शुक्रवार, 26 मार्च 2010

नशों ने मारे गबरू कैसे कैसे...खुशदीप

एक भालू सिगरेट का सुट्टा लगाने की तैयारी कर रहा था कि एक चूहा उसके पास आया...चूहे ने कहा...इतने शक्तिशाली, इतने हैंडसम जवान हो, क्यों खुद को इस नामुराद सिगरेट से जलाने में लगे हो...तुम इसे नहीं पी रहे , बल्कि ये तुम्हे पी रही है...छोड़ दो इसकी लत, आओ मेरे साथ दौड़ो, देखो ये जंगल, ये दुनिया कितनी खूबसूरत है...

भालू को ये सुनकर अपने पर शर्म आई और कुछ लम्हे सोचने के बाद पश्चाताप के लिए चूहे के साथ दौड़ने लगा...





अभी कुछ ही दूर गए थे कि एक हाथी अफ़ीम का अंटा चढ़ा रहा था...ये देखकर चूहा रुक गया...दोनों हाथ कमर पर रखकर हाथी को हड़काते हुए बोला...कहने को तुम गजराज हो लेकिन अक्ल तुम्हे धेले की नहीं है...बस शरीर ही शरीर है तुम्हारे पास...ये अफ़ीम के चक्कर में अपना क्या हाल बना लिया...छोड़ दो ये नशा...मेरे साथ दौड़ो, इस जंगल, इस दुनिया के रंग-बिरंगे नज़ारे देखो...

हाथी भी चूहे से ये सब सुनकर बड़ा शर्मसार हुआ और चुपचाप पीछे-पीछे दौड़ने लगा...

आगे चले तो एक शेर टेबल पर नमकीन के साथ व्हिस्की पीने की तैयारी कर रहा था...चूहे ने वैसे ही धमक कर शेर से भी कहा...जंगल कितना....ये सुनना ही था कि शेर ने व्हिस्की का गिलास एक और रखा...और चूहे के सात-आठ झन्नाटेदार जड़ दिए...ये देखकर हाथी और भालू से रहा नहीं गया...दोनों शेर से बोले...क्यों मार रहे हो इस नेक आत्मा को...एक तो बेचारा तुम्हे नशे की गर्त से निकाल कर ज़िंदगी की तरफ़ ले जाना चाहता है और तुम इसे पीट रहे हो...


ये सुनकर शेर बोला...नेक आत्मा और ये...तुम इसके चक्कर में कहां पड़ गए...पिछली
बार भी मुझे ये जंगल में सात-आठ घंटे दौड़ाता रहा था...वो तो मुझे बाद में पता चला कि ये कमीना तो....




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....



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पक्का भंगेड़ी है...




स्लॉग ओवर

मक्खन के छाते में एक छेद था...

ढक्कन...मक्खन भाई तुम्हारा छाता तो नया लगता है, फिर इसमें ये छेद क्यों हैं...

मक्खन...खोती दे पुतर, बारिश रुक जाएगी ते तेरा प्यो आके मैनू दसेगा...

( गधी के बेटे, बारिश रुक जाएगी तो तेरा बाप आकर मुझे बताएगा)

31 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. मक्खन...खोती दे पुतर, बारिश रुक जाएगी ते तेरा प्यो आके मैनू दसेगा...

    ............लाजवाब

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  3. "पिछली बार भी मुझे ये जंगल में सात-आठ घंटे दौड़ाता रहा था...वो तो मुझे बाद में पता चला कि ये कमीना तो....
    ....
    ....
    पक्का भंगेड़ी है..."

    भई वाह

    खुशदीप भापे तुस्सी ग्रेट हो जी......

    जय हिंद

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  4. अच्छा !!
    अब समझ में आया तो इतने दिनों से जो इतनी सारी शिक्षा जो हमलोगों को दी जा रही थी ...वो भांग के नशे में दी जा रही थी ???
    छि छि.....मैंने आपको क्या समझा और आप क्या निकले....हे भगवान्...!!!
    'अदा ड्रामा कम्पनी'

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  5. ना ना.. ना ना.. ना रे.. ना रे ना.. ओ सड्डे नाल रेओगे तो ऐश करोगे.... ज़िन्दगी दे सारे मज़े कैश....

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  6. तो क्या सही बात कहने वालों को भँगेड़ी करार दिये जाना इतनी पुरानी परम्परा है ?

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  7. ha ha sahi !!
    Waise bhang ke nashe me log do char logo ka bhala bhi kar dete hai ...aaj pata chala.

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  8. सही मार चूहे को...दो हमारी तरफ से लगाओ उसे.

    --

    छाते में छेद का आईडिया तो सही लगा भई..हा हा!!

    --

    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

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  9. अरे! ये क्या?
    सात-आठ पोस्ट से आप दौड़ा रहे हो कमेंट करने के लिए!!
    उसका क्या?

    इतनी ज़्यादा ठीक नहीं भई :-) कुछ कम कीजिए वरना एकाध दिन पंगा हो जाएगा

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  10. हाहाहा .....मजेदार रही चूहे की समाज सेवा

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  11. शंकर जी की बूटी है ही इतनी कमाल की ...और ब्लॉगजगत के तो पूरे कुए में भंग पड़ी है तभी तो सब बौराए है
    मजेदार रचना

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  12. मजेदार तरीके से लिखा है, यह पहले भी कहीं पढ़ चुके थे।

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  13. अब तो आप मान गए ना शंकर जी की बूटी को। चूहे ने हाथी, शेर सभी को दौड़ा दिया। होली के बाद भांग का नशा, ना बाबा ना, अब बस करो, खुशदीप जी।

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  14. शेर तो समझ आ गया मगर यह चूहा कौन है खुशदीप भाई ?

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  15. मजेदार पोस्ट...यानि कि अच्छे काम भी नशे में ही होते हैं...

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  16. वाह क्या गजब किया है.:)

    रामराम

    -ताऊ मदारी एंड कंपनी

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  17. अब क्या कहूँ ………………मेरी तरफ़ से तो सबने सब कुछ कह ही दिया…………………मेरे कहने को तो कुछ बचा ही नही।

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  18. हा हा बढ़िया पोस्ट...और स्लोग ओवर उस से भी अच्छा ...

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  19. भाई वाह लाजवाब !
    चूहा खुद भंगेड़ी (शेर के अनुसार)
    वैसे नेकी कर दरिया में डाल
    तो जग प्रसिद्ध है.

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  20. मेरे गोल दिमाग में भी घुस रहा है ......भांग...

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  21. कृष्ण मुरारी जी..
    सर गोल है इसलिए दीमाग भी गोल सा ही होता है..बेशक उबड़-खाबड़ हो....:)

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  22. ऐसे चूहे की तो....
    गोली-बन्दूक में कुछ नहीं रखा...बम से उड़ा दो स्साले को ...
    :-)

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  23. छाते में छेद
    चूहे ने ही किया है
    और
    बारिश का पता लगे
    या न लगे
    पर चूहा जरूर
    वहीं से आ टपकेगा
    उसी की करतूत
    या कहें
    कारनामा है
    या है चूहानामा।

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  24. साला चूहा कंही का,अबे टाईगर ईयर का तो खयाल रखता।

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