शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

आरुषि जिसे आप नहीं जानते...खुशदीप

आरुषि यानि सूरज के उगने से ठीक पहले आकाश की लालिमा...ऐलान करती अंधेरे के छटने का और उजाले के छाने का...क्या आरुषि के लिए इनसाफ़ की कहानी में भी ऐसा होगा...


आरुषि तलवार को नज़दीक से कोई जानते थे तो वो नोएडा के डीपीएस स्कूल में उसके क्लासमेट ही थे...आरुषि के चरित्र को लेकर यूपी पुलिस के ज़रिए पहली बार जो कहानी सामने आई थी उसे आरुषि के स्कूल के दोस्तों ने पहले दिन ही नकार दिया था...वो अच्छी तरह जानते थे कि सभी को ज़िंदादिली का संदेश देने वाली उनकी आरुषि कभी ऐसा काम नहीं कर सकती थी जो उसके आत्मसम्मान को कचोटे...यही वजह है कि आरुषि को लेकर जब तरह तरह की बातें फैल रही थीं तो उसके स्कूल के दोस्त एक बगीचे का नाम आरुषि पर रखने की सोच रहे थे...

आरुषि का सबसे बड़ा शौक था जैज़ डांस...आरुषि कभी भी स्कूल के गलियारों में पैरों के अंगूठों पर 360 डिग्री के एंगल पर स्पिन करती देखी जा सकती थी...दोस्तों को भी बैले का ये स्टेप सिखाना आरुषि को बड़ा अच्छा लगता था...नौंवी क्लास में पढ़ने वाली सबसे पॉपुलर स्टूडेंट्स में से एक आरुषि ब्लेज़र स्कॉलर भी रही यानि तीन साल उसने लगातार पढ़ाई में अस्सी-नब्बे फीसदी से ज़्यादा मार्क्स लिए...वो आरुषि जिसे आम बच्चों की तरह ही टीचर्स और कपड़ों के बारे में गॉसिप करना बड़ा अच्छा लगता था...वो आरुषि जिसे अपने अच्छे-बुरे की पूरी समझ थी...खुशहाल परिवार की आरुषि आम बच्चों की तरह ही कैमरे, आधुनिक मोबाइल और छुट्टियों में बाहर घूमने जाने जैसी फरमाइशें घरवालों से किया करती थी..


तलवार दंपती ने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में पांच साल तक चले फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बाद इकलौती संतान के तौर पर आरुषि को पाया था...साउथ दिल्ली में 24 मई 1993 को जन्मी आरुषि की अच्छी तरह परवरिश हो सके, इसीलिए दिल्ली के हौज़खास से नोएडा के जलवायु विहार (सेक्टर 25) में आकर रहने का फैसला किया..इसकी सबसे बड़ी वजह आरुषि की नानी लता वहीं पास में रहती थीं और तलवार दंपती के काम पर रहने के दौरान आरुषि की देखभाल कर सकती थीं...आरुषि को स्कूल के लिए ज़्यादा दूर नहीं जाना पड़े इसलिए डेढ़ किलोमीटर के फासले पर ही दिल्ली पब्लिक स्कूल में उसका एडमिशन कराया गया...

आरुषि के दुनिया से दूर जाने की असल वजह पर बेशक अभी कुहासा छाया है लेकिन आरुषि के स्कूल के दोस्तों को विश्वास है कि एक न एक दिन ये छटेगा ज़रूर...और उस दिन आरुषि तारा बनकर आसमान में जहां भी होगी अपने दोस्तों को खास स्माइल ज़रूर देगी...पैरों के अंगूठे पर स्पिन करती हुई...

मेरी ओर से आरुषि को समर्पित ये गीत सुनिए...

17 टिप्‍पणियां:

  1. कृपया इसकी मृत्यु का वृतांत भी यदि उचित समझें तो अवश्य प्रस्तुत करें । धन्यवाद सहित...

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  2. खुशदीप भाई ... क्या सच में यह धुंध कभी छटेगी ??
    जय हिंद !

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  3. इस केस की सुई तो उसके माता-पिता की ओर ही घूम रही है।

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  4. आज हर कोई यही चाहता है कि आरुषि को न्याय जरूर मिले।

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  5. she was a very small child when she died . she was murdered . all the evidence is crucifying her parents and therefore its important that they provide proof of their innocence rather asking cbi to provide proof of their guilt .

    its important that this case like jessica reaches to a trail and fair judgement

    talwars should face the trail with faith in judiciary and if they are innocent they dont have to worry

    what really surprises me in this case it that when ever something abnormal happens in a household like murder / theft / suicide the residents first instinct is to keep all the evidence safe so that they are not crucified or accused

    even uneducated people know this so how can we give benefit of doubt to talwars

    when ever i see arushis face on the tv my heart beats for her i prey to god that such fame should not come to any child
    she is a household name and many children of her age group are following this case so its more important for talwars to proove that they are innocent

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  6. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (12.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  7. चैनलों पर पहले और अब जो बाते सामने आ रही है उससे तो सक उनके माता पिता पर ही होता है | आज तक उनके कई इंटरव्यू मैंने देख है पर कभी भी वो एक हत्या की गई बेटी के माँ बाप के रूप में सामने नहीं आये है वो हमेसा खुद को ही निर्दोष बताते नजर आये है हर बार उसकी माँ एक माँ के तौर पर नहीं एक पत्नी के तौर पर ही सामने आई है चाहे वो उनका पहला इंटरव्यू हो या अब के | अब ये तो वो ही बता सकते है की वो कितने सही है पर कम से कम उन दोनों में अपने लिए तो ये अपराधबोध होना ही चाहिए की वो अपने ही घर में किस बेसुध की नीद सोते रहे की दो फिट दुए दूसरे कमरे में सोती बेटी के साथ इतना कुछ हो जाये और उनकी नीद ही ना खुले , पर ये अपराधबोध भी कभी नजर नहीं आया |

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  8. सारे घटनाक्रम को सुनकर और देखकर बड़ा दुःख होता है ।

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  9. खुशदीप भाई,
    आरुषि के बारे में जब भी कुछ पढ़ता हूँ केवल व्यथित ही होता हूँ , इतना सब कुछ होने के वाबजूद आरुषि को न्याय न मिलना दुखद है !
    आप का कहना सही है कि "आरुषि के दुनिया से दूर जाने की असल वजह पर बेशक अभी कुहासा छाया है लेकिन आरुषि के स्कूल के दोस्तों को विश्वास है कि एक न एक दिन ये छटेगा ज़रूर...और उस दिन आरुषि तारा बनकर आसमान में जहां भी होगी अपने दोस्तों को खास स्माइल ज़रूर देगी...पैरों के अंगूठे पर स्पिन करती हुई...!"

    काश ऐसा हो पाता !

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  10. दुआ है यह धुँध छटे और न्याय हो.

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  11. बहुत ही अजीब स्थिति है, पता नही इस केस की गुत्थी कभी सुलझेगी भी या नही? जो भी हो एक हंसती खेलती बच्ची तो जा ही चुकी है जिसे अब लौटाया नही जा सकेगा. जब भी इस केस की चर्चा होती है उस समय असहय वेदना होती है.

    रामराम

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  12. खुशदीप भाई यह गुत्थी बहुत ही उलझी सी लगती हे, लेकिन उस के मां बाप ऎसा कर सकते हे दिल नही मानता, जरुर किसी ओर की चाल लगती हे इस मे, ओर मां बाप को फ़ंसाया जा रहा हे, जो मां बाप अपनी इकलोती बच्ची के लिये इतना कुछ कर सकते हे, वो उस की हत्या नही कर सकते, आगे भगवान जाने लेकिन दिल यह बात नही मानता.धन्यवाद इस जानकारी के लिये

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  13. आरुषि को न्याय न मिलना दुखद है !
    आरुषि को न्याय जरूर मिलेगा।

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  14. अपने देश की जांच व्यवस्था पर रोना आता है।

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