मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

ब्लॉगगढ़ में आ गया गब्बर का बाप...खुशदीप

गब्बर...

अरे ओ सांबा...ज़रा देख तो सरकार हमार लई कौन सा नया पोस्टरवा लगाए रे ब्लॉगगढ़वा में...

सांभा...

कोई पोस्टरवा वोस्टरवा नई लगाए सरकार तोहार...मरगिला कुत्ता भी न डरे इब तोरे नाम से...

गब्बर...

इब सरदार यो दिन देखेगा के...सरकार का राम नाम सत कराना पड़ि का...

सांभा...

सरकार कहण लाग रि...कह देई गब्बरवा से...इब उसका भी बाप ब्लॉगगढ़वा में खूंटा गाढ़ देओ से...

गब्बर...

हमरा बुढ़ऊ हरि सिंह (गब्बरवा का बापू) तो शोले से भी पहल का टैं बोल गयो से...ई कौण हमार दादी के नए जणे की बात करण लागरि सरकार...

सांभा...

सरदार..ईब तो तोरी भलाई इसी में लाग री के तू भी मेरी तरियो चट्टान पे चढ़ धूनी जमाई ले...नहीं वो तेरा बाप तोहार भी गिच्ची दबा देईगा...



गब्बर...

के नाम है रे ब्लॉगगढ़वा के इस नये आंतकवा का...

सांभा...

उसका नाम लेण से ही भूचालवा आ जाई...बड़े से बड़ा ब्लॉगरवा सूखन पत्तन की तरियो हिलण शुरू कर देओ से...

गब्बर...

बतवा ही फोड़त जाइगा या नाम भी बताई ओस सुसर भूचालवा का...

सांभा...

सरदार, तू बुढ़ऊ हो गया से...मेरे घुटने खुद इब हर वक्त दुखण लाग...नाम सुणान के बाद तोरा क्रियाकर्म कराण चट्टान से मैं कोई ना उतरूं...

गब्बर...

नाम बताई रिया या मार दूं ढेला तोहार खोपड़िया पे...(कारतूस खरीदन लई तो पहल ही एक धेला भी न बचयो था गब्बरवा पे...)

सांभा...

सरदार तू जिद करण लाग रिया... ते दिल पे हाथ रख, नाम सुण...आतंक के इस नये भूचालवा का...नाम से...चिट्ठा चर्चा....

गब्बर...

सांभा तू हमार नमक खई...ईब हमार टेंटूआ दबा देई...




स्लॉग ओवर...

सुनो...सुनो...सुनो...


सारे ब्लॉगगढ़ वालो कान खोल के सुनो...


चिट्ठा चर्चा की महामारी फैल चुकी है...


मोटी चमड़ी करने वाला टीका फौरन लगवाओ...


महामारी के बीच विशुद्ध पोस्ट लिखने वाला लाओ, दुर्लभ जीव का सम्मान पाओ...


सुनो..सुनो..सुनो...

21 टिप्‍पणियां:

  1. ओह ! हो.... मैंने सोचा कि आप मेरा नाम लेंगे.... वैसे मैं अपना लाठी-बल्लम भूल आया हूँ... अगली बार घर जाऊंगा तो लेते आऊंगा.... बहुत ज़रूरत है इसकी.... आजकल भूत बहुत पैदा हो गए हैं... लात से ही मानते हैं.... ??..??

    जय हिंद..

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  2. हा हा हा-
    गब्बर की भी हवा गुम हो गयी नाम सुन के।

    गब्बर-इ गांव मे केतना चर्चा है रे सांभा।
    सांभा- सरदार चर्चा ही चर्चा है।

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  3. " bhaiya ye mahamari to fail chuki hai ...haaaaaaaaaaaa haaaa "


    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  4. अरे नहीं भैया.. बड़ी बड़ी आंधियां, महामारी, सुनामी आये और चले गए लेकिन इतिहास गवाह है की ब्लॉगजगत को कोई नहीं मिटा सका... अच्छा है की हम अपना उद्देश्य 'हिंदी की उन्नति' ध्यान में रखें तो सब ठीक हो जायेगा... वर्ना अंग्रेजी ब्लॉग वाले हमर मजाक यही कह के उड़ायेंगे की 'निकले थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास'...
    जय हिंद...

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  5. निकट भविष्य में हिन्दी ब्लागिंग,ब्लागर्स की कुछ नई परिभाषाएं गढी जाने वाली है........

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  6. खुशदीप जी,
    आज की आपकी पोस्ट एतना ज़बरदस्त है एतना ज़बरदस्त है की का कहें अब..
    इसके ज़बर्दास्तिता ने हमको निशब्द, नकारा कर दिया ...अब हम तभी से कोई धाँसू टिपण्णी देने का सोच रहे हैं...लेकिन दिमागवा आज जबब्वे दे दिया है...
    ऐसन महामारी के लिए कौनो वेक्सीन-उक्सीन भी तो निकालना पड़ी....
    और एक बात ....हम तो already मोटा चमड़ा का हो गए हैं.....जिसके कारण 'थेथर' हो गए हैं...बल्कि अब हमलोग....एक उपाधि का भी ईजाद करिए लेवें ...'थेथर ऑफ़ दी मन्थ', 'थेथरों के थेथर', 'थेथराधिपति', 'थेथरेश्वर' अथवा 'थेथर महाराज' ..काहे की जब चमड़ी मोटा हो जाए तो ई गुण बहुते जियादा परिलक्षित होने वाला है...

    बाकि आज कल ...तो सब यही गितवा गा रहा है..
    चली चली फिर चली चली चली चिट्ठों की चर्चा है चली...
    अपने पोस्ट को हर ब्लोगाना ढूढ़ता है चर्चा की गली...


    स्लाग ओवर ..तो चीज़ बड़ी है मस्त मस्त ....

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  7. टीका ही लगवाना पड़ेगा..महामारी है कि रुकने का नाम नहीं ले रही..सॉलिड!!

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  8. मोटी चमड़ी का टीका ...आईडिया बुरा नहीं है ...टीका इजाद हो जाये तो बता दीजियेगा ...मगर हमको इससे क्या फर्क पड़ेगा ...जहर भी कभी जहर पर असर करता है ...मगर क्या पता हो भी जाए ...लोहा ही तो लोहे को काटता है .....
    वैसे इस दुनिया में थेथर होकर ही जीना संभव है ....

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  9. खुशदीप भाई,
    मेरा मानना है चिट्ठा चर्चा चिट्ठा चर्चा है .और पहला प्रयोग था .इस्लिये बुजुर्ग भी माना जाये उसे . और बुजुर्गो की इज़्ज़त करनी चहिये

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  10. ये वो मर्ज़ है की ---मर्ज़ बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की।
    ज़नाब ये ड्रग फीवर है । सारी दवाइयां बंद कर दो , बुखार अपने आप ठीक हो जायेगा।

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  11. दीपक ने अपनी टिप्पणी में इतनी अच्छी बात कह दी हैः

    "... अच्छा है की हम अपना उद्देश्य 'हिंदी की उन्नति' ध्यान में रखें तो सब ठीक हो जायेगा..."

    कि इससे अच्छी और कोई बात हो ही नहीं सकती!

    खुशदीप जी! आपके इस अंदाज का तो कायल हो गया मैं! बहुत सुन्दर!!

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  12. ईब्ब आया सै ऊँट पहाड़ के निच्चे...
    आपके इस हिन्दी+हरियाणवी+भोजपुरी+अवधी+अंग्रेज़ी मिश्रित व्यंग्य को पढ़कर आनंद आ ग्या जी फुल्ल बटा फुल्ल

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  13. हा हा हा हा वाह हम तो पहले ही डरे बैठे हैं ---- इस महामारी से और हम को तो ये सक्रमित कर भी चुकी है---- मगर अब मैने संक्रमन को रोकने के लिये टीका लगवा लिया है अब ऐसे ब्लाग पर मास्क पहन कर ही जाया करूँगी कई किटाणू तो सच मे बहुत उग्र हैं उनके हमले से बचाव तो करना ही पडेगा----- क्या धाँसू पोस्ट लिख मारी --- खैर आने वाले समय मे इस चर्चा का रूप जरूर बदलेगा। बदलना चाहिये भी कुछ सार्थक प्रयास होना ही चाहिये। आशीर्वाद

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  14. हिल गया सँभा....हा हा हा .... क्या बात है खुशदीप जी बड़ा लगाव है चिटठा चर्चा से ?

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  15. बहुत ही सटीक व्यंग है भयाक्रांत करता हुआ
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  16. हा हा ..अच्छी मुनादी है...और व्यंग बहुत ही सटीक....

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  17. ज़बरदस्त मुनादी.....बढ़िया है...

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  18. अरे वो क्या कहते हैं ....
    मौसी से पूछ के आते हैं

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