रविवार, 25 जुलाई 2010

ये सिर्फ भारत में ही मिलेगा...खुशदीप

जहां पांव में पायल और माथे पे बिंदिया...इट्स हैप्पन्ड ओनली इन इंडिया...वाकई कुछ चीज़ें सिर्फ भारत में ही हो सकती हैं...जो यहां हो सकता है, वो और कहीं नहीं हो सकता...विश्वास नहीं होता तो देख लीजिए अपनी आंखों से...


घोड़े बेच कर सोना...






कूड़ा तो यहीं डलेगा...







ये आराम पाएगा कहां...








आनंदम् मैक्सिमम्...








सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं...


भारत की बात की है तो 24 जुलाई की वजह से हरिकिशन गिरी गोस्वामी याद आ गए...आप कहेंगे ये कौन से पंडित जी है...ये वही पंडित जी है जिनके लिए एक फिल्म में गाना गाया गया था...पंडित जी मेरे मरने के बाद बस इतना कष्ट उठा लेना, मेरे मुंह में गंगाजल की जगह थोड़ी सी मदिरा टपका देना...मैं बात कर रहा हूं भारत कुमार की...यानि एक्टर मनोज कुमार की...24 जुलाई को वो 73 साल के हो गए...फिल्मों में देशभक्ति का ज़िक्र जब भी आएगा, मनोज कुमार का नाम खुद-ब-खुद ज़ुबां पर आ जाएगा...मनोज कुमार अपनी फिल्मों में डॉयलाग्स, गीत-संगीत से लोगों में ऐसा जोश भर देते थे कि हर कोई नाच उठता था...पहले पूरब और पश्चिम का ये गीत देखिए और फिर खुद ही महसूस कीजिए देशभक्ति का जज़्बा...

दुल्हन चली, ओ पहन चली,  तीन रंग की चोली...


मनोज कुमार

17 टिप्‍पणियां:

  1. हे राम जी देख लो आप के भारत मै इतने दुखो के बावजुद भी हम मस्त है, अब परिक्षा लेनी बन्द कर दो, वेसे हम रहेगे हर हाल मै मस्त

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  2. यही हिंदुस्तान की ताकत है। पर यही भाग्य के भरोसे बैठे रहने की आदत। जिसे हमें बदलना होगा, कम से कम कर्म तो करना होगा। कितनी भी परेशानी हो, हम मानते हैं कि ये चला जाएगा। पर उसे दूर करने का प्रयत्न ही तो हमने छोड़ दिया है। मनोज कुमार भले ही कमर्शियल फिल्में बनाते रहे, पर देशभक्तित का जो जज्बा उनकी फिल्म में होता था, वो कम ही फिल्मों में देखने को मिलता है।
    क्या याद करें
    मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती
    रंग दे मां रंग दे बंसती चोला
    है रीत जहां की प्रीत सदा, मैं गीत वहीं के गाता हूं
    जब जीरो दिया भारत ने
    क्या याद करेंगे औऱ क्या नहीं.....लिस्ट इतनी लंबी है कि पूछें नहीं...

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  3. "वक्त"(नई) फ़िल्म से एक संवाद यादआ गया -- " ये तो कुछ भी नही है --------हम/हमारे यहां तो---------" हा हा हा ...
    और-------- "भारत की बात की है तो"----------ऐसे गीत अगस्त /जनवरी आते -आते याद आना कोई नई बात नहीं है ....

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  4. मेरा भारत महान!!


    मनोक कुमार को अच्छा याद किया दिवस विशेष पर.

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  6. जी हाँ , इतने सारे जुगाड़ एक साथ भारत में ही पाए जा सकते हैं ।

    मनोज कुमार के जन्मदिन के बारे में पता चला,अच्छा लगा ।

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  7. गज़ब.... भैया.... कहा से फ़ोटोज़ लाते हैं आप? सच में मेरा भारत महान है.... वो मोटर साइकल वाली फोटो तो देख कर .... कॉलेज के दिन आ गए.... कि एक बाइक पर हम छः लोग चलते थे.... मज़ा आ गया...

    जय हिंद...

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  8. सभी चित्रों में मनुष्य की जिजिविषा के दर्शन हो रहे हैं। सुंदर पोस्ट!

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  9. आपकी पोस्टों पर पठन सामग्री तो अच्छी होती ही है चित्र भी हमेशा लाजवाब होते हैं. जनाब आप बहुत मेहनत करते हैं.

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  10. वाह ...वाह......क्या बात है .......!!

    हम तो यहाँ गुवाहाटी में आये दिन ऐसे नजारे देखते हैं ......क्योंकि इस बार यहाँ मार्च से लगातार बारिश हो रही है .....और हर दुसरे दिन शहर पानी में होता है .....गनीमत है की अभी तक घर के अन्दर पानी नहीं आया ......!!

    मनोज कुमार जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं ......!!

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  11. सिर्फ़ एक बात कहनी है ..........

    जय हिंद !!

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