शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

अमेरिका से लौट भारतीय क्या क्या करता है...खुशदीप

बाइस खास बातें जो कोई भारतीय अमेरिका से लौटने के बाद करता है...यहां मैं उलटे क्रम से लिखूंगा...यानि बाइसवीं सबसे पहले और पहली सबसे बाद में...



22.
NO (नहीं) के लिए NOPE और YES (हां) के लिए YOPE कहना शुरू कर देता है...


21.
सड़क किनारे होटल में भी पेमेंट क्रेडिट कार्ड के ज़रिए करना चाहता है...


20.
पीने के लिए हमेशा मिनरल वाटर की बोतल साथ रखता है और हर वक्त सेहत का ध्यान रखने की बातें करता है...


19.
डिओ इस तरह शरीर पर स्प्रे करता है कि नहाने की ज़रूरत ही न रह जाए...


18.
छींक या हल्की खांसी आने पर भी 'EXCUSE ME' कहना नहीं भूलता...


17.
हाय को हे, दही को योगहर्ट, टैक्सी को कैब, चॉकलेट को कैंडी, बिस्किट को कुकी, हाईवे को फ्री-वे और ज़ीरो को ओह कहना शुरू कर देता है...जैसे 704 को सेवन ओह फोर...


16.
घर से बाहर निकलते ही हर बार वायु प्रदूषण ज़्यादा होने का दुखड़ा ज़रूर गाता है...


15.
दूरी किलोमीटर की जगह माइल्स और गिनती लाख की जगह मिलियन में करना शुरू कर देता है...


14.
सभी चीज़ों की कीमत डॉलर में जानने की कोशिश करता है...


13.
दूध के पैकेट पर ये लिखा ढ़ूंढने की कोशिश करता है कि उसमें कितने फीसदी वसा (फैट) है...


12.
Z (Zed) को हमेशा Zee कहता है...जब दूसरा नहीं समझता तो भी ज़ेड नहीं कहता बल्कि XY Zee गिन कर समझाता है...


11.
तारीख लिखते वक्त पहले महीना, फिर तारीख और आखिर में साल लिखता है...जैसे कि जुलाई 30, 2010 (07/30/2010)...अगर 30 जुलाई 2010 (30/07/2010) लिखा देखे तो कहना नहीं भूलता...ओह, ब्रिटिश स्टाइल...


10.
भारतीय मानक समय (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) और भारतीय सड़कों की दशा का ज़रूर मखौल उड़ाता है...


9.
लौटने के दो महीने बाद भी जेट लैग की शिकायत करता है...".


8.
ज़्यादा तीखा और तला खाने से बचता है...


7.
नार्मल कोक या पेप्पी की जगह डॉयट कोक या डॉयट पेप्सी पीना चाहता है...


6..
भारत में किसी भी चीज़ की ऐसे शिकायत करता है जैसे कि उसे पहली बार ये अनुभव हुआ हो...


5.
शेड्यूल को स्केजूल और मोड्यूल को मोजूल कहना शुरू कर देता है...


4.
होटल और ढाबे के खाने को शक की नज़र से देखता है...






अब तीन सबसे अहम बात...


3.
लगेज बैग से एयरलाइंस के स्टिकर्स भारत पहुंचने के चार महीने बाद तक नहीं उतारता...


2.
भारत में शार्ट विज़िट के लिए भी केबिन लगेज बैग ले जाता है और सड़क पर ही उन्हें रोल करने की कोशिश करता है...


1.
कोई भी बातचीत शुरू करने से पहले, 'IN US' या 'WHEN I WAS IN US' का इस्तेमाल करना नहीं भूलता....


(ई-मेल से अनुवाद)

36 टिप्‍पणियां:

  1. उनका यह अहं भाव, हमारे अहोभाव का ही परिणाम होता है।

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  2. हा हा!! बड़ा सूक्ष्म आबजर्वेशन है भई... :)

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  3. अरे शुक्र है मै अमेरिका मै नही रहता, बाकी आप तो मेरे से मिले है, इन मै से एक भी गुण इस नालयक मै नही..... लेकिन बहुत सुंदर लिखा, कुछ बाते रह गई है, जेसे अपने मकान की शान, गाडियो की शान...

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  4. बहुत ही बढ़िया कटाक्ष उन लोगों पर जो अपनी औकात भूल हवा में उड़ना शुरू कर देते हैं

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  5. एक बात तो आपने छोड़ ही दी इनका खुदा माँ बाप सब डॉलर से ही बनता है और डॉलर से ही बिगरता है ,दुनिया को बर्बाद करने में अंग्रेजों के बाद अमेरिकियों का नंबर दूसरा है इसलिए वहां से आये लोगों में बर्बादी या बर्बाद करने के लक्षण दिखना स्वाभाविक है |

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  7. @राज भाटिया जी,
    आप तो हम भारत में रहने वालों से भी ज़्यादा भारतीय हैं...आप वैसे भी जर्मनी में रहते हैं...मैं उन भारतीयों की बात कर रहा हूं जो थोड़े अरसे के लिए ही अमेरिका जाते हैं और लौटने के बाद वहीं के हैंगओवर में रहते हैं...दिन-रात वहीं का जाप जपते रहते हैं...जैसे अनिल कपूर का स्लमडॉग्स मिलियनेयर्स में छोटा सा रोल था...लेकिन ऑस्कर अवार्ड समारोह में अनिल कपूर ऐसे चहक रहे थे कि सारी फिल्म ही उनके कंधे पर टिकी हो...अंग्रेज़ी इस तरह के अमेरिकन स्टाइल में बोल रहे थे कि अमेरिकी भी चकरा जाएं...बमन ईरानी ने एक प्रोग्राम में अनिल कपूर के स्टाइल में अंग्रेज़ी बोलकर जबरदस्त खिल्ली भी उड़ाई थी...

    जय हिंद...

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  8. इनमे आधी बातें ऐसी हैं , जो एक बार होकर आने वाला भी कहने या करने लगता है ।
    भाई फ़ौरन रिटरन्ड जो हो जाता है ।
    वैसे वो भी बेचारा क्या करे , चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात वाला हाल जो होता है ।

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  9. वाहे गुरु का शुक्र है कि खुशदीपे ने यूरोप से लौटने वालों के बारे में नहीं लिखा .....बाप रे बाप ...उफ़ ...सब कुछ सुधार लिया ...और तो और टैग भी फाड़ कर फेक दिए.... पेरिस शो के टिकट बगैरह अभी नाली में फेंक के आया हूँ !
    भगवान् बचाए इन तिरछी नज़रों से...
    ;-)

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  10. भाई खुशदीप जी जिसने भी यह मेल लिखी है खूब लिखी है। लेकिन आपको एक बात बता दें कि हम भी अभी दो महिने रहकर आए हैं, इनमें से एक भी बुरी आदत नहीं पड़ी है। हाँ बस अपने देश की खुली हवा में जोर से साँस जरूर ली थी और विवेकानन्‍द की तरह अपनी धरती पर लौट-पोट करने का मन भी जरूर हुआ था।

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  11. @अजित गुप्ता जी
    अजित जी ये पोस्ट आप और निर्मला कपिला जी जैसी खालिस भारतीयों के लिए नहीं है...आप और निर्मला जी में तो भारतीयता की वो शक्ति है कि आप थोड़ा लंबे अरसे तक अमेरिका में रहें तो वहां के लोग ही भारत-भारत करने लगेंगे...ये पोस्ट उन लोगों के लिए है जिन्हें भारत में बस खामियां ही खामियां और अमेरिका गुणों की खान नज़र आता है...

    जय हिंद...

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  12. अपने देश में तो हर कोई "घर का जोगी" होता है पर विदेश से लौट आने वाले खुद को "आन गाँव के सिद्ध" समझने लगते हैं, पुरानी कहावत है नाः

    घर के जोगी जोगड़ा आन गाँव के सिद्ध!

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  13. @चिट्ठा जगत
    तेरह टिप्पणियां आने के बाद भी मेरी पोस्ट धड़ाधड़ टिप्पणियों वाले कॉलम में मैग्नीफाइंग ग्लास लेकर भी ढूंढ़ने से नहीं मिल रही...जबकि धड़ाधड़ वाहवाही और धड़ाधड़ पढ़े गए वाले कॉलमों में बदस्तूर दिखाई दे रही है...कोई बता सकता है इसंकी वजह...

    जय हिंद...

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  14. ओ के टाटा बाय बाय ऎसे अमरीका पलट इडियट्स सारी इण्डियन्स से

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  15. शुक्रिया चिट्ठा जगत,
    अब पोस्ट धड़ाधड़ टिप्पणियों वाले कॉलम में भी दिखने लगी है...

    जय हिंद...

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  16. बहुत अच्छी प्रस्तुति...

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  17. बहुत बढ़िया आबजर्वेशन है ! बेहद उम्दा पोस्ट !
    जय हिंद !

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  18. १४,१२, ११, ५ और १ को छोड़ दें तो ये सब यू.के. रिटर्न भी करते हैं.. :) खैर तुलना जायज़ है.. जब हिन्दोस्तान से यहाँ आते हैं तब भी कई अच्छी बुरी बातों कि तुलना की जाती है.. और अपने देश कि बुराई तो वहाँ रहने वाले लोग भी करते हैं.. पर बस बुराई ही कर पाते हैं सब.. सुधार नहीं..

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  19. aise american ko bharat me aane dena hi nahi chahiye agar bye chance aa bhi jaye to air port se agli flight me vapas bhaje do.

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  20. सूक्ष्म और काफी हद तक सही आंकलन है.

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  21. 4,8,10,13 तो हममें भी हैं,जबकि अपन कभी अमरीका नहीं गए

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  22. .
    यह किसी ई-मेल में पढ़ा हुआ है..
    मेरे याहू आई.डी. पर भी है
    फिर भी अच्छा है ।

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  23. hamne to ek baar Rajdhani me safar kiya tha..........teen mahine tak jeb me rakh kar ghumte rahi................he he he :D

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  24. yahi to fark hai hindustan aur uske deshvasiyon ki soch mein............kash itna insaan samajhta to sach mein mera desh mahaan hota.

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  25. सही कहा है आप ने

    शेखर कुमावत

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  26. फॉरेन-रिटर्न (खासकर अमेरिका रिटर्न) वालों के बारे में बहुत सही खाका खिंचा है आपने. मजा आ गया पढ़कर...

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  27. बहुत ही रोचक...मजा आ गया पढ़कर....वैसे मिनरल वाटर पीना तो बेचारों की मजबूरी हो जाती है...

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  28. इन में से कई चीज़ें आप यहाँ भारत में रहकर भी अनुभव कर सकते हैं. रेलवे स्टेशन पर मिनरल वाटर की बोतल लिए लाखों भारतीय मिल जायेंगे. छींक या खांसी आने पर 'excuse me' कहना सभ्यता की निशानी है. वायु प्रदुषण और ख़राब सड़कों को सभी भारतीय कोसते हैं... वगैरह.. वगैरह...

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  29. ....और तापमान फ़ारेनहाईट मे मापता है

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  30. लगेज बैग से एयरलाइंस के स्टिकर्स भारत पहुंचने के चार महीने बाद तक नहीं उतारता...
    ये तो मैंने भी देखा है अक्सर नई दिल्ली स्टेशन पर, जो लोग प्लेन से निकलकर स्टेशन आये होते हैं वो स्टीकर नहीं हटाते :-)

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  31. मज़ेदार

    कुछ गुण तो आजकल के नव-धनाढ्यों में भी पाए जा सकते हैं

    बी एस पाबला

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  32. आजकल की हाई प्रोफाइल और ज्यादा पढ़ी लिखी महिलाएं भी कुछ ऐसा ही वर्ताव करती है, खासकर जब वो गरीबों को देखती हैं तो नाक और भों सिकोड़ने लगती हैं.

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  33. ऐसा ही कुछ हमारे यहाँ का ग्रामीण शहर से लौटकर आने के बाद करता है ।

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