मंगलवार, 3 अगस्त 2010

मर्द का दर्द न जाने कोए...खुशदीप

कौन कहता है मर्द को दर्द नहीं होता...होता है जनाब मर्द को भी दर्द होता है...कहो तो साबित कर सकता हूं...तो सुनिए फिर मर्दों के दिल से ही निकला दर्द...



दर्द नंबर एक

मर्द पैदा होता है, बधाई और फूल मां को मिलते हैं...

शादी होती है, तोहफ़े और लाइमलाइट दुल्हन को मिलती है...

मरता है, बीमे की रकम पत्नी को मिलती है...

फिर भी नारियां पुरुषों के वर्चस्व से मुक्त होने की बात करती हैं...



दर्द नंबर दो

औसतन एक मर्द की ज़िंदगी बंटी होती है-

20 साल मां के ये पूछने पर- कहां जा रहे हो...

इसी सवाल को फिर 40 साल पत्नी पूछती है...

और अंत आने के बाद शोक जताने वाले हैरत जताते हैं- जाने कहां चला गया...



दर्द नंबर तीन

शादी के बाद विदाई का वक्त आया...दुल्हन को उसके पिता गाड़ी तक छोड़ने आए...तभी दुल्हन ने पिता के हाथ में कुछ थमा कर मुट्ठी बंद कर दी...सब जानने को उत्सुक कि आखिर दुल्हन ने पिता को क्या दिया है...सबकी नज़रें देखकर पिता ने ऐलान किया...लेडीज़ एंड जेंटलमैन...आज का दिन मेरे लिए बड़ा सौभाग्यशाली है...आखिरकार मेरी बेटी ने मुझे मेरा क्रेडिट कार्ड वापस कर ही दिया...ये सुनकर वहां एक शख्स को छोड़कर बाकी सब खिलखिला कर हंसने लगे...और  वो शख्स  था- दूल्हे राजा...



दर्द नंबर चार

एक आदमी सड़क पर जा रहा था कि पीछे से आवाज़ आई...एक भी कदम और आगे बढ़ाया तो ईंट तुम्हारे सिर पर गिरेगी और तुम्हारा काम तमाम हो जाएगा...आदमी वहीं रुक गया...तभी उसके सामने बड़ी सी ईंट आकर गिरी...आदमी हैरान-परेशान..थोड़ी देर रुकने के बाद वो सड़क क्रॉस करने के लिए आगे बढ़ा तो फिर वही आवाज आई...ठहरो...जहां हो वहीं खड़े रहो...वरना तेज़ रफ्तार कार तुम्हे यहीं कुचल देगी...आदमी वहीं जड़ हो गया...तभी वाकई एक  तेज़ रफ्तार कार उसे छूते-छूते ज़ूम से आगे निकल गई...आदमी ने आवाज़ देने वाले से पूछा...आखिर तुम हो कौन...आवाज़ आई...मैं तुम्हारा रखवाला फरिश्ता हूं...इस पर वो आदमी थोड़ी देर सोचने के बाद तमतमाते हुए  बोला....फिर उस वक्त कहां सोए पड़े थे, जब मेरी शादी हो रही थी....


(निर्मलतम हास्य)

28 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया !! सच मे मर्द का दर्द ना जाने कोय।

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  2. ye darad bhara afsaana sunane ke liye ...
    aapka bahut bahut aabhaar...
    sachmuch dard naak tha....
    haan nahi to...!!

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  3. अरे मुसीबत में तो फरिश्ते भी भाग जाते हैं। वो भी बेचारा मर्द ही है आखिर। फरिश्तानी नहीं.................

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  4. इसीलिए अमिताभ बच्चन कहते है

    "मर्द को दर्द नहीं होता"

    जय हिन्द

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  5. हा हा हा ! निर्मल आनंद आ गया ।
    अब एक सवाल --आदमी की प्रथम अंतिम यात्रा कब होती है ?

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  6. वाह दर्द का आहिस्ता से आना और चुपके से अपनी जडें जमाना बहुत बढिया ।

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  7. @डॉक्टर दराल सर,
    पहली अंतिम यात्रा तो पता नहीं लेकिन मक्खन की शादी पर डोली के वक्त बैंडवालों ने गलती से ये गाना बजा दिया था-
    दिल में छुपा कर प्यार का अरमान ले चले,
    हम आज अपनी...... का सामान ले चले...

    जय हिंद...

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  8. पिंजरे के पंछी रेऽऽ तेरा दरद ना जाने कोय ....

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  9. इस निरीह और बेबस इंसान का दर्द हम तो जानते है भाई हा हा हा हा।

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  10. चलो कोई तो है जो अपना दर्द समझता है ............धन्यवाद खुशदीप भाई !

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  11. हा हा हा हा हा हा ........भैया....मज़ा आ गया.........

    जय हिंद...

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  12. इन दर्दनाक हादसों के कारण हमें आपसे पूरी सहानुभूति है ...
    रोचक ..!

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  13. बहुत सुंदर, लेकिन इस फ़रिश्ते को पकड के पीटा क्यो नही जी...

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  14. हा हा हा !!! एकदम मस्त. क्या दर्दनाक तरीके से दर्द को उकेरा है.

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  15. भाई पूरा ही सच उगल दिया आज तो.:)

    रामराम

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  16. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  17. समझाए जाईये ...देखें आपकी इस मुहिम से कित्ते कंवारे मर्दों का भला हो पाता है ...........बांकी हमारे जैसे शादीशुदा लोगों के लिए तो ये गीता के ज्ञान की तरह है .......गुन रहे हैं

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  18. कल किसी गीता पर हाथ रख दिया था क्या आपने?
    जो आज सच पर सच लिखे जा रहे हो!

    :-)

    बी एस पाबला

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  19. बात तो सही ही लग रही है आपकी...

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  20. एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

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  21. रामलाल - यार! तुमने ये कान में बाली पहनना कब से शुरू किया?
    श्‍याम लाल - जब से मेरी पत्नी मायके से वापिस आई है।
    रमन- तो क्या! वो मायके से तुम्हारे लिए बाली लेकर आई है?
    श्‍याम लाल - नहीं, ये बाली उसने मेरे बिस्तर से बरामद की है।

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