शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

बिना शब्दों की पोस्ट...खुशदीप

                                                                         



प्यार...




मासूमियत...


 
 
 
विदाई...





दोस्ती...




अलौकिक...











19 टिप्‍पणियां:

  1. तभी तो कहते हैं ……………बिना शब्दों के कही गयी बात मे बहुत असर होता है।

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  2. एहसास और गहरे हो जाते हैं
    शब्दों से जब हम परे हो जाते हैं

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  3. चित्र भी बोलते हैं । लास्ट वाला बहुत भावपूर्ण ।

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  4. ......................................................................................................



    कुछ कहने तो छोड़ा कहाँ आपने !!

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  5. बिन बोले सब बोल दिया, अब कुछ कहा न जाय। नित नव पठन दर्शन को मिले बिन टिपियाये रहा न जाय बहुत ही शानदार व जानदार। बधाई!

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  6. कई बार शब्दों आदमी वो कह नही पाता जो कहना चाहता है मगर कुछ बातें वो बिना शब्दों के महसूस कर लेता है और वही सत्य है ,ाद्भुत सत्य। बहुत सुन्दर-- बधाई। आशीर्वाद।

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  7. एहसास और गहरे हो जाते हैं,
    शब्दों से जब हम परे हो जाते हैं..........



    Jai Hind....

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  8. एहसास और गहरे हो जाते हैं,
    शब्दों से जब हम परे हो जाते हैं..........

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  9. चित्रों की भाषा महाकाव्‍य से कम नहीं होती. धन्‍यवाद.

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