कुछ नींद से जागते हैं और दिन रात एक कर देते हैं...
फिर एक दिन कामयाबी खुद उनके कदम चूमती है...
स्लॉग ओवर
देवदास...पिताजी ने कहा, हवेली छोड़ दो,
मां ने कहा, पारो को छोड़ दो,
पारो ने कहा, दारू छोड़ दो,
और एक दिन आएगा जब...
...
...
...
...
पारो के बच्चे कहेंगे, मामू हमें स्कूल छोड़ दो...




बिचारे देवदास !
ReplyDeleteबहुत सही...
ReplyDeleteमामू बेचारा ....
ReplyDeleteबेचारा! मामू बन गया...
ReplyDeleteबिना जूनून के कामयाबी नहीं मिलती.... अकाट्य सत्य....
जय हिंद....
और कोई दिन रात एक करने पर भी मामू बन जाए तब? ज्यादातर के साथ तो यही होता है।
ReplyDeleteजाने वो कैसे लोग थे जिन के प्यार को प्यार मिला .....
ReplyDeleteJai ho.......
ReplyDeletenice
ReplyDeleteकामयाबी का तो सूत्र यही है जी.
ReplyDelete----
और देखदे देखते देवदास दुनिया छोड़ देंगे. :)
Nice.
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना!
बधाई!
हम मेहनत वालों ने जब भी, मिलकर कदम बढ़ाया
ReplyDeleteसागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया
फ़ौलादी हैं सीने अपने, फ़ौलादी हैं बाँहें
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें
मुझे बहुत ज्यादा हमदर्दी है...
देवदास से....:)
छोटी सी मगर बहुत अच्छी पोस्ट
ReplyDeleteहाँ यही होगा आज कल के देवदास लोगों का वो जीना तो छोड़ नही सकते तो यही करेंगे...सक्सेस फ़ॉर्मूला बढ़िया...धन्यवाद खुशदीप भैया..
ReplyDeletesadhi baat :)
ReplyDeleteपारो के बच्चे कहेंगे,
ReplyDeleteमामू हमें स्कूल छोड़ दो...
हा हा हा
स्लाग ओवर धांसु है।
देवदास, ये क्या हुआ?
ReplyDeleteकामयाबी का सटीक सुत्र दिया. इससे बेहतर कुछ हो ही नही सकता.
ReplyDeleteस्लाग ओवर की गलती सुधारी जाये. अभी अभी मेरे पास मक्खन का फ़ोन आया था, कह रहा था कि स्लाग ओवर मे उसके नाम की जगह देवदास का नाम लिख दिया और वो आपसे बहुत नाराज है. अत: नेक सलाह यही है कि गलती को दुरुस्त कर लिया जाये. आगे आपकी मर्जी.
रामराम.
@Devdaas-
ReplyDeleteSab chhod do...blogging shuru karo..
आजकल कामयाबी मेहनत से नहीं ...छल कपट से मिलती है ...इसलिए हम तो नाकामयाब ही भले ...
ReplyDeleteदेवदास को दिव्यजी का कहना मान लेना चाहिए ....
सटीक फार्मूला
ReplyDeleteक्या मक्खन का दूसरा नाम ही देवदास है जी?
प्रणाम
बेचारा देवदास्……………हा हा हा।
ReplyDeleteकिसी भी लक्ष्य की प्राप्ति बिना जुनून के नही होती।
मामू.....हा हा हा ...
ReplyDeleteपर कामयाबी के लिए जूनून होना ज़रूरी है..इसके बिना हर काम आज - कल पर टाल दिया जाता है
हमने कहा -ब्लोगिंग कम कर दो
ReplyDeleteमक्खन ने कहा --लाइने कम कर दो।
आपने कहा --मक्खन ही सही है। ;)
देवदास ने मक्खण को पीछे छोड़ दिया।
ReplyDelete
ReplyDeleteदारू तो पहले ठीक से छोड़ लैण दे, यार !
k ....k ...कामयाबी का शार्टकट ....................! ! ! .नहीं ये श्योर shot निशाने पर हैं ...............मेंवे गुनिया लगा कर देख लिया हैं ...................और स्लोग ओवर ................पारो ने यार्कर फेंक दी .................खुशदीप भाई ....................
ReplyDeleteकामयाबी कि कुंजी तो बता ही दी..
ReplyDeleteऔर स्लोग ओवर जबरदस्त था
galti sudhaar......
ReplyDeletemujhe bahut hamdardi hai MAKKHAN se itni buri halat hui hai mujhe pata hi nahi tha....
bechara makkhan...!!!
tabhi to bewda sa kagta hai fotu mein bhi....
:)
:)
devdaas ............. paaro ........mamu .......badiya hai
ReplyDelete