मंगलवार, 9 मार्च 2010

सृजन का संतुलन...खुशदीप

ऊपर वाला ब्रह्मांड को बनाने की प्रक्रिया में था...साथ ही अपने मातहतों को सृष्टि का सार बताता भी जा रहा था...देखो, सृजन के लिए सबसे ज़रूरी है, संतुलन...

मसलन हर दस हिरण के पीछे एक शेर होना चाहिए...

इसी तरह मेरे देवदूतों, दुनिया में  अमेरिका नाम का देश है...मैंने उसे समृद्धि और धनधान्य दिया है तो साथ ही इनसिक्योरिटी और तनाव भी दिया है...

यहां अफ्रीका है...ये कुदरत के नज़ारों से मालामाल है लेकिन मौसम की सबसे बुरी मार भी यहीं देखने को मिलती है...

इसी तरह साउथ अमेरिका है, मैंने उन्हें बहुत सारे जंगल दिए हैं, लेकिन साथ ही बहुत कम ज़मीन दी है...जिससे उन्हें जंगल काटने का मौका मिलता रहे...


तो तुमने देखा हर चीज़ संतुलन में है...

तभी एक देवदूत ने पूछा कि पृथ्वी पर ये सुंदर सा कौन देश नज़र आता है...

ऊपर वाला...आहा...ये तो दुनिया का ताज है...भारत...मेरी सबसे अनमोल रचना..

यहां समझदारी से काम लेने वाले और मित्रवत व्यवहार करने वाले लोग हैं...


यहां कल-कल बहते झरने, नदियां और मनोरम पहाड़ हैं..


संस्कृति है जो महान परंपराओं की पहचान है...




तकनीकी तौर पर कुशाग्र और सोने के दिल वाला है ये देश...


ये सब कहने के बाद ऊपर वाला ख़ामोश हो गया...

तब तक सवाल पूछने वाला देवदूत हैरान-परेशान हो गया...आखिर पूछ ही बैठा...आपने तो कहा था कि हर चीज़ संतुलन में है...फिर भारत...

ऊपर वाले ने शांत भाव से जवाब दिया...

प़ड़ोसियों को देखो, जो मैंने भारत को दिए हैं...

34 टिप्‍पणियां:

  1. बॉस, आज तक का मास्टर स्ट्रोक। a big salute!

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह जी सच बोलने का एक यह भी रुप, बहुत सुंदर रचना, मकखन आज कल क्या छूट्टी पर गया है?

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी न सचमुच में पिटाई कर देनी चाहिए ...
    ये मेरा संतुलन वाला कमेन्ट है ..
    बिना मतलब के इतना अच्छा लिखते हैं आप...
    हाँ नहीं तो...!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. हा हा!! थोड़ा खराब बना देते मगर पड़ोसी तो कायदे के देते.

    उत्तर देंहटाएं
  5. khushdeep bhai,
    agar aise padosi na hon to kaun achchha kahega?
    isliye bhagvan sada hi achchhe logon ke padosi aise hi deta hai jisse ve sudhar jayen.......par yah sab unki marji par hota hai ki kitna sudharana chahte hain.

    abhar

    उत्तर देंहटाएं
  6. पडोसी जो भारत को दिए हैं ....छोटे से बड़े ...सभी आँखे दिखाते हैं ....यहाँ तक कि वे भी जिनका अस्तित्व भारत के कारण ही संभव हो पाया .....क्यों ...?

    उत्तर देंहटाएं
  7. पड़ोसी चाहे जैसे भी हो पर "Love Thy Neighbors"!

    उत्तर देंहटाएं
  8. मेरा हाल भी भारत जैसा ही है।ज़बरदस्त लिखा है,ऐसे ही नही आपकी कलम और आपको सलाम करते है हम।बहुत बहुत बढिया दिल जीत लिया खुशदिल भाई आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  9. देवदूत ने कहा कि ये ब्‍लागर क्‍या लिखते हैं। इनका संतुलन नहीं है? है ना बस हमने खुशदीप दे रखा है सभी का संतुलन करता रहता है। भई क्‍या कमाल करते हो? कहीं ऐसा नहीं हो कि ब्‍लागर भी आपके लिए भारत रत्‍न की मांग करने लग जाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  10. भैया...बहुत ही शानदार पोस्ट..... संतुलन को कितने अच्छे से डिस्क्राइब किया है आपने....

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  11. मुझे तो खुशदीप की लेखनी मे संतुलन लगा । बहुत अच्छी पोस्ट आशीर्वाद्

    उत्तर देंहटाएं
  12. आज बहुत दुखी हूँ.... इस आभासी दुनिया में कभी रिश्ते नहीं बनाने चाहिए... कई रिश्ते दर्द देते हैं.... बहुत दर्द देते हैं... ऐसा दर्द जो नासूर बन जाता है...

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही बढ़िया पोस्ट....और ये महफूज़ को क्या होगया......झट से दुखी हो जाते हैं.... कौन सा रिश्ता बना लिया,महफूज़ मियाँ जो,इतना दर्द दे गया.??

    उत्तर देंहटाएं
  14. ओह अच्छा तो ये सारा सिस्टम ऊपर से ही ऐसा है और यहां नेता सब खामख्वा में कभी समझौता एक्सप्रेस चला चला के संतुलन को गडबडाने में लगे रहते हैं ....
    अजय कुमार झा

    उत्तर देंहटाएं
  15. एक चुटकले से पोस्ट बनाना कोई आप से सीखे.... और भारत भी पडोसीयों से बहुत कुछ सीख रहा है ;)

    उत्तर देंहटाएं
  16. गज़ब की अभिव्यक्ति की आपने,अनूठा तरीका,अच्छा लेख.

    विकास पाण्डेय
    www.विचारो का दर्पण.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  17. अरे क्या खुशदीप जी ...
    दर्द की दूकान यहाँ भी लगी हुई है...
    सच्ची.... इतनी पिटाई कीजिये महफूज़ की कि हाथ-पाँव का दर्द जाए ही न....हाँ नहीं तो...!!

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत ही बढ़िया पोस्ट लगी हाँ नहीं तो ??????

    उत्तर देंहटाएं
  19. कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नही मिलता...सही बात कही आपने..

    उत्तर देंहटाएं
  20. A+++++.....

    आजकल ग्रेडिंग का चलन है........

    उत्तर देंहटाएं
  21. ऐसे पड़ोसी भगवान किसी को ना दे
    मगर कुछ तो हमने खुद मिल जुल कर बड़ी खुशी खुशी बनाए है

    है ना ?

    उत्तर देंहटाएं
  22. aapne kaat-chhant kar aur behtar bana diya is chutkule ko.. kabhi gaur se dekhiyega.. har chtkula apne aap me ek gambheer vyangya simete hota hai.. :)
    Jai Hind...

    उत्तर देंहटाएं