शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

आंसू रोक कर दिखाओ इसे पढ़ने के बाद...खुशदीप

ये कहानी इंटरनेट से ही अंग्रेज़ी में मुझे किसी ने ई-मेल की है...ये कहानी अगर देश के हर इंसान को पढ़ा दी जाए, हर टीचर को पढ़ा दी जाए, हर बच्चे को पढ़ा दी जाए...मेरा दावा है इस देश की तस्वीर बदल जाएगी...

स्कूल का पहला दिन...ग्रेड पांच की क्लास में टीचर मिसेज मुखर्जी बच्चों से एक झूठ कह रही है...मैं तुम सब बच्चों से एक जैसा प्यार करती हूं...लेकिन ये कैसे मुमकिन हो सकता है...क्योंकि सबसे अगली लाइन में सिर झुकाए हुए रॉनी बैठा है...

मिसेज मुखर्जी देख रही थीं कि रॉनी और बच्चों के साथ न खेलता था, न ही मिक्स-अप होता था...उसके कपड़े भी सलीके से नहीं होते थे...देखते ही लगता था कि रॉनी को अच्छी तरह नहलाने की ज़रूरत है.... रॉनी को देखकर मिसेज मुखर्जी को यही लगता कि इस बच्चे को स्टडी में बहुत ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत है...

रॉनी के पेपर चेक होने के लिए आए तो मिसेज मुखर्जी ने सख्त टीचर की तरह मार्किंग करते हुए उन पर लाल पेन से बड़ा-बड़ा एफ ग्रे़ड (सबसे फिसड्डी) मार्क कर दिया...प्राइमरी सेक्शन की हेड होने के नाते मिसेज मुखर्जी को हर बच्चे की प्रोग्रेस पर नज़र रखनी थी...इसी प्रक्रिया में एक दिन मिसेज मुखर्जी के हाथ रॉनी के पिछली क्लासेज़ के रिकॉर्ड की फाइल भी लगी...जैसे जैसे फाइल पढ़ना शुरू किया, मिसेज मुखर्जी के चेहरे के भाव बदलते गए...

ग्रेड एक की क्लास टीचर ने लिखा था...रॉनी बेहद हंसमुख और प्रतिभावान बच्चा है...अपना काम बड़ी अच्छी तरह करता है...अच्छे संस्कार वाले रॉनी को पाकर कोई भी टीचर खुद को खुशकिस्मत समझ सकती है...

ग्रेड दो की क्लास टीचर ने लिखा था...रॉनी विलक्षण छात्र है...क्लॉस के सभी बच्चों की जान है...लेकिन कभी-कभी अपनी मां की बीमारी के चलते परेशान दिखाई देता है...दिखता है कि घर में ज़रूर रॉनी को दिक्कत का सामना करना पड़ता होगा...

ग्रेड तीन की क्लास टीचर ने लिखा...मां की मौत का रॉनी पर असर दिखने लगा है...वो अपना श्रेष्ठ दिखाना चाहता है लेकिन उसके पिता शायद पूरा ध्यान नहीं दे रहे...अगर रॉनी के बारे में कुछ विशेष न सोचा गया तो घर का माहौल रॉनी के अंदर के अच्छे छात्र को खत्म कर डालेगा...

ग्रेड चार की क्लास टीचर ने फाइल पर लिखा था...रॉनी गुमसुम रहने लगा है...न वो किसी दोस्त के साथ खेलता है और न ही बात करता है...अक्सर क्लास में सोता दिखाई देता है...


ये सब पढ़ने के बाद मिसेज मुखर्जी को अपनी गलती का अहसास होने लगा ...मिसेज मुखर्जी को तब और भी ग्लानि हुई जब टीचर्स डे पर सब बच्चों ने खूबसूरत पैकिंग और रिबन से बंधे तोहफ़े लाकर उन्हें दिए और रॉनी ने एक सादे ब्राउन पेपर में लिपटी छोटी सी भेंट उनके आगे झिझकते हुए रखी.. मिसेज मुखर्जी ने पेपर को खोला तो उसमें से निकली दो चीज़ों को देखकर और सभी बच्चे हंसने लगे...पेपर से एक हाथ का कड़ा निकला, जिसके कुछ पत्थर टूटे हुए थे...साथ ही एक चौथाई भरी परफ्यूम की बॉटल थी...

मिसेज मुखर्जी ने बच्चों की हंसी को दबाते हुए फौरन कहा...ओह कितना प्यारा कड़ा है...ये कहते हुए मिसेज मुखर्जी ने कड़ा हाथ में डाल लिया...साथ ही परफ्यूम की बॉटल से हथेली और कपड़ों पर थोड़ा स्प्रे कर लिया...अलौकिक खुशबू जैसा चेहरे पर भाव दिया...रॉनी उस दिन स्कूल खत्म होने के बाद भी मिसेज मुखर्जी से ये कहने के लिए रुका रहा...मैम, आज आपसे मुझे मॉम जैसी खुशबू आई...

उस दिन रूम में आने के बाद मिसेज मुखर्जी की आंखों से एक घंटे तक आंसू झरझर बहते रहे...उसी दिन से मिसेज मुखर्जी ने बच्चों को रटाना, लिखाना और मैथ्स पढ़ाना छोड़ दिया...इसकी जगह मिसेज मुखर्जी ने बच्चों को ज़िंदगी पढ़ाना शुरू किया...



रॉनी पर मिसेज मुखर्जी का खास ध्यान रहने लगा...जैसे जैसे मिसेज मुखर्जी रॉनी पर ज़्यादा वक्त देने लगीं, रॉनी के अंदर का प्रतिभावान छात्र लौटने लगा...जितना मिसेज मुखर्जी हौसला बढ़ातीं, उससे दुगनी रफ्तार से वो रिस्पांस देता...साल का आखिर आते-आते रॉनी क्लास के दस स्मार्ट और होशियार बच्चों में फिर गिना जाने लगा...मिसेज मुखर्जी के इस झूठ के बावजूद कि वो क्लास के सभी बच्चों को एक जैसा प्यार करती हैं...



एक साल बाद मिसेज मुखर्जी को अपने रूम के दरवाजे के नीचे कागज का नोट मिला...जिस पर रॉनी ने लिखा था...जितनी भी टीचर्स ने मुझे पढ़ाया, आप सबसे अच्छी हैं...

छह साल बाद फिर मिसेज मुखर्जी को रॉनी का एक नोट मिला...मैंने सेकंडरी स्कूल पूरा कर लिया है...क्लास में थर्ड पोज़ीशन रही है....और आप अब भी मेरी ज़िंदगी की सबसे अच्छी टीचर हैं...

चार साल बाद मिसेज मुखर्जी को रॉनी का फिर खत मिला...लिखा था...जल्दी ही कॉलेज से ऑनर्स के साथ ग्रेजुएट हो जाएगा और आप अब भी ज़िंदगी की सबसे अच्छी और पसंदीदा टीचर हैं...

तीन साल और गुज़र गए...फिर मिसेज मुखर्जी के पास रॉनी का खत आया...पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो गई है...आप अब भी मेरी ज़िंदगी की सबसे अच्छी और पसंदीदा टीचर हैं...लेकिन इस खत के नीचे रॉनी का नाम कुछ लंबा लिखा हुआ था...रॉनी के रॉय, एमडी

कहानी यही खत्म नहीं हो जाती...उसी वसंत में मिसेज मुखर्जी को एक और खत मिला...लिखा था...मुझे एक लड़की का साथ मिला है और जल्दी ही दोनों शादी करने वाले हैं...रॉनी ने ये भी लिखा था कि उसके पिता का दो साल पहले निधन हो गया, इसलिए क्या मिसेज मुखर्जी शादी में उस जगह पर बैठना पसंद करेंगी, जहां लड़के की मां बैठती है...

मिसेज मुखर्जी ने वैसा ही किया जैसी कि रॉनी ने इच्छा जताई थी....और जानते है क्या...शादी वाले दिन मिसेज मुखर्जी आशीर्वाद देने पहुंची तो उनके हाथ में वही कड़ा था और उनके पास से उसी परफ्यूम की खुशबू आ रही थी जो बरसों पहले रॉनी ने तोहफे में मिसेज मुखर्जी को दिए थे...

रॉनी और मिसेज मुखर्जी एक दूसरे को देखने के बाद दस मिनट तक गले लगे रहे...बिना कुछ बोले...आंखों से छमछम बहता पानी ही सब कुछ बोल रहा था...बड़ी मुश्किल से रॉनी (डॉ रॉनी के रॉय, एमडी) मिसेज मुखर्जी के कान में बुदबुदा सका...शुक्रिया मॉम, मेरे ऊपर भरोसा करने के लिए...शुक्रिया मुझे अपनी अहमियत का अहसास दिलाने के लिए...और मुझे जताने के लिए मैं भी बदलाव ला सकता हूं...

मिसेज मुखर्जी ने रॉनी को और ज़ोर से गले लगाते हुए कहा...नहीं मेरे बच्चे...तुम जो कह रहे हो गलत कह रहे हो, उलटे तुम मेरे वो टीचर हो जिसने मुझे पढ़ाया कि मैं भी कुछ बदल सकती हूं...तुमसे मिलने से पहले तो मुझे पता ही नहीं था कि असल में पढ़ाया कैसे जाता है...



ये अनुवाद पूरा करने के बाद मेरी आंखे पूरी तरह नम हैं...शब्द पानी से धुले लग रहे हैं...सोच रहा हूं क्या मैं भी कहीं छोटा सा ही कोई बदलाव ला सकता हूं...आप क्या सोच रहे हैं...

40 टिप्‍पणियां:

  1. मैं इस वक़्त रो रहा हूँ....

    आपको व आपकी लेखनी को सलाम......

    जय हिंद.....

    उत्तर देंहटाएं
  2. कल आपसे दिल्ली में मुलाक़ात होगी.... मैं शताब्दी से सुबह पांच बजे चलूँगा....साढ़े दस बजे पहुँच जाऊंगा.... बहुत मिलने कि तमन्ना है.... अपने प्यारे बड़े भाई से.... सबसे पहले गले मिल के रोऊंगा आपसे.....

    जय हिंद....

    उत्तर देंहटाएं
  3. महफूज़ प्यारे,
    मैंने अपनी पिछली पोस्ट पर तुम्हारे लिए एक कमेंट छोड़ा है...उसे फिर पढ़ो...तुम हंसते-मुस्कुराते ही अच्छे लगते हो...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  4. खुशदीप जी एक स्टूडेंट की प्रतिभा पहचान कर उसमें निखार लाने वाला टीचर ही सबसे अच्छा टीचर होता है..मिसेज़ मुखर्जी ने कुछ ऐसा ही किया पर टीचर और स्टूडेंट का यह प्यार धन्य है मिसेज़ मुखर्जी और धन्य है रॉनी जैसा स्टूडेंट यदि ऐसे हो तो सच में बहुत कुछ बदल जाए और अपना समाज और हम कही और होते...

    मैं बहुत बहुत आभारी हूँ आपका जो इतनी बढ़िया विचारों से सजी कहानी प्रस्तुत की..धन्यवाद खुशदीप जी..बहुत बहुत धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. आप की बात सही है। हम अपने काम के दौरान अपने सब्जेक्ट्स को सही तरीके से जान सकें और उस के अनुसार अपने काम को तय कर सकें तो ऐसे परिणाम आ सकते हैं।
    मैं अनेक हारने वाले मुकदमे अपने क्लाइंट को यह दिलासा देते हुए लड़ता रहा कि वह अंततः जीत जाएगा। उसे यह भी कहता कि लेकिन इस जीत के भरोसे वह न रहे। और जिंदगी के लिए और भी राहें तलाशता रहे। ऐसा सिर्फ इस लिए करना पड़ा कि यदि ऐसा दिलासा न मिलता तो वह क्लाइंट किसी भी दिन आत्महत्या कर लेता। उन में से अधिकांश क्लाइंट मुकदमे के दौरान इस स्थिति में पहुंच गए कि उन्हें फिर मुकदमे की परवाह ही न रही।
    कभी समय मिला तो इन क्लाइंट्स की कहानियाँ लिखूंगा।

    उत्तर देंहटाएं
  6. खुशदीप जी,

    एक काम कीजिये ..आज आप अपने हाथों को एक बार मेरी तरफ से देखिये...और कहिये..उनसे तुम बहुत अच्छे हो...

    फिर आप आईने के सामने जाइए ...खुद को देखिये और मेरी तरफ से ...एक बार कहिये....'अदा' कह रही है ....आप सचमुच बहुत अच्छे इंसान हैं...

    मेरे पास अलफ़ाज़ नहीं हैं..आपकी तारीफ के लिए...आज...!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. शीर्षक को सार्थक करता लेख
    यह लेख नहीं सत्य घटना होगी
    पर बिरले ही होते हैं ऐसे लोग

    उत्तर देंहटाएं
  8. सूर्यकांत जी,
    आपने सही पहचाना...ये सत्य घटना है...अपने देश की नहीं बाहर की...मैंने देश का टच देने के लिए सिर्फ नाम बदल दिए...उस बच्चे का नाम है Dr.Teddy Stradder MD और वो अमेरिका के जाने माने कैंसर स्पेशलिस्ट बने...टीचर का असली नाम है Mrs Jhonson

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  9. खुशदीप जी,

    अदा जी की टिप्पणी से अक्षरक्षः सहमत।

    आपकी लेखनी को सलाम।

    जय हिंद

    उत्तर देंहटाएं
  10. रोंएं खड़े हो गए, अंगेजी में कहें तो गुज बम्पस!

    उत्तर देंहटाएं
  11. कई बदनसीब है इस दुनिया मे
    जिन्हे मां का स्नेह नही मिला।
    कमी कहीं न कहीं खलती है।
    आदमी चाहे कितना ही बड़ा क्यों
    ना हो जाए।
    बालक की परवरिश मे ती्नो का हाथ होता है।
    मातृमान पितृमान आचार्यवान पुरुषो वेदा:।
    आपने भावुक कर दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत पहले यह कथा पढ़ी थी, खुशादीप लेकिन जिन्दगी की रफ्तार तो देखो. ऐसी कथाएँ भी तब याद आ रही हैं जब पुनः पढ़कर पुनः भावुक हुए जा रहे हैं.

    कैसी ये जिन्दगी है हमारी..कुछ भी देर तक असर ही नहीं करता. शायद यही वजह हो कि जिए जा रहे हैं. यही कड़ुवा सच है वरना तो ऐसे ऐसे वाकिये सामने आते हैं कि जीना मुश्किल हो जाये.

    उत्तर देंहटाएं
  13. एक सूक्ष्म नजर किसी के नज़रिये को बद्ल सकती है और फिर जीवन बदलने में समय नहीं लगता. वाकई हर टीचर को यह कहानी पढनी चाहिये.
    @ मैं भी एक अध्यापक हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  14. आंसू भी आज कहना नही मान रहें हैं,आपके दावे को झुठलाने की लाख कोशिश की मगर आंसूओ ने आंखों का बांध तोड़ डाला।

    उत्तर देंहटाएं
  15. खुशदीप जी, मैंने अनजाने में ही आज बहुत कुछ खो दिया। हिन्‍दी सम्‍मेलन में आने का बड़ा मन था, श्री अनिल जोशी से कई बार बात भी हुई लेकिन मुझे इन दिनों ही जम्‍मू रहना था। वहाँ भी नही जा पायी और यहाँ भी नहीं। मुझे मालूम नहीं था कि यहाँ अपने सारे लोग मिलने वाले हैं। आज जब देख रही हूँ कि आप सब लोगों से वहाँ मिला जा सकता था। खैर और कभी सही। आपकी पोस्‍ट पढ़कर ही आपसे नहीं मिलने का दुख हो रहा है। आपकी पोस्‍ट का टाइटल बड़ा चेलेन्जिंग था, मन ने कहा कि देखें कैसे आँसू आते हैं? लेकिन ......

    उत्तर देंहटाएं
  16. खुशदीप जी! आपकी लेखनी को नमन!

    आपकी इस प्रस्तुति में तो माता की मृत्यु के कार बचपन बरबाद हुआ है किन्तु जाने कितने बचपन खो जाते हैं माता पिता की लापरवाही के कारण। पति पत्नी के बीच कलह आज एक आम बात है और इसका प्रभाव पड़ता है बच्चों पर। मैंने अपने ही परिजनों में इस प्रकार की गफलत देखी है जिसके कारण बच्चे बिगड़ गये हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  17. सच कहा आपने. जिसने भी लिखी है कहानी बहुत अच्छी है.

    उत्तर देंहटाएं
  18. रुला तो दिया ही है ...
    ऐसे ही प्रयोग करने का परिणाम भुगत चुके हैं ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत मार्मिक पोस्ट लिखी है।यह एक प्रेरक कथा है....आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  20. बेहतरीन पोस्ट!
    शीर्षक और बेहतर सोचना चाहिये था। इस तरह के शीर्षक कमजोर पोस्ट पर रखे जाते हैं।यह मेरा अपना मानना है। जरूरी नहीं आप इससे सहमत हों!

    उत्तर देंहटाएं
  21. बहुत सार्थक लेखन ....शिक्षक और विद्यार्थी के मजबूत संबंधो को बताती हुई...बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  22. अब तो और रोना आ रहा है....... ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ .......

    उत्तर देंहटाएं
  23. BAHI WAH SCHMUCH EK ACCHI POST, RO NAHI SAKTE KYONKI BAHUT LOG PAHLE HI RO CHUKE HAIN, JARURAT HAI TO AMAL KARNE KI .

    उत्तर देंहटाएं
  24. ye kahani school ki ek workshop me padhi thi tab bhi aansoo aaye the ab bhi.bahut badiya.

    उत्तर देंहटाएं
  25. खुशदीप जी,
    आपने शीर्षक मे ही बिल्कुल सही लिखा है-
    आंसू रोक कर दिखाओ इसे पढने के बाद.
    बिल्कुल सही.

    उत्तर देंहटाएं
  26. khushdeep ji

    is waqt to sirf aansuon ka sailaab aaya huaa haiisliye kuch nhi kah sakti........maafi chahti hun........baad mein aaungi.

    उत्तर देंहटाएं
  27. बहुत ही भावुक कर देने वाली पोस्ट. आभार खुशदीप जी

    उत्तर देंहटाएं
  28. Nahi rook paa rahe hain aansuoonoo ko.
    Thanks very good post

    उत्तर देंहटाएं
  29. bahut samvedansheel post hai... duniya me achchhe bure dono tarah ke log hote hain ....hamare desh me bhi kai aise teachers mil jaaenge....

    उत्तर देंहटाएं
  30. खुशदीप भाई इस बार एक काम गुपचुप कर रहा हूं मगर अब खोलना पड रहा है ,,साल की सबसे बेहतरीन पोस्टों का संकलन कर रहा हूं , कुछ योजनाएं है उनके लिए , बस इतना ही कहूंगा अभी तो
    अजय कुमार झा

    उत्तर देंहटाएं
  31. बेबसी जुर्म है.. हौसला जुर्म है.. ज़िंदगी तेरी इक इक अदा जुर्म है...
    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  32. ाँखें तो अपनी भी नम हैं । आपकी ये पाठशाला भी सभी को बहुत कुछ सिखाती है हंसाती है कई बार प्यार और खुशी से रुलाती भी है। बहुत प्रेरक कहानी है । आशीर्वाद्

    उत्तर देंहटाएं
  33. बस...

    बहुत खूबसूरत कहानी.. शिक्षक और शिक्षार्थी के इन्ही अंतर्संबंधों पर जोर डालती आई है भारतीय संस्कृति.. बस उद्धरण और काल बदल गये हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  34. खुशदीप जी ! सप्ताहांत की व्यवस्था के चलते देर से पड़ी आपकी पोस्ट ..पर सच कहा आपने आंसू रोक सको तो रोक कर दिखाओ....वाकई नहीं रुक रहे आंसू...hats off to you and your writing .

    उत्तर देंहटाएं
  35. खुशदीप भाई,इतना अच्छा अनुवाद किया आपने इसका कि रचना और भी मर्मस्पर्शी हो गयी..

    उत्तर देंहटाएं
  36. हां ,ये कथा पहले भी पढी थी और आज भी ...
    आप बस , इसी तरह लिखते रहीये
    स स्नेह,

    - लावण्या

    उत्तर देंहटाएं