सोमवार, 1 मार्च 2010

ये अंदर की बात है...खुशदीप

जब एक अंडा बाहर की ताकत से टूटता है तो एक जीवन का अंत होता है....



अगर अंडा अपने अंदर की ताकत से फूटता है तो एक जीवन का उदय होता है...





महान कार्य हमेशा अंदर से ही शुरू होते हैं....

34 टिप्‍पणियां:

  1. महान कार्य हमेशा अंदर से ही शुरू होते हैं....<
    सचमुच !!

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  2. खजुराहो के मंदिरों मे यही बताया गया हैं।
    शिल्पकारी बाहर है अंदर नही।
    अंदर उपासना का केन्द्र है,
    बाहर मे संसार हैं।
    अर्थात अंदर मे राम है
    बाहर काम है।
    सृजन अंदर से होता है।
    कम शब्दों मे बहुत अच्छी चित्रमय पोस्ट
    होली की बधाई
    अभी पंचमी तक चले्गी।

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  3. बिलकुल सही। मुख्यतः अंतर्वस्तु और आंतरिक अन्तर्विरोध ही किसी वस्तु को बदलते हैं। बाह्य ताकतें मदद तो कर सकती हैं। लेकिन निर्णायक नहीं हो सकतीं। वे जल्दबाजी में अंडे को तोड़ कर चूजे का जीवन नष्ट कर सकती हैं।

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  4. खुशदीप सर, आज आप की पोस्ट की लंबाई काफ़ी कम है, लेकिन संदेश हमेशा की तरह वजनी है। बहुत अच्छी पोस्ट लगी, बधाई।

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  5. वाह वाह भाई जी क्या बात कही है। मगर आजकल तो अंडर की बात का चलन ज़्यादा है जी। हा हा।

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  6. आपकी रचना बहुत ही बढ़िया लगी , आपको होली की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ।

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  7. बहुत गहरी ओर सुंदर बात. धन्यवाद

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  8. बड़ी अंदर की बात बताई..आभार!

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  9. ye to bilkul hi naya hai.... aur bahut hi prerak... thanks bhaia.. Jai Hind..

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  10. यह केवल अंडे का फंडा नहीं है ज़िन्दगी को ठीक करने का डंडा है ।

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  11. आओ सुनाऊ तुम्हें अन्डे का फ़न्डा
    ये नहीं प्यारे कोई बन्दा
    इसमें छुपा है जीवन का फ़लसफ़ा

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  12. सार्थक दर्शन दिया.
    वाकई

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  13. are baap re !!
    kya baat kah di..lagta hai andar kafi tod-fod hui hai tabhi ye jeewan prerak post ka uday hua hai..
    haan nahi to..

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  14. आपकी हर प्रविष्टि एक नया सन्देश और प्रेरणा देती है ....

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  15. अंडे का गिर कर टूटना और अंडे के टूटने से चूजे का निकलना तो सभी देखते हैं मगर दार्शनिक वही कहलाता है जो इस टूटन में जिंदगी के सार अंश का दर्शन करा सके.
    ..वाह!

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  16. ये भी बढ़िया है..

    होली की शुभकामनाएँ

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  17. बहुत बढ़िया सन्देश खुशदीप भाई !

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  18. ये अन्दर की बात है, मेरे अन्दर तूफ़ान चल रहा है.

    सोलिड बात.

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  19. चंद शब्दों और एक तस्वीर के माध्यम से इतनी बडी गहरी बात कहने का हुनर शायद खुशदीप मे ही है। अतिउत्तम प्रस्तुती। आशीर्वाद

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  20. बहुत ही मजेदार और होली पर चोखा पोस्ट... ऐसा यहाँ मिल सकता था. निराश नहीं हुआ मैं... दरअसल स्वाभाव मुताबिक सबको आपने अच्छा विभाग दिया है... सभी रंग हैं यहाँ...

    यह कमेन्ट कल की पोस्ट के लिए है... शुक्रिया...

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  21. ब्‍लॉग पर पोस्‍ट तो अंदर से फूट गईं

    मान लिया

    पर टिप्‍पणियां क्‍यों नहीं अंदर से

    फूट फूट फूट फूट कर इतनी बाहर निकलतीं

    कि सब लूट लेते।

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  22. भूल गये ना, बाकी का कथासार ?
    कथासार यह है कि, अँदर की चेतना ही सृजन की कारक होती है..
    चेतनाहीनता कालाँतर में सड़न बदबू और सँक्रमण की शिकार हो जाती है..या कोई उसे गड़प कर लेता है, अब वो उबाल कर आत्मसात न कर पाय तो उसके मँथन करते रहने से ऑमलेट से ज़्यादा कुछ हासिल न होने का..

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  23. बढिया सरजी,हम तो बस सोचते ही रह गये।

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  24. dr sahib ne fir aap ko correct kiya hai ..???khoji dimag ki anokhi avm uttam khoj..uttam uphar..

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  25. खुशदीप भाई , एक अच्छी पोस्ट की यही पहचान है । कम शब्दों में गहरी बात --फिर चर्चा चलती रहे दिन रात।
    बढ़िया ।

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  26. बाहर से टूटे तो तुरंत अकेले खा सकते है और अन्दर से टूटे तो तीन महीने बाद एक दावत हो सकती है .

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