खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से कलम-कंप्यूटर तोड़ रहा है

ब्लॉगजगत, बताइए, मैं कुछ कहूं या चुप रहूं...खुशदीप

Posted on
  • Tuesday, October 5, 2010
  • by
  • Khushdeep Sehgal
  • in
  • Labels: , , , ,
  • बेवक्त ये गाना मैं आपको सुना रहा हूं...ब्लॉगिंग के 14 महीने में आज एक ऐसी घटना मेरे साथ हुई जो पहले कभी नहीं हुई...इसलिए कभी सोचता हूं कि मैं कुछ कहूं...कभी सोचता हूं कि मैं चुप रहूं...अब रात को ही किसी नतीजे पर पहुंच पाऊंगा...तब तक इस गीत के ज़रिए ही अपने अंदर की कशमकश दिखाता हूं...

    या दिल की सुनो दुनियावालों,
    या मुझको अभी चुप रहन दो,


    मैं गम को खुशी कैसे कह दूं,
    जो कहते हैं, उनको कहने दो,


    ये फूल चमन में कैसे खिला,
    माली की नज़र में प्यार नहीं,


    हंसते हुए क्या क्या देख लिया,
    अब बहते हैं आंसू बहने दो,


    ये ख्वाब खुशी का देखा नहीं
    देखा जो कभी तो भूल गए,


    मांगा हुआ तुम कुछ दे ना सके,
    जो तुमने दिया वो सहने दो,


    क्या दर्द किसी का लेगा कोई,
    इतना तो किसी में दर्द नहीं,


    बहते हुए आंसू और बहे,
    अब ऐसी तसल्ली रहने दो,

    या दिल की सुनो दुनियावालों,
    या मुझको अभी चुप रहने दो...

    29 comments:

    1. बढ़िया प्रस्तुति..चिट्ठाजगत की बत्ती जली मिली ... चिट्ठाजगत टीम को बधाई.

      ReplyDelete
    2. aisee bhee kya baat hai bhai........?

      shubhkamnae .

      ReplyDelete
    3. खुशदीप सर, चुप मत रहिये........... जो कहना हो वो कहिये.... बाकि रहे दुनिया वाले - उनका काम है कहना - कुछ तो वो जरूर कहेंगे.
      पर दिल में बात रखने से बंद ज्यादा परेशान होता है - मैं ये मानता हूँ.

      ReplyDelete
    4. दर्दनाक है खुशदीप भाई ......खुदा खैर करे :-)

      ReplyDelete
    5. यह गीत बहुत ही प्यारा सन्देश दे रहा है!

      ReplyDelete
    6. ye to thik hai magar baat kya hai wo bhi to batate.

      ReplyDelete
    7. इतना सस्पेंस काहे को..
      अब कह भी दीजिये....हाँ नहीं तो...!!

      ReplyDelete
    8. दिल की गिरह खोल दो……………॥
      कहूँ या
      राज को राज रहने दो…………॥

      कुछ समझ नहीं पाया।
      शुभ हो, बस यही प्रार्थना है जी

      प्रणाम

      ReplyDelete
    9. अब तो टेंशन हो रही है कि क्या हुआ...जल्दी बताओ.

      ReplyDelete
    10. हमारे विचार से तो चुप रहने से कह देना बेहतर है।

      ReplyDelete
    11. खुशदीप भाई , जब आप ऐसा कह रहे हैं तो इसका मतलब कि कुछ बहुत ही गंभीर अपने भीतर लिए बैठे हैं ....और हम तो यही कहेंगे कि ..ले आईये सब कुछ बाहर ..फ़िर जो भी उसका नतीजा

      ReplyDelete
    12. यहाँ लिखा नहीं ..... फोन उठा नहीं रहे ....पता कैसे चले क्या हुआ है ???

      ReplyDelete
    13. चुप हूं तो कलेजा जलता है
      बोलूं तो तेरी रुसवाई है :)

      ReplyDelete
    14. खुशदीप का काम है खुश रहना और दूसरों को खुश रखना दूसरों को खुश रखने के लिये आँसू तो पीने ही पदते है
      वो बस हसाना जानता है
      सब को लुभाना जानता है।
      जल्दी से कशमक्श से निकलो। आशीर्वाद।

      ReplyDelete
    15. बंद हो मुट्ठी तो लाख की
      खुल गई तो फिर खाक की

      इशारों को अगर समझो....

      ReplyDelete
    16. कह ही डालिए अब :)

      ReplyDelete
    17. खुशदीप भाई जो कहना है खुल कर कहॊ, डर किस बात का चलो इंतजार हे आप की बात का.....

      ReplyDelete
    18. एक चुप सौ को हराता है . दिल की ही सुनिये .
      .
      .
      .
      यह टंकी पर चढने वाली बात ना हो तो अच्छा

      ReplyDelete
    19. अब कह भी दीजिये

      ReplyDelete
    20. कह देना चाहिये। अगर ब्लॉग एक परिवार की तरह है तो कहना गलत नहीं है।

      ReplyDelete
    21. ऐसा क्या हो गया, खुशदीप भाई...जो ये गाना याद आ गया?
      कह डालिए अपने मन की.

      ReplyDelete
    22. गैरो में क्या दम था, हमें तो अपनों ने लूटा
      मेरी कश्ती तो वहां ढूबी जहां पानी कम था !!

      किसी निकटतम बँधु ने दुख पहुँचाया है ॥ भाई खुशदीप जी खुश रहिए ।

      ReplyDelete
    23. मेरी मानो तो आप दिमाग की सुनो । दिल तो.... ।

      ReplyDelete

    24. ऒऎ खुशदीप पुत्तर, ठँड रख !
      हलाल किया गया तेरा कॅमेन्ट मैं छापूँगा, क्योंकि मुझे बीस मिनट में ऑफ़िस पहुँचने की कोई जल्दी नहीं है ।
      आज तक पूरा देश मलेरिया से ग्रस्त है, क्योंकि वह कुनैन की गोली से डरता है, और पड़ोसी के घर कूड़ा फ़ेंकता है ।
      खुद को बुद्धिजीवी घोषित कर बाकियों को छद्म-बुद्धिजीवी करार देता है, और मुन्नी बदनाम का दागदार लहँगा पहन यहाँ भीड़ में घुस कर तमाशा देख रहा है, ऒऎ खुशदीप पुत्तर, ठँड रख !

      ReplyDelete
    25. क्या हुआ खुशदीप भाई? सब खैरियत तो है ना?

      ReplyDelete

     
    Copyright (c) 2009-2012. देशनामा All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz