मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

लो फिर वसंत आई...खुशदीप

वसंत पंचमी पर बस आज मलिका पुखराज और उनकी बेटी ताहिरा सैयद की पुरकश आवाज़ में खो जाइए, मेरी तरह...यकीन नहीं आता तो सुनिए, वसंत का जादू आपके भी सिर चढ़ कर बोलेगा...





16 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह ! क्या खूबसूरत और मोहक गीत सुनवाया आपने... सुबह खुशनुमा हो गयी... यह टिप्पणी देर से कर रहा हूँ.... क्योकि पेज रिलोड होते ही गीत बंद हो जाता:) दसियों बार सुनने के बाद भी जी नहीं भरता ... बहुत मोहक ...
    बसंत आगमन की मंगल कामनाएँ

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  2. संभवतः यह पाकिस्तानी मूल का गीत लगता है... हमारे यहाँ तो "लो फिर बसंत आया" होता है॥ उधर बसंत आई होता होगा :)इधर गाते तो बोलते "लो फिर बसंती आई" :P

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  3. खूबसूरत गीत सुनवाया आपने
    वसंत पंचमी की ढेरो शुभकामनाए

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  4. आज तो गीत के सा‍थ ही बसंत का अनुभव कर लिया, बहुत अच्‍छा लगा गीत।

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  5. बसंत यदि ऋतु है तो आएगी ही, और यदि मौसम है तो आएगा। वह पाकिस्तान और हिन्दुस्तान सब जगह बिना भेद के आती है। विशुद्ध भारतीय गीत है।

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  6. मेरा मन पसंदीदा गीत सुनवाने के लिए आभार खुशदीप भाई !

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  7. शानदार प्रस्तुति। \बसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें।

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  8. ek sunder nagana pasand aaya --------------------------------------------------------------------------------------jai baba banaras-------------------

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  9. कल से येही तो कर रहा हूँ...अब आपके ब्लॉग पर एक बार और सही..हफीज साहब मलिका पुखराज और ताहिरा ने कमाल किया है...
    नीरज

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  10. बहुत ही सुंदर और कर्णप्रिय, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  11. खो गए जी बसंती रंग और राग में ।

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  12. Adbhut,anupam,karnpriya
    sangeet kya hai jaise behta hua jharna
    Basant sakar ho utha.Shukriya Kushdeep Bhai.

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