गुरुवार, 2 सितंबर 2010

आदमी जो कहता है, आदमी जो सुनता है, ज़िंदगी भर वो सदाएं पीछा करती हैं...खुशदीप

ब्लॉग जगत में आजकल जो लिखा जा रहा है, उसे दबा कर पढ़ रहा हूं...लेकिन कमेंट कहीं नहीं दे पा रहा हूं...उसके पीछे मेरी व्यक्तिगत समस्याएं हैं...उम्मीद है जल्द ही इनसे पार पा लूंगा...फिर दबा कर कमेंट भी करूंगा...एक तो मन पहले से ही उचाट है, ऊपर से ब्लॉग जगत में कई पोस्टों पर तीखा वाकयुद्ध देखकर और बुरा लग रहा है...पहली बात तो इस तरह के आचरण का औचित्य मेरी समझ से बिल्कुल परे हैं...यहां सब मेरे मित्र हैं, शुभचिंतक है...किसी के साथ व्यक्तिगत तौर पर कुछ बुरा हुआ तो मैं सिर्फ उससे हमदर्दी ही जता सकता हूं...लेकिन मैं किसी को सलाह देने वाला कौन होता हूं...और फिर ब्लॉगर ब्लॉगर होता है कोई डिटेक्टिव या इन्वेस्टीगेशन एक्सपर्ट तो होता नहीं जो किसी की पोस्ट को पढ़कर ही जान ले कि कौन गलत है और कौन सही...

यहां ई-मेल और चैट्स का हवाला दिया जा रहा है...पुरानी चैट्स से धूल झाड़कर उन्हें पेश किया जा रहा है...मैं तो किसी से कभी चैट करता हूं, उसी वक्त वो उड़ जाती है...संभाल कर रखने का तो सवाल ही नहीं...चैट पर मर्यादा का ध्यान हमेशा रखता हूं...लेकिन क्या ये हमारा कसूर नहीं कि हम आभासी दुनिया में किसी को करीब जानकर कुछ ज़्यादा ही लिबर्टी ले लेते हैं...इंटीमेट बातें करने लगते हैं...लेकिन यहां ये बात गौर करने लायक है कि ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती...अगर आप किसी को छूट न दें तो किसी की क्या मज़ाल जो आपकी शान में गुस्ताखी करे...चिंगारी सुलग कर आग बनने की कोशिश करे, बेहतर है कि उस पर पहले ही पानी डाल दिया जाए...

और अगर आप ऐसा नहीं कर पाते...चाहे इच्छा से हो या जज्बात में आकर, अगर आप किसी से चैट पर बात करते हैं तो फिर आप भी उसके परिणामों के लिए उतने ही भागीदार हो जाते हैं जितना कि आप से चैट करने वाला...और फिर उस चैट को संभाल कर रखना...कहीं ये तो नहीं दिखाता कि आप के मन में शुरू से ही आशंका थी...जब तक संबंध मधुर हैं ठीक है...लेकिन जहां कभी संबंधों में कटुता आई, उस चैट या किसी दूसरे माध्यम से हुए संवाद को सार्वजनिक कर दिया जाए...अगर कोई आपको समझाने पर भी लगातार तंग कर रहा है तो उसका सबसे बेहतर तरीका है आप क़ानून का सहारा लें...साइबर लॉ में आजकल इस तरह की हरकतों से निपटने का पूरा बंदोबस्त है...लेकिन निजी चैट को सार्वजनिक कर अपने लिए समर्थन जुटाना, मेरी समझ से तो नितांत गलत है...और अगर कोई आपका समर्थन नहीं करता तो उसे अपने खिलाफ मान लेना भी वाजिब नही है...आपस में टांग खिंचाई की जगह दुनिया में और भी कई मुद्दे हैं जिन पर अपनी ऊर्जा, बुद्धि, विवेक खपाना ज़्यादा श्रेयस्कर है...दूसरे ने क्या किया, हम इस पर क्यों इतनी मगजमारी करते हैं...ये क्यों नहीं सोचते कि हम क्या कर रहे हैं...हमारा आचरण कैसा है, बस इस पर ही क्यों नहीं ध्यान देते...हम भले तो जग भला...


आखिर में बस कबीर को याद करूंगा-

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिल्यो कोए,
जो मन खोजा आपना, तो मुझसे बुरा न कोए


लीजिए अब ये गाना भी सुन लीजिए और सब बड़प्पन दिखाते हुए सारा गुस्सा थूक दीजिए...



आदमी जो कहता है, आदमी जो सुनता है,
ज़िंदगी भर वो सदाएं पीछा करती हैं...

26 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत कुछ सीखने को तो मिलता है यहाँ --क्या लिखना चाहिए और क्या नहीं लिखना चाहिए...मुझे तो ये गीत ---आदमी मुसाफिर है, आता है जाता है,आते जाते रस्ते में यादे छोड़ जाता है....और
    एक भजन याद आ रहा है ..
    ..मन रे तू काहे न् धीर धरे ...ओ निर्मोही मोह न् जाने जिनका मोह करे ..

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  2. ब्लॉग जगत एक पाठशाला है ...रोज कुछ नया सीखने को मिल जाता है ...
    हम क्या कर रहे हैं , हमारा आचरण कैसा है ...इसपर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है ...
    बहुत सही निष्पक्ष बात रखी है आपने ..
    गीत बहुत सही चुना है ...
    जन्माष्टमी की बहुत शुभकामनायें ...!

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  3. आदमी की फितरत ही फसादी हो तो क्या online अरे क्या offline, कहीं भी पंगा ले लेगा! भाई का तो simple funda है, पागल एक ही ठीक, दोनों एक साथ नहीं पगला सकते नहीं तो महाभारत हो जाएगा. तो अपना दायित्व है की शांत रहे और उसको पगला का पूरा अवसर दे, थोड़ी देर में उसको समझ में आ जाएगा की इससे पंगा लेने में कोई मज़ा है, तो वो फिर अपने आप अपने टाइप वाले को ढूँढने निकल जाएगा और आपका पीछा खुद ब खुद छोड़ देगा!

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  4. बात महत्वपूर्ण है। आप के मन की बात न कहने वाला आप का विरोधी है यह मान लेना गलती है।

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  5. मत पढो ऐसी बातों को ।
    ब्लॉग जगत में और भी है ।
    जन्माष्टमी पर पढ़िए एक विशेष लेख हमारे ब्लॉग पर ।
    व्यक्तिगत समस्याओं से हम भी जूझ रहे हैं । लेकिन सब ठीक हो जायेगा , विश्वास रखिये ।

    जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें ।

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  6. खुशदीप भाई !

    इस घटना से मन बड़ा उचाट है, मन करता है कि कुछ दिन लिखना और ब्लाग्स पढना बंद कर दूं ! इन दोनों का मैं पाठक रहा हूँ , दोस्ती को दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए और अगर ऐसा हुआ है तो इन विद्वानों का बचपना ही कहलायेगा ! मतभेद होने की स्थिति में, आपस में बात करना बंद कर दें बस, न कि अपनी दोस्ती को लेकर चौराहे पर आ जाएँ सिर्फ जगहंसाई मिलेगी और तमाशबीन मौके का फायदा उठाते हुए अपनी रंजिशों का बदला लेंगे !

    यह घटना एक सबक है हम सबके लिए !!

    जन्माष्टमी पर आपको सपरिवार शुभकामनायें खुशदीप भाई !

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  7. मत पढो ऐसी बातों को ।
    ब्लॉग जगत में और भी है ।
    जन्माष्टमी पर पढ़िए एक विशेष लेख हमारे ब्लॉग पर ।
    व्यक्तिगत समस्याओं से हम भी जूझ रहे हैं । लेकिन सब ठीक हो जायेगा , विश्वास रखिये ।

    जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें ।

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  8. ब्लॉग जगत में आजकल जो लिखा जा रहा है, उसे दबा कर पढ़ रहा हूं...लेकिन कमेंट कहीं नहीं दे पा रहा हूं...उसके पीछे मेरी व्यक्तिगत समस्याएं हैं...उम्मीद है जल्द ही इनसे पार पा लूंगा...फिर दबा कर कमेंट भी करूंगा..

    हम इन्तज़ार करेंगे तेरा कयामत तक
    खुदा करे कि कयामत हो और तू आये

    कोई बात नही………………इतना इंतज़ार बुरा थोडे है……………कोई ज्यादा नही है।

    कृष्ण प्रेम मयी राधा
    राधा प्रेममयो हरी


    ♫ फ़लक पे झूम रही साँवली घटायें हैं
    रंग मेरे गोविन्द का चुरा लाई हैं
    रश्मियाँ श्याम के कुण्डल से जब निकलती हैं
    गोया आकाश मे बिजलियाँ चमकती हैं

    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये

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  9. बिलकुल सही मश्वरा है। श्री कृष्ण-जन्माष्टमी पर ढेर सारी बधाइयाँ !!औए आशीर्वाद।

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  10. १०० प्रतिशत सही ...
    आपको सपरिवार श्री कृष्णा जन्माष्टमी की शुभकामना ..!!
    बड़ा नटखट है रे .........रानीविशाल
    जय श्री कृष्णा

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  11. हुआ क्‍या है कोई मुझे भी बतलायेगा।

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  12. अरे बाबा आप कहां फ़ंसे है बेकार की बातो मै.... जो लिग टिपण्णियां ओर चेट समभाल कर रखते है कि किसी समय भाडास निकालेगे? उन से मै तो दुर ही रहता हुं, यानि उन्हे हिन्दी मै घास नही डालता ओर अग्रेजी मे लिफ़्ट नही देता, लेकिन अपने दिल पर कोई बोझ नही रखता, तो जनाब निकले इन सब बेकार की बातो से, ओर मस्त रहे अपने जीवन मै...... ओर सुने वो गीत...मै जिन्दगी का साथ निभाता चला गया.............................
    कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

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  13. लिग... लोग गलती सुधार ले जी हमारी

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
    जन्माष्टमी पर्व के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाये...
    आज आपकी एक लाइना चिट्ठी चर्चा समयचक्र पर
    जय श्रीकृष्ण.

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  15. अविनाश जी सबसे उम्दा ब्लोगर हैं ,देखिये उनको कुछ पता ही नहीं है ,शानदार...कास हमलोग भी अविनाश जी जैसा बन पाते ...लेकिन इस अतिसंवेदनशीलता का क्या करें ... ?

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  16. श्री कृष्ण जन्माष्ठमी की बहुत-बहुत बधाई, ढेरों शुभकामनाएं!

    आपकी एक-एक बात शत-प्रतिशत सही है. ब्लॉग जगत में हमेशा ही एक-दुसरे की व्यक्तिगत रूप से टांग खीचने की चेष्ठा गलत ही कही जाएगी. वाही एक-दुसरे के धर्म के खिलाफ लिखना भी अपने आपको मशहूर करने का एक आसान साधन बनता जा रहा है. इसी कारण वश मैंने कुछ दिनों पहले अपने आपको नोर्मल ब्लोगिंग से दूर रहने की घोषणा की थी और लिखा था कि "रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुकी नोर्मल ब्लागिंग को मैं अलविदा कह रहा हूँ. मैंने प्रण किया है कि जिस ब्लॉग में भी किसी धर्म अथवा व्यक्ति विशेष के खिलाफ लिखा जाता है उनको नहीं पढूंगा."

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  17. सहगल साहब आप क्या बात कर रहे हैं हमारे तो पल्ले ही नहीं पड़ी...कहाँ ब्लॉग जगत में कहा सुनी हो रही है? हमारे लिए तो ये एक समाचार है...जब हमें मालूम नहीं है के कहाँ क्या हो रहा है तो बेकार जान कर क्यूँ अपना तनाव बढ़ाएं...वैसे भी ब्लॉग जगत में हम अपनी बात अपने ढंग से कहने आते हैं किसी दूसरे की टांग खींचने नहीं...और खींच कर मिलता भी क्या है? आप तो मस्त रहिये मस्ती में और ऐसे ही लिखते रहिये...कीचड़ में पत्थर डालेंगे तो कपडे आपके ही ख़राब होंगे...नहीं?

    नीरज

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  18. वाह खुशदीप जी ,आप ने एक सटीक बात कह कर खुश कर दिया इस 'दीप 'को कृष्ण जन्माष्टमी पर हार्दिक बधाई.

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  19. अब क्या कहें बात सही है और सबको पता है पर जीवन में उतारना शायद कठिन होता है और ये लांक्षन लगाये जाते हैं, हमने सोच लिया है कि अब ऐसी जगह नहीं जाना है जहाँ सब अपनी अपनी शतरंज लेकर बैठे हों।

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  20. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  21. बात तो पते की कही आपने...
    और गीत भी अच्छा सुना दिया....
    आभार...

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  22. भाई मन खराब हो तो ताऊ के अड्डे पै चले आना.

    राधे राधे...जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  23. ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती..

    बिल्कुल सहमत...

    शुभकामनाएँ.

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  24. इस बारे में थोड़ा-बहुत पता तो चला था लेकिन उन पोस्टों को पढ़ नहीं पाया था...अब लग रहा है कि अच्छा ही हुआ जो नहीं पढ़ा

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