया। :)

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  21. दिलचस्प व्यक्तित्व
    सुंदर चित्रकथा
    रोचक वाक्यांश

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