शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

खुशियां बरसतीं नहीं, ढूंढनी पड़ती हैं...खुशदीप


अगर कल आप ने जैसा सोचा था, वैसा नहीं बीता, कोई बात नहीं..


याद कीजिए आपकी नए सिरे से शुरुआत के लिए भगवान ने आज बनाया है...

ऊपर वाला उन्हीं के लिए श्रेष्ठ रखता है जो कर्म में कोई कसर नहीं छोड़ते और नतीजा ऊपर वाले पर ही छोड़ देते हैं...

जीवन में सब कुछ अस्थायी है...रात का अंधकार या दिन का उजाला..

सूर्योदय अस्थायी है...सूर्यास्त अस्थायी है...

अगर सब कुछ अच्छा हो रहा है तो उसका भरपूर आनंद लीजिए..ये समां हमेशा नहीं रहेगा...

अगर चीज़ें मनमुताबिक नहीं हो रही तो हौसला मत खोइए...शांति से वक्त को गुज़रने दें...क्योंकि ये मुश्किलें भी हमेशा नहीं रहेंगी...

वक्त कैसा भी हो बदलता है...

खर्चे ज़्यादा हो गए हों और तनख्वाह का दिन अब भी दूर हो...और तनख्वाह आ भी जाए और पूरी-सूरी ही पड़े तो सिर्फ एक चीज़ है जो आपको करनी चाहिए...और वो है...




हर हाल में खुद खुश रहिए, दूसरों के चेहरे पर भी मुस्कान लाइए..

14 टिप्‍पणियां:

  1. लीजिये हम एकदम शांत है ... और मुस्कुरा भी रहे है ;-)

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  2. सही सलाह..अब टब में बैठने जा रहे हैं मय बीयर!!!

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  3. आज तो पूरा रलेक्स ही है। मैच देख रहे हैं।

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  4. आपके सुझावे अनुरूप रिलैक्स और खुश दोनों ही हो लिये..

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  5. हम तो हमेशा खुश रहते है और एक बात मानते है ... जाहि विधि राखे राम ताही विधि रहिये

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  6. Khushdeep bhai,aaj to aapne kushi ka shama hi baandh diya.Man laaga mera yaar faqeeri me.

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  7. अरे साहब आज तो मीरपुर में खुशियाँ ही खुशियाँ बरसी हैं. उनका लुत्फ़ लेने के बाद ही आपकी पोस्ट पढ़ी. तमाम संघर्षों के साथ जीवन को खुशनुमा ढंग से जीने के लिए प्रेरित करने वाले विचारों का अच्छा संकलन.

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  8. apun to bahut samay se relax me hain......par jo nahi hain na unko bata kar achha kiya aapne....sadhuwaad..

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  9. टब वाले बच्‍चे के चिंतन से निकले शब्‍द.

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  10. वक़्त कैसा भी हो , बदलता है ...
    बड़ी बात यही है !

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  11. हम तो दो पर्ची अपने पास रखते हैं जी
    एक बुरे वक्त में निकाल कर पढते हैं जिस पर लिखा रहता है "जल्द बदलाव होगा और ऐसा नहीं रहेगा"
    दूसरी अच्छे वक्त में निकालता हूँ, उसपर लिखा रहता है "हमेशा ऐसा नहीं रहेगा, बदलाव होने ही वाला है"

    :)

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