आपको कोई संदेश देना है...जागरूकता लानी है...तो सबसे अच्छा तरीका क्या होता है...यही न, कि कोई प्यारा सा स्लोगन ढूंढा जाए...ग्लोबल वार्मिंग, धरती बचाओ, पेड़ लगाओ, गो ग्रीन जैसे कितने भी स्लोगन दे दिए जाएं लेकिन पर्यावरण की अनदेखी बंद नहीं हो रही...यही हाल रहा तो हमारे नदी, जंगल, वन्यजीवन, ग्लेशियर सब खत्म हो जाएंगे...लेकिन ये सारे स्लोगन एक तरफ और मैंने आज जो स्लोगन देखा, वो फिर भी इन सब पर भारी पड़ता है...युवा-युवतियों के बेहद पसंदीदा सार्वजनिक पार्क के बाहर बोर्ड पर लिखा था-
पेड़ों के साथ उतना ही प्यार करो, जितना प्यार पेड़ों के पीछे करते हो...
स्लॉग ओवर
मक्खन...कल मैंने पत्नी के घुटने ज़मीन पर टिकवा दिए...
ढक्कन...वाह तू तो बड़ा दिलेर निकला...आखिर लड़ाई खत्म कैसे हुई...
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मक्खन...अरे होना क्या था...पत्नी ने ही कहा...अब पलंग के नीचे से बाहर निकल आओ, कुछ नहीं कहूंगी...
रही ना पूरी अनपढ़ की अनपढ़...खुशदीप
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मक्खन अपनी कार के दो पहिये अचानक उतारने लग गया...
मक्खनी ने कहा...ये क्या कर रहे हो? कार के दो पहिये क्यों उतार रहे हो?
मक्खन...चुप कर ज़ाहिल औरत, रही ...





बेचारी.... नारी.मक्खन को जरुर सजा मिलनी चाहिये, जो झुकने की जगह इन नारियो पर जुल्म कर रहा हे.चुपचाप पहले ही निकल आता ना...
ReplyDeleteक्रप्या घर की बाते ना बताया करे ................ मकखन की
ReplyDeleteवाह-वाह खुशदीप जी स्लॉग ओवर तो शानदार है....
ReplyDelete4/10
ReplyDeleteठीक है पोस्ट
ये पलंग के नीचे वाला किस्सा शायद कालजयी है. सैकड़ों बार सुनने के बावजूद भी इसकी ताजगी हमेशा कायम रहेगी.
एक सवाल : यहाँ लोगों को लिखने के लिए कुछ भी मसाला नहीं मिल रहा, ऐसे में आप के पास स्टाक कहाँ से आता है ?
पेड़ों के साथ उतना ही प्यार करो, जितना प्यार पेड़ों के पीछे करते हो...
ReplyDeleteबहुत बढिया स्लोगन है ...
उस्ताद जी ... आप शायद भूल रहे है कि अपने खुशदीप भाई एक पत्रकार है और उनका काम है खबरों के साथ खेलना तो ऐसे में स्टॉक की कमी तो हो ही नहीं सकती !
ReplyDeleteस्लोगन बढ़िया रहा ...खुशदीप भाई !
अब तक का सबसे श्रेष्ठ स्लोगन।
ReplyDeleteप्रेम करो... एक पेड़ अपनाओ .... खुद बढ़ो और अपने बच्चों के लिए भी पेड़ उगाओ !
ReplyDeleteअनुकरणीय सलोगन ....साधुवाद
वाकई बहुत बढ़िया सन्देश है ! पेड़ मानवजाति के सबसे अच्छे मित्र हैं और हमें इनके बारे में सबसे कम मालुम है !
ReplyDeleteइन दोनों को सकुशल देख ख़ुशी हुई चाहे चारपाई के ही नीचे क्यों न हों !
पेड़ों की कीमत कम से कम प्यार करने वालों को तो समझनी चाहिए ।
ReplyDeleteस्लोग ओवर मस्त रहा ।
tan, man, dhan
ReplyDeletesabse uper wan.
नारा वाकई में बढ़िया है..
ReplyDeleteमक्खन फिर वहीं है, पलंग के नीचे.....
ReplyDeleteपेड़ों के साथ उतना ही प्यार करो, जितना प्यार पेड़ों के पीछे करते हो...
ReplyDeleteवाह गजब कर दिया खुशदीप भाई, लेकिन अब पेड़ ही कितने बचे हैं जो पेड़ों के पीछे..........
ललित भाई,
ReplyDeleteइस बार दिल्ली आओगे तो लोधी गार्डन चल कर अपनी आंखों से ही नज़ारा देख लेना...
जय हिंद...
पेड़ों के साथ उतना ही प्यार करो, जितना प्यार पेड़ों के पीछे करते हो..
ReplyDelete-बहुत सन्नाट मैसेज!
पेडों के पीछे प्यार करने के लिए पेड को बडा होने दें। उसे काटे नहीं, नहीं तो प्यार करने के लिए जगह कहाँ से ढूंढोंगे?
ReplyDeleteपेड़ों के पीछे का प्यार तो कुछ क्षणों का ही होता है.
ReplyDeleteहरा भरा संदेश।
ReplyDeleteपेड़ों के साथ उतना ही प्यार करो, जितना प्यार पेड़ों के पीछे करते हो...
ReplyDeleteहमारे शहर में स्मृति गार्डेन आपकी पोस्ट की सच्चाई को पूरी गंभीरता से प्रकट करता है ...
ReplyDeleteमजाक को छोड़ दें ...तो पेड और हरियाली के प्रति जागरूक होना ही चाहिए ...
अच्छी पोस्ट !
really best quote about nature
ReplyDeleteकेदार नाथ सिंह की एक कविता हम लोग इसी तर्ह स्लोगन के रूप मे इस्तेमाल करते है ..." उसका हाथ / अपने हाथो में लेते हुए / मैने सोचा / पृथ्वी को भी इसी तरह/ गर्म और सुन्दर होना चाहिये "
ReplyDeletesave enviroment save tree
ReplyDeletesave enviroment save tree
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