शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

इस दिल ने धड़कना छोड़ दिया...खुशदीप

जिस दिन से जुदा वो  हमसे हुए,


इस दिल ने धड़कना छोड़ दिया,


ए चांद का मुंह उतरा-उतरा,


तारों ने चमकना छोड़ दिया...



इस गीत में वो जहां आ रहा है उसे ब्लॉगिंग मान कर सुनें...

19 टिप्‍पणियां:

  1. पेस मेकर वगैरह के विकल्प तो हैं ही..आजकल इस बात से टेंशन नहीं होती कि घड़कना छोड़ दिया. :)

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  2. अच्छी पंक्तिया है ....
    ....
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com

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  3. भैया......... आपकी तबियत कैसी है अब?

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  4. अजी बिना दिल के ही लिख दी आप ने पोस्ट? अजी चांद का मुंह तो इस लिये उतरा है कि इस कमीने अमेरिका ने वहां भी धमाका कर दिया, वर्ना उसे क्या दुख था, अब वो हमे देख कर डरता है...लेकिन पहले दिल का ध्यान रखे, चांद तारो को छोडे...

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  5. खुशदीप भाई,

    तबियत कैसी है आपकी? अपनी तो खराब चल रही है.... डॉक्टर ने हाईपर थायराइड बताया है.... :-(

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  6. कोई बात नहीं , वो सुबह फिर आएगी ।

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  7. अजी खुशदीप जी...!
    कौन , कब , कैसे , कहाँ, क्यूँ ??????
    ये लो आप गीत गा रहे हैं....और हम यहाँ सोच सोच कर परेशान है कि आप कहाँ हैं ???
    ये चक्कर क्या है ..?
    आप ठीक तो हैं न ?

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  8. सभी ब्लॉगर साथियों के लिए सूचना....

    फिलहाल तो खुश रहने वाले खुशदीप सहगलजी की तबियत नासाज है। चार-पांच दिन की छुट्टी। फिलहाल तो हरारत लगती है कमरतोड़ (या बंदातोड़) काम..और फिर आराम को तिलांजलि....ऐसे में होगा क्या? उम्मीद है कि दो-तीन दिन में वो इस लायक हो जाएंगे कि कुछ घंटे काम कर सकें। लेकिन आराम....???????????????????????? अब क्या कहूं......समझ जाइए....

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  9. पोस्ट पढ़कर कुछ गड़बड़ तो लग ही रही है, रोहित के कमेंट ने खुलासा कर दिया।
    शीघ्र स्वास्थ्यलाभ के लिये कामना।

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  10. .
    लीवर के कह दीजिये , ड्यूटी इंचार्ज बन जायें...धड़क लें कुछ दिन दिल की जगह [for a change ] । मिल जुल कर काम चलता रहेगा।
    .

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  11. दिव्या की बात सही है ....चलता है अपनो के बीच ऐसा ....वैसे भी मिलजुल कर रहने की आदत तो पड़ चुकी होगी ....ब्लोगिंग के एक साल में .....ये तो थी मजाक की बात ...अब गंभीर ......शीघ्र स्वस्थ हो ....यही कामना ........दिल से ...

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  12. आज आप जैसे सभी लोगों का हाल यही है ,जिन्दगी जीने के लिए संवेदनहीनता जरूरी हो गयी है और संवेदना रखने पर लोगों के दुखों को देखकर दिल बैठ जाता है ...! इसी का नाम जीवन है ...देखिये इन साले भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों को संवेदना के व्यापारी बनकर ऐश कर रहें हैं और पूरा देश और समाज का दिल धरकना बंद होता जा रहा है ...

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  13. तो फिर,,,, चांद तोरों को ज़मीन पर लाइए... ब्लागर जो बैठे हैं चमकाने के लिए :)

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  14. अपना ख्याल रखें भाई जी !
    जय हिंद !!

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  15. दिल धड़कना छोड़ दे तो दिल नहीं रह जाता।

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  16. पूरे एक हफ्ते बाद पोस्ट...वो भी चार लाईनों की?...
    तबियत तो ठीक है ना भाई जी?

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