रविवार, 11 जुलाई 2010

गेस लगाइए, मक्खन को इनाम में क्या मिला...खुशदीप

मक्खन का गैराज ठप हो गया...खाने के भी वांदे हो गए...मरता क्या न करता...किसी ने सलाह दी शहर के सेठ उद्योगपति से मिलो...शायद कोई काम बन जाए...मक्खन पहुंच गया उद्योगपति के घर...अपना दुखड़ा सुनाया...

सेठ ने मक्खन की बात सुनकर कहा...अभी और तो कोई काम नहीं है, हां अगर तुम चाहो तो एक काम कर सकते हो...

मक्खन ने पूछा...वो क्या...

सेठ...हमारा एक गार्ड कल ही छुट्टी लेकर गांव गया है...तुम चाहो तो उसकी जगह ड्यूटी कर सकते हो...वो आ जाएगा तो तुम्हें किसी और जगह खपा देंगे...

चलो मक्खन को कुछ आसरा तो हुआ...

एक दिन सुबह-सुबह सेठ कोठी से गाड़ी पर निकल रहे थे...सेठ को बहुत ज़रूरी बिज़नेस डील के लिए फ्लाइट पकड़नी थी....मक्खन ने ये नज़ारा देखा तो भाग कर सेठ के पास आया और कार के बिल्कुल आगे आकर अड़ कर बोला...सेठ जी क्या आप फ्लाइट पकड़ने जा रहे हैं...

सेठ... हां, बोलो क्या परेशानी है...

मक्खन...सेठ जी आज आप अपना प्रोग्राम कैंसल कर दीजिए...

सेठ...क्यों भई, ऐसी क्या बात है, मेरी बड़ी ज़रूरी मीटिंग है, मैं फ्लाइट क्यों छोड़ दूं...

मक्खन...सेठ जी, दरअसल मैंने सपना देखा है, उसमें आपका प्लेन क्रैश होते देखा, इसलिए आप से विनती कर रहा हूं...

सेठ ने कुछ देर सोचा और गाड़ी से उतर कर कोठी में वापस चला गया...

दोपहर तक खबर आ गई कि जिस प्लेन पर सेठ को जाना था, वो वाकई क्रैश हो गया...बोर्ड पर जितने भी लोग थे सभी भगवान को प्यारे हो गए...सेठ ने अपनी जान बाल-बाल बचने के लिए भगवान का शुक्रिया अदा किया...



मक्खन रात को ड्यूटी पर आया तो उसे साथी गॉर्ड ने कहा कि तुम्हे सेठ जी याद कर रहे थे...और कह रहे थे कि सुबह ड्यूटी खत्म होने के बाद घर जाने से पहले उनसे मिलूं...

मक्खन खुश था कि सेठ जी ज़रूर उसे तोहफा देंगे...मक्खन सुबह जब सेठ के पास गया तो वो गार्डन में झूले पर चाय पी रहा था...मक्खन ने सेठ का अभिवादन किया...सेठ ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया...साथ ही एक बड़ा सा लिफ़ाफ़ा भी निकाल कर मक्खन को दिया...साथ ही ताकीद किया कि इसे घर पहुंचने के बाद ही खोलना...आखिर क्या था उस लिफ़ाफ़े में आप अंदाज़ लगा कर टिप्पणी में बताइए...कल सही जवाब बताऊंगा...


(नोट- सिर्फ इस पोस्ट के लिए मॉडरेशन भी चालू रहेगा...)

10 टिप्‍पणियां:

  1. लिफाफे में उसकी नौकरी समाप्‍त किए जाने के आदेश होंगे .. वह ड्यूटी के समय में सो जो रहा था !!

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  2. नौकरी निकाला मिला होगा और क्या...ड्यूटी पर सो कर सपना देखने को रखा था कि चौकीदारी करने को. :)

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  3. अजी होना क्या है, इस मक्खन के बच्चे को डुयटी पर सोने की सजा मिली यानि नोकरी से हाथ धोने पडे, बाकी उस बेचारे का हिसाब किताब होगा.. यानि इनाम के संग नोटिस नोकरी से निकाले जाने का

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  4. सेठजी ने मक्खन को सधन्यवाद नौकरी से निकाल दिया होगा .............क्यों कि उसका काम गार्ड का था और वह ड्यूटी के वक़्त सो गया ! बिना सोये तो वह सपना नहीं देख सकता ना प्लेन के क्रेश होने का !
    जय हिंद !

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  5. मक्खन ड्यूटी के समय सो रहा था इसलिए ईनाम के साथ उसे सेवानिवृति भी मिली होगी ...!

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  6. मक्खन को नकद इनाम दिया गया और रात को ड्यूटी के वक्त सोने के जुर्म में नौकरी से भी निकाल दिया

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  7. मक्खन की ऐसी किस्मत कहाँ कि उसे भारी-भरकम रकम इनाम में मिले या वह किसी नौकरी में टिका रह सके। जरूर लिफाफे में उसे नौकरी से निकाले जाने का हुक्मनामा ही होगा। पर सेठ ने उसे नौकरी से किस बिना पर निकाला यह तर्क तो हम अभी भी सोच रहे हैं। सही तर्क यदि सूझ गया तो फिर से टिप्पणी कर के बता देंगे अन्यथा कल के आपके पोस्ट से तो पता चल ही जाना है।

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