रविवार, 5 सितंबर 2010

मक्खन 'रोमांटिक', मक्खनी हैरान...खुशदीप

मक्खन स्वामी जी के सत्संग से घर वापस आया...

उसके चेहरे की खुशी देखते ही बनती थी...

वो लगातार राधे-राधे गाए जा रहा था...

घर में पैर रखते ही मक्खन मक्खनी से बड़े प्यार से मिला...

फिर उसने मनमोहक मुस्कान के साथ मक्खनी को बाहों में उठा कर नाचना शुरू कर दिया...



ये सब देखकर मक्खनी हैरान-परेशान...

कहां हमेशा घर में करेले जैसा सड़ा सा मुंह लेकर बैठे रहने वाला मक्खन...

और कहां मक्खन का ये नया रोमांटिक अंदाज़...

मक्खनी से रहा नहीं गया, आखिर पूछ ही बैठी...

क्या स्वामी जी ने आज रोमांटिक होने की घुट्टी पिलाई है...

मक्खन...राधे-राधे, ये बात नहीं है प्राण-प्यारी...

मक्खनी...फिर क्या बात है...

मक्खन...दरअसल स्वामी जी ने आज सिखाया है.. कि हमें...

...

...

...

...हमें अपने बोझ और दुखों को भी खुशी-खुशी उठा कर जीना सीखना चाहिए...राधे-राधे...

20 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा ……………फिर तो सही किया मक्खन ने।

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  2. इसमे एक समस्या ये भी आ जाती है की शादी के बाद बोझ अक्सर overweight हो जाता है !

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  3. राधे राधे!
    मक्खन और मक्खनी के चित्र पहली बार देखे, बहुत खूबसूरत हैं। बिलकुल विदेशी से लगते हैं।

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  4. मक्खन ने बाबा से पूछा बाबा शराब?
    बाबा- हरी हरी, हरी हरी

    और मीट?
    बाबा - सिरी सिरी, सिरी सिरी

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  5. मक्खन के बहाने किसका दर्द बांट रहे हैं आप....हीहीहीहीहीही..लगता है आपके घर आना ही पड़ेगा......

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  6. राधे राधे....


    तस्वीर मख्खन मख्खनी की त नहीं है न!! :) ऐसे ही लगा दी होगी उदाहरण के लिए. हा हा!

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  7. हास्य मे भी जीवन दर्शन? वाह बहुत खूब। जीओ मेरे लाल
    आशीर्वाद।

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  8. बोझ तो उठाना ही है .... चाहे मक्खन पर ढक्खन हो न हो :)

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  9. हाहा.. क्या सीख दी है स्वामी जी ने.. बिलकुल सच :)

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  10. मक्खन मक्खनी की तस्वीर पहली बार देखी !!

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  11. और ढक्कन कहाँ गया ....?? शुभकामनाएं !!

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