रविवार, 14 मार्च 2010

अगर जल्दी में हैं तो इसे न पढ़ें...खुशदीप

बर्थ-सर्टिफिकेट सबूत है हमारे जन्म का...


डेथ-सर्टिफिकेट सबूत है हमारी मौत का...


फोटो सबूत हैं हमारे ज़िंदा रहने का...







अब आप एक ठंडी सांस लीजिए...और पूरे सकून के साथ इसे धीरे-धीरे पढ़िए...



मैं मानता हूं...

कि दो लोग आपस में तर्क करते हैं, इसका ये मतलब नहीं कि वो आपस में प्यार नहीं करते...

और सिर्फ़, इसलिए कि वो तर्क नहीं करते, ये मतलब नहीं हो जाता कि वो आपस में प्यार नहीं करते...




मैं मानता हूं...

कि कभी मुझे गुस्सा आता है तो मुझे हक़ है गुस्सा करने का, लेकिन ये मुझे क्रूर होने का हक़ नहीं देता..




मैं मानता हूं...

कि हमें दोस्त बदलने की आवश्यकता नहीं, अगर हमें लगता है कि दोस्त बदल गए हैं...



मैं मानता हूं...

कि कोई आपका कितना भी अच्छा दोस्त क्यों न हो, लेकिन कभी न कभी उसकी कोई बात आपको ज़रूर आहत करेगी और आपको उसे इसके लिए अवश्य माफ़ कर देना चाहिए...






मैं मानता हूं...

कि तुम एक झटके में ऐसा कुछ कर सकते हो जो तुम्हारे दिल को ज़िंदगी भर दर्द देता रहेगा....





मैं मानता हूं...

कि मैं वैसा बनने के लिए लंबा वक्त ले रहा हूं, जैसा कि मैं दिल से बनना चाहता हूं...



मैं मानता हूं...

कि जिन्हें तुम चाहते हो, उनसे हमेशा प्यार भरे शब्दों से ही विदा लो...हो सकता है कि तुम आखिरी बार उन्हें देख रहे हो...



मैं मानता हूं...

कि आप बहुत आगे तक जा सकते हैं, ये समझने के बाद भी कि अब और नहीं चला जा सकता...



मैं मानता हू..

कि जो भी हम करते हैं, उसके लिए हम ही ज़िम्मेदार है...ये मायने नहीं रखता कि हम अपने को गलत समझते हैं या सही...



मैं मानता हूं...

कि हमें अपने व्यवहार को काबू में रखना चाहिए, नहीं तो वो आप पर काबू कर लेगा...



मैं मानता हूं...

कि हीरो वो होते हैं जो नतीजे की परवाह किए बिना वही करते हैं, जो कि होना चाहिए...और जब ऐसा किए जाने की सबसे ज़्यादा आवश्यकता है...



मैं मानता हूं...

धन गिनती गिनने का संक्रमित तरीका है...




मैं मानता हूं...

कि कभी आप कठिनाई में हो और महसूस कर रहे हों कि जिनसे तुम्हे ठोकर मिलने की सबसे ज्यादा उम्मीद हो, वही तुम्हारी मदद के लिए सबसे आगे खड़े होते हैं...



मैं मानता हूं...

कि परिपक्वता इस बात से तय नहीं होती कि आप जीवन में कितने बसंत देख चुके हो, ये निर्भर करती है कि आपको जीवन में क्या-क्या अनुभव हुए और उनसे आपने क्या सीखा...




मैं मानता हूं...

कि हमेशा ये काफ़ी नहीं होता कि दूसरे आपको माफ़ कर दें, कभी-कभी आपको खुद को माफ़ करना भी सीखना चाहिए...




मैं मानता हूं...

कि तुम्हारा दिल कितनी भी बुरी तरह से क्यों न टूटा हो, लेकिन दुनिया आपके दुख के लिए रुकेगी नहीं...



मैं मानता हूं..

कि हमारे परिवेश और परिस्थितियों ने इस बात को प्रभावित किया कि हम जीवन में क्या बने...लेकिन हम जो बने, उसके लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ हम ही ज़िम्मेदार हैं...



मैं मानता हूं...

कि किसी सीक्रेट को जानने के लिए आपको ज़्यादा व्याकुलता नहीं दिखानी चाहिए...हो सकता है कि सीक्रेट को जानने के बाद आपका जीवन ही हमेशा के लिए बदल जाए...



मैं मानता हूं...

दो लोग बिल्कुल एक जैसी चीज़ को ही देखते हैं, लेकिन उनका देखने का नज़रिया बिल्कुल अलग हो सकता है...



मैं मानता हूं..

कि आपका जीने का तरीका कुछ ही घंटों में उन लोगों की वजह से बिल्कुल बदल सकता है, जो आपको बिल्कुल नहीं जानते...




मैं मानता हूं...

कि आपके सम्मान में दीवार पर कितने भी प्रमाण-पत्र क्यों न टंगे हो, ये साबित नहीं करता कि आप अच्छे इनसान भी हो...




मैं मानता हूं...

कि जिन लोगों की आप ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा फ़िक्र करते हैं, वही आपसे जल्दी ही दूर कर दिए जाते हैं...



मैं मानता हूं...

कि ज़रूरी नहीं कि सबसे ज़्यादा खुश वहीं लोग हो जिनके पास ज़िंदगी का सब कुछ बढ़िया उपलब्ध हो, सबसे ज़्यादा खुश वो हैं जो जैसा भी मिले उसी में से ही बढ़िया निकाल लेते हैं...



ईश्वर आपका शुक्रिया, उन सभी अच्छे लोगों के लिए जिन्होंने जीवन-यात्रा में हमारी मदद की...






ईश्वर आपका भला करे...



(ई-मेल से अनुवाद)

37 टिप्‍पणियां:

  1. खुशदीप भाई
    बहुत बढिया गांठ बांधने लायक बाते है।
    आभार

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  2. आप मानते हैं

    इसका सीधा सा मतलब है

    कि काफी कुछ जानते हैं।

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  3. गागर मे सागर के जॆसे हॆ आपका ये लेख..आभार
    Ashu

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  4. बहुत लंबा पाठ है। पूरा याद करने लायक। इस में से जो मैं नहीं जानता गांठ बांध लिया है।

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  5. जितना सब कुछ आप मानते है उनमें से थोड़ा बहुत मैं भी मानता हूँ अब आगे से कोशिस रहेगी की और ज़्यादा विचारों पर गौर करूँ क्योंकि सभी बातें मानने योग्य है...एक बेहतरीन पोस्ट इसके लिए बधाई खुशदीप भाई

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  6. सीखने योग्य पाठ...आदर्श जीवन के लिए उपयोगी मार्गदर्शन!! आभार.

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  7. आपको बडे अच्‍छे ईमेल मिला करते हैं .. जीवनोपयोगी बातें बताने का शुक्रिया !!

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  8. आदरणीय
    खुशदीप सहगल जी
    मैं भी आपकी अधिकांश बातें मानता हूँ , लेकिन मानने भर से कोई फर्क नहीं पड़ता, जब तक कि हम इन " सीप के मोतियों" का मूल्य समझते हुए इन पर अमल न करें .
    मैं तो बस यही अपेक्षा करता हूँ कि काश लोग पढ़ कर कुछ प्रतिशत ही सही , अमल करना तो शुरू करें.
    http://hindisahityasangam.blogspot.com
    - विजय तिवारी " किसलय "

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  9. मैनें गांठें बाँध ली है....याद रखूंगा....खुशदीप ..याद रखूंगा...

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  10. मैं मानता हूं...
    कि पोस्ट बडी लम्बी है लेकिन इस का मतलब यह नही की रुचिकर नही, अरे बहुत चंगी है जी

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  11. भाई ..अभी जल्दी में हूँ, मैं मानता हूँ कि मैने इसे नहीं पढ़ा ।

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  12. मैं मानता हूं आपके दुआरा लिखी सभी बातें मानने योग्य हैं....

    थोड़ी बहुत मैं मानता हूँ और शेष सभी आगे से मानने की व अमल में लाने की कोशिश रहेगी..........

    मार्गदर्शन के लिये आभार.....

    जय हिंद

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  13. इतनी गहरी बातें सब एक जगह!
    आसमान में टिमटिमाते तारों की तरह था..
    सबका अध्ययन और पालन ज़रूरी है..

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  14. कि दो लोग आपस में तर्क करते हैं, इसका ये मतलब नहीं कि वो आपस में प्यार नहीं करते...

    और सिर्फ़, इसलिए कि वो तर्क नहीं करते, ये मतलब नहीं हो जाता कि वो आपस में प्यार नहीं करते...

    pahle waale mein doosri do lines mein jo 'nahi' hai shayad nahi hona chahiye...khair aap dekh lijiyega...
    saari baatein ekdam sahi hain...chahti hun ki inko apne jeewan mein bhi lagoo karun...lekin kya pata kitna ho paayega...
    khushdeep ji , hamesha ki tarah bahut hi umda baatein...aur ek behtareen post...
    aabhar...

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  15. Bahut acchi baatein bataai aapane is post ke madhyaam se pad kar bahut accha laga jivan me hamesha kaam aaengi...bahut bahut dhanywaad!

    उत्तर देंहटाएं
  16. कि ज़रूरी नहीं कि सबसे ज़्यादा खुश वहीं लोग हो जिनके पास ज़िंदगी का सब कुछ बढ़िया उपलब्ध हो, सबसे ज़्यादा खुश वो हैं जो जैसा भी मिले उसी में से ही बढ़िया निकाल लेते हैं...
    इसीलिए तो हम इतना खुश रहते हैं .....
    कि आपके सम्मान में दीवार पर कितने भी प्रमाण-पत्र क्यों न टंगे हो, ये साबित नहीं करता कि आप अच्छे इनसान भी हो...

    हाँ ...हमें कहाँ किसी प्रमाणपत्र की जरुरत है ....:):)

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  17. गाँठ बाँधने लायक बढ़िया बातें लेकिन शायद ही कोई इन सभी पर अमल कर पाता हो

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  18. सुंदर और बहुत ही उपयोगी, आभार आपका.

    रामराम.

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  19. मैं मानता हूं आपके दुआरा लिखी सभी बातें मानने योग्य हैं....
    पर मानता कोंन है.........

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  20. waahji kya baat hai./..jaldi jaldi keh kar padhwa bhi liya...

    :-) khair achhi seekh di aapne

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  21. भैया कोई आपसे सीखे......क्या कहूँ आप्त वचन .सूक्तियां, अमर वचन,.....मैं कई बार सोचता रहा ..लेकिन अभी आ ही गया पोस्ट पर और बस पढता गया..पढता गया..

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  22. बहुत ही उपयोगी बातें.....गाँठ बाँध कर रखने लायक ...... मनन करके इतने अच्छे अनुवाद का...शुक्रिया

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  23. कल शहर से बाहर थी तो ब्‍लाग जगत छूट गया अत: आपकी इतनी बेशकीमती पोस्‍ट आज देख पा रही हूँ। सारी ही बाते बहुत अच्‍छी है, कुछ बातों का तो अनुभव भी है। आपका आभार इतनी अच्‍छी पोस्‍ट लगाने के लिए।

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  24. Aaj to post par moti hi bikher diye aapne.. wo bhi anmol moti.. jeevan bhar kaam aane wale.

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  25. बेहतरीन बातें
    इत्मिनान से पढा है

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  26. बहुत ही सुन्दर. शिक्षाप्रद. ऐसी बातें होनी चाहिए
    पोस्ट में.

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  27. मियां आजकल बहुत ज्ञान बांटा जा रहा है , ज्ञानियों में ।
    आखिरी वाला सर्वोत्तम ।

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  28. ओह पढता ही चला गया..कुछ को बार-बार..!

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  29. मैं मानता हूं...
    कि पोस्ट बडी लम्बी है लेकिन इस का मतलब यह नही की रुचिकर नही, अरे बहुत चंगी है जी

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  30. सीखने योग्य पाठ...आदर्श जीवन के लिए उपयोगी मार्गदर्शन!! आभार.

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  31. जी मैं मानता हूं ...कि मैं मैं हूं.....आखिर तक मैं ही हूं औऱ कुछ नहीं....जो ऊपर लिखा है वो ही मैं हूं...और कुछ नहीं

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