मंगलवार, 14 जून 2011

स्वामी निगमानंद ! काश आप भी बाबा रामदेव होते...खुशदीप



स्वामी निगमानंद काश आपको आमरण अनशन के साथ मार्केटिंग करना भी आता...बाबा रामदेव की तरह आपका ऑरा होता.. अरबों रुपये का एम्पायर होता...अन्ना हज़ारे की तरह आपकी टीम में पूर्व नौकरशाह, पूर्व आईपीएस, दिग्गज वकील, रिटायर्ड जस्टिस होते...फिर देखते...आप की मौत के बाद जो आपके लिए आसमान सिर पर उठा रहे हैं, वही आपके जीते-जी भी आपकी गणेश-परिक्रमा कर रहे होते...

आखिर आपने गंगा के मैली होने का मुद्दा उठाया ही क्यों...गंगा मैया का सीना अगर किनारे लगे स्टोन क्रशर से छलनी हो रहा था, तो आपने दर्द क्यों महसूस किया...सवा अरब की आबादी में गंगापुत्र बनने का बीड़ा आपने ही क्यों उठाया...अन्ना हजारे या उनकी टीम के सदस्य या बाबा रामदेव, छींक भी मारते हैं तो कलम-कंप्यूटर के धनी माइक्रोस्कोप से ये भी देखने को तैयार रहते हैं कि कि नाक-मुंह से नज़ले की कितनी बूंदें बाहर आई...लेकिन इन शूरवीरों को भीष्म पितामह की तरह मृत्युशैया पर पड़े स्वामी निगमानंद ज़िंदा रहते कभी नहीं दिखे...मौत के बाद ज़रूर छाती पीट-पीट कर विलाप होने लगा...

अगर बाबा रामदेव के पल-पल के स्वास्थ्य के लिए दुनिया भर का मीडिया देहरादून के हिमालयन इंस्टीट्यूट अस्पताल में डेरा न डाले होता तो स्वामी निगमानंद की मौत का किसी को पता भी नहीं चलता...बाबा रामदेव और स्वामी निगमानंद में एक बात कॉमन थी...आमरण अनशन...इसी ने पैरलल स्टोरी का आधार तैयार किया...लेकिन ये सब भूल गए कि इस साल 19 फरवरी को जब स्वामी निगमानंद ने हरिद्वार के मातृ सदन पर आमरण अनशन शुरू किया था तो उस वक्त न तो अन्ना हजारे और न ही बाबा रामदेव का अनशन कहीं पिक्चर मे था...स्वामी निगमानंद जिस मातृ सदन आश्रम से जु़ड़े थे उसने न जाने कब से गंगा से हिमालय के पत्थरों के खनन और किनारे पर ही क्रशऱ से उन्हें कूटे जाने के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा था...इसी संघर्ष का परिणाम था कि इक्कीस में से बीस क्रशर बंद हो गए...एक क्रशर जो बचा है उसका मामला अदालत में है...यथास्थिति बनाए रखने की वजह से ये इकलौता क्रशर ही बंद नहीं हुआ है...मातृ सदन के संतों समेत स्वामी निगमानंद ने यही प्रण कर रखा था कि जब तक स्टोन क्रशऱ पूरी तरह बंद नहीं हो जाते, उनका आंदोलन जारी रहेगा....

स्वामी निगमानंद ने भी ठान लिया था कि जब तक प्रण पूरा नहीं होता अनशन पर रहेंगे...19 फरवरी से 27अप्रैल तक 68 दिन तक स्वामी निगमानंद अनशन पर बैठे रहे लेकिन किसी ने सुध नहीं ली...27 अप्रैल को उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई तो उन्हें ज़बरन अस्पताल पहुंचा दिया गया...हालत ज़्यादा खराब होने पर उन्हें जॉलीग्रांट देहरादून स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ले जाया गया...दो मई को स्वामी निगमानंद कोमा में गए और 13 जून की दोपहर को इस युग का ये भागीरथ 36 साल की उम्र में ही परलोक सिधार गया...

स्वामी निगमानंद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी मौत कोमा, सेप्टिसेमिया और डिजेनेरेटिव ब्रेन डिसऑर्डर की वजह से हुई...लेकिन मातृ सदन आश्रम के संस्थापक सदस्य स्वामी शिवानंद ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि प्रशासन उत्तराखंड सरकार के दबाव में काम कर रहा है...स्वामी शिवानंद का आरोप है कि स्वामी निगमानंद की मौत ज़हर देने की वजह से हुई है...उनके मुताबिक अस्पताल में स्वामी निगमानंद को नियमित तौर पर एट्रोपिन दी जा रही थी, जिसका इस्तेमाल ज़हर वाले केसों में ही किया जाता है...

स्वामी निगमानंद चले गए...लेकिन उनकी चिता पर राजनीतिक रोटियां ज़रूर सिकनी शुरू हो गई है...कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने उत्तराखंड की रमेश पोखरियाल निशंक सरकार पर दोहरे मापदंड के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कठघरे में खड़ा किया है...दिग्विजय सिंह के मुताबिक बाबा रामदेव के अनशन पर तो निशंक सरकार पूरी तरह बिछ गई थी और स्वामी निगमानंद के अनशन की सुध तक नहीं ली थी...निशंक सरकार के बचाव में बीजेपी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने तर्क दिया है कि स्वामी निगमानंद का सबसे अच्छे अस्पताल में इलाज कराया जा रहा था...

इसे राजनीति का विद्रूप ही कहा जाएगा कि जिस बीजेपी ने बाबा रामदेव के समर्थन के लिए नौ दिन में ही दिन-रात एक कर दिया था...राजघाट पर ठुमके भी लग गए थे...उसी बीजेपी को स्वामी निगमानंद की व्यथा 115 दिन तक नज़र नहीं आ सकी...उत्तराखंड सरकार के मुखिया रमेश पोखरियाल निशंक बाबा रामदेव के 4 जून की कार्रवाई के बाद पतंजलि योग पीठ पहुंचते ही चरणवंदना करने पहुंच गए थे...लेकिन स्वामी निगमानंद के लिए उनसे पर्याप्त वक्त नहीं निकल सका...आरोप तो ये भी हैं कि गंगा किनारे स्टोन क्रशर के धंधे पर राज्य के ही किसी मंत्री का वरदहस्त था...उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव दूर नहीं है...इसलिए कांग्रेस भी स्वामी निगमानंद के मुद्दे को चुनाव तक जिलाए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी...बीजेपी ने स्वामी निगमानंद की सुध नहीं ली तो कांग्रेस ने भी उनके जीते-जी क्या किया...क्यों नहीं उनके समर्थन में बड़ा आंदोलन खड़ा किया...खैर राजनीति तो है ही उस चिड़िया का नाम जिसकी कोई नीति न हो....

स्वामी निगमानंद जी आपके जाने के बाद बाबा रामदेव समेत हर कोई कह रहा है कि गंगा के लिए दिए आपके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा...लेकिन क्या ऐसा हो पाएगा...गंगा से भी अपनी तिजोरियां भरने का रास्ता ढूंढने वाले क्या गंगा को मैली होते रहने से बचा पाएंगे...

स्वामी निगमानंद को समर्पित ये गीत...




22 टिप्‍पणियां:

  1. मीडिया भी स्वामी जी के बलिदान पर अपनी रोटियां सेंक रहा है. इस दिन से पहले काश मीडिया ने निगमानन्द "शहीद" को पांच मिनट भी दिये होते. अब अरण्य रोदन जारी है और क्या कहा जाये राजनीतिबाजों को. किसी के भी हों उन्हें अपनी गोटियां सर करने से मतलब.

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  2. इसे राजनीति का विद्रूप ही कहा जाएगा कि जिस बीजेपी ने बाबा रामदेव के समर्थन के लिए नौ दिन में ही दिन-रात एक कर दिया था...राजघाट पर ठुमके भी लग गए थे...उसी बीजेपी को स्वामी निगमानंद की व्यथा 115 दिन तक नज़र नहीं आ सकी...
    सभी लोग अपने लाभ हानि का गणित देखकर ही कुछ करते हैं।
    ब्लॉगजगत में भी यही सब गंदगी भरी पड़ी है।

    आइये इस गंदगी को मिलकर साफ़ करें।

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  3. सरकार और मिडिया ही क्यों हम सब जिम्मेदार है निगमानंद की मौत के लिए | अन्ना के लिए हम सब मोमबत्ती लेकर दौड़े | बाबा रामदेव के आगे पीछे घुमे पर निगमानंद को कोई देखने तक नहीं गया | अब कुछ दिन हम सरकारों को कोसेंगे इसमें भी कोई बीजेपी को कोसेगा किसी को दिग्गी का बयान गले नहीं उतरेगा | निगमानंद को हम घर बैठे पोस्ट लिखकर कर या किसी की लिखी पर टिप्पणी में श्रधान्जली दे देंगे | उनकी मौत को शर्मनाक कह अपने दायित्व से मुक्त हो जायेंगे |
    फिर कोई बाबा गंगा के लिए अनशन नहीं करेगा | आज निशंक सरकार पर हमला बोलने वाला दिग्गी तब कहाँ गया था जब अन्ना अनशन के बाद गंगा के लिए जंतर मंतर पर किसानों व बाबाओं ने अनशन किया था बेचारे थक हार कर वापस चले गए काश दिग्गी और उसकी धूर्त सरकार उन्हें भी पुलसिया हाथों से उठवाकर फिंकवा देती तो कम से कम उन्हें भी ये तसल्ली तो होती कि पुलिस नहीं आती तो गंगा के लिए कुछ कर सकते थे |

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  4. अभी अभी ठीक इसी मुद्दे को दूसरे तरह से लिख रहा था,
    यह पोस्ट उससे आगे भी बहुत कुछ कहती है ।
    इन सब घटनाक्रम को देख कर तो यही लगता है कि,
    जो दिखता है, वह बिकता है ।
    जहर की थ्योरी गलत है !

    भूपेन हज़ारिका और कविता कृष्णमूर्ति का यह खूबसूरत अहोम-गान मुझे बहुत प्रिय है । यू-ट्यूब लिंक चोरी करके ले रहा हूँ ।

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  5. बेचारा निगमानंद ......, _________ था बिलकुल....


    प्लीज़ फिल इन दी ब्लैंक .... वॉटएवर... गाली यू पीपल विश...

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  6. निगमानंद बेचारा नहीं था
    वह एक जलता हुआ दिया था
    जब तक जलता रहा
    देता रहा रोशनी
    अब वहाँ धुआँ है
    लगता है अब आग नहीं
    आग तो पहुँच चुकी है
    हरिद्वार के जन जन तक
    आग पहुँची है वहाँ तक
    जहाँ जलने को कुछ भी है
    जब ये जलेगी तो
    जलाएगी बहुत कुछ
    और रोशन करेगी दुनिया

    निगमानंद शहीद हुए
    उन्हें आत्मिक श्रद्धांजलि!

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  7. बाबा रामदेव की प्रसंशा में गीत गाने वाले ब्लागरों, समझ लो कि सत्याग्रह क्या होता है, निगमानन्द के सत्याग्रह को शत शत नमन, पर क्या करें, इस देश में भेड़चाल है,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  8. भगीरथ स्वामी निगमानंद जी को हार्दिक श्रद्धांजली !

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  9. काश निगमानंद भी हर समय बिकने को तैयार मीडिया को खरीद पाते

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  10. एक और भागीरथ ने देह त्याग दी और देश को पता तक नहीं चला.......
    हम मंत्र मुग्ध हो ठुमके लगाते रहे मिडिया की कहानियों और नोट कमाने की भूख पर !
    मुग्ध कर दिया आपके लेखन ने खुशदीप भाई !
    आभार आपका !

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  11. निगमानंद जी को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

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  12. निगमानंद जैसे लोगों का बलिदान कभी भी खाली नहीं जाता ऐसे लोगों की गुमनाम या पूरे देश में प्रचारित मौत हो रही है इस बात से कोई फर्क नहीं परता लेकिन ऐसे एक भी व्यक्ति की मौत से पूरी भ्रष्टाचारियों व कुकर्मियों की सत्ता की नीव की एक ईट तो हिल ही जाती है तथा कुकर्मी लोगों को जलाने की ज्वाला पैदा होती है...निगमानंद की मौत उत्तराखंड की राजीनीति को आने वाले समय में एक नयी दिशा जरूर देगा...मौत अगर देश व समाजहित में हो तो उसका फायदा देश व समाज को होता ही है...

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  13. स्वामी निगमानन्द सही मायनों में मुद्दों के लिये लड़ने वाले सँत थे... उन्होंनें आमरण का व्रत पूरा किया । काश कि उन्हें बाज़ारवाद के क, ख, ग का पता होता और वह भली प्रकार अपने अनशन की अँट-शँट मार्केटिंग कर पाते । उनको सच्ची श्रद्धाँजलि यही होगी कि यदि हम उनके मुद्दे के समर्थन में सक्रिय तौर पर कुछ न कर सकें तो कम से कम अपने स्तर पर गँगा को प्रदूषित करने वाले हर क्रिया-कलाप का बहिष्कार करें, और अपने साथियों को भी प्रेरित करें ।

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  14. काश निगमानन्द राहुल गांधी होता......

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  15. स्वामी निगमानंद जी को श्रद्धांजली - आजकल बिना मार्केटिंग के कुछ नहीं होता. नोटिस में लिया नहीं जाता, लाना पड़ता है....

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  16. बस इन्ही के कर्मों का हिसाब रखने गंगा बहती है।

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  17. स्वामी निगमानंद जी को हार्दिक श्रद्धांजली|

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  18. विवेक जैन की तरह मै भी यही कहना चाहती हूँ दिन ब दिन बी जे पी और सत्याग्रहियों के चीहरे सामने आ रहे हैं यहाँ एक संत 74 दिन तक अनशन की मार झेल गया वहाँ बाबा जो खुद को 200 साल जीने का दावा करने वाले 9 दिन मे ही ढेर हो गये। शायद निगमानन्द अभी और अनशन झेल लेते अगर उनकी मौत जहर से न हुयी होती। या उनकी तरफ भी सब ने अमीर बाबाकी तरह धयान दिया होता। या फिर उनका अनशन भी मेडिया इसी तरह उठाता जिस तरह बाबा राम देव का उठाया । लगता है बी जे पी की सत्ता की भूख ने उसे पागल कर दिया है\ ठुमके लगा रही है सुशमा औरसोनिया को मुन्नी शीला बता रहे है गडकरी। कितने ओछे हथियारों पर उतर आयी है हिन्दू धर्म का दम भरने वाले पार्टी। हिन्दू धर्म तो माँ बहिन बेटी बहु को घर की इज़्ज़त समझते हैं। चलो एक तरह से अच्छा है इनका चरित्र लोगों की समझ मे आ रहा है। लानत है ऐसे दोहरे चेहरों पर ।अन्ना भी सत्याग्रह के नाम पर चन्द लोगों के हाथों मे खेलने लगे हैं हठयोग किसी के लिये भी अच्छा नही। शुभकामनायें।

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  19. अब क्या कहा जाये कल तक तो लोगो को एक बाबा के मुद्दे नहीं उनके कपड़ो का रंग दिख रहा था राजनीति दिख रही थी पीछे से सेटिंग दिख रही थी आज अचानक लोगो को निगमानंद जी के कपड़ो का रंग क्यों नहीं दिख रहा है ये भी जानना चाहूंगी को बाबा रामदेव पर तो कइयो ने ब्लॉग लिख दिया मिडिया में भी खूब उछाला पर आज तक निगमा नन्द पर कोई ब्लॉग क्यों नहीं लिखा गया क्यों आज तक लोगो को गंगा का दर्द नहीं दिखाई दिया | निगम नन्द ऐसा करने वाले अकेले नहीं है आज की तारीख में भारत में कई लोग ऐसा कर रहे है और कई दुसरे तरीके के आन्दोलनों में मर रहे है किसी को किसी की भी मतलब नहीं है लोगो निजी रूप से जिसे समर्थन विरोध करना चाह रहे है कर रहे है चुकी आज कुछ लोगो को निगम नन्द के ऊपर बंदूख रख कर किसी और पर गोली चलने का मौका मिला है तो लोग वो भी कर रहे है मतलब यहाँ भी उनके द्वारा उठाये मुद्दे गायब है वही आरोप प्रत्यारोप की भेड़ चाल इस मामले में भी सामने आ रही है | चलो आज निगमानंद जी के मौत का भी हम सब खूब फायदा उठाते है मरने वाला तो मर गया उसके नाम पर अपने विरोधियो का मजाक उड़ाते है उन पर दुनिया जहाँ के आरोप लगते है मुद्दे गुम हो जाते है तो हो जाने दो हम से क्या |

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  20. Swami Nigmanand ne 17 varsh ki umra me sansarik tyag kar ke sanyast ho gaye aur Mata Ganga ke liye unki jan gayi aur aaj news padh rahu hoon CBI keh rahi ki unki maut(Nidhan) samanya tha na jane kyon antarman manane se inkar kar raha hai ek ne ganga ke liye apne jeevan ki aahuti di aur ek ne apne vasna aur chand kagaj ke tukde ke liye unki jan le li waqt aaj na kal jarur insaf karega hum kitne patit ho chuke hai unki balidan ka desh samaj aur desh ke liye koi asar nahi raha unhone mahatma ke charam seema ko chua hum bahut garv ka anubhav karte hai ke vo hamare samaj ke hissa the unhone desh aur Mithilanchal ka nam raushan kiya wo sadaiv hamare dilo me rahenge ek din to har kisi ko mitti me milna hai.

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