शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

प्रणब दा ! रोटी तो मिलती रहेगी न...खुशदीप

परसो ममता दी का दिन था...आज प्रणब दा का है...बजट का दिन है...प्रणब दा को फिक्र होगी...फिस्कल घाटे की...जीडीपी की...रुपया आएगा कहां से...रुपया जाएगा कहां...लेकिन आंकड़ों की बाज़ीगरी के इस वार्षिक अनुष्ठान से हमारा-आपका सिर्फ इतना वास्ता होता है कि क्या सस्ता और क्या महंगा...इनकम टैक्स में छूट की लिमिट बढ़ी या नहीं...होम लोन सस्ता होगा या नहीं...लेकिन इस देश में 77 करोड़ लोग ऐसे भी हैं जिनका प्रणब दा से एक ही सवाल है...रोटी मिलेगी या नहीं...



कल मोटे-मोटे पोथों में आर्थिक सर्वे संसद में पेश किया गया...सर्वे में सुनहरी तस्वीर दिखाई गई कि भारत ने आर्थिक मंदी पर फतेह हासिल कर ली है...अगले दो साल में नौ फीसदी की दर से विकास का घोड़ा फिर सरपट दौड़ने लगेगा...लेकिन आम आदमी को इस घोड़े की सवारी से कोई मतलब नहीं...उसे सीधे खांटी शब्दों में एक ही बात समझ आती है कि दो जून की रोटी के जुगाड़ के लिए भी उसकी जेब में पैसे होंगे या नहीं...

या दाल, चावल, आटे के दाम यूं ही बढ़ते रहे तो कहीं एक वक्त फ़ाके की ही नौबत न आ जाए...ये उसी आम आदमी का दर्द है जिसके दम पर यूपीए सरकार सत्ता में आने की दुहाई देते-देते नहीं थकती थी...चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस नारा लगाती थी...आम आदमी के बढ़ते कदम, हर कदम पर भारत बुलंद...लेकिन आठ महीने में ही आम आदमी की सबसे बुनियादी ज़रूरतों पर ही सरकार लाचार नज़र आने लगी...

महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा है...लेकिन राष्ट्रपति के अभिभाषण के ज़रिए सरकार ने गिन-गिन कर वजह बताई कि खाद्यान्न की कीमतें क्यों काबू से बाहर हो गईं...सरकार के मुताबिक...

खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई...


दुनिया में दाल, चावल, खाद्य तेल के दाम तेज़ी से बढ़े...


किसानों को फसल का ज़्यादा समर्थन मूल्य दिया गया...

ग्रामीण इलाकों में लोगों की आय बढ़ी...

ज़ाहिर है कि खाद्यान्न की कीमतें काबू से बाहर हुईं तो लोगों को राहत पहुंचाना भी तो सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है...सौ दिन में तस्वीर बदलने के दावे करने वाली सरकार ने वादा तो पूरा किया...लेकिन नई तस्वीर आम आदमी को और बदहाल करने वाली रही...विरोधी दल महंगाई पर सरकार को घेरती है तो सरकार इसे राजनीति कह कर खारिज कर सकती है...लेकिन अगर सरकार का आर्थिक सर्वे ही सरकार पर उंगली उठाता है तो स्थिति वाकई ही गंभीर है...आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि

सरकार ने सूखे और मानसून फेल होने पर खरीफ़ ( मुख्यतया चावल) की फसल बर्बाद होने का ढिंढोरा पीटा, जिससे जमाखोरियों को बढ़ावा मिला...


सरकार ने स्टॉक में मौजूद खाद्यान्न को नज़रअंदाज किया नतीजन सही तस्वीर प्रचारित न होने से आपदा जैसी स्थिति महसूस की जाने लगी...


सरकार ने रबी (मुख्यता गेहूं) की फसल अच्छी रहने का सही अनुमान नहीं लगाया


आयातित चीनी को बाज़ार में लाने में देर की गई, जिससे अनिश्चितता का माहौल बना और महंगाई को पर लग गए..


ऐसे में स्पष्ट है मानसून फेल होने से स्थिति इतनी नहीं बिगड़ी जितनी कि बाज़ार शक्तियों ने मोटे मुनाफे के चक्कर में बंटाधार किया...सरकार इन शक्तियों पर काबू पाने की जगह अपने ही विरोधाभासों में उलझी रही...कभी कांग्रेस शरद पवार को महंगाई के लिए कटघरे में खड़ा करती तो कभी पवार पूरी कैबिनेट को ही नीतियों और फैसलों के लिए ज़िम्मेदार ठहरा देते...सरकार के इसी ढुलमुल रवैये के बीच आर्थिक सर्वे जो इशारे दे रहा है, वो आम आदमी की और नींद उ़ड़ाने वाले हैं...राशन के खाने, खाद और डीजल पर से सब्सिडी वापसी की तलवार और वार करने के लिए तैयार है...आर्थिक सर्वे में विकास दर में बढ़ोतरी के अनुमान के साथ आने वाला कल बेशक सुनहरा नज़र आए, लेकिन आम आदमी की फिक्र आज की है...और इस आज को सुधारने में सरकार भी हाथ खड़े करती नज़र आती है...और शायद यही सबसे बड़ा संकट है...


स्लॉग ओवर

मक्खन के पुत्र गुल्ली के स्कूल में इंस्पेक्शन के लिए इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल समेत बड़े अधिकारी आए हुए थे...अधिकारी गुल्ली की क्लास में पहुंचे...किस्मत के मारे गुल्ली पर ही इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल ने सवाल दाग दिया...अंग्रेजी में बताओ तुम्हारे क्लास टीचर का क्या नाम है...

गुल्ली थोड़ी देर तक सोचता रहा फिर बोला...ब्युटीफुल रेड अंडरवियर...

ये सुनकर इंस्पेक्टर को गुस्सा आ गया...क्लास टीचर से मुखातिब होते हुए कहा...व्हाट नॉनसेस, यही सिखाया है बच्चों को...

ये सुनकर टीचर ने डरते-डरते जवाब दिया...जनाब सही तो कह रहा है, मेरा नाम है... सुंदर लाल चड्ढा....

18 टिप्‍पणियां:

  1. हे भगवान जल्दी से प्रणब दा को अच्छे से अंग्रेजी (इकोनोमिक्स) सिखाओ कि अच्छा सा बजट दें, नहीं तो हर बार की तरह सुंदर लाल चड़्ढ़ा ही मिलने वाला है।

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  2. यह सरकार बार बार कह रही है विदेशो मै भी महगाई बढी है, लेकिन कोन से देश मै यह भी बताये पाकिस्तान बंगाल देश नेपाल को छोड कर, हमारे यहां तो नही बढी महगाई? पुरे युरोप मै भी नही, शायद चांद पर बढी हो....

    गुल्ली बहुत समझ दार है जी:)

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  3. सुन्दर लाल चड्ढा ने भी वैसे ही माथा पटका होहा जैसे आम जनता मुखर्जी ददा का बयान सुन कर पटक रही है.

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  4. 77 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व कोई नहीं करता। वे अपना इंतजाम खुद करें, तब तक यह सब चलता रहेगा।

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  5. "राष्ट्रपति के अभिभाषण के ज़रिए सरकार ने गिन-गिन कर वजह बताई कि खाद्यान्न की कीमतें क्यों काबू से बाहर हो गईं"

    इन वजहों को रेकॉर्ड कर के रख लें और रोज दोपहर रात सुना करें। पेट भर जाया करेगा और खाना खाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

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  6. बेशक आर्थिक मंदी से तो हम उभरे हैं , औरों से पहले।
    लेकिन जब तक खाने वाले यूँ ही बढ़ते रहेंगे , तब तक रोटी की समस्या तो बनी रहेगी।
    सरकार भी कहाँ तक पूरा करेगी।
    लेकिन जनसँख्या के बारे में कोई सोच रहा है क्या ?

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  7. भारत की ग़रीब जनता को देश और विदेश में भारत की बढ़ती साख से क्या मतलब चलो ठीक है विकास हुआ भी तो अच्छा है पर उनके लिए तो चिंता उनकी दो जून की रोटी है सरकार अगर इस बात पर विचार करे और कुछ अच्छा कदम उठाए तो समझिए की बजट सार्थक है और सरकार की पहल पर ग़रीब जनता की भी दुआ लगेगी...बढ़िया आलेख....खुशदीप भैया नमस्कार स्वीकारें

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  8. हम तो रोज सुन सुन कर ही पेट भर लेते हैं.

    रामराम.

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  9. pranav da se jyada fikra to aam aadmi ko hi hai ki roti milegi ya nahi... :)

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  10. अभी तो सिर्फ कांग्रेस का "हाथ" पड़ा है तो यह हाल है, कहीं **त देने पे आ गए तो सोचो क्या होगा:)

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  11. तू कहता है तो - "चल दिया रोटी"
    तू भी क्या याद करेगा... साले! रोटी रोटी करता रहता है...
    पर यह बता, तेरे लिए क्या सबसे बड़ा सवाल यही है... देख अभी क्या है कि GDP हाई जा रेला है बॉस... अभीच गेम होने वाला है दिल्ली में, यह देख ना, काय कु खाली- पिल्ली खुसी में खलल डालता है कलम वाले भाई!!!!

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  12. ऊपर के गुस्ताखी के लिए माफ़ी खुशदीप बाबू... कृपया इसे "निर्मल हास्य- व्यंग" कि तरह लें... ऐसी बात उठाई है कि हमने भी दही में सही मार दी :)

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  13. ha ha ha .स्लोग ओवर मजेदार है.
    राज भाटिया जी से सहमत यहाँ तो नहीं बड़ी महंगाई बडती भी है तो ५-१० पैसे कोई फरक नहीं पड़ता.
    ..

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  14. रोटी वोटी छोडो हम लोग तो आपके स्लाग ओवर से ही काम चला लेंगे प्रनव दा को पता है कि खुशदीप अपने स्लागओवर से लोगों को उलझाये रखेगा उन्हे भूख ही नही लगेगी। इसी लिये तो लैपटाप सस्ते किये हैं लोग बस ब्लागिन्ग करते रहें। बहुत बडिया लगा स्लागअवर । आशीर्वाद होली पर आपको व आपके परिवार को बधाई शुभकामनायें

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  15. भैया.....बजट ने मार डाला.... रोटी महँगी हो गई...पर पिज्जा सस्ता हो गया.... पेट्रोल महंगा हो गया.... पेप्सी सस्ती हो गई.... दूध महंगा हो गया.... पर डायट कोला सस्ता हो गया....

    क्या करें.... अब तो महंगाई से बस्ता भारी हो गया....


    जय हिंद...

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  16. गुल्ली आख़िर बेटा किसका है? हीहिहिहिहिहिहिही

    जय हिंद...

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