गुरुवार, 25 मार्च 2010

ओेए लक्की, लक्की ओए...खुशदीप

अपना लक पहन कर चलो...ये पढ़ कर आपको ज़रुर याद आ गया होगा कि मैं लक्स कोज़ी की एड का ज़िक्र कर रहा है...लेकिन कुछ पहनने से लक बदलता है या नहीं, ये मैं नहीं जानता लेकिन आज आपको लक यानि किस्मत की महिमा बताता हूं...



लक मैटर्स...



एक कंपनी में एक्जीक्यूटिव पोस्ट के लिए आवेदन मांगे गए....

देखते ही देखते तीन सौ आवेदन आ गए...लेकिन कंपनी के पास वक्त बहुत कम था...और किसी को नौकरी पर रखना भी बहुत जल्दी था...

बॉस ने सेक्रेट्री से डेस्क पर रखे तीन सौ आवेदनों में से नीचे रखे 50 को कॉल करने के लिए कहा...और बाकी सारे आवेदनों को रद्दी की टोकरी में फेंकने के लिए...

ये सुनकर सेक्रेट्री का मुंह खुला का खुला रह गया...फिर भी उसने हिम्मत करके पूछा...क्या 250 आवेदन फेंक दिए जाएं, बिना देखे....अगर इनमें वाकई श्रेष्ठ उम्मीदवारों के भी आवेदन रद्दी में चले गए तो...


बॉस ने ये सुनने के बाद मुस्कुराते हुए कहा...

यस, तुम्हारा तर्क बिल्कुल ठीक है, लेकिन मैं अपने ऑफिस में ऐसे लोग नहीं चाहता जिनका लक खराब हो...

-बेकी होरोविट्ज (रीडर्स डाइजेस्ट)



स्लॉग गीत


ओए लकी, लकी ओए



स्लॉग ओवर

मक्खन...

नी मक्खनिए....जब मैंने तुझे पहली बार देखा था तो तेरी फिगर बिल्कुल कोक की बॉटल की तरह होती थी..


मक्खनी...

ठंड रख, मैं अब भी कोक की बॉटल ही हूं...फर्क सिर्फ इतना है पहले 300 ML की थी, अब दो लीटर वाली हो गई हूं...



33 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. हा हा! २ लीटर की कोक की बाटल...:) वाह रे मख्खनी, बड़ी तरक्की की.

    उत्तर देंहटाएं
  3. oye lucky.....lucky oye.......
    जब भगवान् देता हैं तो छप्पर फाड़ के देता हैं
    गुरूजी हम तो कब से छप्पर फटने के इंतजार में हैं.....वो फटे...माल गिरे.....और हम लेकर खिसके.......

    उत्तर देंहटाएं
  4. कोका कोला वालो का शुकर कही उन्होने कोक का ड्रम नही बनाया,

    उत्तर देंहटाएं
  5. Kahin na kahin luck naam ki koi cheej hoti to jaroor hai bhaia, yahan to coke ki 3 litre bottle bhi aati hai.. ekdam gol-matol. kahin makkhani wo na dekh le.
    Jai Hind...

    उत्तर देंहटाएं
  6. लक कब कहां लग जाए कहा नहीं जा सकता......

    उत्तर देंहटाएं
  7. यस, तुम्हारा तर्क बिल्कुल ठीक है, लेकिन मैं अपने ऑफिस में ऐसे लोग नहीं चाहता जिनका लक खराब हो...
    बुरी बात ...क्या पता किसी का ख़राब लाक आपके साथ मिल कर अच्छा हो जाये ...इतनी बेदर्दी अच्छी नहीं ....:):)

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाणी जी,
    ये दिल से सोचना हमारे और आप जैसे इनसानों का काम है लेकिन कारपोरेट ऐसी ही बेरहमी से चला करते हैं...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सारे लोग घर से बाहर भी इसलिये नही निकल पाते कि उनका लक खराब होता है । इसलिये हमेशा लक धोते रहना चाहिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. हमारा आवेदन भी कचरे में फेंकने वाले उन ढाई सौ आवेदनों में शामिल था क्योंकि हमारा तो हमेशा ही बेडलक खराब ही रहता है!

    उत्तर देंहटाएं
  11. भाग्य और कर्म दोनों साथ साथ चलते हैं....अच्छी बात कही आपने..

    उत्तर देंहटाएं
  12. मैं ये बात मानती हूँ की समय से पहले और भाग्य से अधिक कुछ नहीं मिलता....:):)

    कोक की बोतल बढ़िया रही :)

    उत्तर देंहटाएं
  13. मेरा भी बैडलक ख़राब रहता है हमेशा....
    और हाँ हम तो ...कोक की बैरल ही हैं ..मक्खनी जी से कह दीजिये दिल छोटा न करे...
    बहुतों से वो बहुत बेहतर हैं..
    हाँ नहीं तो...!!!

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपके यह मख्खन और मक्खनी आपसे भी अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  15. लक तो वाकई छा गया। हमें तो अब डर है कि ऐसे ही कम्‍प्‍यूटर पर बैठकर ब्‍लोंगिग करते रहे थे यह कोकाकोला की बोतली कहीं फैमिली पेक ना हो जाए? हा हा हा हा, आनन्‍द आ गया, खुशदीप जी।

    उत्तर देंहटाएं
  16. लक तो वाकई छा गया। हमें तो अब डर है कि ऐसे ही कम्‍प्‍यूटर पर बैठकर ब्‍लोंगिग करते रहे थे यह कोकाकोला की बोतली कहीं फैमिली पेक ना हो जाए? हा हा हा हा, आनन्‍द आ गया, खुशदीप जी।

    उत्तर देंहटाएं
  17. आज टपोरी भाषा में टिपण्णी करने का मन हो रहा है
    "बोले तो एक दम झक्कास "

    उत्तर देंहटाएं
  18. मानो तो खुदा ना मानो तो पत्थर …………बस यही हाल होता है।

    उत्तर देंहटाएं
  19. अपना तो साला बैडलक बहुत स्ट्रांग है गुडलक तो पता नही कुम्भकरण की तरह सो गया है कंही।दो लीटर वाली बोतल,हा हा हा हा,हम लोग उसे सिलेंडर बाडी कहते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  20. हाय....मार डाला....मैं तो अभी अपने लक के बारे में सोच रहा हूँ.....
    ...............
    विलुप्त होती... नानी-दादी की बुझौअल, बुझौलिया, पहेलियाँ....बूझो तो जाने....
    .........
    http://laddoospeaks.blogspot.com/
    लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से....

    उत्तर देंहटाएं

  21. मैंनें पोस्ट पढ़ी तो नहीं,
    अवश्य कुछ अच्छा ही लिखा होगा ।
    टिप्पणी केवल सतत लेखन का प्रोत्साहन प्रतीक मात्र है, सो..
    " वाह, क्या बात है ? / खुशदीप जी, आपका ज़वाब नहीं !" में से कोई एक चुन लें ।
    चाहें तो दोनों ही टिप्पणियाँ ही मॉडरे्शन की भेंट चढ़ा दें, इनको रख भी लें तो कोई बात नहीं,
    यह कम से कम परस्पर सँबन्धों को प्रगाढ़ करने के उपयोग में तो लायी जा सकती हैं :)

    उत्तर देंहटाएं
  22. हम्म बात तो पते की कह दी कम्पनी के बॉस ने...
    मक्खनी की बात पे अमीन सायानी की कही एक बात याद आ गयी.."मिस इण्डिया को कुछ सालों बाद देखो तो ऐसा लगता है,मिस इण्डिया,अमेरिका,इंग्लैण्ड ...सब एक साथ ही चली आ रही हैं."

    उत्तर देंहटाएं
  23. हम्म कंपनी की तरक्की के लिए ऐसा ही बॉस होना चाहिए.और कोक कि बोतल गज़ब रही हा हा हा

    उत्तर देंहटाएं
  24. लक तो कर्मों से ही बनता है भाई।

    वैसे मक्खनी दा ज़वाब नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  25. वाह रे वाह अगर ऎसे बास बचे रहेगे तो मेरा तो कल्याण हो जायेगा:)

    उत्तर देंहटाएं
  26. किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान ...
    बढ़िया पोस्ट

    उत्तर देंहटाएं
  27. किस्मत हमेशा दो कदम आगे ही चलती है....

    जय हिंद

    उत्तर देंहटाएं
  28. अरे वाह !!! इत्ते सारे चुटकुले एक साथ पढ़ने को मिल गये. मज़ा आ गया.

    उत्तर देंहटाएं
  29. पहली बार आया हूँ इस गली
    बहुत अच्छा लगा

    कभी अजनबी सी, कभी जानी पहचानी सी, जिंदगी रोज मिलती है क़तरा-क़तरा…
    http://qatraqatra.yatishjain.com/

    उत्तर देंहटाएं