मंगलवार, 26 जुलाई 2011

इनसान भी फूलों की तरह खिल सकते हैं...खुशदीप




दावा है इनसान को इससे ज़्यादा खूबसूरत पहले कभी नहीं देखा होगा...यहां सारे फूल, पत्तियां, पंखुड़ियां, तने, इनसानों के बने हैं...












आप हिम्मत हार जाते हैं और किसी काम को आप ये कह कर छोड़ देते है कि इसे करना मेरे बस की बात नहीं, याद रखिए जिस पल आप खुद को उस काम से अलग करते हैं, उसी के अगले पल से जीत शुरू होती है...इसलिए कोशिश कभी नहीं छोड़नी चाहिए...दो चूहों के माध्यम से समझिए ज़िंदगी के इस फ़लसफ़े को...Determination is life...Khushdeep

10 टिप्‍पणियां:

  1. क्या खूबसूरत रंग हैं ....शुभकामनायें आपको !

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  2. प्रकृति में इन्सान ही तो है जो कुछ बनाता है।

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  3. अद्भुत संयोजन, मानवीय काया का अनुपम रंग छाया।

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  4. आपकी रचना आज तेताला पर भी है ज़रा इधर भी नज़र घुमाइये
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  5. लो जी हम तो खिल गये। आशीर्वाद।

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  6. खूबसूरत चित्र.

    चूहों में मोटे की तो 'राम राम सत्' हो गई न.

    छोटे ने मक्खन निकाल कर जान बचाई.

    आपकी टिपण्णी के मक्खन के लिए मैं भी हाथ
    पाँव मार रहा हूँ.

    देखो जान बचती है या नहीं.

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