सोमवार, 8 मार्च 2010

क्या हम बीमार हैं...खुशदीप

जी हां, ठीक पढ़ा आपने...क्या हम सब बीमार हैं...आप कहेंगे कि भईया तुम अपनी निबेड़ो, हम भले-चंगों को साथ क्यों लपेटते हो...लेकिन मेरी इल्तज़ा ये है कि पहले इस पिक्चर पोस्ट को गौर से पढ़ लीजिए...क्या हम वाकई स्वस्थ हैं...

मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर के क्लिनिक में रूटीन चेक-अप के लिए पहुंचा...रिपोर्ट के बाद पक्का हो गया कि मैं बीमार था...




जब ऊपरवाले ने मेरा ब्लड प्रेशर चैक किया तो मेरे अंदर संवेदना बहुत कम थी...





जब मेरा टेम्प्रेचर लिया गया तो थर्मामीटर पर 40 डिग्री के साथ अवसाद नोट किया गया...





मेरा ईसीजी लिया गया तो पता चला कि मुझे 'प्यार के कई बाइपास' की जरूरत हैं क्योंकि मेरी नाड़ियां अकेलेपन से ब्लॉक थी और खाली दिल तक नहीं पहुंच सकती थीं...



मैं हड्डी और जोड़ एक्सपर्ट के पास गया क्योंकि मैं अपने भाई से कंधे से कंधा मिला कर नहीं चल सकता था...क्योंकि मैं दोस्तों को गले नहीं लगा सकता था...मुझे ईर्ष्या का फ्रैक्चर जो हुआ था...





जब मेरी आंखों का टेस्ट हुआ तो मुझे दूर का कम दिखाई देता था...क्योंकि मैं अपने भाई और बहनों की खामियों के सिवा कुछ देख ही नहीं सकता था...





जब मैंने कम सुनने की शिकायत की तो डायग्नोस में पाया गया कि मैंने दिन प्रतिदिन के आधार पर खुद तक आने वाली ईश्वर की आवाज़ सुनना बंद कर दिया है....




इस सबके लिए ईश्वर ने मुझे मुफ्त परामर्श दिया...मैं जब क्लिनिक से निकला तो ऊपर वाले की दया से ठान चुका था कि जो भी सत्य के शब्दों के साथ प्राकृतिक उपचार मुझे सुझाया गया है, उस पर पूरा पूरा अमल करूंगा..





हर सुबह  कृतज्ञता का एक गिलास लूंगा...





जब काम पर जाऊंगा तो शांति का एक चम्मच लूंगा...




हर घंटे एक कैप्सूल संयम, एक कप भाईचारा और एक गिलास विनम्रता का लूंगा...



घर लौटने पर एक खुराक प्रेम की लूंगा...





बिस्तर पर जाते वक्त दो गोली विवेक की लूंगा...




दिन भर दुख और हताशा के साथ जो सामना हुआ, उसके आगे हार नहीं मानूंगा

ऊपर वाला जानता है, तुम कैसा महसूस करते हो...

ऊपर वाला पूरी सटीकता के साथ जानता है कि तुम्हारी ज़िंदगी के साथ क्या किया जाना है...



तुम्हारे लिेए ईश्वर का उद्देश्य बिल्कुल साफ और फिट बैठने वाला है

वो तुम्हे वो सब दिखाना चाहता है जो तुम सिर्फ जीने से ही समझ सकते हो, तुम किस अंदाज़ से और कहां रह कर जी रहे हो...


27 टिप्‍पणियां:

  1. This post is one of the most optimistic and impressive posts I have ever seen. I am unable to count the value of this post. ANMOL. Giving a pious message. Thanks a lot for such a wonderful post

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  2. इसमें इतना और जोड़ दीजिये..
    इस क्लिनिक के खुलने का समय " जब आप पैदा हुए "
    इस क्लिनिक के बन्द होने का समय " जब आपकी आँखें बन्द होंगी "
    मेरी दुआ यही है कि यह क्लिनिक कभी बन्द न हो । ताकि बीमारों का इलाज़ चलता रहे ।

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  3. भैया ....यह पूरा खुल ही नहीं रहा है.... फोटो तो बिलकुल भी नहीं खुल रही है.... शायद मेरे कंप्यूटर में कोई प्रॉब्लम हो....?

    जय हिंद....

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  4. इस पोस्‍ट की प्रशंसा के लिए शब्‍द नहीं है मेरे पास .. क्‍या कहूं ??

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  5. संगीता पुरी जी व शरद कोकास जी से अक्षरक्षः सहमत.......

    ऐ खुशदीप तुझे सलाम............

    जय हिंद

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  6. जय हो...बेहतरीन पोस्ट.

    क्लिनिक चलता रहे...हम सुधरते रहें.

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  7. Sharad bhaia ki baat suniye wo ekdam sahi kah rahe hain.. aur aapne bataya nahin ki itne beemar hain.. wapas aaun kya koi jaroorat ho to?? :) haan vaise Charak Samhita ke anusar is dunia me kabhi koi bhi kisi samay poorna swasth nahin ho sakta..
    Jai Hind...

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  8. तारीफ के लिए शब्द खोजे नहीं मिल रहे......

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  9. गाहे बगाहे इस क्लिनिक में जा आये सभी तो कोई रोगी नहीं रहेगा ....ना किसी को रोगी बनाएगा ....
    अंतरात्मा से साक्षात्कार को प्रोत्साहित करती आपकी इस लाजवाब पोस्ट के लिए बहुत आभार ....

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  10. भईया, मैं इसमें कुछ और जोड़ना चाहता हूँ..
    लेकिन यह ऍथिक्स ( आचार सँहिता ) के विपरीत होगा ।
    साथ ही आजकल मुझ पर पोस्ट अतिक्रमण का मुकदमा भी चल रहा है । सो, आज तो बस दूर से सलाम
    यह सलाम तुम्हें नहीं बल्कि पोस्ट को दिया है

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  11. वक़्त लगेगा...

    पर आप ठीक हो जायेंगे..

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  12. बहुत शानदार और संग्रहणीय पोस्ट ! शुभकामनायें खुशदीप भाई !

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  13. खुशदीप जी
    अब क्‍या कहें, शब्‍द ही नहीं हैं शेष। इतनी मधुर पोस्‍ट, यह तो सारे ही मिष्‍ठान्‍नों से बड़ी है। लगता है आज महिला दिवस का सभी उपहार दे रहे हैं, अपनी बेहतरीन पोस्‍ट देकर। बधाई।

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  14. बहुत ही बढ़िया पोस्ट....मन खुश हो गया....

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  15. वाह बहुत अच्छी लगी पोस्ट। मै दो दिन दिली थी बहुत मन था खबर लेने आने का मगर समय नही निकाल पाई। पिछली पोस्ट जरा फ्री होते ही पढती हूँ। आशीर्वाद ।

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  16. बहुत सुंदर पोस्ट, जो भी इस पोस्ट को पढेगा उसे कुछ तो लाभ जरुर होगा, फ़िर दोबारा पढेगा तो फ़िर कुछ लाभ होगा, काश हम सब इस पर अमल लाये तो कोई रोगी ही ना रहे.
    धन्यवाद

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  17. अरे सारा इलाज़ मुफ्त में बता दिया ।
    ये भी नहीं सोचा हम डॉक्टरों का क्या होगा।
    चलिए परहेज़ हम बता देंगे , लेकिन बिना फीस के नहीं।

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