बुधवार, 2 जून 2010

एंग्री यंग ब्लॉगर्स, इसे पढ़ो प्लीज़...खुशदीप

क्रोध वो अवस्था होती है जिसमें जीभ दिमाग़ से तेज़ काम करती है...आप अतीत तो नहीं बदल सकते लेकिन आने वाले कल की चिंता में घुलकर आप अपने आज के साथ अन्याय करते हैं...





ऊपर वाला अपना सर्वश्रेष्ठ उसी को देता है जो अपना मुकद्दर ऊपर वाले के हाथ में ही छोड़ देता है...गले लगना सबसे बड़ी नेमत है जो हर एक को माकूल बैठती है...ये किसी भी मौके पर किया जा सकता है...इसकी अदला-बदली आसान होती है..




खिलखिला कर हंसना भगवान की अपनी उजली धूप है...हंसने के लिए वक्त निकालो क्योंकि ये आत्मा का संगीत है...

37 टिप्‍पणियां:

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  2. आज के इस इंसान को ये क्या हो गया???

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  3. कुछ अन्नू मलिक टाइप शायरी...

    समझाने से कोई समझा है आज तक....
    ठोकर खा के ही इंसान संभला है आज तक....

    गुटबाज़ी के खिलाफ़ खुद गुट बना लिया....
    अरे ब्लॉगरों ये क्या किया...ये क्या किया...

    एक बार बस कर के देखो गुस्से पर काबू...
    तुरंत समझ आएगा तुम्हें, झप्पी का जादू.....

    वाह वाह वाह....
    खुशदीप भाईजान हमेशा की तरह उम्दा...संयमित...आपकी शैली के मुताबिक....

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  4. हे हे हे हे हे ...........
    आ आ आ आ आ ....
    खुशदीप जी बच्चा पार्टी लोग पार्टी मना रहा है...मनाने दीजिये ना.....
    एंग्री यंग मैन के कुछ डायलाग याद आ गए....

    * "पार्टनर, अब जब बोल ही दिया है तो देख लेंगे "
    * "तुम्हारा नाम क्या है बसंती ?
    * "पहली बार सुना है ये नाम "
    * "हम भी तो रोज खतरों से खेलते हैं ."
    * "जो कल हुआ वो दुबारा नहीं होगा ."
    * "घड़ी घड़ी में ड्रामा करता है साला ."
    * "औरों को तो इन्होने एक घंटे में सिखा दिया है ."
    * "अंग्रेजों के ज़माने के जेलर और इतनी घबराहट ?"

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  5. 1
    सर हम तो खुद पर हंसते हैं
    2
    दूसरों पर हंसने की पुरानी आदत है
    3
    गले तो हम खुब लगाते हैं पर वो छुरा घोप देते हैं
    4
    और दिल से गले लगाना चाहते हैं पर वो सब मानतीं ही नहीं क्या करें
    5
    हमारी हंसी से बाकी दुनिया दुखी होती क्या करें


    और क्या क्या कहें

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  7. जीवन में आत्मसात करने वाले नियम.

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  8. क्रोध वो अवस्था होती है जिसमें जीभ दिमाग़ से तेज़ काम करती है...आप अतीत तो नहीं बदल सकते लेकिन आने वाले कल की चिंता में घुलकर आप अपने आज के साथ अन्याय करते हैं..

    बहुत बढिया खुशदीप भाई

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  9. ब्लॉग लिखते लिखते ब्लोगर पर लिखने लग गए खुशदीप भाई... बहुत फिसलन है यहाँ...

    जय हो..

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  10. क्रोध पर नियंत्रण स्वभाविक व्यवहार से ही संभव है जो साधना से कम नहीं है।

    आइये क्रोध को शांत करने का उपाय अपनायें !

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  11. उत्तम विचार! बहुत खूब!

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  12. खुशदीप भाई बहुत ही उम्दा प्रस्तुती ,लेकिन मुर्ख को तो समझाया जा सकता है जड़ को नहीं ? हमारा तो रोज ऐसे जड़ों से वास्ता परता है ,जब ऐसे जड़ वक्त का ठोकर खाकर इंसानियत को ढूंढते हैं |

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  13. हे ईश्वर!..इन्हें माफ कर दे...ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं? ...

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  14. गू में गिर कर भी पुलकित रहने वाले को क्या कहोगे ?
    सायास किये गये क्रोध की क्या दवा है ?

    तेरे पोस्ट और मेरी टीप
    दोनों मिल हटायेंगे खीझ ?
    प्रश्नचिन्ह ससुरा यहाँ भी पीछा नहीं छोड़ रहा !

    What is more significant is that all the cooments ( almost 61 ) put there share just 3-4 IPs.
    They are in proccess of motivated autolysis, Let them... We need not preach to hinder them !
    Today,I feel sorry for being sad .

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  15. it's not so simple to control this type of blog - anger but I admire your coolness !

    I read saleem khan's comment yesterday at his blog-post . that's bad . forget that . now I'm repeating mr. R. Taneja's words --- '' हे ईश्वर!..इन्हें माफ कर दे...ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं? ... ''

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  16. प्रेरक और सुन्दर पोस्ट
    आभार

    प्रणाम स्वीकार करें

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  17. होंट घुमा सीटी बजा के बोल भैया आल इज वेल ..

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  18. आज रात पढि़ए ब्‍लोग जगत के महारथी महामानव फुरसतिया सर को समर्पित कविता। दोबारा याद नहीं कराऊंगी। खुद ही आ जाना अगर मौज लेनी हो, अब तक तो वे ही लेते रहेंगे, देखिएगा कि देते हुए कैसे लगते हैं फुरसतिया सर।

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  19. खुशदीप भाई ,
    कथा सार , सब डा. अमर कुमार कह गए हैं ,इसके अलावा कुछ भी नहीं बचा है अब कहने को

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  20. भाई साहब,
    आपने न्यौता दिया था एंग्री यंग ब्लॉगर्स को ये पोस्ट पढने के लिये, इसलिये नहीं पढ़ी थी। फ़िर ’ समझा करो’ वाली सलाह याद आई तो ’बिटवीन द लाईन्स’ पढ़ने आ गये।
    मैनेजमेंट के सिद्धांत हों, या जीवनशैली सुधारने वाली सलाहें, सही मायने में जिन्हें पढ़नी चाहियें वो ही नहीं पढ़ते हैं।
    कल की आपकी पोस्ट पर ह्र्दय परिवर्तित कमेंट भी पढ़ा था, दुख ही होता है।
    ईश्वर से प्रार्थना ही कर सकते हैं, सदबुद्धि दें हमें।

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  21. क्या हुआ भाई , फिर मोडरेशन आ गया ।

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  22. खिलखिला कर हंसना भगवान की अपनी उजली धूप है...हंसने के लिए वक्त निकालो क्योंकि ये आत्मा का संगीत है...

    पूर्णतया सहमत ।

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  23. पिछली पोस्ट पर फिर जाकर समझ आ गया ।

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  24. बहुत सुंदर, जी, पता नही इन नोजवानो को क्या हो रहा है?? यह जानते है यह क्या कर रहे है? इस लिये इन्हे समझाने से कोई लाभ नही

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  25. बहुत बढिया खुशदीप भाई

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

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