सोमवार, 29 मार्च 2010

नेकी कर, लिफ़ाफ़े में डाल...खुशदीप

पोस्ट ऑफिस में एक सीनियर क्लर्क उस डेस्क का काम देखा करते थे जहां अधूरे या अस्पष्ट पतों वाली डाक की छंटाई होती थी...

एक दिन सीनियर क्लर्क को ऐसा ख़त मिला जिस पर कांपते हाथों से किसी ने सिर्फ.. गॉड... लिखा हुआ था...






सीनियर क्लर्क ने सोचा, ख़त का लिफ़ाफ़ा खोल कर देखा जाए, शायद वहां से कोई सुराग मिले कि भेजने वाला ख़त कहां भेजना चाहता है...



ख़त पर लिखा था...



डियर गॉड,


मैं 83 साल की विधवा हूं, बहुत छोटी सी पेंशन पर मेरा गुज़ारा होता है... कल मेरा किसी ने पर्स चुरा लिया...उसमें सौ डॉलर थे...अगली पेंशन जब तक नहीं आती मेरे जीने का सहारा बस वही रकम थी...अगले रविवार को क्रिसमस है...मैंने अपने दो दोस्तों को घर पर बुलाया है...बिना पैसे उनके लिए मैं कोई खाने का सामान नहीं खरीद सकती...न ही मेरा कोई रिश्तेदार है जिससे मदद मांग सकूं...गॉड आप ही मेरी अकेली उम्मीद हो... क्या आप मेरी मदद करोगे...


आपकी
एडना



ये ख़त पढ़कर सीनियर क्लर्क की आंखों में आंसू आ गए...उसने स्टाफ के सभी सहयोगियों को वो ख़त दिखाया...सबने अपने वालेट से कुछ कुछ न डॉलर निकाल कर विधवा को मदद भेजने के लिए सीनियर क्लर्क को दे दिए...इस तरह कुल 96 डॉलर इकठ्ठे हुए...वो उन्होंने एक लिफ़ाफ़े में डालकर विधवा को भेज दिए...


ये काम करने के बाद पोस्ट ऑफिस के सारे स्टॉफ के चेहरे खुशी से पूरा दिन चमकते रहे...सब विधवा एडना और उसके दो दोस्तों की पार्टी के बारे में सोचते और बातें करते रहे...



क्रिसमस आया और चला गया...



दो-तीन बाद फिर उसी विधवा का ख़त गॉड के नाम पर आया...

ख़त की बात सुनते ही सारा स्टाफ दौड़ा दौड़ा आ गया और सबके सामने ही सीनियर क्लर्क ने ख़त खोल कर पढ़ा...


उस पर लिखा था...



डियर गॉ़ड,

मैं आपका किन शब्दों में शुक्रिया करूं...मुसीबत में आप किस तरह मेरी मदद के लिए आगे आए...


आपके प्यार के तोहफ़े की वजह से ही मैं दोस्तों के लिए शानदार डिनर का इंतज़ाम कर सकी...हमने बहुत मज़े लिए...मैंने दोस्तों को आपकी मेहरबानी के बारे में भी बताया...


हां, आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि आपके भेजे लिफ़ाफ़े से 4 डॉलर कम थे...ये ज़रूर पोस्ट ऑफिस में काम करने वाले हरामज़ादों की कारस्तानी होगी....

आपकी
एडना



स्लॉग ओवर



ढक्कन...शादी क्या है...



मक्खन...कुंवारों के लिए शादी एलपेन्लिबे (कैंडी) के एड की तरह है...'जी ललचाए, रहा न जाए'....



और शादीशुदाओँ के लिए...



...



...



क्लोरोमिंट का एड...'दोबारा मत पूछना'...

25 टिप्‍पणियां:

  1. अमरीका के पोस्ट ऑफिस में भी ऐसी कारगुजारियाँ होती हैं।

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  2. बेचारे पोस्‍ट ऑफिस वाले .. इस दुनिया में नेकी करनेवालों का यही हश्र होता है !!

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  3. अच्छा हुआ ब्लोगिंग में ऐसा नहीं होता :)

    एक हाँथ ले और एक हाँथ दे, बढ़िया नियम है कोई किसी से शिकायत नहीं करता मैंने आपको १०० दिए आपने मुझे केवल ९६
    ४ का हिसाब दीजिए

    यहाँ तो १०० देने के बाद ५० मिल जाये तो ब्लॉगर खुश हो जता है
    हा हा हा

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  4. हा हा हा हा हा हा................:)-

    पोस्ट ऑफिस वालों की यही रेपूटेशन है, वह कितना ही अच्छा क्यों न करें..... पर उनकी इमेज ही कुछ ऐसी है...वह कहते हैं न..."फ़र्स्ट इमप्रेसन इस द लास्ट इमप्रेसन"

    रही बात स्लॉग ओवर की, तो - 'दोबारा मत पूछना'

    जय हिंद

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  5. खुशदीप जी, मैं आपकी इस पोस्ट से कतई असहमत हूँ क्योंकि...
    मेरी जानकारी के अनुसार यह राशि पोस्ट-ऑफ़िस वालों ने नहीं, बल्कि गॉड के मिनिस्टीरियल स्टॉफ़ ने लिया था !
    उन दिनों अपने रामराज्य में भी सरकारी सहायता पर 4 परसेन्ट का ही रेट था ।

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  6. मुझे यह स्कूप कहाँ से मिला ?
    दोबारा तो क्या, एक बार भी मत पूछना !

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  7. जय हो बोध कथाकार आप सच में गज़ब लिखते हैं
    रही ३८ वर्षीया एडना [जिसने अपनी उम्र को ८३ बताया था]की बात वो तो कल फ़िर मिली थी दूसरे पति के साथ पोस्ट आफ़िस में बडे बाबू के पास खडी थी नये पति की पोस्टेल ज़ायदाद पर नामीनेशन कराने

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  8. बद अच्छा बदनाम बुरा...!!
    First impression is the LASTING impression....
    देना ही था तो पूरे १०० देते, हर बात में चूक तो होती ही है उनसे इसमें भी चूक गए...
    हा हा हा हा हा ..

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  9. mazedaar lazzatdaar kurram.. karram lizzat papad aen hen hen aen hen hen...

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  10. हा हा!! दोनों ही हिस्से जबरदस्त!! ऐसी बदनामी कि अच्छा करें तो भी कोई न माने!!

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  11. बहुत लाजवाब, दोनों के दोनों नायाब.

    रामराम.

    -ताऊ मदारी एंड कंपनी

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  12. लडको को तो शादी हमेशा से नखलिस्तान की तरह ही लगता है पर लड़कियों को सच्चाई हमेशा से पता है

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  13. अपुन को तो अभी तक़ एल्पेनलिबे ही नही मिली फ़िर क्लोर क्या और मिंट क्या दोबारा क्या और एकबारा क्या?वैसे मुझे पता तो था दुनिया मे सब समान है लेकिन समानता इस मामले मे भी?

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  14. सच है आज कल नेकी का ज़माना भी नहीं....दोनों किस्से मजेदार

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  15. हा हा हा बेचारे पोस्ट औफ़िस वाले ..इसके बाद क्या हुआ ये तो बताते ...अरे आंटी का नहीं उस पोस्ट औफ़िस का ....बहुत मजेदार
    अजय कुमार झा

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  16. बहुत लाजवाब, दोनों के दोनों नायाब.

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  17. vaah bahut badiya kai din se blog par nahin aa paayee magar dhiyan sara din blog par he rahata hai. aaj jaise hee time mila socha pahale khushdeep kaa haal poochha jaye. kaise ho? JUNE ME HEE REGULAR HO PAAOONGEE BAHUT BAHUT AASHEERVAAD

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  18. ha...ha..ha...ha....ha....ha...iska sabak...?? kabhi kisi kee madad mat karo....!!

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  19. @निर्मला कपिला जी,
    यही तो है आपका वो प्यार, जिसने हम सबको आपके आंचल से बांध रखा है...वतन से इतनी दूर जाकर भी आपका ध्यान हम सब पर है...इससे बड़ी खुशी की बात हमारे लिए क्या हो सकती है...लेकिन मेरा आपसे आग्रह है आप जी भर कर अमेरिका यात्रा का आनंद लीजिए...जितना संभव हो सके घूमिए...यात्रा का हर पल आपके लिए सुनहरी यादगार बन जाए...बाकी हम सब कहां जाने वाले हैं...आप लौटने पर सब को वहीं पाएंगी जहां छोड़ कर गई थीं...हां आपका लिखा ज़रूर हम सब मिस कर रहे हैं...आने के बाद उसकी डबल भरपाई कर दीजिएगा...

    जय हिंद...

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  20. बहुत बड़िया चुटकुला इस नये रूप मे पढ़कर अच्छा लगा । वैसे अपने यहाँ ऐसा होता था पहले अब कोई लिफाफे मे पैसे नही भेजता ।

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