गुरुवार, 29 जुलाई 2010

स्वर्ग पसंद हैं या नर्क...खुशदीप

आज एक दोस्त ने बेहद मज़ेदार ई-मेल भेजा है...अनुवाद करके आपके साथ शेयर कर रहा हूं...उम्मीद करता हूं आपको भी उतना ही आनंद आएगा जितना इसे पढ़ कर मुझे आया...





एक मल्टीनेशनल कंपनी (एमएनसी) ने भर्ती की निगरानी करने के लिए बड़ी खूबसूरत रिक्रूटमेंट मैनेजर (इलीट भाषा में कहें तो ह्यूमन रिसोर्सेज़ मैनेजर) रखी हुई थी...एक दिन वो मैनेजर बाज़ार में पैदल ही जा रही थी कि किसी तेज़ रफ्तार कार ने टक्कर मार कर उसकी जीवनलीला खत्म कर दी...

वो स्वर्ग पहुंची तो प्रभारी देवता खुद उससे मिलने के लिए आए...साथ ही बोले...हमारा प्रशासन आपके यहां आने से दुविधा में हैं...दरअसल हमारे पास कभी कोई ह्यूमन रिसोर्सेज़ मैनेजर पहले नहीं आया...इसलिए हम समझ नहीं पा रहे हैं कि आपके साथ क्या किया जाए...

मैनेजर ने कहा...कोई समस्या नहीं, मुझे बस आने दीजिए...फिर भविष्य में आपको ऐसी दिक्कत कभी नहीं आएगी..

प्रभारी देवता बोला...काश मैं ऐसा कर सकता...लेकिन हमें चीफ देवता की तरफ से आदेश हैं, हमें उनका पालन करना ही होगा...आपके लिए हमें निर्देश हैं कि एक दिन आप नर्क में रहें और एक दिन स्वर्ग में...फिर आप खुद ही फैसला करें कि आपको हमेशा के लिए कहां रहना है...

मैनेजर...ऐसी बात हैं तो मैंने फैसला कर लिया है कि मैं स्वर्ग में ही रहूंगी...

प्रभारी देवता...नहीं मैडम रूल इज़ रूल...आपको उसके मुताबिक चलना होगा...

ये कह कर मैनेजर को एक लिफ्ट में चढ़ा दिया गया...लिफ्ट जैसे पाताल में जा रही हो, बहुत नीचे जाने के बाद रूकी...लिफ्ट का डोर खुला तो बाहर बहुत खूबसूरत सा गोल्फ कोर्स था...पास ही एक कंट्री क्लब था...जिसके गेट पर मैनेजर के बहुत सारे दोस्त खड़े थे...वो सब इवनिंग ड्रैस में बड़ी तफ़री के मूड में थे...सब दौड़ कर आ कर मैनेजर से बड़ी गर्मजोशी से मिले...पहले गोल्फ खेला गया...फिर कंट्री क्लब में शानदार डाइन एंड ड्रिंक्स हुआ...वो नर्क के प्रभारी मिस्टर शैतान से भी मिली...बेहतरीन सूट मे बात बात में हंसी मज़ाक करने वाला शख्स निकला मिस्टर शैतान...बड़ी अच्छी तरह टाइम पास हो रहा था कि मैनेजर का लिफ्ट में वापस जाने का वक्त हो गया...सबने खुशी खुशी हाथ मिलाकर मैनेजर को लिफ्ट तक छोड़ा...

अब लिफ्ट स्वर्ग में आ गई...प्रभारी देवता ने मैनेजर को पुष्पक विमान में बिठा कर स्वर्ग की सैर के लिए भेज दिया...बादलों के ऊपर सैर करते हुए बड़ा अलौकिक अनुभव था...माहौल में धीमा किंतु मुग्ध कर देने वाला मंत्रोच्चार हो रहा था...इन्हीं मनोरम दृश्यों के बीच मैनेजर का स्वर्ग में भी एक दिन पूरा हो गया...अब प्रभारी देवता ने मैनेजर से पूछा...आपने स्वर्ग-नर्क दोनों का अनुभव ले लिया है...अब बताएं, आप कहां रहना चाहेंगी....

मैनेजर ने ठंडी सांस ली और फिर कहा... मैंने नहीं सोचा था कि मुझे ये कहना पड़ेगा...स्वर्ग वाकई बहुत सुंदर है, लेकिन मुझे लगता है कि मेरे लिए नर्क ही ज़्यादा सूट करेगा...

प्रभारी देवता ने ये सुनकर मैनेजर को फिर लिफ्ट पर चढ़ा दिया...एक बार लिफ्ट फिर तेज़ी से नर्क की ओर बढ़ चली...लिफ्ट का दरवाज़ा खुला...लेकिन ये क्या...जबरदस्त बदबू ने मैनेजर का स्वागत किया...जैसे किसी गटर में उतार दिया गया हो...चारों तरफ़ गंदगी और कूड़े का ढेर...कल जो दोस्त इवनिंग ड्रैस में महक रहे थे, आज फटे पुराने लत्तों में बोरे लेकर कूड़ा बीनने का काम कर रहे थे...

तभी मिस्टर शैतान मवाली जैसे वेश में मैनेजर के पास आया...मैनेजर को हैरान-परेशान देखकर मिस्टर शैतान बोला...क्या परेशानी है...

मैनेजर बड़ी हिम्मत जुटा कर बोली...कल तो यहां गोल्फ कोर्स, कंट्री क्लब, खूबसूरत लोग, हंसी मज़ाक का खुशनुमा माहौल दिख रहा था...आज अचानक ये सब कैसे उलट गया...

ये सुनकर मिस्टर शैतान के चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ गई...बोला...

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...

...

...

कल हम तुम्हे रिक्रूट (भर्ती) कर रहे थे...आज तुम हमारी कर्मचारी हो...चलो वक्त मत जाया करो...फौरन काम पर लग जाओ...



22 टिप्‍पणियां:

  1. ha ha ha ha....
    use bhi nahi samajh aaya..khud bhi to yahi karti rahi thi...
    haan nahi to.....!!

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  2. सारगर्भित हास्य कथानक है,इस कथानक को न केवल रिक्रूटमेंट मैनेजर के कार्याक्लापों पर व्यंग्य के रूप में,बल्कि कर्मो के अनुसार प्रतिफ़ल के रूप में भी देखा जा सकता है।
    इसीलिये मैने कहा सारगर्भित हास्य कथानक !!

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  3. हा हा हा हा हा हा......भैया... मज़ा गया इस पोस्ट में... जैसे को तैसा....

    जय हिंद...

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  4. हीहीहीहीहीहीह मिस्टर शैतान नर्क की मार्केटिंग कर रहे थे क्या पहले।

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  5. hahaबहुत बढ़िया ..ये तो हर कंपनी का हाल है इसलिए जहाँ आप काम करते हैं वो कुछ दिन बाद नर्क लगने लगता है :)

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  6. अरे भैया कभी टाइम मिले तो ओशो का बुद्ध वाला स्वर्ग-नरक का किस्सा सुनना.. आत्मा हरी हो जाती है सुनके.. :P

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  7. हा हा!! एच आर मैनेजर होकर भी इत्ता सा नहीं मालूम था उसे.

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  8. मजेदार :)

    ना सुख चाहु सुरग रो नरक आवसी दाय।
    म्हारी माटी गांव री गळियाँ जै रळ जाय॥
    हमारें गांव की गलियों की मिट्टी यदि नरक में मिल जाये तो हमें स्वर्ग का सुख नहीं चाहिए|
    भागीरथ सिंह "भाग्य"

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  9. हा..हा..हा..मैनेजर को सही फल मिला.
    जितना सुंदर हास्य उतना करारा व्यंग्य.

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  10. आज तो कमाल ही कर दिया है खुशदीप भाई.............एकदम मस्त और HR पर एकदम सटीक व्यंग से हमें भी रु-बरु करवाने के लिए धन्यवाद.....

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  11. हा हा हा

    स्वर्गलो्क में रहते रहते ऊब गया है मन
    इसलिए अब नरकलोक की बारी है श्रीमन

    बहुत बढिया

    जय हिंद

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  12. इसे कहते हैं सब्‍ज बाग दिखाना। हा हा हा हा।

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  13. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  14. झूठे दिखावा और सुख को स्वर्ग समझने वालों का अंजाम ऐसा ही होता है ,सच्चाई,ईमानदारी और मेहनत को जो सच्चा सुख समझता है वही परम सुख यानि स्वर्ग को पाता है ,बहुत ही अच्छी प्रेरक प्रस्तुती ,मेरी दुआ है की भगवान आप जैसों को इतना साधन और संसाधन दे जिससे आप जैसे लोग सबकुछ छोड़कर देश और समाज सुधार की दिशा में जमीनी स्तर पर काम कर सकें ..आप जैसे सोच वालों की बहुत जरूरत है जमीनी स्तर पे ..

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  15. हा हा हा हा हा …………नौकरी ज्वाइन करने के पहले और ज्वाइन करने के बाद्…………॥ खूबसूरत !

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  16. हमारे देश में 10 लाख मंदिर हैं जो अरबों-खरबों के सोने चांदी और अनेक आभूषणों से भरे पड़े हैं। यदि विश्व में सोने के तख्त पर कोई व्यक्ति बैठता है तो वह एक व्यक्ति भारत का गुरू शंकराचार्य ही है। कुछ समय पूर्व अभी एक शंकराचार्य की मृत्यु हुई थी तो उसका शव भी सोने के तख्त पर लिटाया गया था। भारत में 5 प्रतिशत उच्च जातीय हिन्दू जमींदार हैं जिनमें एक-एक के पास 10-10 हजार एकड़ भूमि के फ़ार्म हैं। इन जमींदारों के पास भी अरबों-खरबों की सम्पत्ति है।

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  17. मतलब रियलिटी शो अगले दिन था ,पहले दिन सिर्फ शो

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