खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से कलम-कंप्यूटर तोड़ रहा है

ज़िंदगी है क्या, बोलो ज़िंदगी है क्या...खुशदीप

Posted on
  • Tuesday, March 16, 2010
  • by
  • Khushdeep Sehgal
  • in
  • Labels: , , , , , ,

  • ज़िंदगी है क्या...


         

    आप भी बताइए, आपकी नज़र में ज़िंदगी है क्या...



    स्लॉग गीत

    ज़िंदगी है क्या, बोलो ज़िंदगी है क्या...


    फिल्म....सत्यकाम (1969)

    सिर्फ गीत सुनना है तो इस लिंक पर सुनिए




    स्लॉग ओवर

    मक्खन की नज़र में ज़िंदगी है क्या...


    मक्खन के पिता की मौत हो गई....मक्खन ज़ोर ज़ोर से रो रहा था...

    तभी मक्खन का फोन आया...मक्खन ने सुना तो और दहाड़े मार कर रोने लगा...


    ढक्कन ने पूछा...भाई मक्खन क्या हुआ, किसका फोन था...


    मक्खन...मेरी बहन का फोन था, उसके भी पिता की मौत हो गई है...







    28 comments:

    1. Song vastav me kamaal ka tha, iske sath hi 'gadi bula rahi hai' bhi sun liya..
      aur rone wali baat hi hai ek ghar me do-do mauten.. bhai ke pita aur bahin ke pita dono to ek hi din chal base.. :)

      ReplyDelete
    2. यही जिन्दगी है। इस शोक और रोने धोने के माहौल में भी मक्खन ने लोगों को हँसने का अवसर दे दिया।

      ReplyDelete
    3. इस सवाल के हज़ारो उत्तर है फिर भी एक कविता याद आती है ....
      " ज़िन्दगी क्या है जान जाओगे ..रेत पे लाके मछलियाँ रखदो "
      मेरी जो परिभाषा है वह कभी ब्लॉग पे दूंगा । चित्र चुनकर लगाया है भाई ।

      ReplyDelete
    4. आपके इस सवाल के जवाब में मेरी एक कविता की कुछ पंक्तियाँ लिखा रही हूँ ...
      ज़िन्दगी एक अनबुझ पहेली है
      कभी भीड़ में तो कभी अकेली है
      निकल जाती है हाथ से रेत की तरह
      दे दोस्त, न ये तेरी न मेरी सहेली है
      गाना बहुत अच्छा लगा ...धन्यवाद !!

      ReplyDelete
    5. मेरे हिसाब से तो जिन्दगी एक पेसंजर गाडी है, जो कभी धीरे तो कभी तेज चलती है, ओर तरह तरह के लोग हमे इस सफ़र मै हमे मिलते है, बिछडते है, ओर अपना स्टेशन आने पर हमे उतरना ही है
      मकखन भाई का तो वक्त ही खराब चल रहा है इधर मकखन का बाप मरा, तो उस के वियोग मै उस की बहिन का बाप भी चल बसा, शायद दोनो भाई भाई होंगे:)

      ReplyDelete
    6. तेरी बज़्म में तू बेखबर मैं बेखबर
      इक ऐसी सुहाग-ए-रात ज़िंदगी

      ReplyDelete
    7. ज़िदगी की किताब जितनी सरल है हमने उसे उतना ही कष्टकारी बना दिया है.. काहे को ईतना घमंड करतें हैं हम.समाज को रौंदते हैं हम....आखिर क्यों...

      ReplyDelete
    8. वो चाँद जो मेरे कमरे में रहता है...
      मैने उसे जिन्दगी जाना..... :)



      -जिन्दगी जिन्दादिली का नाम है-


      मख्खन भी गजब आईटम है आपका. हा हा! बेचारे के यहाँ डबल ट्रेजड़ी पड़ गई. :)

      ReplyDelete
    9. एक आस , एक विश्वास , एक हंसी , एक आंसू ,
      फूल, तितली, खुशबू ,झरना ,
      इनसे परे भी है जिंदगी
      टूटी फूटी छतों से झांकता तारों भरा आसमान
      कुत्तों और इंसानों के बीच चौराहे पर मची जंग ..
      और भी क्या क्या ...

      नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें ....
      शुभ हो ...!!

      ReplyDelete
    10. दुःख की बात तो है ही...एक ही घर में दो-दो मौतें एक साथ हो जाना..वो भी सगे भई-बहन के पिता की..कोई मजाक थोड़े ही है ?...

      ReplyDelete
    11. jeene ka naam hai jindgee......

      ReplyDelete
    12. जिन्दगी जोश है, जिन्दगी उत्साह है
      जिन्दगी तो कुछ कर जाने की चाह है

      ReplyDelete
    13. इस सवाल का उत्तर तो अच्‍छे-अच्‍छे ज्ञानी महात्‍मा नहीं दे सके तो हमारी क्‍या औकात है। हमें तो लगता है जीते है जब मुसीबत लगती है और मरने का नम्‍बर आता है तब बेहद प्‍यारी हो जाती है।

      ReplyDelete
    14. ज़िन्दगी है खेल, कोई पास कोई फेल
      अनाड़ी है कोई, खिलाड़ी है कोई....

      ReplyDelete
    15. धा हा हा यही है जिन्दगी। आशीर्वाद आपको नव संवत्सर की मांगलिक शुभकामनाएँ.

      ReplyDelete
    16. बड़ा कठिन सवाल है यह....
      स्लोग ओवर बहुत मजेदार रहा...हमेशा की tarah

      ReplyDelete
    17. बहुत कठिन है कुछ कहना.

      रामराम.

      ReplyDelete
    18. जिंदगी को आप सबकुछ के साथ जोड़ सकते हैं.

      ReplyDelete
    19. मैं अवधिया भईया के साथ हूँ....
      उन्होंने जो कहा वही है ज़िन्दगी....
      हा हा हा हा हा .....

      ReplyDelete
    20. जिन्दगी एक ठो शब्द है ..कवि , कहानीकार, फ़िलम वाले, और हम आप जईसन ब्लोग्गर ..बहुते टेंशन देता है ..ओईसे शब्द बडा धांसू है ..जाने का का लिखा पढा जा सकता है इस पर ...मुदा इसके लिए भी ..ई शब्द को जिया जाना जरूरी है .....तो चलिए .....जीते हैं ...
      अजय कुमार झा

      ReplyDelete
    21. gaan to hai hi badhiya .han 2-2 maut ek sath hona dukhad hai ....hahaha.

      vaise yahi zindagi hai.........ik pal hansna aur dooje pal rona.

      ReplyDelete
    22. Yaha badiya hai Kuch mere Pass Bhi esa Hi hai : http://praveen.jagranjunction.com/

      ReplyDelete
    23. जिन्दगी ख्वाब है .ख्वाब में झूठ क्या ? और भला सच है क्या?फ़िलहाल तो यही गाना याद आया [:)] नव संवत्सर की मांगलिक शुभकामनाएँ

      ReplyDelete
    24. जिंदगी पर ना जाने कितनो ने कितना लिखा है...पर अभी भी अनबूझ पहेली है...

      १- जिंदगी
      क्या एक सुलगती
      माचिस नहीं
      जो एक क्षण सुलगी
      और फिर
      बुझ गयी...

      २ जिंदगी दिन का
      शोर है
      जो रात की
      खामोशी में
      डूब जाता है ..

      ३ जिंदगी एक
      ऐसी पहेली
      जिसका उत्तर
      ढूँढते ढूँढते
      खत्म हो जाती है
      उतार नहीं मिलता ...

      और भी बहुत कुछ कहा जा सकता है....पर असलियत है कि जिंदगी जिन्दादिली का नाम है

      ReplyDelete
    25. ज़िन्दगी एक मोहब्ब्त है
      मौत से पहले की इबादत है ।

      ReplyDelete
    26. मेरे हिसाब से तो जिन्दगी प्यार का गीत है.....

      देखें और सुनें :

      http://www.youtube.com/watch?v=PVFfnDSH3cc
      और
      http://www.youtube.com/watch?v=9Mu-DpRNnKU

      जय हिंद

      ReplyDelete
    27. जिंदगी को आप सबकुछ के साथ जोड़ सकते हैं.

      ReplyDelete

     
    Copyright (c) 2009-2012. देशनामा All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz