सोमवार, 5 अप्रैल 2010

एक 'बड़ी' सी लव स्टोरी...खुशदीप

दो बुज़ुर्ग, एक विधुर और एक विधवा, एक दूसरे को बरसों से अच्छी तरह जानते थे...लेकिन दोनों शहर के अलग अलग ओल्ड एज होम में रहते थे...



एक बार किसी एनजीओ ने वृद्धों के सम्मान के लिए लंच का आयोजन किया...शहर के सारे ओल्ड एज होम्स में रहने वाले वृद्धों को भी आमंत्रित किया गया...इनमें वो विधुर और विधवा भी शामिल थे...संयोग से दोनों को लंच के दौरान बैठने के लिए एक ही टेबल मिल गई...पहले इधर उधर की बातें हुईं और फिर विधुर ने हिम्मत दिखाते हुए बोल ही डाला...क्या तुम मुझसे शादी करना पसंद करोगी...

छह सेंकड तक विधवा सोचती रही और फिर बोली...हां...हां...मैं तुमसे शादी करूंगी...

लंच खत्म हो गया...दोनों ने एक दूसरे का अभिवादन किया और अपने अपने ओल्ड एज होम में आ गए...

अगले दिन बुज़ुर्ग विधुर महोदय बड़े परेशान...यही सोच सोच कर हलकान हुए जा रहे थे कि जिस महिला को प्रपोज़ किया था उसने जवाब में हां कहा था या न...

लाख याद किया, लेकिन बेकार...ये तो अच्छा था महिला का नंबर था जनाब के पास...आखिर फोन मिला ही दिया...हौसला बटोर कर इधर उधर की बातें की...बताया कि अब यादाश्त पहले जैसी नहीं रही...अक्सर चीज़े भूल जाता हूं...विधुर ने एक दिन पहले लंच पर विधवा के साथ बिताए अच्छे वक्त को भी याद किया...आखिर में काम की बात पर आते हुए कहा...मैंने जब तुम्हे शादी के लिए प्रपोज़ किया था तो तुमने क्या जवाब दिया था...हां या न...

विधुर की खुशी का ठिकाना न रहा, जब उसने विधवा को फोन पर कहते सुना...हां...मैंने हां कहा था और दिल से तुम्हारा शादी का प्रपोज़ल कबूल किया था...लेकिन...

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तुमने अच्छा किया मुझे फोन कर पूछ लिया...वरना मैं भी कल से ही ये सोच सोच कर परेशान थी कि वो कौन सा शख्स था जिसने मुझे प्रपोज़ किया था...लाख कोशिश करने पर भी याद नहीं आ रहा था...

(ई-मेल से अनुवाद)



स्लॉग ओवर



मक्खन की बहन को डाकू उठा कर ले गए...

मक्खन बेचारा करे तो करे क्या...

बुरे वक्त पर आख़िर दोस्त ही काम आते हैं...मक्खन के परम सखा ढक्कन ने आगाह करते हुए सलाह दी...

ये डाकू बड़े ख़तरनाक होते हैं...जाने कब क्या कर बैठें...इसलिए खाली हाथ बिल्कुल नहीं जाना...


मक्खन डाकुओं के डैने पर गया और हाथ में...



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दो किलो आम ले गया...

27 टिप्‍पणियां:

  1. खुशदीप जी , वो तो उम्र के मारे थे आजकल कुछ ऐड तो युवाओ को प्रेम के मामले में ऐसी याददाश्त रखने को प्रेरित कर रहे है ....मक्खन तो बेहतरीन है ही

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  2. सच मे याददाश्त का प्राब्लम बहुत खतरनाक है दिलखुश भाई।दीपसुख जी आपने दिल जीत लिया।वैसे आपका नाम क्या है खुशदिल भाई।हा हा हा हा।अब तो अपने भी वृद्धाश्रम जाकर पुराने दिनों की खोई हुई याद ताज़ा करने के दिन आ गये।

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  3. क्‍या इसे एक 'बूढी' सी लव स्‍टोरी नहीं कहा जा सकता ??
    और मक्‍खन की सोंच का कहना ही क्‍या !!

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  4. आम खा कर डाकुओ की आत्मा तृप्त हो गई होगी और उन्होंने दोनों को घर तक छोड़ा होगा

    पाजिटिव थिंकिंग तो ये ही कह रही है :)

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  5. मक्खन भी तो नई रिश्तेदारी पक्की
    करने गया था,शगुन मे आम लेकर।:)

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  6. लवस स्टोरी बहुत अच्छी लगी, इतनी गर्मी मै मकखन आम ले गया, खराब हो जाते तो... अच्छा था मोती चुर के लड्डू ले जाता:)

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  7. तभी कहा जाता है कि प्रपोज करने में देर नहीं करनी चाहिए औऱ अगर हां कह दे सजनी तो चट मंगनी पट ब्याह कर लेना चाहिए .... बाकी भला ही होगा.....या ??????

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  8. ha ha ha...
    kitna samajhdaar hai dhakkan...are dushman ke ghar bhi khaali haath thode hi na jaate hain...aur dakuon ko kaun se roj aam mil rahe hain khane ko...
    haan nahi to...!!

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  9. अच्छी जोड़ी टकराई बुजुर्गों की.

    मख्खन को कभी हम भी धमका कर देखेंगे, शायद आम लेता आये. :)

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  10. भूल जाना कि किसने प्रपोज किया था ...कई लोगो के साथ बुढ़ापे से बहुत पहले भी हो जाता है ...:):)

    मक्खन की समझदारी के आगे कौन नतमस्तक नहीं होगा ....

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  11. इश्क का मज़ा तो तभी आता है , जब न मूंह में दांत हों और न पेट में आंत।
    लेकिन इस याददास्त का क्या करें । मुई एन वक्त पर धोखा दे सकती है। :)

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  12. वाकई छोटी सी कहानी में बड़ी सी लव स्टोरी पढ़ा दी आपने। बहोत दिनों तक इसे याद कर मन प्रफुल्लित होता रहेगा ।
    --आभार।

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  13. आपका और आपके लेखन का जवाब नहीं ........बहुत खूब

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  14. मक्खन भी बेचारा क्या करे? आखिर ढक्कन जैसा सलाहकार जो मिल गया.:)

    रामराम.

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  15. शुक्र है महिला को प्रोपोज किया था यह तो याद रहा है... यही काम की बात थी... २ साल उम्र और बढ़ गयी होगी उसकी...

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  16. हा हा हा………………जैसा सलाहकार होगा वैसा ही तो बेचारा करेगा।

    ये लव स्टोरी तो सचमुच काबिल-ए-तरीफ़ है।

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  17. डाकू के पास पहुंचने के बाद जब दोनों किलो आम डाकू और मक्खन की बहन ही चट कर गए तो मक्खन गुस्से में अपनी बहन को वहीं छोड आया ..ये कहते हुए कि कम से कम मुझे तो एक देते ...
    अजय कुमार झा

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  18. स्लाग-ओवर मज़ेदार किंतु पूरा आलेख
    हा हा हा खूब मज़ा आया

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  19. ये 'ओल्ड एज लव' की मेल भेजी किसने थी आपको .....??

    वाह...वाह.......

    कुछ नज़र नहीं आता उनके तसब्बुर के सिवा
    हसरते दीदार ने आँखों को अँधा कर दिया .....

    मक्खन की समझदारी नोट कर ली है जी .....!!

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  20. आप बुज़ुर्गो की बात कर रहे है हमारे यहाँ तो युवाओं मे भी यही हो रहा है । हाहाहा ....।

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  21. बहुत खूब!
    पोस्ट भी मक्खन की तरह ही है

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